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आरे: कैसे बचेगा पर्यावरण? विकास से पहले ही हो जाता है विनाश

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लखनऊ। मुंबई मेंट्रो के लिए आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को लेकर सरकार और पर्यावरण प्रेमी आमने-सामने हैं। सैकड़ों लोग पेड़ों को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हो गई जिसके बाद कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। हालात बिगड़ते देख धारा 144 लगा दी गई है।

यह सब तब शुरू हुआ जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने इससे जुड़ी याचिकाओं को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला पहले की सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के सामने लंबित है, इसलिए हाई कोर्ट इसमें फैसला नहीं दे सकता। कोर्ट का फैसला हुआ और बीएमसी ने मेट्रो कार शेड के लिए आरे के करीब 2700 पेड़ों को काटना शुरू कर दिया।

पेड़ों की कटाई की खबर पर्यावरण प्रेमियों को लगी। एक वीडियो भी वायरल हुआ। सूचना मिली कि करीब 200 पेड़ काट दिए गए हैं। बस उसके बाद वहां लोगों को ताता लगना शुरू हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 300 से भी ज्यादा लोगों ने वहां पहुंचकर मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की बैरिकेडिंग तोड़ी और पेड़ों को कटने से बचाया। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। यह भी सूचना मिली कि अब तक 60-70 लोग हिरासत में भी लिए गए हैं।

बात विकास की, काम विनाश का

दुनियाभर में ग्लोबल वार्मिंग बड़ी चिंता का विषय है। तमाम नेता बड़े-बड़े भाषण भी पर्यावरण को बचाने के देते रहते हैं। भारत में भी ऐसे नेताओं की कमी नहीं है। इसके लिए वो भारतीय संस्कृति का हवाला भी देते हैं। आजकल तो फाइलों में पेड़ लगाओ प्रतियोगिता भी छिड़ी हुई है। सरकारें पेड़ लगाने का गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड बना रही हैं। हालही में उत्तर प्रदेश में तो ‘पौधारोपण कुंभ’ भी आयोजित हुआ, जिसके तहत 22 करोड़ पौधे लगाए गए (विद सेल्फी)। लेकिन हकीकत में कितने पेड़ अपनी जड़े मिट्टी में बचा पाते हैं शायद ही इसका कभी ऑडिट हुआ हो। वहीं, हर साल विकास के नाम पर पेड़ों को काटकर पर्यावरण के विनाश के लिए तो ऑडिट की भी जरूरत नहीं है। ग्लोबल वार्मिंग खुद ही इसकी गवाह है। तापमान में लागातार वृद्धि इस बात का सबूत है।

पिछले 100 वर्षों में दुनिया भर में औसत तापमान 0.75 डिग्री सेल्सियस (1.4 डिग्री फारेनहाइट) बढ़ गया है, इस वृद्धि का दो तिहाई 1975 के बाद से हुआ है। भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के तापमान में भी छोटी वृद्धि गंभीर प्रभाव डाल रही हैं। पिछली शताब्दी में पृथ्वी का औसत तापमान 1.4 डिग्री फ़ारेनहाइट तक बढ़ गया है और अगले में 11.5 डिग्री फारेनहाइट बढ़ने की उम्मीद है। यह समझना कोई रॉकेट साइंस नहीं है कि इसका हल कैसे निकाला जाए। बस करना इतना है कि पेड़ लगाइये और सतत विकास अपनाइए।
सतत विकास का मतलब है कि ऐसा विकास जिसमें प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल भावी पीढ़ी को ध्यान में रख कर किया जाए, ताकि उनके प्रयोग के लिए भी संसाधन बचे रहें। ऐसा नहीं है कि सरकार सतत विकास पर बात नहीं करती है। संयुक्त राष्ट्र ने जो सतत विकास के लक्ष्य रखें हैं उनकी तो नेता भर-भर के बाते करते हैं लेकिन बस समस्या यही है कि वो सिर्फ बाते करते हैं, लक्ष्य हासिल करने का प्रयास नहीं।

