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सत्योदय विशेष

सिर्फ लखनऊ में ही क्यों मनाए जाते हैं जेठ के बड़े मंगल, जानें कब-कैसे चल निकली परंपरा…

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लखनऊ। को नहि जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो….अर्थात अपने भक्तों के संकटों को पल भर में हरने वाले हनुमान जी को संकट मोचन के नाम से भी जाना जाता है। भगवान राम के अनन्य भक्त बजरंग बली शरण में आए भक्त के दुख पल भर में हर लेते हैं, शर्त यह है कि श्रद्धा, भक्ति और विश्वास वैसा ही होना चाहिए जैसा हनुमान जी को अपने आराध्य श्रीराम पर था।
संकटमोचन के भक्तों के लिए वैसे तो हर मंगलवार का बड़ा महत्व है लेकिन जेठ के महीने में पड़ने वाले बड.े मंगल बेहद खास होते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान हनुमान भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। माना जाता है कि भगवान श्रीराम से हनुमान जी की पहली मुलाकात जेठ माह के मंगल के दिन ही हुई थी इसीलिए बड़ा मंगल मनाया जाता है।
भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण द्वारा बसाई गई नगरी लखनपुरी जो अब लखनऊ में बदल चुकी है, यहां जेठ माह में अलग ही भक्ति भाव की छटा दिखती है। हर बड़ा मंगल यहां महापर्व की तरह मनाया जाता है। अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए प्रसिद्ध लखनऊ इस दिन बजरंग बली के रंग में रंगा नजर आता है। नवाबी दौर में अवध के नवाब भी ऐसे आयोजनों में बढ.-चढ.कर हिस्सा लेते थे। इस माह में पड़ने वाले सभी बड़े मंगल नवाबी शहर लखनऊ के लिए किसी महापर्व से कम नहीं है। इस बार जेठ माह की शुरूआत 19 मई से हो रही है और पहला बड़ा मंगल 21 मई को पड़ रहा है। जेठ माह में पड.ने वाले हर बड़ा मंगल पर जो भक्ति भाव की लहर लखनऊ में उठती है वैसी देश भर में अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलती। महीने भर पहले ही की इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं जैसे मंदिरों की रंगाई-पुताई साफ-सफाई आदि। बड.े मंगल पर विशेष पूजन और हनुमान जी के विशेष श्रृंगार के लिए श्रद्धालुओं में होड. लगती है जिसके चलते महीने भर पहले ही बुकिंग शुरू हो जाती है। बड.ा मंगल आते ही मंदिरों की कौन कहे….हर गली और चैराहे पर सब्जी पूड़ी, शर्बत, बूंदी, हलवा आदि के स्टाॅलों की भरमार हो जाती है। हर ओर बस जय हनुमान…जय हनुमान का शोर और लोग पेट भर-भर कर प्रसाद पाते हैं।

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कृपा ऐसी कि साधारण कारीगरों द्वारा बनाई सब्जी और पूड.ी में ऐसा स्वाद आ जाता है कि लोग प्रसाद से ही पेट भर लेते हैं। जेठ की तपती दोपहरी में जेठ के बड.े मंगल गरीब, रिक्शा चालकों और यहां के नौकरीपेशा बाहरी लोगों के लिए किसी निमंत्रण से कम नहीं होते। जहां चाहें और जितना चाहें छक कर प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। यह क्रम सुबह से लेकर शाम तक चलता है। बड़ा मंगल सिर्फ हिन्दू धर्म की आस्था का प्रतीक ही नहीं है बल्कि विभिन्न धर्मों के लोगों की भी इसमें आस्था है। इस आयोजन में हिन्दू, मुस्लिम, सिख व ईसाई आदि सभी धर्मो के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। यह त्यौहार लखनऊ के धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक मान्यताओं का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस शहर गंगा जमुनी की तहजीब को बखूबी देखा जा सकता है, जहां एक मुसलामन मंदिर का निर्माण कराता है, हिन्दू भाई मस्जिद का निर्माण कराते हैं। आज तक के इतिहास में लखनऊ एक शांतिपूर्ण शहर रहा है, जहां कभी धर्म को लेकर कोई हिंसा और असहिष्णुता नहीं हुई है। # Intolerance

