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रिलायंस जियो से अब सभी वाॅयस काॅल फ्री नहीं, ग्राहकों को देना होगा चार्ज

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मुंबई। देश भर में अपने ग्राहकों को फ्री वाॅयस काॅल की सुविधा दे रही रिलायंस जियो ने ने इस सुविधा का समाप्त करने की घोषणा की है। काॅल टर्मिनेशन चार्ज के जुड़े नियमों की बाध्यता के चलते टेलीकाॅम कंपनी रिलायंस जियो ने बुधवार को बताया कि अब वह ग्राहकों से कॉलिंग के पैसे लेगा। जियो यूजर्स को जियो के अलावा अन्य नेटवर्क पर किए जाने वाले वॉयस कॉल के लिए 6 पैसे प्रति मिनट चार्ज किया जाएगा। लेकिन उन्हें बराबर मूल्य का फ्री डेटा देकर जियो इसे बैलेंस भी करेगा। रिलायंस जियो को यह चार्ज आईयूसी नियमों की बाध्यता के चलते लगाना पड़ रहा है। आईयूसी एक मोबाइल टेलिकॉम ऑपरेटर द्वारा दूसरे को भुगतान की जाने वाली रकम है। यह पहली बार होगा जब जियो यूजर्स वॉयस कॉल के लिए पेमेंट करेंगे। अब तक जियो केवल डेटा के लिए चार्ज लेता है, और देश में कहीं भी और किसी भी नेटवर्क पर वॉइस कॉल पूरी तरह फ्री है। हालांकि, सभी नेटवर्क से इनकमिंग कॉल्स पहले की तरह फ्री में जारी रहेंगी।

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जियो ने एक बयान में कहा है कि जब तक टेलिकॉम ऑपरेटरों को अपने यूजर्स द्वारा अन्य ऑपरेटरों के नेटवर्क पर किए गए मोबाइल फोन कॉल के लिए पेमेंट करने की जरूरत पड़ रही है। तब तक 6 पैसा प्रति मिनट शुल्क ही लागू रहेगा। ये चार्ज जियो यूजर्स द्वारा दूसरे जियो नंबर पर किए गए कॉल और वॉट्सएप, फेसटाइम या ऐसे अन्य प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके किए गए फोन और लैंडलाइन कॉल पर लागू नहीं होगा।


रिलायंस जियो ने कहा कि हमारा मानना है कि आईयूसी शून्य किया जाना चाहिए। टाई भी वर्ष 2011 से लेकर अब तक कई बार ऐसा करने को कह चुका है। सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान टाई ने अपना हलफनामा दाखिल करते हुए कहा था, हमारी राय है कि टर्मिनेशन शुल्क में लगातार कमी की जानी चाहिए और आखिर में इसे समाप्त किया जाना चाहिए, …….. जो वर्तमान से 2 साल के अंत तक हो जाना चाहिए। टाई ने अपनी राय में कहा कि 2014 तक टर्मिनेशन चार्ज शून्य कर दिया जाना चाहिए। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि उस समय ना तो 4जी और ना ही जियो मौजूद था। लेकिन आज तक आईयूसी शून्य नहीं किया जा सका है।

क्या है आईयूसी चार्ज

इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज (आईयूसी) एक मोबाइल टेलिकॉम ऑपरेटर द्वारा दूसरे को भुगतान की जाने वाली रकम है। जब एक टेलीकॉम ऑपरेटर के ग्राहक दूसरे ऑपरेटर के ग्राहकों को आउटगोइंग मोबाइल कॉल करते हैं तब प्न्ब् का भुगतान कॉल करने वाले ऑपरेटर को करना पड़ता है। दो अलग-अलग नेटवर्क के बीच ये कॉल मोबाइल ऑफ-नेट कॉल के रूप में जानी जाती हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा IUC शुल्क निर्धारित किए जाते हैं और वर्तमान में यह 6 पैसे प्रति मिनट हैं।