लोग जागरूक लेकिन सरकार नहीं

दुनियाभर में यह समस्या है कि लोगों को अपने पर्यावरण के संरक्षण के लिए कैसे जागरूक किया जाए। लेकिन ये वही बात है कि बीमार गुलाबों हैं और इलाज सिताबों का किया जा रहा हो। दुनिया का सबसे विकसित राष्ट्र अमेरिका के सबसे ताकतवर लीडर डॉनल्ड ट्रंप को ही देख लीजिए। उन्होंने तो ग्लोबल वार्मिंग जैसी कोई चीज है इसी को मानने से इंकार कर दिया था। लोगों की जागरूकता देखनी है तो आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई रोकने आए लोगों को देखिए। पेड़ों को बचाने के लिए वो लाठी तक खाने के लिए तैयार हैं। वहीं, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर का कहना है कि मजबूरी में पेड़ काटे जाते हैं तो उसकी भरपाई भी की जाती है। जावडेकर ने कहा कि यूं भी बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरे को जंगल नहीं माना है। उन्होंने दिल्ली मेट्रो के पहले स्टेशन के निर्माण के वक्त इसी तरह के विरोध की याद दिलाते हुए कहा कि पेड़ सिर्फ काटे ही नहीं जाते हैं, लगाए भी जाते हैं। पर्यावरण मंत्री ने कहा, ‘बॉम्बे हाई कोर्ट ने आदेश में कहा है कि यह जंगल नहीं है। पहला दिल्ली मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए भी 20-25 पेड़ काटे जाने थे। लोगों ने तब भी विरोध किया था, लेकिन काटे गए हरेक पेड़ के बदले पांच पौधे लगाए गए थे।’

एक पेड़ की कीमत तुम क्या जानो सरकार बाबू

पर्यावरण मंत्री का ये कहना कि पेड़ों को मजबूरी में काटना पड़ता है यह बहुत ही डरावना है। लगता है कि सरकार खुद ही नहीं जानती है कि एक पेड़ जिंदगी के लिए कितना महत्व रखता है। आपको बता दें, एक स्वस्थ पेड़ हर दिन लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे सात लोगों को प्राण वायु मिल पाती है। यानि जब हम एक पेड़ को काटते हैं तो इसका मतलब है कि सात लोगों की हत्या कर रहे हैं। फिर तो ये सवाल उठना लाजमी है कि ऐसा कौन सा विकास है जो सात लोगों की हत्या की कीमत पर भी किया जाना चाहिए?

वायु प्रदूषण के कारण भारतीयों की आयु 2.6 वर्ष घटी

सेंटर फॉर साइंस ऐंड इनवायरन्मेंट (सीएसई) पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाला एक संगठन है। सीएसई की रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि घर से बाहर का वातावरण और घर के अंदर का वातावरण दोनों ही जगह वायु प्रदूषण जानलेवा बीमारियों को न्योता दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘वायु प्रदूषण भारत में स्वास्थ्य संबंधी सभी खतरों में मौत का अब तीसरा सबसे बड़ा कारण हो गया है। यह बाहरी पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5, ओजोन और घर के अंदर के वायु प्रदूषण का सामूहिक प्रभाव है।’ यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि वायु प्रदूषण के सामूहिक प्रभाव की वजह से भारतीयों समेत दक्षिण एशियाई लोगों की औसत आयु 2.6 साल कम हो गयी है।

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भारत में वनों की स्थिति

राष्ट्रीय वन नीति 1988 के अनुसार देश के कुल क्षेत्रफल का कम से कम एक तिहाई क्षेत्रफल वनों व वृक्षों से आच्छादित करने का लक्ष्य होना चाहिए जिसमें पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में यह दो तिहाई से कम नहीं होना चाहिये। लेकिन वर्तमान में भारत में वन स्थित रिपोर्ट 2017 के अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का कुल वन और वृक्ष आच्छादन 24.39 प्रतिशत है। इसमें भी जो कुल वनावरण है वो 21.54 प्रतिशत है। अभय सिन्हा

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तीस हजारी कोर्ट मामले में HC ने आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक….

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तीस हजारी

फाइल फोटो

नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट मामले में दिल्ली पुलिस को राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी पुलिसवालों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सभी बार काउंसिल को नोटिस जारी किया है। अब मामले की सुनवाई 23 दिसंबर को की जाएगी।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच के सामने सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने कहा कि ज्यूडिशियल इन्क्वॉयरी पूरी होने से पहले किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए।

कोर्ट के इस आदेश के बाद वकीलों पर ये दबाव रहेगा कि वो हड़ताल को खत्म करें। वकील पिछले 2 हफ्ते से पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे थे, लेकिन आज कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि जुडिशल इंक्वॉयरी पूरी हुए बिना पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। 3 नवंबर को कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ भी कोई सख्त कार्रवाई न करने का आदेश पहले ही कर दिया था। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई ना करने की याचिका दाखिल की थी।

