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बिहार

तेजप्रताप यादव हुए 30 के, भाई तेजस्वी ने दी बधाई, ऐश्वर्या के पिता ने कही ये बात

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राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव का आज 30 साल के हो गए हैं। उनके समर्थक और अपने उन्हें लगातार शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं तेजप्रताप यादव के बागी बयानों के बावजूद भी आज इस खास दिन पर छोटे भाई तेजस्वी यादव ने उन्हें बधाई दी। इसके बाद तेजस्वी चुनावी रैली के लिए रवाना हो गए। कहा कि शाम को जाकर उनसे मुलाकात भी करेंगे।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तेजप्रताप ने इस बार अपना बर्थ डे मनाने के लिए खास तैयारियां की हैं।जानकारी के मुताबिक तेजप्रताप इस बार अपना जन्मदिन पटना के सरकारी आवास स्ट्रैंड रोड में ही मनाएंगे। अपने जन्मदिन पर उन्होंने अपनी मां राबड़ी देवी, भाई तेजस्वी यादव, बहन मीसा भारती समेत परिवार के अन्य लोगों को भी बुलाया है। बता दें कि तेजप्रताप पहली बार अपना जन्मदिन अपने सरकारी घर से अलग सरकारी आवास में मनाएंगे।

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पिछले साल तेज प्रताप यादव ने अपना  29वां जन्मदिन अनोखे तरीके से सेलिब्रेट किया था। तेज प्रताप ने पटना के एक दलित बस्ती में अपने जन्मदिन का केक काटा था और महादलित बच्चों के साथ अपनी खुशियां बांटी थीं। दलित बस्ती में पहुंचे तेज प्रताप का बच्चों ने भी जोरदार स्वागत किया था।

जन्मदिन मनाने के बाद सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर शेयर करते हुए तेज प्रताप ने लिखा था कि इस समाज मे कोई बड़ा और छोटा नहीं है। गरीबों के बीच जन्मदिन मनाने में मुझे आनंद आता है, बच्चों में भगवान बसते हैं।

वहीं आज सारण लोकसभा सीट से तेजप्रताप के ससुर और महागठबंधन के प्रत्याशी चंद्रिका राय ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। चंद्रिका राय ने अपने दामाद तेजप्रताप के बागी होकर सारण से चुनाव लड़ने पर चुटकी ली और कहा कि तेजप्रताप ने 1 अप्रैल यानी मूर्ख दिवस के दिन सारण से चुनाव लड़ने का दावा किया था और अब नामांकन का वक्त खत्म होने को है लिहाजा आप लोग समझ जाइए कि तेजप्रताप ने आप लोगों को मूर्ख बनाया है। मालूम हो कि चंद्रिका राय को राजद ने इस सीट से टिकट दिया है वहीं उनके सामने पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी हैं। http://www.satyodaya.com

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बिहार

अस्पताल पहुंचे नीतीश कुमार का हुआ कड़ा विरोध,परिजनों ने ‘वापस जाओ’ का लगाया नारा…

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बिहार में चमकी बुखार का कहर और इसपर मचे सियासी बवाल के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच हॉस्पिटल पहुंचे। उनके साथ उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी मौजूद रहे। इस दौरान अस्‍पताल में मरीजों के परिजनों ने नीतीश कुमार का कड़ा विरोध किया सिर्फ यही नहीं मुर्दाबाद और वापस जाओ के नारे भी लगाए।

सीएम ने पहले ICU में पीड़ित बच्चों का हाल चाल लिया । साथ ही पीड़ित बच्चों के परिजनों से भी बातचीत की । इस मामले को लेकर सीएम नीतीश कुमार ने अस्पताल में डॉक्टरों के साथ समीक्षा बैठक भी की। इससे पहले सोमवार को नीतीश कुमार की बैठक में फैसला किया गया कि चमकी से प्रभावित बच्चों को निशुल्क एंबुलेंस मुहैया कराई जाएगी और पूरे इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। वहीं इस बीमारी से मरने वालों के परिजनों को 4 लाख रुपये मुआवजा भी दिया जाएगा। नीतीश कुमार के दौरे के चलते अस्पताल में सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है। ऐसे में मरीजों और उनके परिवारों को और अधिक मुसीबतों का सामना कर पड़ रहा है।

