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प्रियंका ने बताया आखिर क्यों छोड़ी ‘भारत’ …

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प्रियंका चोपड़ा ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपने दम पर एक खास मुकाम हासिल किया है। जिस तरह की फिल्मों का चयन वो करती हैं उसमें हमेशा एक चैलेंज होता है। उनके करियर ग्राफ को देखे तो इस बात का पता साफ तौर पर चलता है।

सलमान खान की फिल्म भारत के लिए पहली पसंद प्रियंका ही थी। यहां तक की उन्होंने ये फिल्म साईन भी कर ली थी लेकिन शूटिंग शुरू होने से ठीक 5 दिन पहले प्रियंका ने ये फिल्म छोड़ दी।देसी गर्ल के फिल्म छोड़ने के साथ अटकलों का बाजार तेज हो गया कि किस वजह से ये फिल्म छोड़ी है। सलमान खान भी फिल्म छोड़ने के लिए प्रियंका को अक्सर निशाना बनाते रहते है। हालांकि अब भारत रिलीज हो गयी है और बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा बिजनेस भी कर रही है।

इनसब के बीच प्रियंका ने हाल ही में ये खुलासा किया कि इस फिल्म को छोड़ने की असली वजह क्या थी। दरअसल प्रियंका सोनाली बोस की फिल्म स्काई इस पिंक कर रही हैं जिसकी कहानी दिल्ली की मोटिवेशनल स्पीकर आयशा चौधरी की रियल लाइफ से इंस्पायर्ड है। इस फिल्म की स्टोरी प्रियंका को ज्यादा पसंद आई जिसको करने के लिए उन्होंने भारत छोड़ दी। बकौल प्रियंका “मैं नाच गाने वाले रोल करने के बजाए एक ऐसा किरदार करना ज्यादा पसंद करूंगी जिसमे मेरे एक्टिंग स्किल को चैलेंज मिले”।

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बता दें कि सोनाली बोस के निर्देशन में बनने वाली ये फिल्म एक बायोपिक है जिसमें प्रियंका 18 साल की बच्ची की मां का रोल कर रही हैं। इस फिल्म में उनके साथ फरहान अख्तर और जायरा वसीम प्रमुख भूमिका में है। ये फिल्म 18 अक्टूबर को रिलीज होगी।http://www.satyodaya.com

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नेहरू के कार्यकाल में ही स्थापित हुए देश के प्रमुख संस्थान: अजय कुमार ‘लल्लू’

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लखनऊ। राजधानी के आलीगंज स्थित साईं आश्रम में गुरुवार को बाल दिवस पर पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी  अध्यक्षता पूर्व पार्षद शैलेंद्र तिवारी बबलू और संचालन कमलाकर त्रिपाठी प्रदेश प्रवक्ता ने किया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, विधायक राष्ट्रीय प्रवक्ता कांग्रेस अखिलेश प्रताप सिंह मौजूद थे।

इस अवसर पर अजय कुमार लल्लू ने नेहरू को समावेशी संस्कृति का पोषक बताते हुए कहा कि आजादी के समय के कठिन दौर में जब संसाधन अत्यंत सीमित थे, उन परिस्थितियों में आईआईटी, आईआईएम, एम्स जैसे एकेडमिक संस्थानों की स्थापना, भेल, नाल्को, भिलाई और दुर्गापुर बोकारो स्टील प्लांट जैसे बड़े संयंत्रों की स्थापना, परमाणु आत्मनिर्भरता के दिशा में इसरो और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जैसे संस्थानों की स्थापना उनके युग दृष्टा होने की प्रामाणिक गवाह है। वहीं, वर्तमान सरकार सिर्फ उपक्रमों को बेच रही है लेकिन सृजन का कोई कार्य नहीं कर रही।

राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि देश दुर्भाग्यपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जिसमें कांग्रेस की सच्चाई पिछड़ गई है और नरेंद्र मोदी शासित भाजपा का झूठ लोगों के सर चढ़कर बोल रहा है। ऐसे में हम कांग्रेसजनों का दायित्व है के नेहरू द्वारा प्रतिपादित मिश्रित अर्थव्यवस्था से लेकर समाजवाद के पोषण तक की नीतियों को पुनर्स्थापित करें।