इस बार जेठ के बड़े मंगल की शुरूआत कृष्ण तृतीया से हो रही है। इस दिन चन्द्रमा धनु राशि में रहेगा, धनु मंगल की मित्र राशि है। सिद्ध योग होने के कारण हर कार्य में सफलता मिलेगी। इसलिए जेठ माह की शुरूआत काफी शुभ और सफलतादायक सिद्ध होगी। इस बार चार मंगल है। जिसमें 21, 28 मई और 4 व 11 जून को पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक बड़े मंगल पर हनुमान जी के दर्शन, पूजन व चोला चढ़ाने से काफी लाभ मिलेगा। राजधानी के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में बड़ा मंगल को लेकर तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। यहां भक्तों की भीड़ और गर्मी को देखते हुए काफी व्यस्थाएं की गयी गई हैं।
अलीगंज का नया हनुमान मंदिर टस्ट के व्यवस्थापक राकेश दीक्षित ने बताया कि जेठ महीने के मंगल को लेकर यहां चल रहीं तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर के आस-पास साफ सफाई से लेकर श्रद्धालुओं को धूप व गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ एनसीसी सहित अन्य स्थानीय संगठन व सेवादार अपनी सेवाएं देंगे। श्रद्धालुओं को गर्मी से बचाने के लिए पानी वाले पंखों की व्यवस्था की गयी है। श्री दीक्षित ने बताया कि जेठ माह के पहले बड़े मंगल पर पांच कुंतल फूलों से बाबा का श्रृंगार होगा और तीन कुंतल लड्डुओं का भोग लगेगा। यहां जेठ के चारों बड़े मंगल पर बाबा का विशेष श्रृंगार करने के लिए अभी तक 1000 से ज्यादा श्रद्धालु बुकिंग करा चुके हैं।# AliganjNewHanuman Temple शहर प्रसिद्ध मंदिरों में से एक हनुमान सेतु मन्दिर में भी बड़े मंगल की तैयारियों जोरों पर हैं। गोमती के किनारे स्थिति यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। बड़े मंगल पर यहां भी भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां हर बार जेठ के बड़े मंगल पर किसी एक भक्त को ही बाबा के श्रृंगार का सौभाग्य मिलता था लेकिल इस बार 5 से 6 भक्तों को हनुमान जी के शृंगार का मौका मिलेगा। यहां हर दो घण्टे पर हनुमान जी का श्रृंगार बदला जाएगा। जेठ के सभी मंगल पर मन्दिर परिसर को एयरकंडीशन किया जायेगा। जिससे भक्तों को गर्मी में काफी राहत मिलेगी। मन्दिर के बाहर कई समाजसेवियों द्वारा भण्डारे और प्याऊ की व्यवस्था की जाएगी। मंगल के दिन लखनऊ विश्वविद्यालय मार्ग स्थित मन्दिर का द्वार बन्द रहेगा। उस दिन बंधा मार्ग के गणेश द्वार से ही दर्शन होंगे। इसी तरह चैक स्थित मनकामेश्वर मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर और लेते हुए हनुमान मंदिर सहित शहर के अन्य मंदिरों में बड़े मंगल की तैयारियां चल रही हैं।

कैसे और कब चल निकली परंपरा

लोगों के मन में यह जाने का कौतूहल अवश्य होता है कि आखिर नवाबी शहर में हिन्दुओं के ईष्टदेव हनुमान जी के इस त्यौहार को इतनी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने की परंपरा कब और कैसे चल निकली। तो बता दें कि इसके पीछे कई कहानियां हैं…

