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करणी सेना ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील साजन के खिलाफ किया प्रदर्शन

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील सिंह साजन द्वारा क्षत्रियों को अंग्रेजों का गुलाम बताए जाने पर क्षत्रिय समाज नाराज है, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा व करणी सेना ने सुनील साजन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से सुनील साजन को पार्टी से निकालने की मांग की है जा रही है।https://satyodaya.com

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जेट एयरवेज का हाल, कंपनी कंगाल, संस्थापक मालामाल

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नई दिल्ली। नरेश गोयल एक भारतीय उद्योगपति और भारत के प्रसिद्द एयरलाइन्स जेट एयरवेज के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उन्होंने जेट एयरवेज की स्थापना सन 1993 में की। फोर्ब्स पत्रिका द्वारा जारी किये जाने वाले भारत के सबसे धनि व्यक्तियों और अरबपतियों में नरेश गोयल का नाम भी सुमार है। नरेश गोयल पंजाब के संगरूर में नाभा गेट स्थित एक आभूषण व्यापारी के घर 1949 में पैदा हुए। उन्होंने एक गवर्नमेंट स्कूल से कक्षा 6 तक की शिक्षा प्राप्त की। जब वह 11 साल के थे तब उनके परिवार को गंभीर आर्थिक गुजरना पड़ा और उनका घर भी नीलाम हो गया। उसके बाद नरेश अपनी माँ के चाचा के घर पर रहने लगे। 18 साल की अम्र में उन्होंने ने शिक्षण की डिग्री ले ली। नरेश गोयल ने अपने करियर की शुरुआत एक कैशियर के तौर पर की। उन्होंने अपने मामा सेठ चरण दास राम लाल के लिए काम करना शुरू किया। उनके मामा का ट्रैवल एजेंसी का व्यवसाय था। नरेश गोयल ने 1967 में वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद लेबनान इंटरनेशनल एयरलाइंस के लिए जनरल सेल्स एजेंट के तौर पर कार्य आरम्भ किया। 1967 से 1974 तक उन्होंने कई विदेशी एयरलाइनों के साथ जुड़ कर एयरलाइन कारोबार की पेचीदगियों को सीखा।

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नरेश गोयल ने मई 1974 में जेट एयर (प्राइवेट) लिमिटेड की स्थापना की, जिसका उद्देस्य भारत में विदेशी एयरलाइनों के बिक्री और विपणन सम्बंधित ऑपरेशन्स देखना था। नरेश गोयल ने यातायात पैटर्न, मार्ग संरचनाओं, और परिचालन अर्थशास्त्र और उड़ान का समय निर्धारण जैसी महत्वपूर्ण पहलुओं पर कार्य किया। उनके अनुभव और एयरलाइन कारोबार की बारीकियों की जानकारी ने उन्हें भारतीय उड्डयन इंडस्ट्री का एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बना दिया।
सन 1991 में जब भारत सरकार ने नई आर्थिक नीति के तहत भारतीय अर्थव्यवस्था को खोलने का कार्य शुरू किया तब नरेश गोयल ने भारत सरकार के खुले आकाश नीति का फायदा उठाया और भारत में घरेलू सेक्टरों पर अनुसूचित हवाई सेवाओं के संचालन के लिए जेट एयरवेज की स्थापना की। जेट एयरवेज ने 5 मई 1993 को वाणिज्यिक परिचालन शुरू कर दिया। जल्द ही नरेश गोयल ने जेट एयरवेज को भारत की सबसे बड.ी हवाई सेवा कंपनी बना दिया। जेट एयरवेज का मुख्यालय भारत के वाणिज्यिक राजधानी मुंबई में स्थित है। इसके अलावा चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और दिल्ली में भी कंपनी के महत्वपूर्ण कार्यालय हैं। स्थापना से लेकर अभी तक जेट एयरवेज को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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जनवरी 2006 में जेट एयरवेज ने ऑल-कैश-डील (नकद सौदा) के तहत भारत के सहारा एयरलाइन्स को खरीदने की घोषणा की। यह भारतीय उड्डयन जगत के इतिहास का सबसे बड़ा सौदा होता और इसके परिणाणाम स्वरूप जेट भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी बन जाती परन्तु यह सौदा जून 2006 में रद्द हो गया। इसके पश्चात 12 अप्रैल 2007 को जेट 14.5 अरब डॉलर (अमेरिका $ 340,000,000) में एयर सहारा को खरीदने के लिए सहमत हो गया। एयर सहारा को जेटलाइट नाम दिया गया और इसे लो कॉस्ट कर्रिएर और एक पूर्ण सेवा एयरलाइन के रूप में रखा गया।
जेट एयरवेज के सफलता के साथ-साथ नरेश गोयल का नाम भी भारतीय व्यापार जगत के बड़े उद्यमियों में गिना जाने लगा और उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। नरेश गोयल को निजी क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं विकास में उत्कृष्टता के लिए पहला बीएम मुंजाल पुरस्कार पुरस्कार प्रदान किया गया।http://www.satyodaya.com

