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जानिए, क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा और क्या है इसका महत्व

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प्रतीकात्मक चित्र

भारत सदैव से ऋषि-मुनियों की धरती रही है । ये वो देश है जहां कभी गुरुकुल परंपरा रही है । गुरुकुलों में रजा और रंक दोनों के बच्चे एक साथ पढ़ते थे । श्रीकृष्ण और सुदामा इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं । गुरु भी सभी शिष्यों को एक सामान शिक्षा देते थे । गुरु को गोविन्द मतलब भगवान से भी बड़ा दर्जा दिया गया है । भारतवर्ष में कई विद्वान गुरु हुए हैं, किन्तु महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होंने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) के चारों वेदों की व्याख्या की थी ।’ गुरु’ को समर्पित संत कबीर का एक दोहा आप सभी ने जरूर पढ़ा या सूना होगा कि ‘गुरु गुरू ‘गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय । बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय ।’ गुरू और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए, गुरू को अथवा गोबिन्द को ? ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । इतना ही नहीं कबीर ने यह भी कहा कि, ‘गुरू बिन ज्ञान न उपजै, गुरू बिन मिलै न मोष । गुरू बिन लखै न सत्य को गुरू बिन मिटै न दोष ।’

कबीर दास जी कहते हैं, हे सांसरिक प्राणियों । बिना गुरू के ज्ञान का मिलना असम्भव है । तब तक मनुष्य अज्ञान रूपी अंधकार में भटकता हुआ मायारूपी सांसारिक बन्धनों मे जकड़ा रहता है जब तक कि गुरू की कृपा प्राप्त नहीं होती । मोक्ष रूपी मार्ग दिखलाने वाले गुरू हैं । बिना गुरू के सत्य एवं असत्य का ज्ञान नहीं होता । उचित और अनुचित के भेद का ज्ञान नहीं होता फिर मोक्ष कैसे प्राप्त होगा ? अतः गुरू की शरण में जाओ। गुरू ही सच्ची राह दिखाएंगे ।

कबीर दस इससे आगे कहते हैं कि ‘गुरू पारस को अन्तरो, जानत हैं सब संत । वह लोहा कंचन करे, ये करि लेय महंत ।’ मतलब गुरू और पारस के अन्तर को सभी ज्ञानी पुरूष जानते हैं । पारस मणि के विषय में यह पूरे जग में विख्यात हैं कि उसके स्पर्श से लोहा सोने का बन जाता है किन्तु गुरू भी इतने महान हैं कि अपने गुण ज्ञान में ढालकर शिष्य को अपने जैसा ही महान बना लेते हैं । गुरु की इसी महत्ता को देखते और समझते हुए गुरु पूर्णिमा मनाए जाने की परम्परा शुरू हुई । गुरु के प्रति आदर-सम्मान और अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का विशेष पर्व मनाया जाता है। इस बार यह गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई यानी शुक्रवार को है । भारतीय संस्कृति में गुरु देवता को तुल्य माना गया है । गुरु को हमेशा से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है । वेद, उपनिषद और पुराणों का प्रणयन करने वाले वेद व्यास जी को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है ।

कब मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है । मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग 3000 ई. पूर्व में हुआ था । उनके सम्मान में ही आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है । गुरु पूर्णिमा के दिन बहुत से लोग अपने दिवंगत गुरु अथवा ब्रह्मलीन संतों के चिता या उनकी पादुका का धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, चंदन, नैवेद्य आदि से विधिवत पूजन करते हैं । शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार और रु का का अर्थ- उसका निरोधक । गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है। अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है ।