मान्यता है कि इस परम्परा की शुरुआत लगभग 400 वर्ष पूर्व मुगलशासक ने की थी। नवाब मोहमद अली शाह का बेटा एक बार गंभीर रूप से बीमार हुआ। उनकी बेगम रूबिया ने उसका कई जगह इलाज कराया लेकिन वह ठीक नहीं हुआ। बेटे की सलामती की मन्नत मांगने वह अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर आयी। पुजारी नेबेटे को मंदिर में ही छोड़ देने कहा बेगमरूबिया रात में बेटे को मंदिर में ही छोड़ गयीं। दूसरे दिन रूबिया को बेटा पूरी तरह स्वस्थ मिला। तबरूबियाने इस पुराने हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।जीर्णोद्धार के समय लगाया गया प्रतीक चांदतारा का चिन्ह आज भी मंदिर के गुंबद पर चमक रहा है। मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ ही मुगल शासक ने उस समय ज्येष्ठ माह में पड.ने वाले मंगल को पूरे नगर में गुडधनिया (भुने हुए गेहूं में गुड मिलाकर बनाया जाने वाला प्रसाद) बंटवाया और प्याऊ लगवाये थे। तभी से इस बडे मंगल की पर परा की नींव पडी।बडा मंगल मनाने के पीछे एक और कहानी है। नवाब सुजा-उद-दौला की दूसरी पत्नी जनाब-ए-आलिया को स्वप्न आया कि उसे हनुमान मंदिर का निर्माण कराना है। सपने में मिले आदेश को पूरा करने के लिये आलिया ने हनुमान जी की मूर्ति मंगवाई। हनुमान जी की मूर्ति हाथी पर लाई जा रही थी। मूर्ति को लेकर आता हुआ हाथी अलीगंज के एक स्थान पर बैठ गया और फिर उस स्थान से नहीं उठा।आलिया ने उसी स्थान पर मंदिर बनवाना शरू कर दिया जो आज नया हनुमान मंदिर कहा जाता है। मंदिर का निर्माण ज्येष्ठ महीने में पूरा हुआ। मंदिर बनने पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करायी गयी और बड़ा भंडारा हुआ।

तभी से जेठ महीने का हर मंगलवार बड़ा मंगल के रूप में मनाने की पर परा चल पड़ी। चार सौ साल पुरानी इस परंपरा ने इतना वृहद रूप ले लिया है कि अब पूरे लखनऊ के हर चैराहे व हर गली पर भंडारा चलता है।
वहीं दूसरी ओर पौराणिक कथाओं की मानें तो ज्येष्ठ के पहले मंगल के दिन ही भगवान लक्ष्मण ने लखनऊ शहर को बसाया था। तब उन्होंने पहली बार बड़ा मंगल मनाने की परंपरा की शुरुआत की थी। उसके बाद से आज तक लखनऊ में बड़ा मंगल मानने की परंपरा चलती आ रही है। खास बात यह कि, पूरे भारत में सिर्फ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ही बड़े मंगल का आयोजन किया जाता है, जिसमे बड़े धूमधाम भंडारे आयोजित होते हैं और हनुमान मंदिरों में सुंदरकांड का पाठ आयोजित किया जाता है।

एक और किवदंति है कि नवाब वाजिद अली शाह के समय में केसर-कस्तूरी का एक मारवाड़ी व्यापारी जटमल लखनऊ आया और चैक के निकट की तत्कालीन सबसे बड़ी सआदतगंज की मंडी में कई दिन तक पड़ा रहा, किन्तु अधिक मँहगी होने के कारण उसके दर्जनों ऊँटों पर लदी केसर ज्यों-की-त्यों पड़ी रह गयी, कोई खरीददार भी नहीं मिला। ज्ञातव्य है कि इस मंडी की प्रशंसा बड़ी दूर-दूर तक थी। फारस, अफगानिस्तान तथा कश्मीर आदि से मेवों, फलों तथा जेवरात आदि के बड़े-बड़े व्यापारी वहाँ आते थे। मारवाड़ी व्यापारी बड़ा निराश हुआ और लोगों से कहने लगा कि श्अवध के नवाबों का मैंने बड़ा नाम सुना था, किंतु वह सब झूठ निकला।श् इतनी दूर आकर भी खाली हाथ लौटने के विचारमात्र से वह बड़ा दुरूखी हुआ और अयोध्या की ओर चल दिया। रास्ते में इसी नये मन्दिर के पास आकर जब वह विश्राम के लिये रूका, तब लोगों के कहने से उसने हनुमान जी से अपने माल की बिक्री के लिए मनौती मानी।
संयोगवश उन्हीं दिनों नवाब वाजिद अली शाह अपनी कैसर बेगम के नाम पर कैसरबाग का निर्माण करा रहे थे। किसी ने उनको राय दी कि यदि इस कैसरबाग की इमारत को केसर-कस्तूरी से पुतवा दिया जाये तो सारा इलाका ही अत्यंत सुवासित हो जायेगा। और जटमल की सारी कस्तूरी उसके मुँहमाँगे दाम पर खरीद ली गयी। जटमल के हर्ष का काई ठिकाना नहीं रहा, उसने हृदय खोलकर मन्दिर के लिए खर्च किया। आज भी मन्दिर के भीतर मूर्ति पर जो छत्र लगा है, वह इसी व्यापारी का बनवाया हुआ है। उसने पूरे मन्दिर को ही नये सिरे से बनवाया। वर्तमान स्तूप (गुंबद) भी तभी का है। तभी से यहाँ मेली भी लगने लगा।http://www.satyodaya.com