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देश

जानें- कैसे अर्श से फर्श पर आकर धराशाई हो गईं जेट एयरवेज के उड़ने की सभी उम्मीदें, यहां है पूरी कहानी

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नई दिल्ली। कभी देश की सबसे बड़ी निजी विमान सेवा कंपनी का रुतबा हासिल करने वाली जेट एयरवेज की हालत आज ऐसी हो गयी है कि उसकी उड़ने की सभी उम्मीदें टूट चुकी हैं और वह आसमान से जमीन पर आ पहुंची है। आर्थिक रूप से धराशाई हुई भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी विमानन कंपनी के पास एक अदद हवाई सेवा जारी रखने के लिए ईंधन तक के पैसे नहीं बचे हैं, कर्मचारियों को तीन महीने से सैलरी नहीं मिली है। बुधवार रात जेट एयरवेज के किसी विमान ने अंतिम बार उडान भरी। दरअसल 25 साल पुरानी एयरलाइन कंपनी पर 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है और बैंकों ने 400 करोड़ रुपये का इमर्जेंसी फंड देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद जेट एयरवेज के प्रबंधकों ने जेट की सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया है। अपनी बेहतर सेवाओं के चलते जेट एयरवेज भारत सहित दुनिया के सभी यात्रियों में खासा लोकप्रिय थी। हजारों लोग प्रतिदिन अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए जेट एयरवेज पर निर्भर थे। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के मामले में जेट एयरवेज कभी देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस थी। दिसंबर 2018 तक जेट के पास बोइंग 777 और एयरबस ए330, सिंगल बी737 और टर्बोप्रॉप एटीआर के साथ कुल 124 विमान थे। कंपनी हर दिन करीब 600 उड.ानें भर रही थी। लेकिन 18 अप्रैल 2019 को कंपनी ने केवल पांच विमानों के साथ परिचालन किया और बुधवार रात जेट की आखिरी उड.ान अमृतसर से मुंबई के लिए थी।
इसके पहले आर्थिक संकट के चलते जेट एयरवेज पहले ही अपने अंतरराष्ट्रीय परिचालन को 18 अप्रैल तक स्थगित करने की घोषणा कर चुकी थी। कंपनी की यह हालत बैंकों का कर्ज न चुका पाने के कारण हुई है।

कैसे हुई शुरुआत

जेट एयरवेज की स्थापना 1992 में एयर टैक्सी के रूप में हुई थी। मई 1993 में दो विमानों बोइंग 737 और बोइंग 300 के साथ कंपनी ने कामर्शियल उड़ाने प्रारंभ की। 2004 में जेट एयरवेज ने चेन्नई से कोलंबों हवाई सेवा की शुरूआत कर अंतरराष्टीय सेवा का आगाज किया। जनवरी 2007 में जेट एयरवेज ने एयर सहारा को खरीद लिया। जिसके बाद जेट एयरवेज ने बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं की शुरूआत की। लेकिन इस खरीद के बाद से ही जेट एयरवेज की मुश्किलें भी शुरू हो गईं। कंपनी इस कर्ज भारी-भरकम कर्ज को चुका नहीं पाई। रही सही कसर 2008 की आर्थिक मंदी ने पूरी कर दी। अक्टूबर 2008 में जेट एयरवेज ने कुछ कर्मचारियों की छंटनी की लेकिन नागरिक उडृडयन मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद कंपनी को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा।

