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बिहार

सुशील मोदी ने लगाया लालू यादव पर बड़ा आरोप, बेटे तेजस्वी ने दी तीखी प्रतिक्रिया, कहा…!!

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लोकसभा चुनाव के इस दौर में पार्टियों का एक दूसरे पर हमला लगातार बढ़ गया है। एक के बाद एक आरोप लगाये जा रहे हैं। ऐसे में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि लालू ने प्रेम गुप्ता को अरुण जेटली के पास अपना संदेश देकर भेजा था कि मुझे सीबीआइ से बचा लें तो मैं नीतीश कुमार की सरकार को गिरा दूंगा।

सुशील मोदी के बयान के बाद बिहार की राजनीति गरमा गयी है। जदयू ने जहां सुशील मोदी को सही ठहराया है तो वहीं राजद ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

पिता पर हुई इस टिप्पणी के बाद लालू प्रसाद के छोटे बेटे और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर सुशील मोदी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा है कि सृजन चोर सुशील मोदी हार देख बौखला गए है। मानसिक दिवालिएपन की पराकाष्ठा लांघ कह रहे हैं कि लालू जी संघ से मिले हुए है। अरे, लालू जी वो है जिन्होंने संघियों की आंखों में उंगली डाल बिगड़ैल बलवाई संघियों की नाक में रस्सी पिरोई है। कोई और बहाना खोजों, राफ़ेल चोर के गोतिया भाई सृजन चोर!

तेजस्वी ने आगे लिखा है कि सृजन चोर जी, लालू जी ने संघ की घृणित नफ़रती राजनीति को बिहार में पांव पसारने नहीं दिया। आडवाणी जी को नकेल डाल उनकी उन्मादी यात्रा को रोका। 15 वर्ष में एक भी दंगा होने नहीं दिया! ख़ानदानी चोर साहब, हार की बौखलाहट में आपकी कुतर्कों से परिपूर्ण मूर्खता पर ठहाके लगा लोग हंस रहे है।

तेजस्वी ने सुशील मोदी के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी तंज कसा और लिखा कि नीतीश जी संघ की गोद में लेटे दूध पी रहे है। बिहार में संघ के असल जन्मदाता नीतीश जी हैं। संघियों ने पलटी मारने के 6 महीने बाद इनको दूध पिलाना बंद किया तो फिर लालू जी की शरण में आना चाहते थे। चाचा, कब तक अपने सहबाला सृजन चोर जैसी पंचर स्टेपनी के बूते अपनी रेंगती राजनीति को खींचेंगे?

देश का लाखों करोड़ रुपया लूटाकर भगाने वाले और लूटकर भागने वाले एक ही “वर्ण और जात-बिरादरी“ के हैं। इन भगौडे डकैतों और चोर-लुटेरों में एक भी दलित-पिछड़ा,आदिवासी और मुसलमान नहीं है। तो देश के महाचोर ख़ानदानी ठग-लुटेरे किस डकैत जमात के हुए। बोलो रे छाती पीटने वाले “ठगों”?? http://www.satyodaya.com

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देश

राबड़ी देवी की सुरक्षा में तैनात जवान ने खुद को मारी गोली

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लखनऊ । बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी के सुरक्षा में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान गिरिअप्पा नामक जवान ने खुद को गोली मारी गिरिअप्पा ने अपने ही हथियार से ही पटना स्थित राबड़ी देवी के आवास पर खुद को गोली मार ली । घटना शुक्रवार रात दस बजे की है । आत्महत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है । शुरुआती जांच में पुलिस मान रही है कि पारिवारिक विवाद में जवान ने खुदकुशी की है । सचिवालय डीएसपी ने घटना की पुष्टि की है ।


मिली जानकारी के मुताबिक घटना गुरुवार देर रात 2 बजे की है । गिरियप्पा कर्नाटक के बेलगाव का रहने वाला था । पिछले 9 महीने से गिरियप्पा पटना स्थित राबड़ी आवास पर तैनात था । राबड़ी देवी आवास पर कुल 11 सीआरपीएफ तैनात थे । जिसमें 8 कांस्टेबल 2 हवलदार 1 टीम लीडर शामिल है । इनमें गिरियप्पा भी शामिल था ।

यह भी पढ़ें : मायावती पर आठवले का पलटवार-कहा, पीएम मोदी की पत्नी की चिंता छोड. पहले खुद कर लें शादी


बताया जा रहा है कि गिरियप्पा ने अपने X95 हथियार से ही गोली मारकर आत्महत्या कर ली । घटना के बाद सुरक्षाकर्मीयों ने घटना को दिन भर छिपाकर रखा । वहीं पटना पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया परिवारिक विवाद का मामला लग रहा है । बताया जा रहा है कि गिरियप्पा का फोन पर अपनी पत्नी से बहस हुआ था । पटना पुलिस के मुताबिक घटना शुक्रवार की है । मृतक जवान के शव को कर्नाटक भेज दिया गया है ।http://www.satyodaya.com

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बिहार

NDA प्रत्याशी की जनसभा में जनता ने बरसाए जूते चप्पल, आने वाले थे भोजपुरी स्टार पवन सिंह, मगर…!!