सत्योदय विशेष

मोदी सरकार-2 में आधा दर्जन महिलाओं को भी मिली जगह, जानिए उनका अब तक का राजनीतिक सफर…

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30 मई को केन्द्र में एक बार फिर से पीएम मोदी की अगुवाई में एनडीए की सरकार बन गयी। पीएम मोदी के 57 सहयोगियों में आधा दर्जन महिलाओं को भी जगह मिली हैं। आइए जानते हैं मोदी मंत्रिमंडल में शामिल इन महिला शक्तिओं के बारे में…

निर्मला सीतारमण: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में निर्मला सीतारमण सितंबर 2017 में रक्षा मंत्री बनने से पहले वह भारत की वाणिज्य और उद्योग तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री रह चुकी हैं। अब उनके कंधों पर वित्त मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। जैसा की सबको पता है कि सीतरमण ने मंत्री के रूप में अपने काम से सबको प्रभावित किया है, लेकिन वित्त मंत्री के रूप में उनकी असली अब परीक्षा होगी। निर्मला सीतारमण भाजपा से संबद्ध हैं और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। बता दें कि निर्मला सीतारमन भारत की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री रह चुकी हैं। इन्होने ही इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए अतिरिक्त कार्यभार के रूप में यह मंत्रालय संभाला था। निर्मला सीतारमन 2003 से 2005 तक राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं। वह सितंबर 2003-2017 तक भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता के साथ ही भारत की वाणिज्य और उद्योग तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री रहीं हैं और सितंबर 03-2017 को पीएम नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार में उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया।

स्मृति ईरानी: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में स्मृति इरानी को इस बार भी अहम जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले स्मृ ति ईरानी पूर्ववर्ती एनडीए सरकार में भी दो अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मे दारी संभाल चुकीं है। स्मृति इरानी को इस बार भी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ-साथ कपड़ा मंत्रालय की जिम्मे दारी भी दी गई है। बता दें कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेमदारी एनडीए-1 सरकार में मेनका गांधी के पास थी।

वहीं मेनका गांधी को नई मोदी कैबिनेट में जगह नहीं दी गई है। उन्हें प्रोटेम स्पीमकर बनाए जाने की चर्चा है। स्मृोति ईरानी पीएम मोदी की अगुवाई वाली नई मंत्रिमंडल में वह सबसे कम उम्र की मंत्री हैं। स्मृनति साल 2014 से ही अमेठी में सक्रिय रहीं है, वहीं 43 साल की उम्र में स्मृ ति लोकसभा चुनाव में गांधी परिवार के गढ़ माने जाने वाले अमेठी से कांग्रेस अध्य क्ष राहुल गांधी को पूरे 55000 वोटों से हरा दिया है। स्मृति ने अपनी जीत से खूब सुर्खियां बटोरीं और उसके साथ ही राजनीति में इतिहास भी रच दिया है। साल 2003 से भाजपा से जुड़ी स्मृति बहुत ही सहनशील और अपने कार्य के प्रति लगन दिखाकर उन्होंने अपनी जीत हासिल करी है। इस जीत को पाने के लिए स्मृति ने अपने जीवन में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। बता दें कि इससे पहले स्मृति मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जिम्मेकदारी दी गई थी। राजनीति में आने से पहले स्मृेति ईरानी लोगों के बीच टीवी एक का चर्चित चेहरा भी रह चुकी हैं। एकता कपूर के धारावाहिक श्क्योंयकि सास भी कभी बहू थीश् से घर-घर में पहचान बनाने वालीं स्मृति ईरानी के आज भी उनसे अच्छे संबंध हैं।