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बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर में सैकड़ों बच्चे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार की चपेट में हैं। मुजफ्फरपुर में इस बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़कर 108 हो गई है, वहीं अस्पतालों में भर्ती बीमार बच्चों की संख्या बढ़कर 414 हो गई है। चमकी बुखार से पीड़ित ज्यादातर मरीज मुजफ्फरपुर के सरकारी श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल और केजरीवाल अस्पताल में एडमिट हैं। अब तक एसकेएमसीएच हॉस्पिटल में 89 और केजरीवाल अस्पताल में 19 बच्चों की मौत हो गई है।http://www.satyodaya.com

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बिहार

बिहार में लू के साथ दंगाइयों जैसा सलूक! गया में धारा 144 लागू

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पटना। यूं तो पूरा उत्तर भारत भीषण गर्मी और सूरज की तपिश से झुलस रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश से सटे राज्य बिहार में हालात सबसे ज्यादा विकराल हैं। यहां लू के थपेड़ों ने तीन दिन के भीतर करीब 200 लोगों को मौत की नींद सुला दिया है तो वहीं दूसरी तरफ चमकी बुखार मासूमों पर कहर बन कर टूटा है। पिछले 15 दिनों में इस बुखार ने 100 से ज्यादा मासूमों की जिंदगी लील ली है। हालात अभी भी असामान्य हैं। लू और चमकी बुखार ने बिहार की नीतीश सरकार के होश खराब कर दिए हैं।
इसी के चलते बिहार के गया में इस समस्या से निपटने के लिए पूरे जनपद में धारा 144 लागू कर दी है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी राज्य में गर्मी ने हालात इतने खराब कर दिए हों कि प्रशासन धारा 144 लगाने पर मजबूर हो जाए। बता दें कि शांति व्यवस्था बनाए रखने, शहर के हालात बिगड.ने की संभावना अथवा किसी बड़ी घटना के बाद पुलिस धारा-144 लगाती है। लेकिन गया जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी और लू से निपटने के लिए धारा 144 लागू कर दी है। यह धारा लागू होने के बाद उस स्थान अथवा क्षेत्र में 4 या 4 से अधिक लोगों के एक साथ एकत्र होने पर पाबंदी होती है।

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गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में गया, नवादा और औरंगाबाद हैं। हालांकि लू की वजह से मौत की खबरें पटना के ग्रामीण इलाकों के अलावा शेखपुरा और मुंगेर से भी मिल रही हैं। सरकार ने लू से बचने के लिए एडवाजरी जारी करते हुए लोगों से कहा है कि जब बहुत जरूरी हो तभी वो घर से निकले। इसके अलावा सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक सभी तरह के सरकारी और गैर सरकारी निर्माण कार्यों, मनरेगा के तहत मजदूरी का काम और खुली जगह में किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम या लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगा दी गई है। लू से सबसे ज्यादा मौतें 50 से ज्यादा उम्र के लोगों की हुई हैं। अस्पताल में लू के शिकार सैकड़ों मरीज भर्ती हैं। इस बीच शिक्षा विभाग ने ऐलान किया है कि 22 जून तक राज्य के सभी सरकारी स्कूल बंद रहेंगे। राज्य में शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है कि गर्मी के कहर को देखते हुए सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल 22 जून तक बंद रहेंगे।
गया के डीएम ने अपने निर्देश में यह भी कहा कि मनरेगा की कोई योजना सुबह 10.30 बजे के बाद से नहीं चलेगी। कोई भी निर्माण कार्य 11 बजे सुबह से शाम 4 बजे तक नहीं किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि निर्माण कार्यों में लगे मजदूर इसके शिकार हो रहें हैं। इस दौरान बाजार बंद रखने का निर्दश जारी किया गया हैं। यानी 11 बजे से शाम 4 बजे तक सभी दुकानें बंद रखने का निर्देश हैं।

