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बिहार

13 वर्ष की बच्ची का विवाह हो रहा था 34 वर्षीय व्यक्ति से, बच्ची ने महिला पुलिस को लिखी थी चिट्ठी, लेकिन…

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सांकेतिक चित्र

बिहार के भोजपुर जिले से एक बालिका विवाह का मामला सामने आया है। खबरों के मुताबिक यहां 13 वर्ष की बालिका का विवाह 34 वर्ष के दूल्हे के साथ कर दिया गया । बच्ची ने इस मामले में पुलिस से मदद भी मांगी मगर इसका कोई फायदा नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि शादी से बीस दिन पहले ही इस बालिका वधू ने महिला थाने को चिट्ठी लिख कर गुहार लगे थी कि मुझे बचा लिया जाए, मैं शादी नहीं करना चाहती, मेरा दूल्हा 34 साल का है। लेकिन नियति के आगे उस लड़की की एक न चली और उसकी शादी उसी दूल्हे से कर दी गई।

उसकी शादी के बाद अब जा कर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। इसी संबंध में संदेश थाने की पुलिस ने मंदिर के पुजारी से सर्टिफिकेट की मांग की है।

ख़बरों के अनुसार महिला थाना प्रभारी माधुरी कुमारी ने कहा है कि हमारे पास चिट्ठी या आवेदन तो नहीं, लेकिन लड़की ने फोन कर मौखिक रूप से कहा था कि मेरी शादी की जा रही है, आप एक्शन लीजिए। थानाप्रभारी का कहना है कि मामले की पूरी जांच की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।

दूसरी ओर संदेश थाना प्रभारी ने बताया कि अखगांव के मंदिर में शादी की सूचना मिलने पर पुलिस वहां गई थी। लेकिन, वहां जिस पूजारी पूछताछ की गई थी। उस पुजारी ने लड़की की उम्र अठारह साल बतायी था।

हालांकि इस मामले को लेकर 13 वर्ष की बच्ची ने  20 दिन पहले ही महिला थाने की पुलिस से गुहार लगायी थी, लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई नहीं होने के बाद बच्ची ने उसी आवेदन को सदर एसडीओ के पास भी भेजा था। जिसके बाद सदर एसडीओ द्वारा उस आवेदन को धनगाई पुलिस को भेज दिया गया। धनगाई पुलिस द्वारा बच्ची को आश्वासन दिया गया था कि पुलिस के रहते उसकी शादी नहीं होगी। पुलिस द्वारा उसके मां-बाप से भी पूछताछ कर शादी नहीं करने की बात बतायी गयी थी, लेकिन 26 अप्रैल को संदेश थाने के शिवाला मंदिर में मां-बाप ने उसकी शादी कर दी।

वहीं पुलिस का कहना है कि चोरी-छिपे लड़की की शादी कर दी गई। पुलिस को जैसे ही भनक लगी, पुलिस ने संदेश थाना पुलिस को इसकी सूचना दी, लेकिन पुलिस के पहुंचने के पहले ही उसकी शादी कर दी गयी थी। हालांकि, एसडीओ द्वारा इस मामले की जानकारी संदेश के सीओ तथा संदेश थाने की पुलिस को भी दी गयी थी, उसके बावजूद शादी नहीं रुकी।

पुलिस की भनक लगते ही परिजन उसे लेकर दूसरे मंदिर में चले गये थे। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब मंदिर के पुजारी से बातचीत की और सख्त कार्रवाई करने की बात कही तो मंदिर के पुजारी ने पूरी बात प्रशासन को बतायी। इसके बाद मंदिर के पुजारी से रसीद और सर्टिफिकेट की मांग की गयी है। सर्टिफिकेट और रसीद के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी। http://www.satyodaya.com

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बिहार

NDA प्रत्याशी की जनसभा में जनता ने बरसाए जूते चप्पल, आने वाले थे भोजपुरी स्टार पवन सिंह, मगर…!!