हरसिमरत कौर बादल: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पंजाब के बठिंडा से शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली है। इससे पहले हरसिमरत पीएम नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में भी कैबिनेट मंत्री थीं। बता दें कि हरसिमरत पंजाब की राजनीति में सबसे ताकतवर बादल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। हरसिमरत कौर बादल के पति सुखबीर सिंह बादल पंजाब के उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं। सुखबीर बादल शिरोमणि अकाली दल के प्रधान भी हैं और वहीं पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के मुखिया प्रकाश सिंह बादल की बहू हैं।

हरसिमरत 2014 में अपने देवर मनप्रीत सिंह बादल को बठिंडा संसदीय सीट से कड़े मुकाबले में करीब 19 हजार मतों से पराजित कर संसद पहुंची थीं। जिसके बाद 2014 में मोदी सरकार में हरसिमरत कौर बादल को मोदी कैबिनेट में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री बनाया गया था। खाद्य प्रसंस्करण मंत्री के पद पर किए गए कार्य की काफी सरहना भी हुई है । वहीं पिछली उपलब्धियों की वजह से बठिंडा की जनता ने हरसिमरत पर दोबारा से भरोसा जताकर कांग्रेस प्रत्यासशी अमरिंदर राजा वड़िंग को 21772 वोटों से मात दे दी है । बता दें कि हरसिमरत कौर सदैव ही दिल्ली की राजनीति में अकाली दल का चेहरा रही हैं। उन्होंने कभी पंजाब की राजनीति में इतनी सक्रियता नहीं दिखाई है।

रेणुका सिंह: लोकसभा चुनाव 2019 में छत्तीसगढ़ से सरगुजा फतेह करने वाली रेणुका सिंह (सुरता) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टीम इंडिया में शामिल किया गया है। रेणुका सिंह को जनजातीय (आदिवासी) मामलों के मंत्रालय में केन्द्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली हैद्य आजादी के बाद यह दूसरा मौका है, जब भारत सरकार में छत्तीसगढ़ के सरगुजा से कोई मंत्री बना है। सांसद रेणुका से पहले मोरारजी देसाई की सरकार में सरगुजा से लरंग साय रेल राज्य मंत्री थे । इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद रेणुका सिंह पहली महिला सांसद हैं, जिन्हें केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया है। लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी को 1 लाख 57 हजार से अधिक वोटों से हराने वाली रेणुका सिंह पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री रही चुकी हैं । वो अनुसूचित जनजाति की तेजतर्रार नेत्री के तौर पर भी जानी जाती हैं। रेणुका सिंह प्रेमनगर से दो बार विधायक निर्वाचित हुई हैं. 2003 से 2005 तक महिला बाल विकास मंत्री रही हैं। वे 2005 से 2013 तक सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष भी थीं । वर्ष 2002 से 2004 तक भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री रहीं।

