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नए साल पर सपा कार्यालय में लगा समर्थकों का जमावड़ा, अखिलेश ने भरी हुंकार

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कोई गाड़ी में भरकर लाया अमरूद तो किसी ने बीन बजाकर किया अखिलेश का अभिनंदन

लखनऊ। नए साल के पहले दिन लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में सैकड़ों कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा। विभिन्न जनपदों से आए कार्यकर्ताओं ने सपा मुखिया अखिलेश से मुलाकात कर नए साल की शुभकामनाएं दीं। यश भारती से सम्मानित पं. हरिप्रसाद मिश्रा ने मंत्रोच्चारण के साथ अखिलेश यादव की सफलता एवं नए वर्ष 2022 के लिए शुभकामनाएं दीं। कैंट के किशन बैण्ड ने सपा के गीतों की धुन बजाकर शानदार स्वागत किया। सिराथू कौशाम्बी से आए ग्राम प्रधान लवलेश कुमार यादव अपनी पार्टी कलर की आल्टो गाड़ी भरकर अमरूद लाए थे। उनके साथ धनराज यादव और कैलाश यादव भी आए थे। राजीव सपेरा और पृृथ्वीनाथ सपेरा ने बीन बजाकर अभिनंदन किया। अल्लूपुर, मलीहाबाद के वीरेन्द्र सिंह यादव ने सीडलेस काले जामुन का पौधा भेंट किया।

अखिलेश यादव को नववर्ष की बधाई देने वालो में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, महिलाएं, व्यापारी, पूर्व सैनिक, रोजगार सेवक, सिख समाज, खिलाड़ी, पत्रकार, प्रोफेसर, डाक्टर, युवा नेता, अधिवक्ता, किसान सभी शामिल थे। समाजवादी पार्टी के विधायको, पूर्व मंत्रियों, विभिन्न जिलों के नताओं ने भी बुके के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष का अभिनंदन किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि राज्य में भाजपा का सत्ता से बाहर जाना और सपा का सत्ता में आना जरूरी हो गया है। सभी ने नए वर्ष पर सपा की सरकार बनवाने का संकल्प लिया। अखिलेश यादव ने सभी के सुख समृृद्धि की कामना करते हुए कहा कि नया सवेरा और नववर्ष राज्य की जनता का तभी आएगा जब भाजपा की सरकार बदल जाएगी। अभी तीन वर्ष भी नहीं हुए जबकि भाजपा के प्रति जनता का भरोसा उठ गया है। कहा कि सन 2022 में जन विश्वास तोड़ने के कारण सत्ता से भाजपा का हटना तय है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा संविधान का भी सम्मान नहीं करती है। संविधान में किसी के प्रति भेदभाव जैसी भी नहीं है जबकि भाजपा भेदभाव कर रही है। भाजपा न हिंदू धर्म को जानती है और न उसे मानती है। भाजपा ने देश में आर्थिक संकट पैदाकर दिया है, रोजगार कहां? किसानों का भविष्य अधर में है। भाजपा का शौचालय धोखा है। नौजवान समाजवादी पार्टी का दिया लैपटाप आज भी चला रहे हैं। सपा मुखिया ने कहा कि कहा कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर तीनों व्यवस्थाएं साजिश हैं और भारतीयों के विरूद्ध हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की व्यवस्था संविधान में है। इसको कोई छीन नहीं सकता है। अखिलेश यादव ने आव्हान किया कि सन 2022 में समाजवादी सरकार बनाने के लिए अभी से सभी को जुट जाना चाहिए। नोटबंदी-जीएसटी ने जनता की मुसीबतें बढ़ाई हैं। बेरोजगारी बढ़ी है।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा कि भाजपा सरकार ने नव वर्ष में जनता की खुशियों पर आाघात करते हुए रेल किराया, बस किराया बढ़ाने के साथ घरेलू गैस के दाम 19 रूपए तक बढ़ा दिए है। अब एनपीआर की मुसीबत आ गई है। जब आधार कार्ड में पूरा विवरण है तो एनपीआर की कवायद क्यों की जा रही है। अखिलेश ने जनता से अपील करते हुए कहा, वह सत्याग्रह आंदोलन के ढंग से एनपीआर फार्म न भरे।

छोटे लोहिया की बेटी-दामाद व एथलीट ने की मुलाकात

अखिलेश से भेंट करने वालों में समाजवादी नेता डा. राममनोहर लोहिया के चुनाव प्रस्तावक रहे विधूना के लज्जाराम शर्मा, 100 मीटर रेस के विजेता एथलीट विश्वजीत यादव, एचसीएल कंपनी के राजनराय, छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र की बहन और उनके दामाद तथा बार एसोसिएशन के महासचिव जितेन्द्र सिंह ‘जीतू‘ यादव एडवाकेट भी शामिल रहे।