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फाइल फोटो

लोकसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशी अपने प्रचार के लिए पूरी मेहनत से जुटे हुए हैं। ऐसे में वो ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच अपनी सभा करना चाहते हैं। जनसभा तक लोगों को बुलाने के लिए किसी फिल्मी सितारे को बुलाने हेतु भी परहेज नहीं किया जा रहा। परहेज किया भी कैसे जा सकता है जब राजनीति में अब खुद फिल्मी चेहरों की कमी न रह गई हो। इसी क्रम में बिहार में एक एनडीए प्रत्याशी ने अपने चुनाव प्रचार के लिए भोजपुरी स्टार पवन सिंह बुलाया था। यह जनसभा लौरिया के साहू जैन स्टेडियम में आयोजित की गई थी।

जनसभा में पहुंचे लोगों में अपने पसंदीदा स्टार को देखने की काफी उत्सुकता थी लेकिन यही उत्सुकता तब आक्रोश में बदल गई जब 5 घंटे बीतने पर भी पावन सिंह जनसभा में नहीं पहुंचे। इसके बाद तो मौजूद जनता ने जमकर उत्पात मचाया। लोग भीषण गर्मी में पावन सिंह की एक झलक पाने को आये थे लेकिन जब उन्हें पता चला कि वे नहीं आने वाले तो दर्शक आक्रोशित और बेकाबू हो गए। इस दौरान दर्शकों ने सभा स्थल पर मौजूद बैरिकेडिंग व कुर्सियों को तोड़ डाला।

दरअसल पवन को बिहार में एनडीए प्रत्याशी वैद्यनाथ प्रसाद का प्रचार करने आना था। जानकारी के मुताबिक कुछ लोगों ने स्टेज पर जूते चप्पल भी बरसाए। इस दौरान सभा में भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग जख्मी हो गए। बता दें कि 12 मई को छठे चरण के दौरान बिहार की आठ सीटों पर मतदान होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को एनडीए प्रत्याशी वैद्यनाथ प्रसाद का प्रचार करने के लिए पवन सिंह और सतीशचंद्र दूबे सहित कई नेताओं को हेलीकॉप्टर से यहां आना था। इस दौरान भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह को देखने के लिए हजारों लोग एक बजे से ही कड़ी धूप में स्टेडियम में डटने लगे।

संचालक स्टेज से बार-बार पवन सिंह के आने की घोषणा करते रहे। लेकिन जब 4 घंटे तक भी पवन सिंह नहीं पहुंचे तो, गर्मी से बेहाल लोगों के सब्र का बांध टूट गया, जिसके बाद लोगों ने जमकर बवाल किया। बैरिकेडिंग, कुर्सियां तोड़ने के बाद स्टेज पर जूते-चप्पल फेंकना शुरू कर दिया। जानकारी के मुताबिक़ भीड़ को उग्र होता देख जेडीयू व बीजेपी नेताओं ने तुरंत मंच से उतरने में अपनी भलाई समझी।http://www.satyodaya.com

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बिहार

समान कार्य समान वेतन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 3.50 लाख नियोजित शिक्षकों के हाथ लगी मायूसी, जानिए

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नियोजित शिक्षकों ने तकरीबन दस साल पहले सामान काम सामान वेतन को लेकर पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला भी सुना दिया था लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बिहार के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को बहुत बड़ा झटका लगा है।

वहीं इस फैसले से बिहार सरकार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नियोजित शिक्षकों समान काम के बदले समान वेतन देने के फैसले से इनकार करते हुए पटना हाईकोर्ट के फैसले को भी पलट दिया है। हाई कोर्ट से मिली ख़ुशी के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बिहार के इन नियोजित शिक्षकों को फिर से मायूस कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल के।के। वेणुगोपाल ने कहा था कि शिक्षकों की नियुक्ति और वेतन देना राज्य सरकार का काम है। इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है। केंद्र ने तर्क दिया था कि नियमित शिक्षकों की बहाली बीपीएससी के माध्यम से हुई है। वहीं नियोजित शिक्षकों की बहाली पंचायती राज संस्था से ठेके पर हुई है, इसलिए इन्हें समान वेतन नहीं दिया जा सकता है।

