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बिहार

पाटलिपुत्र सीट बनी लालू परिवार की प्रतिष्ठा का सवाल, पूरा परिवार लगा रहा है दम, तेजस्वी और तेजप्रताप भी आये एक साथ

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फाइल फोटो

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी रामकृपाल यादव के खिलाफ चुनाव में उतारी हैं। मीसा इस बार लालू परिवार से चुनाव लड़ने वाली अकेली उम्मीदवार हैं। ऐसे में ये सीट लालू परिवार की प्रतिष्ठा का सवाल बन गयी है। ऐसे में दोनों भाई तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव बहन मीसा को जितने के लिए एक साथ हो गए हैं।

बिहार की 40 लोकसभा सीटों में मात्र एक सीट ही लालू परिवार के पास है जिस पर पूरा लालू परिवार साथ-साथ प्रचार कर रहा है। दरअसल, लालू यादव के जेल में रहने के कारण लालू परिवार से लड़ रहीं एकमात्र सदस्य मीसा भारती के लिये परिवारजनों ने पूरी ताकत लगा दी है।

मीसा भारती को जनसभा से ज्यादा टोलों और लोगों के बीच जनसंपर्क करते हुए देखा जा रहा है। वह राजद महिला प्रकोष्ठ की राज्य अध्यक्ष आभा लता और पाटलिपुत्र क्षेत्र के राजद नेताओं को लेकर सुबह से रात तक गांव-गांव घूम रहीं हैं। अपने क्षेत्र की विधानसभावार क्षेत्रों में घूमने के दौरान वे स्थानीय राजद नेताओं को भी साथ रहने का आग्रह करती हैं।

लालू यादव खुद सजायाफ्ता हैं और राबड़ी देवी भी चुनाव नहीं लड़ रही हैं, ऐसे में पाटलिपुत्र सीट लालू परिवार के लिए प्रतिष्ठा की सीट बनी हुई है। डेढ़ दर्जन सदस्यों वाले लालू परिवार से मात्र इस बार सिर्फ मीसा भारती ही चुनाव के मैदान में हैं। सीट को परिवार गंभीरता से ले रहा है। मीसा भारती के नामांकन के दिन दोनों भाईयों ने साथ-साथ रोड शो किया।

इस दौरान मीसा भारती ने कहा ‘यह पहला चुनाव है जब उनके पिता लालू यादव उनके साथ नहीं है। उनकी कमी लगातार बहुत महसूस हो रही है। बिहार ही नहीं देश की राजनीति में उनके पिता की अलग पहचान है। लालू यादव बाहर होते तो देश की राजनीति कुछ और होती। भाजपा को यह पता था कि लालूजी बाहर होते तो उनका बिहार में खाता भी नहीं खुलता। साजिश के तहत लालू यादव को जेल में डलवा दिया गया। वो कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ाती हैं- भाईयों के विवाद को नकारते हुए कहती हैं कि राजद अटूट है। जब लालू जी के जेल जाने के बाद राजद में टूट नहीं हुई तो अब क्या टूटेगी।‘

दूसरी तरफ परिवार से नाराज चल रहे तेजप्रताप ने भी इस दौरान अपना रुख नरम कर लिया है। यही कारण है कि तेजप्रताप अपने साथियों संग लगातार इस लोकसभा क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। तेजप्रताप की टीम की दो से चार गाड़ियां रोज मीसा भारती के काफिला के साथ घूम रही हैं। http://www.satyodaya.com

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तेजस्वी यादव ने घर के बाहर लगाया जमावड़ा, उड़ाई सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

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नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू है। वहीं घर से बाहर निकलने के लिए कुछ निर्देश जारी किए गए है। लेकिन नेता व विधायक इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है। ऐसा ही एक मामला बिहार का है। जहां  पूर्व डिप्टी सीएम और राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव शुक्रवार गोपालगंज जाने पर तुल गए। गाड़ियों के काफिले और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के बीच दो गज की दूरी व बिना मास्क के नियमों ली हवा निकाल दी। पुलिस और आरजेडी के बीच तनातानी जारी है।