देबाश्री चौधरी: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में देबाश्री को मोदी कैबिनेट में महिला बाल विकास मंत्री का पद मिला हैद्य बता दें कि बंगाल के रायगंज की नवनिर्वाचित सासंद देबाश्री चैधरी मोदी सरकार पार्ट-2 में पहली बार मंत्री पद की शपथ लेने वाले सांसदों की लिस्ट में शामिल हुई हैंद्य देबाश्री चैधरी ने टीएमसी के कन्हैयालाल अग्रवाल को 60,574 मतों से हराया हैद्य देबाश्री चैधरी की शैक्षिक योग्यता स्नातकोत्तर हैद्य उनको राजनीति में लगभग 20 साल से ज्यादा का अनुभव है । देबाश्री चैधरी का पैतृक घर-देबाश्री चौधरी भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के दक्षिण दिनाजपुर जिले में स्थित बालुरघाट की रहने वाली हैंद्य लेकिन उनका पैतृक घर खादिमपुर में हैद्य देवश्री ने अपनी पढ़ाई बर्दवान से की है लेकिन बीजेपी मुख्यालय से जुड़ने के बाद वो बागुइती में शिफ्ट हो गई थींद्य महिला मोर्चा से भी जुड़ी रही देबाश्री चैधरी-देबाश्री चैधरी ने कई साल तक अपनी पार्टी की युवा शाखा और महिला मोर्चे में काम भी कियाद्य पिछले कुछ साल से वो पार्टी की राज्य इकाई की महासचिव के रूप में भी कार्य कर रही हैं। साल 2014 में हुए चुनाव में उन्होंने बर्दवान-दुर्गापुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में आई है ।

साध्वी निरंजन: नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार में साध्वी निरंजन ज्योति को फिर से राज्य मंत्री बनाया गया है। 52 साल की साध्वी निरंजन ज्योति ने फतेहपुर लोकसभा सीट पर गठबंधन उम्मीदवार बसपा के सुखदेव प्रसाद वर्मा को हराया था। पिछली सरकार में वह केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री थीं। इनका मूसा नगर, कानपुर देहात में उनका आश्रम है। उमा भारती के बाद वह केंद्रीय मंत्री के पद तक पहुंचने वाली देश की दूसरी साध्वी हैं।

2014 में उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट से जीतकर पहली बार सांसद बनी थीं। इससे पहले वह फतेहपुर से ही 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक चुनी गई थीं। इस साल प्रयागराज कुंभ मेले में साध्वी निरंजन ज्योति को निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर की पदवी दी गई थी।साध्वी निरंजन ज्योति निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर परमानंद गिरी की शिष्या भी हैं। उत्तर प्रदेश से इस बार सिर्फ स्मृति ईरानी और साध्वी निरंजन ज्योति मंत्री बनाई गई हैं। पिछली बार उमा भारती, मेनका गांधी, साध्वी निरंजन ज्योति, कृष्णा राज, अनुप्रिया पटेल को मौका मिला था। पिछली दफा स्मृति अमेठी से चुनाव हार गई थीं और वह गुजरात से राज्यसभा सदस्य बनीं।http://www.satyodaya.com

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सत्योदय विशेष

जानिये लखनऊ के एक ऐसे शख्स को जिसने महज 19 साल में छू लिया अपने सपनों का आसमान …

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युवा शख्सियत
सत्योदय डेस्क , लखनऊ :

वो वीडियों एडिटिंग भी करते… डॉयरेक्टर भी है … जरूरत पड़ने पर अभिनय भी करते हैं। यहां तक की जिस उम्र में युवाओं को पता नहीं होता कि लाइफ में करना क्या है , उस उम्र में अपनी प्रोडक्शन कम्पनी खोल ली। यही नहीं अब उसको सफलता पूर्वक चला भी रहे हैं। इसमें अपने साथ करीब बीस से ज्यादा लोगों की टीम को भी काम दिए हुए हैं। पहली बार में लगता है कि इतनी सारी खूबियां एक इंसान में कैसे हो सकती है लेकिन यह सच है। … और यह शख्स किसी दूसरी जगह का नहीं बल्कि अपने शहर लखनऊ का है।