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वहीं पुलिस का कहना था कि जिस तरह से वकीलों की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है, उसी तरह से पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई जाए।

बता दें वकीलों ने इसका विरोध किया है। वकीलों का कहना था कि पुलिस की ये याचिका उन पुलिसवालों को जमानत दिलाने के लिए है, जिन्होंने वकीलों पर गोली चलाई और जिनकी गिरफ्तारी की मांग वकील लगातार कर रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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INX MEDIA CASE में HC ने खारिज की पी चिदंबरम की जमानत याचिका…..

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पी चिदंबरम

फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर आज दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया है। पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले में 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। तब से चिदंबरम तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में  हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत की मांग करते हुए कहा गया था कि आईएनएक्स मीडिया मामले के सभी दस्तावेज जांच एजेंसियों के पास हैं, इसलिए उनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। जिसके बाद ईडी ने 8 नवंबर को चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया था और कोर्ट में दलील दी थी कि वह जमानत मिलने के बाद गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

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ईडी का प्रतिनिधित्व कर रही सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि पूर्व वित्तमंत्री पर चल रहा धन शोधन मामला काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह एक आर्थिक अपराध है जो काफी अलग है।

74 वर्षीय चिदंबरम को सीबीआई ने 21 अगस्त को आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अरेस्ट किया था।वह फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में ईडी की कस्टडी में हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ 15 मई, 2017 को एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें उन पर साल 2007 में आईएनएक्स मीडिया ग्रुप के लिए आने वाले 305 करोड़ के विदेशी फंड के लिए फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से गलत तरीके से अनुमतियां लेने का भी आरोप लगाया गया था। बता दें उस समय पी चिदंबरम ही वित्तमंत्री थे। बाद में ईडी ने भी 2017 में उनके खिलाफ एक केस दर्ज कराया था, जिसके बाद उन्हें इस साल 16 अक्टूबर को ईडी ने अरेस्ट कर पूछताछ की थी।http://www.satyodaya.com

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अपने आखिरी वर्किंग डे पर बोले रंजन गोगोई, मौन में ही है जजों की आजादी

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लखनऊ। अयोध्या विवाद जैसे पेचीदा मामले का ऐतिहासिक फैसला और सीजेआई कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाने का आदेश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का आज (15 नवंबर) आखिरी वार्किंग डे था। 17 नवंबर को गोगोई रिटायर हो जाएंगे। उनकी जगह न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े लेंगे। परंपरा के मुताबिक सीजेआई रंजन गोगोई अपने अंतिम वर्किंग डे पर भावी सीजेआई बोबड़े के साथ कोर्ट रूम में बैठे। गोगोई ने महज 3 मिनट में 10 मुकदमों में नोटिस जारी किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश खन्ना ने रंजन गोगोई का धन्यवाद दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया।

अपने आखिरी वर्किंग डे पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने न्यायपालिका और सहकर्मियों के लिए संदेश नोट भी जारी किया। कुछ वर्षों पूर्व मीडिया के सामने आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चार जजों में शामिल रहे गोगोई ने कहा, जजों को मौन रहकर ही अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करना चाहिए। सीजेआई ने इस दौरान प्रेस के व्यवहार की भी प्रशंसा की। गोगोई ने अपने जारी नोट में कहा, वकीलों को बोलने की आजादी है और सही भी है। लेकिन बेंच के जजों को अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग मौन रहकर करना चाहिए। जजों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए मौन रहना चाहिए। गोगोई ने स्पष्ट किया, मौन रहने का मतलब यह नहीं कि जजों को चुप रहना चाहिए। बल्कि न्यायाधीशों को अपने दायित्वों के निर्वाह के लिए बोलना चाहिए। बेवजह की बातों से बचना चाहिए।

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गोगोई ने पे्रस से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। सीजेआई गोगोई ने कहा कि मीडिया के दबाव के समय न्यायपालिका की साख को ठेस पहुंचने वाली झूठी खबरों के खिलाफ सही रुख अपनाया। रंजन गोगोई ने हाथ जोड़कर सभी सार्थियों, वकीलों, कर्मचारियों का शुक्रिया किया। कोर्ट रूम में मौजूद सभी को हाथ जोड.कर अलविदा कहा। http://www.satyodaya.com

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