पूर्व सीएम राबड़ी देवी के घर के बाहर विधायकों और पार्टी नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। न मास्क, न सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लॉकडाउन के सभी नियमों की धज्जियां उड़ा दी। अभी भी तेजस्वी यादव अपनी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और भाई तेज प्रताप यादव के साथ गोपालगंज जाने के लिए अड़े हैं। वहीं पटना पुलिस ने साफ कह दिया है कि किसी हाल में कानून नहीं तोड़ने दिया जाएगा।

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गोपालगंज में आरजेडी के तीन कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद सियासत गर्म हो गई है। हत्या का आरोप जेडीयू नेता पर लगा है। तेजस्वी की मांग है कि आरोपी को फौरन गिरफ्तार किया जाए और इसी सियासी रोड पर वो पटना से गोपालगंज जाने पर अड़ गए हैं।  पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर सरकार काम न कर रही हो, लोग मर रहे हो, भूख से, गोलियों से, अपराधी लोगों को मार रहे हैं, ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि पीड़ित के आंसू को पोंछे और सरकार की जिम्मेदारी है कि अपराधी को पकड़े। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लॉकडाउन में अपराधियों को विशेष पास दिया गया था। यही अपराधी-गुंडा जब हजार लोगों के साथ जुलूस निकालता है, तो कार्रवाई नहीं होती है और हम जब पीड़ित के आंसू पोंछने जा रहे हैं तो हमें रोका जा रहा है। पुलिस जेडीयू विधायक को क्यों नहीं गिरफ्तार कर रही है।http://www.satyodaya.com

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1200 किलोमीटर साइकिल के सफर ने ज्योति के सपनों को दी नई उड़ान

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लखनऊ। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है,
पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है…

जी हां यही सच है…और अगर विश्वास न हो तो बिहार के दरभंगा की बेटी ज्योति की कहानी जान लीजिए। जिसने हिम्मत और जज्बे की ऐसी मिसाल कायम की है कि पूरी दुनिया उसे सलाम कर रही है। लाॅकडाउन के बीच हरियाणा के गुरुग्राम में फंसे अपने घायल पिता को साइकिल पर बैठाकर बिहार की इस बेटी ने 1200 किलोमीटर का सफर तय किया। कलयुग की इस श्रवण कुमार बेटी के साहस की मुरीद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प भी हो चुकी हैं। साइक्लिंग का शौक रखने वाली ज्योति ने देश के युवाओं को संघर्ष की जो राह दिखाई है, उसकी मिसाल मिलनी मुश्किल है। पूरा देश बिहार की इस बेटी से प्रेरणा ले रहा है। इसके साथ ही तमाम राजनीति हस्तियों ने ज्योति की मदद की भी पहल की है।

केन्द्रीय खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री किरेन रिजीजू ने ज्योति का कॅरियर संवारने की जिम्मेदारी ली है। रविवार को एक ट्वीट कर केन्द्रीय मंत्री कहा, मैं विश्वास दिलाता हूं कि साई के अधिकारियों और साइक्लिंग फेडरेशन्स से ज्योति कुमारी के परीक्षण के बाद मुझे रिपोर्ट करने के लिए कहूंगा। यदि संभावित पाया, तो उसे नई दिल्ली में आईजीआई स्टेडियम परिसर में राष्ट्रीय साइक्लिंग अकादमी में प्रशिक्षु के रूप में चुना जाएगा।

किरेन रिजीजू ने यह ट्वीट केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान के एक ट्वीट कर जवाब देते हुए किया है। श्री पासवान ने केन्द्रीय खेल मंत्री किरेन रिजीजू से अपील की थी कि वह ज्योति पासवान की साइक्लिंग की प्रतिभा को और अधिक संवारने के लिए इसके उचित प्रशिक्षण और छात्रवृति की व्यवस्था करें।

ज्योति पासवान के साहस और जज्बे की तारीफ तो पूरी दुनिया कर रही है। साथ मदद के लिए भी लोग आगे आ रहे हैं। हाल ही में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ज्योति को 1 लाख रुपए की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। इसके अलावा संघ विचारक प्रो. राकेश सिन्हा ने भी ज्योति को 25000 हजार रुपए की मदद दी है।

