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प्रशासन की गलती का खामियाजा भुगत रहे राशनकार्ड धारक

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जब से राशनकार्ड ऑनलाइन करवाने का सिलसिला चला है तब से राशनकार्ड धारकों की मुसीबतें बढ़ गयी हैं। ज्यादातर लोगों का कहना था कि हमारे घर वालों के नाम काट दिए गए हैं। ऐसे लोग अपने कार्ड को सही करवाने के लिए जिला और क्षेत्रीय पूर्ति कार्यालयों के लगातार चक्कर लगा रहे हैं। अधिकतर कार्ड धारक पूर्ति विभाग की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं।

पीड़ितों का कहना है पहले हमको आसानी से राशन मिल जाया करता था। लेकिन जब से राशनकार्ड को ऑनलाइन करने का सिलसिला चला है तब से परेशानिया बढ़ गयी हैं। मेरे घर में पहले 8 यूनिट का कार्ड था जो कि अब सात लोगों के नाम काट दिए जाने के बाद सिर्फ एक यूनिट का रह गया है। जब हम कोटेदार के यहां राशन लेने के लिए जाते हैं तो वह बोलता है कि पहले राशनकार्ड सही करवा कर लाओ फिर हम राशन देंगे। साथ ही कहा मेरे साथ-साथ मेरे मोहल्ले के कई लोगों के नाम काट दिए हैं जिसके कारण लोग बहुत परेशान हैं। मेरे खुद के कार्ड में सभी लोगों के आधार पहले से ही लिंक थे उसके बावजूद भी सारे नाम काट दिए गए हैं और सिर्फ एक नाम ही बचा है। उधर कोटेदार हम लोगों को दो महीने से राशन नहीं दे रहा है। साथ ही कार्डधारकों ने कहा क्षेत्रीय खाद के ऑफिस आओ तो यहां भी सुनवाई नहीं होती है।

वहीं, जब क्षेत्रीय खाद अधिकारी संतोष कुमार से इस विषय पर बात की गई तो उनका कहना था कि राशनकार्ड में आधार कार्डो की फीडिंग कराई जा रही थी। फीडिंग के दौरान बहुत से कार्ड में डुप्लीकेसी दिखी जिसमें से कुछ गैर जनपद के थे, कुछ यहां के थे और जिन कार्ड धारकों के नाम डिलीट हो गए हैं और यदि वह हमारे पास आता है तो उनके आधार को लिंक कर के उनके नामों को जोड़ दिया जाता है। किन्तु सोचने वाली बात यह है कि यदि किसी के कार्ड में डुप्लीकेसी पायी जाती है तो वह पूरा कार्ड ही निरस्त किया जाना चाहिए था। किंतु उस कार्ड में से परिवार के मुखिया का नाम छोड़ कर बाकी पूरे घर के लोगों के नाम गायब कर देना कहां से सही है। ऑनलाइन सूची में कार्डधारकों के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं। कई कार्डों की यूनिट की कटौती कर दी गई है। इसके लिए किसकी जवाबदेही बनती है और इस बीच गरीबों को महीनों से जो राशन नहीं मिल पा रहा है उसके लिए कौन जिम्मेदार है।http://www.satyodaya.com

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Birthday Special : ये हैं इंडियन सिनेमा की पहली फीमेल कॉमेडियन, कुछ इस तरह बनी थीं उमा से टुनटुन

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11 जुलाई 1923 को उत्तर प्रदेश में जन्मी टुनटुन का असली नाम उमा देवी खत्री था। वो इंडियन सिनेमा की पहली फीमेल कॉमेडियन थीं। उनका जन्म मथुरा के पास एक गांव के पंजाबी परिवार में हुआ था। उन्होंने उन्होंने माता-पिता दोनों को खो दिया था।

उनकी परवरिश उनके भाई और चाचा ने की थी। बाद में घर से भागकर मुम्बई आ गईं। इन्होंने नौशाद अली से कहा था कि वो गा सकती हैं और अगर उन्होंने उन्हें काम नहीं दिया तो वो समंदर मे डूब कर जान दे देंगी। नौशाद ने इन्हें सुना और उसी समय इन्हें काम दे दिया। वर्ष 1947 में उन्हें पहली बार गाने का मौक़ा मिला। संगीत की कोई औपचारिक तालीम न होने पर भी उनकी आवाज़ में एक खास किस्म की मिठास थी। उनकी गायिकी पर नूरजहां और शमशाद बेगम का असर साफ नजर आता था। उनके गाए ‘अफ़साना लिख रही हूँ, दिले बेक़रार का…’ ने उन्हें शोहरत की नई बुलंदियों पर पहुंचाया।