समाजवादी दिग्गजों ने भी की भेंट

अखिलेश यादव को शुभकामना देने वाले प्रमुख लोगोें में नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद अहमद हसन, राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चैधरी, प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, पूर्व मंत्री ब्रहमाशंकर त्रिपाठी, शैलेन्द्र यादव ललई, केके गौतम, घूरेराम, फरीद महमूद किदवई, अबरार अहमद, पारसनाथ यादव, योगेन्द्र प्रताप सिंह, अभिषेक मिश्रा, पूर्व सांसद सुशीला सरोज, वनवारी लाल कंछल, प्रदेश कोषाध्यक्ष राजकुमार मिश्र शामिल थे। इसके अतिरिक्त युवा नेता गौरव दुबे, विकास यादव, मो. एबाद, पीडी तिवारी शामिल थे।

विधायकों व पूर्व विधायकों ने भी दी बधाई

बड़ी संख्या में विधायको एवं पूर्व विधायकों ने भी अखिलेश यादव को नव वर्ष की बधाई दी। इनमें प्रमुख रूप से विधायक एसआरएस यादव, हाजी इकराम कुरैशी, राकेश प्रताप सिंह, हाजी रिजवान, सुरेश यादव, अंबरीश पुष्कर, जसवंत सिंह, डा. दिलीप सिंह, पिंकी यादव, रफीक अंसारी, अरविन्द कुमार सिंह, सुनील साजन, आनंद भदौरिया, संग्राम यादव, अरविंद प्रताप, रामबृृक्ष सिंह यादव, बासुदेव यादव, सुभाष राय, राजेश यादव ‘राजू‘, साहब सिंह सैनी, नफीस अहमद, हाजी रिजवान, राकेश गुड्डू, डा. राजपाल कश्यप, नईम उल हसन, आलमबदी, प्रभुनारायण यादव, तसलीम अहमद, मनोज पारस तथा पूर्व विधायकगण मो. रेहान, गजाला लारी, अनवर हाशमी, उदयराज यादव, सनातन पाण्डेय, जयप्रकाश अंचल, श्याम किशोर यादव, पूरनमासी देहाती, मनीष रावत, इंद्राणी वर्मा, इंद्रजीत कोरी आदि।

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इसके अतिरिक्त भेंट कर्ताओं में फाखिर सिद्दीकी, चौधरी राजपाल सिंह, जय सिंह जयन्त, मुकेश शुक्ला, मनीष सिंह, विनोद सविता, बंदना चतुर्वेदी, डा मरगूब कुरैशी, याकूब अंसारी, एसके राय, जयवर्धन, सर्वेश अम्बेडकर, चौधरी रामलोटन निषाद, विद्या यादव, शीला सिंह, गीता पाण्डेय, कीर्ति सिंह, फरहाना सिद्दीकी, आलोक त्रिपाठी, देवेन्द्र सिंह ‘जीतू‘ अपर्णा जैन, नीलम रोमिला सिंह ज्ञानेन्द्र मिश्र, विजय यादव, आरएस यादव, हाजी इस्लामुमुद्दीन, धीरज श्रीवास्ताव, महेंद्र यादव, सूर्यमुखी यादव, छात्रनेता सतीश समर यदुवंशी, सर्वेश शुक्ला, मधुर सिंह, गौरव पाण्डेय, अभिषेक यादव, दीपक दीप चौरसिया, वीरू पाल, अक्षय पटेल शामिल रहे।http://www.satyodaya.com

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यूपी सहित 10 राज्यों में 3 नवंबर को होंगे उपचुनाव, 10 को आएगा परिणाम

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित 10 राज्यों की 54 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए 3 नवंबर को मतदान होगा। चुनाव आयोग ने मंगलवार को कुल 56 विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। बिहार की एक लोकसभा सीट और और केन्द्र शासित प्रदेश मणिपुर की दो विधानसभा सीट पर 7 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। सभी सीटों पर चुनाव परिणाम 10 नवंबर को जारी किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर उपचुनाव होने हैं।

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आयोग ने असम, केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की कुल सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव न कराने का फैसला किया है। चुनाव आयोग के अनुसार इन राज्यों में अभी उपचुनाव के लिए हालात सही नहीं है। इन राज्यों ने उपचुनाव कराने में मौजूदा हालात में असमर्थता जताई है।बता दें कि बिहार में 28 अक्टूबर से विधानसभा चुनाव भी शुरू हो रहे हैं। 243 सीटों के लिए यहां तीन चरणों में चुनाव होने हैं। 10 नवंबर को ही बिहार विधानसभा चुनाव के भी परिणाम सामने आएंगे।http://www.satyodaya.com