कमलाकर त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य में कहा कि पंडित नेहरू सही मायने में लोकतंत्र में विश्वास रखते थे। जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, जैन, बुध जैसे अनेक धर्म सहअस्तित्व में बिना किसी शंका और आशंका के रहते थे और देश की प्रगति में अपना योगदान देते थे। किसी को भी मॉब लिंचिंग का डर नहीं था। जो आज भीड़ तंत्र हावी है वह नेहरू के लोकतंत्र से एकदम अलग है। उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि देश नेहरू के समावेशी नेतृत्व और विजन से ही चल सकता है, विघटनकारी सोच से नहीं। उन्होंने कहा कि जो लोग स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के साथ थे वह आज देशभक्त होने का दावा कर रहे हैं और इनके झूठ और फरेब को बेनकाब करना कांग्रेसजनों का ही कार्य है।

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संगोष्ठी में वीरेंद्र मदान, ओंकार सिंह, चंद्रशेखर मिश्रा, विजेंद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। राकेश सिंह , विवेक भट्ट, पंकज तिवारी, हनुमान त्रिपाठी आशुतोष, शांतनु,  डॉक्टर उपरेती, आलोक रायकवार,  अमरनाथ अग्रवाल, श्याम तिवारी समेत कांग्रेसी कार्यकर्ती मौजूद रहे।  http://www.satyodaya.com

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इलाज नहीं संक्रमण बांट रहे प्रदेश के अस्पताल: अखिलेश यादव

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लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर प्रदेश की योगी सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि सूबे में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भाजपा सरकार की इसे लेकर लापरवाही घोर अमानवीयता की पराकाष्ठा है। लोग डेंगू से मर रहे हैं। मलेरिया का प्रकोप फिर बढ़ा है। टीबी के मरीज बढ़े हैं। अस्पतालों में इलाज की जगह मरीजों को तकलीफ और संक्रमण बंट रहा है। अव्यवस्था का ऐसा आलम है कि अब राज्य में सामान्य आदमी की जिंदगी हर दिन खतरे में रहती है।

अखिलेश ने कहा कि खुद मुख्यमंत्री गृह जनपद गोरखपुर में जापानी बुखार पर नियंत्रण नहीं पा सके। वहीं, डेंगू की बीमारी फैलने से दर्जनभर लोगों की मौंते हो गई। सहारनपुर में 5 मौते डेंगू से हो गई हैं। जिलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो में तो बुरी हालत है। न तो मरीजो की जांच की सुचारू व्यवस्था है और नहीं दवाएं मिल पाती है।

उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ में रोज ही किसी न किसी के डेंगू की बीमारी से मौत की खबरें आती हैं। यहां कई मौतें हो चुकी हैं। कई वरिष्ठ अधिकारी, नेता और छात्र भी डेंगू के शिकार हुए हैं। भाजपा की एक महिला नेत्री और छात्रा की कल ही मौत हुई। यहां डेंगू मरीजों की संख्या 1100 तक पहुंच चुकी है। कई अस्पतालों में डेंगू की जांच किट भी नहीं है। बलरामपुर अस्पताल में बुधवार को ही 3100 से ज्यादा बुखार के बीमार पहुंचे। सिविल, लोहिया, मेडिकल कालेज, में भी यही स्थिति है। वार्डों में मरीजों की भीड़ हैं। तमाम बीमारों को तो बिना इलाज वापस किया जा रहा हैं।

सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा सरकार को जनता की दिक्कतों की कोई फिक्र नहीं। सत्ता सुख में उन्हें जनता की बीमारियों से मौत से कोई संवेदना नहीं है। कानपुर नगर और ग्रामीण क्षेत्र में सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल डेंगू मरीजों से भरे हुए हैं। शासन के दबाव से डेंगू मरीजों की संख्या और मौतों की जानकारी नहीं दी जाती है फिर भी अनुमान है कि प्रतिदिन आधा दर्जन मरीज डेंगू से मर रहे हैं। बिल्हौर विधानसभा के पिहानी गांव में 5 हजार की आबादी में 16 लोगों की मौत हो चुकी है। 400-500 मरीज अस्पतालों में भर्ती है। कानपुर के बिठूर विधानसभा क्षेत्र में डेंगू बुखार से 20 लोगों की मौत होने, विधानसभा कल्याणपुर में 13 और विधानसभा महाराजपुर में 24 लोगों की मौते होने की खब़र है। शासन-प्रशासन का रवैया निहायत निंदा योग्य है। भाजपा सरकार इन मौतों के दायित्व से बच नहीं सकती है।