ट्राई के फैसले से नुकसान

2017 में दूरसंचार नियामक ट्राई ने इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज (आईयूसी) को 14 पैसे से 6 पैसे प्रति मिनट तक घटा दिया था और कहा था कि इसे जनवरी, 2020 तक खत्म कर दिया जाएगा। अब ट्राई ने रिव्यू के लिए एक कंसल्टेशन पेपर मंगवाया है कि क्या इस टाइमलाइन को बढ़ाने की जरूरत है। चूंकि जियो नेटवर्क पर वॉइस कॉल फ्री हैं, इसलिए कंपनी को भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसे ऑपरेटर्स को किए गए कॉल्स के लिए 13,500 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा है।http://www.satyodaya.com

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नेहरू के कार्यकाल में ही स्थापित हुए देश के प्रमुख संस्थान: अजय कुमार ‘लल्लू’

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लखनऊ। राजधानी के आलीगंज स्थित साईं आश्रम में गुरुवार को बाल दिवस पर पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी  अध्यक्षता पूर्व पार्षद शैलेंद्र तिवारी बबलू और संचालन कमलाकर त्रिपाठी प्रदेश प्रवक्ता ने किया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, विधायक राष्ट्रीय प्रवक्ता कांग्रेस अखिलेश प्रताप सिंह मौजूद थे।

इस अवसर पर अजय कुमार लल्लू ने नेहरू को समावेशी संस्कृति का पोषक बताते हुए कहा कि आजादी के समय के कठिन दौर में जब संसाधन अत्यंत सीमित थे, उन परिस्थितियों में आईआईटी, आईआईएम, एम्स जैसे एकेडमिक संस्थानों की स्थापना, भेल, नाल्को, भिलाई और दुर्गापुर बोकारो स्टील प्लांट जैसे बड़े संयंत्रों की स्थापना, परमाणु आत्मनिर्भरता के दिशा में इसरो और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जैसे संस्थानों की स्थापना उनके युग दृष्टा होने की प्रामाणिक गवाह है। वहीं, वर्तमान सरकार सिर्फ उपक्रमों को बेच रही है लेकिन सृजन का कोई कार्य नहीं कर रही।

राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि देश दुर्भाग्यपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जिसमें कांग्रेस की सच्चाई पिछड़ गई है और नरेंद्र मोदी शासित भाजपा का झूठ लोगों के सर चढ़कर बोल रहा है। ऐसे में हम कांग्रेसजनों का दायित्व है के नेहरू द्वारा प्रतिपादित मिश्रित अर्थव्यवस्था से लेकर समाजवाद के पोषण तक की नीतियों को पुनर्स्थापित करें।

कमलाकर त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य में कहा कि पंडित नेहरू सही मायने में लोकतंत्र में विश्वास रखते थे। जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, जैन, बुध जैसे अनेक धर्म सहअस्तित्व में बिना किसी शंका और आशंका के रहते थे और देश की प्रगति में अपना योगदान देते थे। किसी को भी मॉब लिंचिंग का डर नहीं था। जो आज भीड़ तंत्र हावी है वह नेहरू के लोकतंत्र से एकदम अलग है। उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि देश नेहरू के समावेशी नेतृत्व और विजन से ही चल सकता है, विघटनकारी सोच से नहीं। उन्होंने कहा कि जो लोग स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के साथ थे वह आज देशभक्त होने का दावा कर रहे हैं और इनके झूठ और फरेब को बेनकाब करना कांग्रेसजनों का ही कार्य है।

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संगोष्ठी में वीरेंद्र मदान, ओंकार सिंह, चंद्रशेखर मिश्रा, विजेंद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। राकेश सिंह , विवेक भट्ट, पंकज तिवारी, हनुमान त्रिपाठी आशुतोष, शांतनु,  डॉक्टर उपरेती, आलोक रायकवार,  अमरनाथ अग्रवाल, श्याम तिवारी समेत कांग्रेसी कार्यकर्ती मौजूद रहे।  http://www.satyodaya.com