हम आपको लखनऊ के एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे है जो महज 19 साल की उम्र में यह तय करता है कि उसको सिनेमा की दुनिया में जाना है। उस समय संसाधन नहीं थे लेकिन अपने मेहनत से न सिर्फ संसाधन एकत्र किया बल्कि पिछले पांच साल से अपना प्रॉडक्शन हाउस चला रहें है, जिसमें पांच से ज्यादा फिल्में भी बन चुकी हैं । इनको यूट्यूब पर अब तक लाखों लोग देख चुके हैं । यह कहानी है उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जन्मे लेकिन अब लखनऊ के होकर रह गए रिजवान खान की।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी रिजवान लखनऊ से लेकर मायानगरी तक शहर का नाम रोशन किए हुए है। महज पांच साल की उम्र में पिता को खो चुके रिजवान चार भाइयों में सबसे छोटे है, ऐसे में घर से हमेशा उन्हें समर्थन मिलता रहा। पहले बीएससी की पढ़ाई पूरी की, उसके बाद राजधानी के एक निजी संस्थान से एनिमेशन का कोर्स किया। लगातार कुछ नया करने वाले रिजवान यहां भी नहीं रूके और मुम्बई जाकर प्रोडक्शन का काम सीखा। हालांकि इस दौरान महज 19 साल की उम्र में ‘अधूरा सच’ और इसके बाद 21 साल की उम्र में ‘विरोध द रिवेंज’ नाम से दो फिल्मों का डायरेक्शन और प्रोडक्शन किया। मुम्बई में कुछ दिनों तक प्रोडक्शन का काम सीखने के बाद लखनऊ आ गए। उसके बाद प्रिज्म प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की।

सरकारी विभागों के लिए बनाते डाक्यूमेंट्री

रिजवान सरकारी विभागों के लिए भी काम कर रहें हैं। संस्कृति विभाग, कुंभ मेला से लेकर लखनऊ सिटी के लिए कई सरकारी प्रॉजेक्ट की डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं । इसके अलावा बीस से ज्यादा वीडियों सांगस भी बना चुके हैं। इसके अलावा अन्य सेक्टर से भी उनके पास बेहतर काम आ रहे हैं ।

रिजवान के साथ लंबे समय से काम रही लखनऊ के चर्चित मॉडल और अभिनेत्री इलिशा सिंह बताती हैं कि रिजवान की सबसे बड़ी खूबी काम को लेकर उनका लगन है। वह लगातार कुछ नया करने की कोशिश करते हैं । यही वजह है कि छोटे प्रॉजक्ट से शुरूआत करने वाले रिजवान के पास आज कई बड़े काम हैं ।

भोजपुरी सुपरस्टार अक्षरा सिंह की फिल्म में किया काम

अभी कुछ दिनों पहले भोजपुरी फिल्मों की सुपर स्टार अक्षरा सिंह की फिल्म ‘लैला मजनू’ का काम लखनऊ में शुरू हुआ। डॉयरेक्टर ने सबसे पहले प्रॉडक्शन मैनेजर के तौर पर रिजवान खान का नाम चुना। हालांकि मुम्बई से भी ज्यादा काम आने के बाद अब लगातार वहां जाना पड़ता है। उनकी खुद की निर्देशित फिल्में यूट्यूब पर काफी लोकप्रिय हुई है। जिसकी वजह से उनकी कम्पनी को ऐड के माध्यम से अच्छी कमाई होती है। अभी उप्र सरकार की ओर से कुंभ पर चल रहे एक बड़े प्रॉजेक्ट में भी रिजवान अपना योगदान दे रहे है।

यह भी पढ़ें -किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की 32वीं पुण्यतिथि के मौके पर, जानें उनके राजनीतिक संघर्षों के बारे में

प्रमुख फिल्में

अधूरा सच, विरोध द रिवेंज, दबंग गुंडाराज, बिहाइंड द डार्क, वो कौन थी।http://www.satyodaya.com

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जानिये लखनऊ के एक ऐसे शख्स को जिसने महज 19 साल में छू लिया अपने सपनों का आसमान…

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युवा शख्सियत
सत्योदय डेस्क , लखनऊ :