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वर्ष 2012 में जेट एयरवेज घरेलू हिस्सेदारी में इंडिगो से पिछड. गयी। संकट से जूझ रही जेट एयरवेज में एतिहाद एयरलाइंस ने 24 प्रतिशत शेयर खरीदा। जबकि कंपनी का 51 प्रतिशत जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के पास ही रहा। 2018 में जेट एयरवेज को भारी तिमाही नुकसान उठाना पड.ा। दिसंबर 2018 में जेट ने सभी विदेशी सेवाएं स्थगित कर दी। इसके बाद 25 मार्च 2019 में जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने कंपनी में अपने सभी पदों से इस्तीफा सौंप दिया।

कुछ समय पहले तक जेट एयरवेज देश के 52 तथा 21 विदेशी गंतव्यों के लिए हवाई सेवाएं दे रहा था। जेट एयरवेज का मुख्यालय भी मंुबई में ही है। इसके परिचालन का मुख्य केन्द्र मुंबई का छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा है। इसके अतिरिक्त बंगलौर के केम्पेगोव्डा अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, चेन्नई अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, दिल्ली के इंदिरा गाँधी अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन, कोलकाता के नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अन्तराष्ट्रीय विमान पत्तन तथा पुणे विमान पत्तन से सभी उड़ानों का परिचालन करता है।

कई महत्वपूर्ण रूटों पर बढ़ गया किराया

देश व दुनिया की हवाई यात्राओं में जेट एयरवेज की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जेट का परिचालन बंद होने से देश में कई रूटों पर हवाई किराया महंगा होने की आशंका है। विदेशी रूटों पर किराया बढ़ने की खबर आ चुकी है। लंदन का किराया 37 हजार रु. से बढ़कर 1.80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। उड्डयन मंत्रालय ने लोकप्रिय रूट्स पर बढ़ते हवाई किरायों पर अंकुश लगाने के लिए गुरुवार को एयरलाइंस और हवाई अड्डों की मीटिंग बुलाई है। एक सूत्र ने बताया कि सरकार एयरलाइंस से कैपेसिटी बढ़ाने को कह सकती है, लेकिन कंपनियों के लिए अभी जेट एयरवेज के स्लॉट की भरपाई करना मुमकिन नहीं है। माना जा रहा है कि जेट के पास देश भर में 400 डिपार्चर स्लॉट हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इनमें से दिल्ली और मुंबई के 80 स्लॉट्स हैं, जो देश के दो सबसे व्यस्त हवाई अड्डे हैं।

26 बैंकों का कर्ज

फिलहाल जेट एयरवेज पर कुल 26 बैंकों का करीब 8,500 करोड़ रुपये कर्ज है। इसमें कुछ प्राइवेट और विदेशी बैंक भी शामिल हैं। पब्लिक सेक्टर बैंक में केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहबाद बैंक, एसबीआई और पीएनबी शामिल हैं। वहीं, आईसीआईसीआई और यस बैंक जैसे प्राइवेट बैंकों का भी जेट पर बकाया है। दरअसल, 2010 के संकट के बाद एयरलाइन का कर्ज संकट गहराने लगा। इस दौरान कंपनी को लगातार चार तिमाहियों में घाटा उठाना पड़ा। इसके बाद वह ईएमआई चुकाने में फेल होने लगी।