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शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, जेएनयू के 87 फीसदी स्कॉलर्स में मानसिक तनाव

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लखनऊ। कोरोना के चलते शिक्षण संस्थान बंद होने से एमफिल और पीएचडी स्कॉलर्स की दिक्कतों पर शोध में हुआ है। जिसमें चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के 87 फीसदी एमफिल और पीएचडी स्कॉलर्स मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। जबकि 64.7 फीसदी स्कॉलर्स की स्कॉलरशिप तक रूक गई हैं।

जेएनयू के इन तीन रिसर्च स्कॉलर्स अलामू आर, सोमाश्री दास और यांगचेन ने कोरोना काल के दौरान छात्रों की स्थिति पर एक ऑनलाइन सर्वे किया है। इसके लिए इन्होंने जेएनयू के ही करीब 530 शोद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। जिसमें से करीब 41.5 फीसदी छात्र और 58.1 फीसदी छात्राएं शामिल हैं। वहीं इस शोध में छात्रों को आ रही परेशानी और उनकी मनोदशा पर सवाल पूछे थे। जिसमें से ज्यादातर ने अपनी मानसिक परिशानियों का हवाला दिया है।

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सर्वे में सामने आया है कि करीब 87 फीसदी छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। शोध कार्य पूरा न होने से स्कॉलरशिप भी रूक गई है। ऐसे में वे अपने खर्चे तक  नहीं निकाल पा रहे हैं। एमफिल और पीएचडी की किताब बहुत महंगी मिलती है। ऐसे में वे उन्हें खरीद तक नहीं सकते हैं। क्योंकि घर में भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

शोध में दावा किया गया है कि मार्च में ही अधिकतर स्कॉलर्स अपने गांवों को लौट गए थे। महज 13 से 14 फीसदी छात्र ही कैंपस में है। करीब 75.9 फीसदी स्कॉलर्स का कहना है कि वे डिजिटली अपनी थीसिस और शोधकार्य पूरा नहीं कर सकते हैं। करीब दस फीसदी छात्रों ने कहा कि उनके घर में 4 से 6 घंटे बिजली कट होती है। जबकि 38 फीसदी ने कहा कि वे लगातार बिजली कट से परेशान रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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28 साल का इंतजार खत्म, बाबरी विध्वंस मामले में फैसले की घड़ी निकट

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लखनऊ। बाबरी विध्वंस मामले में 28 साल बाद आखिरकार फैसले की घड़ी निकट आ गई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत 30 सितंबर को इस केस में अपना फैसला सुनाएगी। इस केस में स्पेशल सीबीआई जज एसके यादव हैं। इसे देखते हुए मध्य प्रदेश के दो बड़े नेताओं पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। इनमें से एक हैं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और दूसरे हैं बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया है। ये दोनों भी बाबरी केस में आरोपी बनाए गए थे। लिहाजा 30 सितंबर को आने वाले फैसले में इनके भविष्य का भी फैसला होगा। फैसले को देखते हुए पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ग्वालियर से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं, जबकि कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से ये माना जा रहा है कि उमा भारती वीसी के ज़रिए कोर्ट की कार्यवाही में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी।

बता दें 12 जून को बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्य प्रदेश बीजेपी के कद्दावर नेता जयभान सिंह पवैया के अंतिम बयान दर्ज किए गए थे। ग्वालियर से लखनऊ पहुंचे जयभान सिंह पवैया ने सीबीआई कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए थे। 5 घंटे तक चली कार्यवाही के दौरान उनसे कुल 1050 सवाल किए गए थे। इनमें कुछ सवाल प्रश्नावली के तहत पूछे गए। जबकि कुछ सवाल जज की ओर से पूछे गए थे। जयभान सिंह ने इन सभी 1050 सवालों के जवाब दिए थे। सीबीआई की विशेष कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद जयभान सिंह पवैया ने अपने बयान में कहा था कि अगर राम काज के लिए उन्हें कोई कुर्बानी देनी पड़ी तो वह इसके लिए तैयार हैं।

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क्या है मामला
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया गया था। इस मामले में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं को आरोपी बनाया गया था। जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, कल्‍याण सिंह, जयभान सिंह पवैया समेत कई और बड़े नेता शामिल थे। इन सभी ने अदालती कार्रवाई का सामना किया। कई साल से चल रहे इस केस में कुछ आरोपियों की मृत्यु भी हो चुकी है।http://satyodaya.com

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