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एमपी बोर्ड ने जारी किया 10वीं और 12वीं का रिजल्ट, लड़कियां लड़कों से आगे…

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया गया है। 10वीं 12वीं रिजल्ट के साथ-साथ 12वीं वोकेश्नल रिजल्ट की भी घोषणा की गई है। एमपी बोर्ड 12वीं का रिजल्ट 72.37 फीसदी और 10वीं का रिजल्ट 61.32 फीसदी रहा। 10वीं और 12वीं दोनों में लड़कियों का रिजल्ट लड़कों से बेहतर रहा है। 10वीं में 63.69% लड़कियां पास हुईं। जबकि लड़के 59.15% पास हुए। एमपी बोर्ड 12वीं में 76.31 फीसदी लड़कियां पास हुई हैं और 68.94 फीसदी लड़के। परिणाम की घोषणा सुबह 11 बजे मॉडल स्कूल टीटी नगर ऑडिटोरियम में मुख्य सचिव एसआर मोहंती द्वारा प्रेस कॉन्फेंस में की गई। स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट एमपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic. in और www.mpresults.nic.in पर भी देख सकते हैं।

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10वीं में सागर जिले के गगन दीक्षित और आयुष्मान ताम्रकार ने टॉप किया। दोनों के 500 में से 499 मार्क्स। दीपेन्द्र कुमार अहरीवार 497 मार्क्स के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तीसरे स्थान पर छह स्टूडेंट्स रहे। सभी के 496 मार्क्स आए हैं।12वीं आर्ट्स स्ट्रीम में दृष्टि सनोडिया ने किया टॉप, हासिल किए 500 में से 479 मार्क्स। 12वीं साइंस स्ट्रीम मैथ्स ग्रुप में आर्या जैन ने 486 अंक हासिल कर टॉप किया है। 12वीं कॉमर्स स्ट्रीम में 486 अंकों के साथ भोपाल के विवेक गुप्ता ने टॉप किया है। 12वीं एग्रीकल्चर ग्रुप में 481 अंक हासिल कर प्रिया चौरसिया ने टॉप किया है।  12वीं साइंस स्ट्रीम बायोलॉजी ग्रुप में सृजन श्रीवास्तव ने 481 अंक हासिल कर टॉप किया है।  फाइ आर्ट्स एवं होम साइंस में 476 अंक पाकर प्रतीक्षा शर्मा ने पहला स्थान हासिल किया है।http://www.satyodaya.com

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में शुरू किया 2 दिवसीय स्वच्छता अभियान, सफाई करते आए नजर….

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ओम बिरला

फाइल फोटो

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद देशभर में स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। संसद से गांव तक स्वच्छता अभियान को पहुंचाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज संसद भवन परिसर में 2 दिवसीय स्वच्छता अभियान का शुभारंभ किया।

उन्होंने संसद सदस्यों से स्वच्छता अभियान के इस संकल्प को संसद से प्रत्येक गांव तक ले जाने का आग्रह किया। वहीं इस दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन,केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री प्रहलाद जोशी समेत कई अन्य केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, संसद सदस्य इस अवसर पर उपस्थित थे। इस शुभ अवसर पर मौजूद प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि संसद भवन परिसर में आज आयोजित स्वच्छता अभियान का शुभारंभ गांधी जी द्वारा दिखाए गए स्वच्छता के सपने को साकार करने का एक मात्र पहल है।

इस स्वच्छता अभियान का मुख्य उद्देश्य घर-घर तक स्वच्छता को पहुंचाना है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि पीएम मोदी द्वारा आयोजित स्वच्छता अभियान की शुरूआत गांधी जी के 150वीं वर्षगांठ पर शुरू किया गया था। ओम बिरला ने कहा कि संसद सदस्य लोकतंत्र के मंदिर अर्थात संसद में भारत की 130 करोड़ जनता के प्रतिनिधि हैं और इस अभियान के प्रति जनता को जागरूक एवं जिम्मेदार  बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