वो वीडियों एडिटिंग भी करते हैं… डायरेक्टर भी हैं … जरूरत पड़ने पर अभिनय भी करते हैं। जिस उम्र में युवाओं को पता नहीं होता कि लाइफ में करना क्या है उस उम्र में इन्होने अपनी प्रोडक्शन हाउस खोल ली। जिसमें काम कर रहें लगभग 20 लोगों का घर इसी कंपनी से चलता है। पहली बार में लगता है कि इतनी सारी खूबियां एक इंसान में कैसे हो सकती हैं लेकिन यह सच है। … और यह शख्स किसी दूसरी जगह का नहीं बल्कि अपने शहर लखनऊ का है। हम आपको लखनऊ के एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने महज 19 साल की उम्र में यह तय कर लिया था कि उसे फिल्मों की दुनिया में जाना है। लेकिन उस वक्त ये इतना आसान नही था।अपने सपनों को पूरा करने के लिए बहुत सी कठिनाईयों का सामना भी करना पड़ा। इनसब के बावजूद ये आगे बढ़ते रहें और आज पिछले पांच सालों से सफलतापूर्वक अपना प्रॉडक्शन हाउस चला रहें हैं जिसमें पांच से ज्यादा फिल्में भी बन चुकी हैं । इन फिल्मों को यूट्यूब पर अब तक लाखों लोग देख चुके हैं।यह कहानी है लखनऊ के ही युवक रिजवान खान की जिनका जन्म तो उतरप्रदेश में हुआ पर इन्होने नवाबों के इस शहर को अपना मान यहीं के हो गयें।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी रिजवान लखनऊ से लेकर मायानगर तक शहर का नाम रोशन किए हुए हैं । महज पांच साल की उम्र में पिता को खो चुके रिजवान चार भाइयों में सबसे छोटे हैं।ऐसे में घर से हमेशा समर्थन रहा। पहले बीएससी की पढ़ाई पूरी कि उसके बाद राजधानी के एक निजी संस्थान से एनिमेशन का कोर्स किया। हालांकि लगातार कुछ नया करने वाले रिजवान यहां भी नहीं रूके और मुम्बई में जाकर प्रोडक्शन का काम सीखा। इसी दौरान महज 19 साल की उम्र में अधूरा सच और बाद में 21 साल की उम्र में विरोध द रिवेंज नाम से दो फिल्मों का डायरेक्शन और प्रोडक्शन भी किया। मुम्बई में कुछ दिनों तक प्रोडक्शन का काम सिखने के बाद लखनऊ आकर प्रिज्म प्रोडक्शन हाउस नाम का अपना प्रोडक्शन हाउस भी खोला।

सरकारी विभागों के लिए डॉक्युमेंट्री का निर्माण

रिजवान आज के दौर में संस्कृति विभाग, कुंभ मेला से लेकर लखनऊ सिटी के लिए कई सरकारी प्रॉजेक्ट की डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं। सिर्फ इतना ही नही इन्होने इसके अलावा बीस से ज्यादा वीडियों सांग भी बनाया है।आज अन्य सेक्टर में इनके पास बेहतर काम है। इनके साथ लंबे समय से काम कर रही लखनऊ की सबसे चर्चित मॉडल और एक्ट्रेस इलिशा सिंह बताती हैं कि रिजवान की सबसे बड़ी खूबी काम को लेकर उनकी लगन है। वह लगातार कुछ नया करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि छोटे प्रॉजक्ट शुरू करने वाले रिजवान के पास आज कई बड़े काम है।

भोजपुरी सुपरस्टार अक्षरा सिंह की फिल्म में किया काम

हाल ही में भोजपुरी की स्टार एक्ट्रेस अक्षरा सिंह की फिल्म लैला -मजनू की शूटिंग लखनऊ में हुई जिसके लिए प्रोडक्शन मैनेजर के तौर पर उनका नाम पहले सुझाया गया। सिर्फ इतना ही नहीं मुंबई से भी लगातार काम आने की वजह से रिजवान का आना जाना लगा रहता है।

प्रमुख फिल्में

अधूरा सच, विरोध द रिवेंज, दबंग गुंडाराज, बिहाइंड द डार्क, वो कौन थी

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बता दें कि उनकी खुद की निर्देशित फिल्में यूट्यूब पर काफी लोकप्रिय हुईं हैं। जिसकी वजह से उनकी कम्पनी को ऐड के माध्यम से कमाई होती है। उप्र सरकार की ओर से कुंभ पर चल रहे एक बड़े प्रॉजेक्ट में भी रिजवान ने अपना योगदान दिया है। http://www.satyodaya.com

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