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इलाज नहीं संक्रमण बांट रहे प्रदेश के अस्पताल: अखिलेश यादव

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लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर प्रदेश की योगी सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि सूबे में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भाजपा सरकार की इसे लेकर लापरवाही घोर अमानवीयता की पराकाष्ठा है। लोग डेंगू से मर रहे हैं। मलेरिया का प्रकोप फिर बढ़ा है। टीबी के मरीज बढ़े हैं। अस्पतालों में इलाज की जगह मरीजों को तकलीफ और संक्रमण बंट रहा है। अव्यवस्था का ऐसा आलम है कि अब राज्य में सामान्य आदमी की जिंदगी हर दिन खतरे में रहती है।

अखिलेश ने कहा कि खुद मुख्यमंत्री गृह जनपद गोरखपुर में जापानी बुखार पर नियंत्रण नहीं पा सके। वहीं, डेंगू की बीमारी फैलने से दर्जनभर लोगों की मौंते हो गई। सहारनपुर में 5 मौते डेंगू से हो गई हैं। जिलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो में तो बुरी हालत है। न तो मरीजो की जांच की सुचारू व्यवस्था है और नहीं दवाएं मिल पाती है।

उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ में रोज ही किसी न किसी के डेंगू की बीमारी से मौत की खबरें आती हैं। यहां कई मौतें हो चुकी हैं। कई वरिष्ठ अधिकारी, नेता और छात्र भी डेंगू के शिकार हुए हैं। भाजपा की एक महिला नेत्री और छात्रा की कल ही मौत हुई। यहां डेंगू मरीजों की संख्या 1100 तक पहुंच चुकी है। कई अस्पतालों में डेंगू की जांच किट भी नहीं है। बलरामपुर अस्पताल में बुधवार को ही 3100 से ज्यादा बुखार के बीमार पहुंचे। सिविल, लोहिया, मेडिकल कालेज, में भी यही स्थिति है। वार्डों में मरीजों की भीड़ हैं। तमाम बीमारों को तो बिना इलाज वापस किया जा रहा हैं।

सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा सरकार को जनता की दिक्कतों की कोई फिक्र नहीं। सत्ता सुख में उन्हें जनता की बीमारियों से मौत से कोई संवेदना नहीं है। कानपुर नगर और ग्रामीण क्षेत्र में सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल डेंगू मरीजों से भरे हुए हैं। शासन के दबाव से डेंगू मरीजों की संख्या और मौतों की जानकारी नहीं दी जाती है फिर भी अनुमान है कि प्रतिदिन आधा दर्जन मरीज डेंगू से मर रहे हैं। बिल्हौर विधानसभा के पिहानी गांव में 5 हजार की आबादी में 16 लोगों की मौत हो चुकी है। 400-500 मरीज अस्पतालों में भर्ती है। कानपुर के बिठूर विधानसभा क्षेत्र में डेंगू बुखार से 20 लोगों की मौत होने, विधानसभा कल्याणपुर में 13 और विधानसभा महाराजपुर में 24 लोगों की मौते होने की खब़र है। शासन-प्रशासन का रवैया निहायत निंदा योग्य है। भाजपा सरकार इन मौतों के दायित्व से बच नहीं सकती है।

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अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार में एक रूपए के पर्चे पर गंभीर रोगों तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था थी। अस्पतालों को दवाओं का पर्याप्त बजट मिलता था। डाक्टर भी नियमित रूप से ओपीडी में बैठ रहे थे। उनकी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया था। भाजपा की सरकार बनते ही स्वास्थ्य क्षेत्र में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गरीब का इलाज मुश्किल है। अस्पतालों में वसूली की शिकायतें आने लगी हैं। जनता इस सबसे गहरे असंतोष और आक्रोश में हैं। खुद राज्यपाल की पिछले दिनों टिप्पणी थी कि प्रदेश के अस्पतालों में कमीशनबाजी चल रही है इससे बेफिक्र प्रदेश की भाजपा सरकार चेती नही, बल्कि पूरी स्वास्थ्य सेवाएं ही चौपट हो गयी।http://www.satyodaya.com