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वहीं बिरला ने ये भी कहा कि स्वच्छता का महत्व देव-भक्ति के समान है। उन्होंने ये भी कहा कि  स्वच्छता अभियान मात्र संसद भवन तक सीमित नहीं है इससे गांव-गांव तक भी पहुंचाना है।

वहीं इस स्वच्छता अभियान के बारे में बात करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह पहला ऐसा मौका है जब संसद भवन में स्वच्छता अभियान का शुभारंभ किया गया। वहीं उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उनकी इस अच्छी पहल के लिए धन्यवाद भी किया।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि स्वच्छता अभियान अब एक आंदोलन बन गया है और देश का जन-जन अपने परिवेश और वातावरण की स्वच्छता तथा उससे संबंधित स्वास्थ्यगत लाभों के प्रति सजग एवं सतर्क है। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रियों, संसद सदस्यों और अन्य गण्यमान्य प्रतिनिधियों ने भी गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा देश में ‘स्वच्छता’ के संदेश को फैलाने की शपथ ली है। http://www.satyodaya.com

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ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला लेखिका आशापूर्णा देवी की आज है पुण्यतिथि

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लखनऊ। आशापूर्णा देवी की आज पुण्यतिथि है। कलकत्ता में 8 जनवरी 1909 को जन्मी आशापूर्णा देवी बांग्ला भाषा की कवयित्री और उपन्यासकार थीं, जिन्होंने 13 वर्ष की अवस्था से लेखन प्रारम्भ किया और आजीवन साहित्य रचना से जुड़ीं रहीं। गृहस्थ जीवन की सारी जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने लगभग दो सौ कृतियाँ लिखीं, जिनमें से अनेक कृतियों का भारत की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उनके रचनाओं में नारी जीवन के विभिन्न पक्ष, पारिवारिक जीवन की समस्यायें, समाजिक कुंठा और लिप्सा उभर कर सामने आती हैं। उनकी कृतियों में नारी की खुद को अभिव्यक्त करने की आजादी और उसकी महिमा पर नये ढंग से प्रकाश पड़ता है। उन्हें 1976 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली वे पहली महिला हैं। आशापूर्णा देवी ने 13 जुलाई 1995 को 86 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

कलकत्ता में जन्मी आशापूर्णा देवी का परिवार कट्टरपंथी और रूढ़िवादी था इसलिए उन्हें स्कूल और कॉलेज जाने का सुअवसर नहीं मिला। लेकिन बचपन से ही उन्हें पढ़ने-लिखने और अपने विचारों की अभिव्यक्ति की सुविधाएं प्राप्त हुई। उनके घर में नियमित रूप से अनेक बांग्ला पत्रिकाएं आती थीं। इन्हीं की वजह से उन्हें चिंतन करने और लिखने शौक हुआ। 13 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ लेखन का यह सफर ताउम्र चला। जिस कला और साहित्यिक के परिवेश में वह पली-बढ़ी उसकी वजह से उनमें संवेदनशीलता का भरपूर विकास हुआ।

पिता, माता और तीन भाईयों वाला उनका एक मध्यमवर्गीय परिवार था। चुंकि पिता एक अच्छे चित्रकार और माता की बांग्ला साहित्य में गहरी रुचि थी इसलिये आशापूर्णा देवी को उस समय के जानेमाने साहित्यकारों और कला शिल्पियों से निकट परिचय का अवसर मिला। उस युग में बंगाल में चारों तरफ रूढ़िवाद फैला था। पिता और पति दोनों के ही घर में पर्दा होने के बावजूद उनकी दृष्टि में मानो पूरा संसार उतर आता था। फिर वह चाहें भारत की आजादी का संघर्ष हो, असहयोग आंदोलन हो या महिला सशक्तिकरण की बात हो उनकी लेखनी में सबकुछ शामिल था।