बर्बादी का राजनीतिक कनेक्शन

जेट एयरवेज के संकट के राजनीतिक कनेक्शन भी हैं। नरेश गोयल का यूपीए सरकार के शासन काल में हुआ था। लेकिन 2014 में केन्द्र में एनडीए सरकार आने के बाद जेट एयरवेज की समस्याएं शुरू हो गईं। सूत्रों के अनुसार भाजपा की सहयोगी शिवसेना के साथ जेट एयरवेज के मैनेजमेंट के संबंध अच्छे नहीं हैं। इसने भाजपा से कहा है कि जेट को सरकार की तरफ से कोई मदद न दी जाए।
वहीं जेट में मुंबई की एक सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे एनसीपी नेता के भी पैसे लगे हैं। सूत्रों के अनुसार एनआरआई नरेश गोयल के पास इतने पैसे हैं कि अकेले जेट को संकट से उबार सकते हैं। लेकिन ज्यादातर पैसा कालेधन में है। उनका दुबई और लंदन में होटल चेन है।
करीब 25000 लोगों को रोजगार देने वाली जेट एयरवेज के बंद होने से हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है। खबरों के अनुसार जेट का संकट बढ़ने के बाद 400 पायलट नौकरी छोड़ चुके हैं। अब जेट के पास 1,300 पायलट रह गए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में बंद होने वाली जेट एयरवेज दूसरी बड़ी हवाई सेवा कंपनी है। इसके पहले 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस भी बंद हो चुकी है। किंगफिशर के मालिक भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या भारतीय बैंकों को हजारों करोड. रुपए का चूना लगाकर विदेश में शरण लिए हुए हैं। जिनके भारत प्रत्यर्पण के लिए भारतीय जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं।http://www.satyodaya.com

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भारत का निर्यात : मार्च में हुई 11 फीसदी की बढ़त, व्यापार घाटे में आई कमी

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नई दिल्ली:- वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान देश के निर्यात का रिकार्ड उंचाईयों पर पहुच गया है। देश के निर्यात में अच्छी वृध्दि दर्ज की गई है। मार्च में निर्यात 11 प्रतिशत से बढ़कर 32.55 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। अक्टूबर 2018 से अब तक निर्यात में सबसे बड़ी मासिक वृध्दि हुई है। अक्टूबर में निर्यात 17.86 फीसदी बढ़ा। जबकि फार्मा, रसायन, और इंजीनियरिंग, जैसे क्षेत्रों में ऊंची वृध्दि की वजह से कुल निर्यात में वृध्दि हुई है। पूरे वित्त वर्ष 2018-19 में निर्यात 9 प्रतिशत से बढ़कर 331 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह किसी वित्त वर्ष में निर्यात का सबसे ऊंचा आंकड़ा माना जा रहा हैं।

जानकारी के अनुसार मार्च 2018 में निर्यात का आंकड़ा 29.32 अरब डॉलर था। लेकिन मार्च महीने में आयात 1.44 प्रतिशत से बढ़कर 43.44 अरब डॉलर हो गया है। हालांकि इस दौरान व्यापार घाटा कम होकर 10.89 अरब डॉलर पर आ गया। जो मार्च 2018 में 13.51 अरब डॉलर था।

सोने का आयात मार्च में 31.22 प्रतिशत से बढ़कर 3.27 अरब डॉलर पर पहुंच गया। जबकि कच्चे तेल का आयात 5.55 प्रतिशत की वृघ्दि के साथ 11.75 अरब डॉलर रहा। जबकि वित्त वर्ष के दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 176.42 अरब डॉलर रहा, जो कि 2017-18 में 162 अरब डॉलर था।

आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-मार्च, 2018-19 में कच्चे तेल का आयात 29.27 प्रतिशत से बढ़कर 140.47 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, गैर तेल आयात 2.82 प्रतिशत की वृध्दि के साथ 366.97 अरब डॉलर रहा हैं।

मंत्रालय ने कहा हैं कि 2016-17 से कुल निर्यात (वस्तुओं और सेवाओं का मिलाकर) लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 2018-19 में यह पहली बार हुआ कि आंकड़ा 500 अरब डॉलर के पार कर गया। वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 2018-19 में 7.97 प्रतिशत की वृध्दि के साथ 535.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। हालांकि, आंकड़ों के अनुसार फरवरी, 2019 में सेवा निर्यात 6.54 प्रतिशत से घटकर 16.58 अरब डॉलर रह गया। इस दौरान सेवाओं का आयात भी 11 प्रतिशत से घटकर 9.81 अरब डॉलर पर पहुच गया हैं।http://www.satyodaya.com

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April 19, 2019, 1:26 am
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