सात महीने बाद हुए इस फैसले का सीधा असर बिहार के साढ़े तीन लाख शिक्षकों और उनके परिवार वालों पर पड़ेगा। बिहार के नियोजित शिक्षकों का वेतन फिलहाल 22 से 25 हजार है और अगर कोर्ट का फैसला शिक्षकों के पक्ष मे आता तो उनका वेतन 35-40 हजार रुपए हो जाता। शिक्षकों की इस लड़ाई में देश के दिग्गज वकीलों ने उनका पक्ष कोर्ट में रखा था।

शिक्षकों की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वकीलों ने कोर्ट में बहस की,
जिसके बाद नोहर सप्रे और जस्टिस उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने अंतिम सुनवाई पिछले साल तीन अक्तूबर को की थी और फैसला सुरक्षित रखा गया था, लेकिन शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए नियोजित शिक्षकों को समान वेतन देने से इनकार कर दिया है। आपको बता दें कि कोर्ट के इस फैसले से बिहार के प्राथमिक स्कूल से लेकर प्लस टू विद्यालयों के शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे।

निश्चित है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ये नियोजित शिक्षक बिहार सरकार से खासा नाराज होंगे ऐसे में देखना ये होगा कि इन साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों की मायूसी इस चुनावी माहौल पर कितना असर डालती है।  http://www.satyodaya.com

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बिहार

आरक्षण के मुद्दे पर तेजस्वी यादव ने सत्ता पक्ष पर साधा निशाना, कह दी ये बड़ी बात!!

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फाइल फोटो

लोकसभा चुनाव के इस समय में मुद्दों की कोई कमी नहीं है। देश भर में हो रही जनसभाओं में नेताओं द्वारा बड़े बड़े मुद्दे उछाले गए। इसी क्रम में बिहार की राजनीति में इस चुनावी मौसम के दौरान आरक्षण का मुद्दा गरमाने लगा है। राज्य में अभी दो चरण के मतदान बाकी हैं, ऐसे में इस मुद्दे पर खूब सियासत हो रही है। आरक्षण के मुद्दे पर जहां एक ओर महागठबंधन आक्रमक है वहीं NDA के नेता हर चुनावी सभा में सफ़ाई देते फिर रहे हैं।

एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के आधार पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जल्द पिछड़ी जातियों के आरक्षण में एक ओर जहां कटौती करने जा रही है वहीं धीरे धीरे अति पिछड़ी जातियों और भविष्य में दलितों के आरक्षण को भी ख़त्म करने के अपने एजेंडा पर काम कर रही है।

चुनाव प्रचार में जाने से पूर्व तेजस्वी यादव ने पटना में पत्रकारों को इस अख़बार की कतरन दिखाते हुए कहा कि यह जो ख़बर छपी है इससे हमारा आरोप और प्रमाणित होता है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार पहले पिछड़ी जातियों जैसे कुशवाहा कुर्मी दांगी और यादवों के आरक्षण के वर्तमान कोटे में कटौती आएगी और भविष्य में धीरे धीरे दलितों के भी आरक्षण को ख़त्म कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं हैं।

तेजस्वी ने कहा कि हम लोग हमेशा कहते थे कि BJP से  संविधान को ख़तरा है और आरक्षण ख़त्म करने जा रही है। आज एक अंग्रेज़ी अख़बार में ये आया है कि  पिछड़ों को जो आरक्षण था एकदम समाप्त करने का काम किया जा रहा है। ये लोग जो पिछड़े हैं जैसे कुर्मी, अहीर, उसके बाद अति पिछड़ों और फिर बाद में दलितों का भी आरक्षण खत्म कर देंगे। ये जो सारा रिपोर्ट है यह सामने आया है हम लोग जो बात कहते थे कि आरक्षण पर ख़तरा है और जो संविधान बचाने की बात कर रही। यह साबित हो गया इनके कथनी और करनी में अंतर है। हालांकि बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार अपनी हर सभा मे इस बात का खंडन करते हैं कि आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ किया जा रहा है या भविष्य में कोई भी दल या गठबंधन आरक्षण को ख़त्म करने की हिम्मत करेगा।http://www.satyodaya.com

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May 18, 2019, 11:31 am
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