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लोकसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशी अपने प्रचार के लिए पूरी मेहनत से जुटे हुए हैं। ऐसे में वो ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच अपनी सभा करना चाहते हैं। जनसभा तक लोगों को बुलाने के लिए किसी फिल्मी सितारे को बुलाने हेतु भी परहेज नहीं किया जा रहा। परहेज किया भी कैसे जा सकता है जब राजनीति में अब खुद फिल्मी चेहरों की कमी न रह गई हो। इसी क्रम में बिहार में एक एनडीए प्रत्याशी ने अपने चुनाव प्रचार के लिए भोजपुरी स्टार पवन सिंह बुलाया था। यह जनसभा लौरिया के साहू जैन स्टेडियम में आयोजित की गई थी।

जनसभा में पहुंचे लोगों में अपने पसंदीदा स्टार को देखने की काफी उत्सुकता थी लेकिन यही उत्सुकता तब आक्रोश में बदल गई जब 5 घंटे बीतने पर भी पावन सिंह जनसभा में नहीं पहुंचे। इसके बाद तो मौजूद जनता ने जमकर उत्पात मचाया। लोग भीषण गर्मी में पावन सिंह की एक झलक पाने को आये थे लेकिन जब उन्हें पता चला कि वे नहीं आने वाले तो दर्शक आक्रोशित और बेकाबू हो गए। इस दौरान दर्शकों ने सभा स्थल पर मौजूद बैरिकेडिंग व कुर्सियों को तोड़ डाला।

दरअसल पवन को बिहार में एनडीए प्रत्याशी वैद्यनाथ प्रसाद का प्रचार करने आना था। जानकारी के मुताबिक कुछ लोगों ने स्टेज पर जूते चप्पल भी बरसाए। इस दौरान सभा में भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग जख्मी हो गए। बता दें कि 12 मई को छठे चरण के दौरान बिहार की आठ सीटों पर मतदान होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को एनडीए प्रत्याशी वैद्यनाथ प्रसाद का प्रचार करने के लिए पवन सिंह और सतीशचंद्र दूबे सहित कई नेताओं को हेलीकॉप्टर से यहां आना था। इस दौरान भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह को देखने के लिए हजारों लोग एक बजे से ही कड़ी धूप में स्टेडियम में डटने लगे।

संचालक स्टेज से बार-बार पवन सिंह के आने की घोषणा करते रहे। लेकिन जब 4 घंटे तक भी पवन सिंह नहीं पहुंचे तो, गर्मी से बेहाल लोगों के सब्र का बांध टूट गया, जिसके बाद लोगों ने जमकर बवाल किया। बैरिकेडिंग, कुर्सियां तोड़ने के बाद स्टेज पर जूते-चप्पल फेंकना शुरू कर दिया। जानकारी के मुताबिक़ भीड़ को उग्र होता देख जेडीयू व बीजेपी नेताओं ने तुरंत मंच से उतरने में अपनी भलाई समझी।http://www.satyodaya.com

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बिहार

समान कार्य समान वेतन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 3.50 लाख नियोजित शिक्षकों के हाथ लगी मायूसी, जानिए

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नियोजित शिक्षकों ने तकरीबन दस साल पहले सामान काम सामान वेतन को लेकर पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला भी सुना दिया था लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बिहार के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को बहुत बड़ा झटका लगा है।

वहीं इस फैसले से बिहार सरकार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नियोजित शिक्षकों समान काम के बदले समान वेतन देने के फैसले से इनकार करते हुए पटना हाईकोर्ट के फैसले को भी पलट दिया है। हाई कोर्ट से मिली ख़ुशी के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बिहार के इन नियोजित शिक्षकों को फिर से मायूस कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल के।के। वेणुगोपाल ने कहा था कि शिक्षकों की नियुक्ति और वेतन देना राज्य सरकार का काम है। इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है। केंद्र ने तर्क दिया था कि नियमित शिक्षकों की बहाली बीपीएससी के माध्यम से हुई है। वहीं नियोजित शिक्षकों की बहाली पंचायती राज संस्था से ठेके पर हुई है, इसलिए इन्हें समान वेतन नहीं दिया जा सकता है।

सात महीने बाद हुए इस फैसले का सीधा असर बिहार के साढ़े तीन लाख शिक्षकों और उनके परिवार वालों पर पड़ेगा। बिहार के नियोजित शिक्षकों का वेतन फिलहाल 22 से 25 हजार है और अगर कोर्ट का फैसला शिक्षकों के पक्ष मे आता तो उनका वेतन 35-40 हजार रुपए हो जाता। शिक्षकों की इस लड़ाई में देश के दिग्गज वकीलों ने उनका पक्ष कोर्ट में रखा था।

शिक्षकों की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वकीलों ने कोर्ट में बहस की,
जिसके बाद नोहर सप्रे और जस्टिस उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने अंतिम सुनवाई पिछले साल तीन अक्तूबर को की थी और फैसला सुरक्षित रखा गया था, लेकिन शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए नियोजित शिक्षकों को समान वेतन देने से इनकार कर दिया है। आपको बता दें कि कोर्ट के इस फैसले से बिहार के प्राथमिक स्कूल से लेकर प्लस टू विद्यालयों के शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे।

निश्चित है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ये नियोजित शिक्षक बिहार सरकार से खासा नाराज होंगे ऐसे में देखना ये होगा कि इन साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों की मायूसी इस चुनावी माहौल पर कितना असर डालती है।  http://www.satyodaya.com

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May 18, 2019, 10:51 pm
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