पुराणों के अनुसार, भगवान शिव सबसे पहले गुरु माने जाते हैं । शनि और परशुराम इनके दो शिष्य हैं । शिवजी ने ही सबसे पहले धरती पर सभ्यता और धर्म का प्रचार-प्रसार किया था इसलिए उन्हें आदिदेव और आदिगुरू कहा जाता है । शिव को आदिनाथ भी कहा जाता है ।
हालांकि बहुत से लोग तर्क देते है कि आषाढ़ में पड़ने वाली पूर्णिमा का तो पता ही नहीं चलता है । आसमान में बादल घिरे रहते हैं ऐसे में बहुत संभव कि चंद्रमा के दीदार ही न हों । ऐसे में बिना चंद्रमा के कभी पूर्णिमा की कल्पना ही नहीं की जा सकती है ? ऐसे लोगों का तर्क है कि अगर किसी पूर्णिमा का जिक्र होता है तो वह शरद पूर्णिमा है ऐसे में शरद की पूर्णिमा को ही श्रेष्ठ मानना चैये क्योंकि उस दिन चंद्रमा अपनी पूर्णता से सभी का मन मोह लेता है । परन्तु यहां महत्वपूर्ण और गूढ़ बात यह है कि महत्व तो आषाढ़ पूर्णिमा का ही है क्योंकि इसका विशेष महत्व है ।

आषाढ़ माह की पूर्णिमा को चुनने के पीछे गहरा कारण और गूढ़ है । वो ये कि गुरु तो पूर्णिमा के चंद्रमा जैसे हैं जो हमेशा पूरी तरह से प्रकाशमान रहते हैं और शिष्य तो आषाढ़ माह के बादलों जैसे हैं । शिष्य हर तरह के हो सकते हैं, जन्मों के अंधेरे को लेकर आ छाए हैं । वे अंधेरे बादलों की तरह ही हैं । उसमें भी गुरु जब चंद्रमा की तरह चमक सके, उस अंधेरे माहौल को भी अपने प्रकाश से प्रकाशमान कर सकें, यही तो गुरु पद की श्रेष्ठता है । इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है । इसमें गुरु की तरफ भी इशारा है और शिष्य की तरफ भी ।

जीवन में गुरु और शिक्षक के महत्व को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए यह एक आदर्श पर्व है । व्यास पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा अंधविश्वास के आधार पर नहीं बल्कि श्रद्धाभाव से मनाना चाहिए । गुरु का आशीर्वाद सबके लिए कल्याणकारी व ज्ञानवर्द्धक होता है । इसलिए इस दिन गुरु पूजन के बाद गुरु का आशीर्वाद लेना चाहिए । सिख धर्म में इस पर्व का महत्व इस कारण अधिक है क्योंकि सिख इतिहास में उनके दस गुरुओं का बेहद महत्व रहा है ।http://www.satyodaya.com

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मंदी के बावजूद सोने में बंपर निवेश, जानिए क्यों!

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लखनऊ। देश की अर्थव्यवस्था पर इस समय मंदी के काले बादल मंडरा रहे हैं। लोगों की क्रय शक्ति क्षमता कम हो गई है। उत्पादनकर्ताओं के लिए अपना पहले से तैयार माल निकालना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में कोई नया उत्पादन नहीं करना चाहता है। इसका परिणाम यह है कि अर्थव्यवस्था के कई सेक्टर्स में रोजगार पैदा होना बंद हो गए हैं। यहां तक कंपनियों ने छटनी भी शुरू कर दी है। कई लोग बेरोजगार हो गए हैं और लाखों लोगों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। लेकिन इन सबके बावजूद एक क्षेत्र ऐसा है जहां कीमतों में कमी नहीं आई है बल्कि जबरदस्त उछाल आया है। सर्राफा क्षेत्र में कीमतों में रिकॉर्ड स्तर का उछाल है। सोना-चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। सोना जहां 38 हजार के पार जा चुका है वहीं चांदी 45 हजार के पार चली गई है। ऐसे में वो क्या वजह हैं जिनकी वजह से सर्राफा क्षेत्र में इस तरह का उछाल देखने को मिला है?

लखनऊ महानगर सर्राफा व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि सरकार की नीतियों के साथ ही कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय कारण हैं जिसकी वजह से सोना-चांदी की कीमतें में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। सरकार ने 2019-20 के बजट में आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया है। जिसकी वजह से कीमतें बढ़ गई हैं। वहीं, दुनियाभर के केंद्रीय बैंक भी सोने के भण्डार को बढ़ा रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी 2018 से अब तक 60 टन सोने का रिजर्व बढ़ा लिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने भी ब्याज दरों में कटौती कर दी है। इसकी वजह से भी कीमतें बढ़ी हैं। साथ ही साथ अमेरिका-चीन के बीच छिड़ा ट्रेड वॉर भी एक वजह है जिसने एशियाई बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। इन्हीं कुछ वजहों से लोग इस मंदी के दौर में सोने पर ज्यादा इनवेस्ट कर रहे हैं। लोगों का रूझान इस क्षेत्र की ओर बढ़ा है। हालांकि, इससे आम आदमी को परेशानियां हो रही हैं। शाद-ब्याह के अवसर पर उनको ज्याद कीमतें अदा करनी पड़ रही हैं जिसकी वजह से उनका बजट बिगड़ा है। वहीं, बढ़ी कीमतों ने कालाबाजारी को भी बल दिया है।   

अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि इस मंदी के दौर में यह जरूरी है सरकार व्यापारियों को कुछ राहत दे। जीएसटी में सुधार कर उसे सुविधाजनक बनाए ताकि व्यापारियों को आसानी हो। इसके साथ ही कालाबाजारी करने वालों पर भी नकेल कसने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यह जो सर्राफा बाजार में कीमतों में वृद्धि देखने को मिल रही है वह आगे इसी तरह जारी नहीं रहेगी। उम्मीद है कि आने वालों दिनों में वापस से कीमतें नीचे आएंगी। http://www.satyodaya.com

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गाजियाबाद: सीवर में उतरे पांच सफाई कर्मचारियों की मौत, सीएम योगी ने दिए जांच के आदेश

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गाजियाबाद। शहर में सीवर सफाई के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया है। यहां नंदग्राम में सीवर साफ करने उतरे पांच लोगों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि उन्हें सीवर में उतरने के लिए ठेकेदार ने कहा था। सीवर में उनकी दम घुटने से मौत हुई है। पांचो की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। इस घटना पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया है। इसके साथ ही मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख सहायता राशि देने का ऐलान किया है। सीएम योगी ने प्रबंध निदेशक को इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।

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दरअसल, बुधवार को नंदग्राम में सीवर सफाई का कार्य चल रहा था। सीवललाइन साफ करने एक आदमी अंदर नहीं गया। जब वो बाहर निकल कर नहीं आया तो उसे देखने दूसरा आदमी भी अंदर चला गया है। इसी तरह पांचो लोग अंदर गए और वहीं उनका दम घुट गया। दम घुटने के कारण उनकी मौत हो गई। हादसे की जानकारी मिलने के बाद अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। तुरंत ही सीवर लाइक को भी बंद कर दिया गया था। मृतकों के शव को अस्पताल भेज दिया गया है। http://www.satyodaya.com

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Maruti Suzuki XL6 MPV भारत में हुई लॉन्च, जानें शुरुआती कीमत

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देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी ने आपनी नई प्रीमियम एमपीवी XL6 भारत में लॉन्च हो गई है। भारत की दिग्गज कार निर्माता की यह MPV (मल्टी-परपज- व्हीकल) कंपनी की Ertiga पर बेस्ड है। इसकी कीमत 9.79 लाख रुपये से शुरू होती है। इसे सिर्फ पेट्रोल इंजन के साथ बाजार में उतारा गया है। इसका लुक कई मायनों में सबसे अलग दिख रहा है। जबकि XL6 को Maruti Suzuki की प्रीमियम डीलरशिप नेक्सा से बेचा जाएगा।  

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ग्राहकों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए मारुति ने नई XL6 में कई अच्छे फीचर्स को शामिल किया है। नई XL6 का डिजाइन स्पोर्टी और बोल्ड है। यह स्पोर्टी और प्रीमियम दिखती है। इसकी फ्रंट क्रोम ग्रिल, प्लास्टिक क्लैडिंग बेहतर लुक देने में मदद करते हैं। इसके साइड में दी गई लाइन अच्छी दिखती है। पीछे की तरफ से यह काफी हद तक अर्टिगा की तरह दिखती है, लेकिन इसमें दिए गए ब्लैक इंसर्ट्स इसके रियर लुक को स्पोर्टी बनाते हैं। इसके अलावा नई XL6 में ब्लैक अलॉय व्हील्स, रूफ रेल्स आकर्षित करते हैं। http://www.satyodaya.com

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August 25, 2019, 7:07 pm
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