आशापूर्णा देवी को समकालीन बांग्ला उपन्यासकारों की प्रथम पंक्ति में गौरवपूर्ण स्थान मिला। उन्होंने लगभग 225 कृतियां लिखी हैं, जिनमें 100 से अधिक उपन्यास हैं। उनमें गजब की प्रतिभा थी। खासतौर से उनके लेखन में व्यावहारिकता, कम से कम शब्दों में अपनी बात कहना और बिना लाग-लपेट के सीधे अपनी बात कह जाने की कला उन्हें विशिष्ट बनाती है। उनकी नजर उनकी इतनी तीक्ष्ण थी कि वह समाज में घटने वाली छोटी से छोटी घटना को भी अपनी लेखनी में उतार लेती थीं। पूर्वगृहों से मुक्त आशापूर्णा घृणित चरित्र का रेखाकंन भी बिना किसी कड़वाहट के करती थीं। आशापूर्णा मानव और मानव जाति से प्यार करती थीं। समाज में फैली रूढि़यां, बंधनों, जर्जर पूर्वग्रहों, समाज की अर्थहीन परंपराओं से उनका विद्रोह था। नारी-पुरूष की बराबरी की वो हिमायती थीं। उनकी उपन्यास-त्रयी, प्रथम प्रतिश्रुति, सुवर्णलता और बकुलकथा की रचना ही उनके इस सघन विद्रोह भाव को मूर्त और मुखरित करने के लिए हुई। आशापूर्णा के लेखन की खासियत उनकी अपनी शैली है। कथा का विकास, चरित्रों का रेखाकंन, पात्रों के मनोभावों से अवगत कराना, सबमें वह यथार्थवादिता को बनाए रखते हुए अपनी आशामयी दृष्टि को अभिव्यक्ति देती हैं।

आशापूर्णा को ‘प्रथम प्रतिश्रुति’ के लिए 1976 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया। लगभग पच्चीस वर्ष पूर्व दूरदर्शन में, ‘प्रथम प्रतिश्रुति’ नामक टीवी प्रसारित हुआ था। अपने जीवन की घटनाओं के बाद की कथा आशापूर्णा देवी ने  दो अन्य उपन्यास  ‘सुवर्णलता’ और ‘बकुल कथा’ में लिखा है। उनकी कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकें क्रमश: अधूरे सपने, अनोखा प्रेम, अपने अपने दर्पण में, अमर प्रेम, अविनश्वर, आनन्द धाम, उदास मन, कभी पास कभी दूर, कसौटी, काल का प्रहार, किर्चियाँ, कृष्ण चूड़ा का वृक्ष, खरीदा हुआ दु:ख, गलत ट्रेन में, चश्में बदल जाते हैं, ये जीवन है, राजकन्या, लीला चिरन्तन, विजयी वसंत, विश्वास अविश्वास, वे बड़े हो गए, शायद सब ठीक है, श्रावणी, सर्पदंश, सुवर्णलता आदि हिन्दी में उपलब्ध है।http://www.satyodaya.com

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने अमित शाह की मुलाकात…

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नयी दिल्ली 13 जुलाई केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने पार्टी अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की तथा उनसे शिक्षा परिसरों में नशीली दवाओं के प्रयोग रोकने, जम्मू-कश्मीर मसले, शिक्षा और शहरी आतंकवाद जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की गई। अभाविप प्रतिनिधिमंडल ने शाह से मुलाकात के दौरान शैक्षणिक परिसरों में नशीली दवाओं के इस्तेमाल पर कारगर रोक लगाने तथा इस मामले में उनसे व्यक्तिगत रूप से रूचि लेने का आग्रह किया। अभाविप नेताओं ने शाह से रोहिंग्या मसले पर भी चर्चा की। 

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अभाविप सूत्रों ने कहा कि संगठन के प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष शक्ति सिंह शामिल थे। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी से भी मुलाकात की। 
प्रतिनिधिमंडल ने संगठन के चेन्नई में हाल में संपन्न राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद सम्मेलन में उठाये गये और चर्चा में शामिल मुद्दों समेत विभिन्न मसलों पर विचार-विमर्श किया। अभाविप नेताओं ने सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत से भी मुलाकात की तथा उनसे विचार-विमर्श किया। http://www.satyodaya.com

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July 13, 2019, 5:53 pm
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