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अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार में एक रूपए के पर्चे पर गंभीर रोगों तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था थी। अस्पतालों को दवाओं का पर्याप्त बजट मिलता था। डाक्टर भी नियमित रूप से ओपीडी में बैठ रहे थे। उनकी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया था। भाजपा की सरकार बनते ही स्वास्थ्य क्षेत्र में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गरीब का इलाज मुश्किल है। अस्पतालों में वसूली की शिकायतें आने लगी हैं। जनता इस सबसे गहरे असंतोष और आक्रोश में हैं। खुद राज्यपाल की पिछले दिनों टिप्पणी थी कि प्रदेश के अस्पतालों में कमीशनबाजी चल रही है इससे बेफिक्र प्रदेश की भाजपा सरकार चेती नही, बल्कि पूरी स्वास्थ्य सेवाएं ही चौपट हो गयी।http://www.satyodaya.com

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सत्ता पर काबिज लोगों ने कश्मीरियों को दिया धोखा: एडवा

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लखनऊ। कश्मीर मुद्दे को लेकर एडवा ने कैसर बाग स्थित प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर कहा कि अब महिला संगठनों, जन संगठनों के प्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता कश्मीरी आवाम के खिलाफ सरकार द्वारा की गई धनात्मक कार्रवाई की सख्त निंदा करते हैं। एडवा के लोगों ने कहा कि आज कश्मीर के 100 दिन पूरे हो गए हैं। 5 अगस्त 2019 को केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार ने कश्मीरी आवाम को धोखा देते हुए उनके संवैधानिक अधिकारों और मानव अधिकारों का हनन किया है। जिसका हर हिंदुस्तानी संवेदनशील नागरिक सख्त विरोध करता है। भाजपा सरकार ने धारा 370 को निष्प्रभावी कर धारा 35a जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे से समाप्त कर संविधान में निहित संघीय व्यवस्था से छेड़छाड़ की है। साथ ही कश्मीरी आवाम के साथ विश्वासघात किया है।

वहीं RSS को निशाने पर लेते हुए एडवा के लोगों ने कहा कि आरएसएस विचारधारा से संचालित भाजपा की विचारधारा बहुसंख्यक बात पर भारत की एक अति केंद्रीयकृत संकल्पना पर टिकी रही है। इसलिए वे हर प्रकार से राज्य की स्वतयता के खिलाफ रहे हैं। कश्मीर घाटी मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण भी भाजपा के निशाने पर है। इनकी विचारधारा के अनुसार कश्मीर घाटी अपने धार्मिक गठन के कारण आतंकवाद का अड्डा है। भाजपा की सोच में कश्मीर सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा है। जो उनकी कल्पना के अंदर भारत का हिस्सा है। उन्हें कश्मीर चाहिए कश्मीरी नहीं। उनका राष्ट्रवाद जमीन के टुकड़े के लिए है, ना कि उस पर बसी जनता के लिए। उनकी नजरों में राष्ट्र जनगढ़ से नहीं बनता है, बल्कि राष्ट्र की सीमाओं और जमीन से ही बनता है।

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एडवा ने कहा कि आज कश्मीर ताले में बंद है, मीडिया को भी सेंसर कर दिया गया है। कश्मीर के दौरे सरकार द्वारा प्रायोजित कर भ्रम फैलाया जा रहा है, कि वहां सब अमन-चैन है। वहीं देश के सांसदों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को कश्मीर जाने से रोका जा रहा है। कश्मीर की बंदी के कारण अनुमानत 10,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है। जिसका शिकार वहां के मजदूर दस्तकार व छोटे व्यापारी हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के नौजवानों के लिए रोजगार के नए अवसर लाने का वादा किया था। इसके विपरीत आज वहां अधिक फौज तैनात करने का काम किया है, जो उन्हें कुचल रही है। महिलाएं युवा लड़कियां असुरक्षित है। युवा लड़कों को पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट के नाम पर गिरफ्तार कर जेल में डाला जा रहा है। सरकार का यह दमकारी कदम कश्मीरी आवाम के अंदर अलगावाद पैदा करेगा। वहीं एडवा के लोगों ने मांग की कि धारा 370 व 35a को बहाल किया जाए, जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया जाए, राजनैतिक कैदियों की अविलंब रिहाई हो, कश्मीर में तैनात फौज को दी गई विशेष पावर afpsa सेल को रद्द किया जाए, कश्मीर क्षेत्र में सामान्य जनजीवन सुनिश्चित किया जाए।http://www.satyodaya.com

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November 16, 2019, 11:26 am
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