गया में एक ही दिन में 28 लोगों की मौत

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को नालंदा में 6 और औरंगाबाद में 4 लोगों की लू का शिकार होने के बाद मौत हो गई। इससे पहले रविवार को लू लगने से 112 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। सबसे अधिक मौतें औरंगाबाद, नवादा, पटना, पूर्वी बिहार, रोहतास, जहानाबाद और भोजपुर जिलों में हुई हैं। गया, नवादा और औरंगाबाद के अस्पतालों में 300 से ज्यादा मरीज भर्ती कराए गए हैं। साथ ही नए मरीजों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। अकेले गया जिले में रविवार को 28 लोगों की मौत की खबर है। लू से इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौतों के बाद सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रभावित जिलों में मरीजों के लिए अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती की है। इसके अलावा गांवों और शहरों में पीने का पानी पहुंचाने के लिए अतिरिक्त टैंकर लगाए गए हैं। इस बीच लू प्रभावित इलाकों में अगर डॉक्टर आज हड़ताल पर रहते हैं तो मरीजों की मुश्किल और बढ़ सकती है। हालांकि डॉक्टरों ने अभी आश्वासन दिया है कि वे मरीजों का इलाज करेंगे।

डॉक्टरों के मुताबिक लू पीड़तिों को पहले बेचैनी हो रही है और उसके बाद वे बेहोश हो जा रहे हैं। फिर आधे से दो घंटे के बीच उनकी मौत हो जा रही है। बताया जा रहा है कि मौत की वजह ब्रेन में ग्लूकोज की कमी है। डॉक्टरों ने खूब पानी की सलाह मरीजों को दी है। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि सभी मृतकों के परिजनों को अनुग्रह अनुदान राशि मुहैया कराए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक औरंगाबाद में रविवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से करीब 7 डिग्री सेल्सियस अधिक था। यहां पर सोमवार को भी गर्मी से निजात मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।http://www.satyodaya.com

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बिहार: दिल्ली की राजनीति में सक्रिय नीतीश कुमार, दिमागी बुखार के कारण हो रही मौतों पर साधी चुप्पी

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बिहार । दिमागी बुखार व लू से हो रही मौतों के इतर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं । उन्होंने बीते रविवार शाम को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की । जिसके बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है ।

नीतीश कुमार बीते शनिवार को नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे थे । उसके बाद आयोजित पार्टी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि झारखंड में पार्टी अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगी । मगर बिहार में खराब स्वास्थ्य व्यवस्था व दिमागी बुखार से हो रही मौतों पर सीएम नीतीश का अभी तक कोई बयान नहीं आया है ।

वहीं बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय इसके लिए नियति विभाग को जिम्मेदार बता चुके हैं । उन्होंने एक निजी चैनल से बात करते हुए कहा था कि ‘बच्चों की मौत के लिए न प्रशासन जिम्मेदार है और न सरकार । बच्चों की नियति ठीक नहीं थी । मौसम भी इसके लिए जिम्मेदार है ।’

बिहार में दिमागी बुखार से अभी तक 96 से ज्यादा बच्चों की मौतें हो चुकी है । रविवार को मुजफ्फरपुर के एसके मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के सामने ही तीन मासूम बच्चों ने दम तोड़ दिया । प्रचंड गर्मी से भी 44 लोगों की मौत हो चुकी है ।

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नीतीश कुमार ने दिमागी बुखार से मरने वाले बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजे देने का एलान किया है । अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरपुर समेत राज्य के 12 जिलों में इस बीमारी का कहर लगातार बढ़ रहा है । मृतकों में ज्यादातर की उम्र 10 वर्ष से कम है । बच्चों के हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल के बिल्कुल कम होने) और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के शिकार होने के कारण मौतें हो रही है ।http://www.satyodaya.com

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June 19, 2019, 1:51 pm
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