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सत्ता पर काबिज लोगों ने कश्मीरियों को दिया धोखा: एडवा

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लखनऊ। कश्मीर मुद्दे को लेकर एडवा ने कैसर बाग स्थित प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर कहा कि अब महिला संगठनों, जन संगठनों के प्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता कश्मीरी आवाम के खिलाफ सरकार द्वारा की गई धनात्मक कार्रवाई की सख्त निंदा करते हैं। एडवा के लोगों ने कहा कि आज कश्मीर के 100 दिन पूरे हो गए हैं। 5 अगस्त 2019 को केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार ने कश्मीरी आवाम को धोखा देते हुए उनके संवैधानिक अधिकारों और मानव अधिकारों का हनन किया है। जिसका हर हिंदुस्तानी संवेदनशील नागरिक सख्त विरोध करता है। भाजपा सरकार ने धारा 370 को निष्प्रभावी कर धारा 35a जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे से समाप्त कर संविधान में निहित संघीय व्यवस्था से छेड़छाड़ की है। साथ ही कश्मीरी आवाम के साथ विश्वासघात किया है।

वहीं RSS को निशाने पर लेते हुए एडवा के लोगों ने कहा कि आरएसएस विचारधारा से संचालित भाजपा की विचारधारा बहुसंख्यक बात पर भारत की एक अति केंद्रीयकृत संकल्पना पर टिकी रही है। इसलिए वे हर प्रकार से राज्य की स्वतयता के खिलाफ रहे हैं। कश्मीर घाटी मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण भी भाजपा के निशाने पर है। इनकी विचारधारा के अनुसार कश्मीर घाटी अपने धार्मिक गठन के कारण आतंकवाद का अड्डा है। भाजपा की सोच में कश्मीर सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा है। जो उनकी कल्पना के अंदर भारत का हिस्सा है। उन्हें कश्मीर चाहिए कश्मीरी नहीं। उनका राष्ट्रवाद जमीन के टुकड़े के लिए है, ना कि उस पर बसी जनता के लिए। उनकी नजरों में राष्ट्र जनगढ़ से नहीं बनता है, बल्कि राष्ट्र की सीमाओं और जमीन से ही बनता है।

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एडवा ने कहा कि आज कश्मीर ताले में बंद है, मीडिया को भी सेंसर कर दिया गया है। कश्मीर के दौरे सरकार द्वारा प्रायोजित कर भ्रम फैलाया जा रहा है, कि वहां सब अमन-चैन है। वहीं देश के सांसदों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को कश्मीर जाने से रोका जा रहा है। कश्मीर की बंदी के कारण अनुमानत 10,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है। जिसका शिकार वहां के मजदूर दस्तकार व छोटे व्यापारी हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के नौजवानों के लिए रोजगार के नए अवसर लाने का वादा किया था। इसके विपरीत आज वहां अधिक फौज तैनात करने का काम किया है, जो उन्हें कुचल रही है। महिलाएं युवा लड़कियां असुरक्षित है। युवा लड़कों को पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट के नाम पर गिरफ्तार कर जेल में डाला जा रहा है। सरकार का यह दमकारी कदम कश्मीरी आवाम के अंदर अलगावाद पैदा करेगा। वहीं एडवा के लोगों ने मांग की कि धारा 370 व 35a को बहाल किया जाए, जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया जाए, राजनैतिक कैदियों की अविलंब रिहाई हो, कश्मीर में तैनात फौज को दी गई विशेष पावर afpsa सेल को रद्द किया जाए, कश्मीर क्षेत्र में सामान्य जनजीवन सुनिश्चित किया जाए।http://www.satyodaya.com

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