राकेश सिन्हा ने ज्योति व उसके परिवार से फोन पर बात भी की है। राज्य सरकार ने भी ज्योति को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। शनिवार को राज्य शिक्षा विभाग की टीम ने दरभंगा स्थित ज्योति के घर पहुंचकर उसका 9वीं कक्षा में नामांकन कराया। शिक्षा विभाग की टीम ने ज्योति को नई साइकिल, पोशाक, काॅपी-किताबें आदि भी भेंट की। ज्योति ने 2017 में 8वीं पास करने के बाद आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़ दी थी।

साहस न दिखाती तो भूख से मर जाते बाप-बेटी

दरअसल बिहार के दरभंगा में रहने वाले मोहन पासवान हरियाणा के गुरुग्राम में मजदूरी करते हैं। इस साल की शुरूआत में ही मोहन पासवान किसी हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए। 15 साल की ज्योति अपने पिता की सेवा के लिए जनवरी में गुरुग्राम गई थी। इसी बीच कोरोना महामारी के चलते मार्च में लाॅकडाउन हो गया। दोनों बाप-बेटी वहीं फंस गए। बीमारी के चलते पिता की जेब खाली थी। दोनों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई।

सरकारी मदद से खरीदी पुरानी साइकिल

इसी बीच प्रधानमंत्री राहत कोष से 1 हजार रुपए की मदद मिली। इस समय तक ज्योति ने घायल पिता को लेकर अपने घर दरभंगा लौटने का निश्चय कर लिया था। 1000 रुपए में कुछ पैसे और मिलाकर ज्योति ने एक पुरानी साइकिल खरीदी। जिस पर पिता को बिठाकर घर के लिए निकल पड़ी।

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पहले तो पिता ने बेटी को मना किया लेकिन ज्योति की जिद और कोई और रास्ता न होने पर वह तैयार हो गए। 8 दिन में 1200 किलोमीटर का सफर तय कर ज्योति अपने घर दरभंगा के सिरहुल्ली पहुंच गई, और फिर यहीं से ज्योति पूरी दुनिया में साहस और जज्बे की जीती-जागती मिसाल बन गई। मीडिया के पूछने पर पिता मोहन पासवान बस इतना ही कहते हैं कि उन्हें बेटी पर गर्व है। वहीं ज्योति कहती है, मैं अपने पिता की बेटी नहीं, बेटा हूं।http://www.satyodaya.com

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बिहार

सीवान में फूटा कोरोना बम, एक ही परिवार के 25 लोग कोरोना पाॅजिटिव

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बिहार में कुल 60 संक्रमित मरीजों से 31 लोग एक ही गांव के सदस्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश से सटे बिहार में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। बिहार में अब तक कुल 60 मरीजों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। सबसे ताज्जुब वाली बात यह है कि इन 60 मरीजों से 25 मरीज एक ही परिवार के हैं। इस परिवार का एक सदस्य कुछ दिन पूर्व विदेश यात्रा से लौटा था। शुरूआती जांच में उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। जिसके चलते संक्रमण पूरे परिवार में फैल गया। अब सीवान कोरोना के लिए हाॅट स्पाॅट बन चुका है। यह सभी संक्रमित व्यक्ति इसी जनपद के पंजवार गांव के हैं। पंजवार गांव में अब तक कुल 31 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। गुरुवार को बिहार में कोरोना संक्रमण के कुल 19 मामले सामने आए हैं।

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बेगुसराय के बछवाड़ा में 15 और 18 वर्ष के युवकों में कोरोना की पुष्टि हुई है। यह दोनों युवक जमात में शामिल रहे हैं। इस तरह इस गांव में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 4 हो गयी है। कोरोना संक्रमण को लेकर बिहार के 4 जनपदों को संवेदनशील माना जा रहा है। इनमें सीवान, मंुगेर, पटना और गया शामिल हैं। हालांकि संक्रमित मरीज कुल 11 जिलों में मिल चुके हैं। फिलहाल गुरुवार को बड़ी संख्या में कोरोना मरीज मिलने के बाद सीवान, बेगूसराय और नवादा की सीमाएं सील कर दी गयी है। http://www.satyodaya.com

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June 2, 2020, 9:42 am
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