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अफसाना लिख रही हूं, गीत गाने के दौरान मोहन नाम का एक युवक उमा का दीवाना हो गया। वो उनके लिए सब कुछ छोड़कर मुंबई चला आया। इसी बीच दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा और कुछ दिनों बाद उमा ने मोहन से शादी कर ली। इसके बाद वे अपनी शादीशुदा जिंदगी को संभालने में लग गईं। इस बीच हालात ऐसे हुए कि उन्हें फिल्मों में काम मिलना बंद हो गया। जब आर्थिक तंगी ज्यादा आयी तब वे फिर से नौशाद के पास पहुंचीं। तब नौशाद ने उनसे कहा कि अब तुम्हारा गला किसी काम का नहीं रहा, बेहतर होगा कि तुम एक्टिंग में हाथ आजमाओ, फिर उन्होंने एक्टिंग करने का फैसला किया और एक ऐसी कॉमिक एक्ट्रेस बनकर कामयाब हुई कि, वो जिस भी फिल्म में नजर आतीं लोगों को हंसा-हंसा कर लोट-पोट कर देतीं।

टुनटुन की पहली फिल्म ‘बाबुल’ थी और उसमें उनका नाम टुनटुन था। सबको उनका अभिनय इतना पसंद आया कि वो टुनटुन के नाम से मशहूर हो गईं। अपने फिल्मी करियर के दौरान इन्होंने लगभग 198 फिल्मों और उस समय के लगभग सभी प्रमुख हास्य अभिनेताओं जैसे धूमल,भगवान दादा,जानी वॉकर आदि के साथ काम किया।

सिंगिंग के फील्ड में तो उनका बहुत ज्यादा नाम नहीं हुआ, लेकिन बतौर कॉमेडियन उनकी कई फिल्में हिट रही और इंडियन सिनेमा की एक बेहतरीन कॉमेडियन के रूप में उनका नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है। 24 नवंबर 2003 को उनका मुंबई में निधन हो गया।

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व्यापार

SBI ने ब्याज दर में की कटौती, जानिए कितना सस्ता होगा होम लोन

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अगर आप स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्राहक हैं तो आपके लिए आज यानी 10 जुलाई से होम या ऑटो लोन लेना सस्‍ता हो गया है। एसबीआई के इस तोहफे का फायदा बैंक के 40 करोड़ से ज्‍यादा ग्राहक उठा सकते हैं।

स्टेट बैंक ने अपनी सभी अवधि के कर्ज पर सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (MCLR) में 0.05 फीसदी की कटौती की है। बैंक के इस फैसले के बाद 1 साल की अवधि के होम लोन पर न्यूनतम ब्याज दर 0.05 फीसदी घटकर 8.40 फीसदी हो गया है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आम बजट पेश होने के बाद वित्त मंत्री के साथ होने वाले पारंपरिक बैठक के मौके पर सोमवार को कहा था कि रेपो दर में एक के बाद एक तीन बार में 0.75 प्रतिशत कटौती किये जाने के बाद उन्हें बैंकों द्वारा इसका लाभ ग्राहकों तक जल्द पहुंचाये जाने की उम्मीद है।

मौद्रिक नीति की जून में हुई समीक्षा के बाद रेपो दर में 0.25 प्रतिशत कटौती होने पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कॉर्पोरेशन बैंक, ओरिएंटल बैंक और आईडीबीआई बैंक ने अपनी एमसीएलआर दर को 0.05 से 0.10 प्रतिशत तक कम किया है। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 5 से 9 अगस्त के बीच होगी।

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प्रदेश

Budget 2019: क्या रही उत्तर प्रदेश के व्यापारियों की राय?

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लखनऊ। मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट शुक्रवार को देश के सामने आ गया है। बजट के आते ही समाज के हर वर्ग से प्रतिक्रिया भी आना शुरू हो गई है। व्यापारियों ने भी बजट 2019 पर अपनी राय रखी है।

चौक सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश चन्द्र जैन ने गोल्ड पर बढ़े टैक्स को लेकर कहा कि 2.5 फीसद टैक्स बढ़ोतरी से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पढ़ने वाला है। लेकिन निश्चित तौर पर इससे कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, सरकार की भी अपनी मजबूरी है उसे गरीबों के लिये भी सुविधाएं मुहैया करवानी है इसलिये उसने टैक्स बढ़ा दिया है। वहीं, चौक सर्राफा एसोसिएशन के महामंत्री ने कहा कि टैक्स में वृद्धि का फैसला सही नहीं है। पहले 10 फीसद टैक्स लगता था लेकिन अब 12.5 फीसद लगेगा। बढ़े टैक्स की मार आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों पर भी पड़ेगी। दूसरी तरफ गोल्ड तस्करों को पहले से ज्यादा मुनाफा बनाने का मौका मिलेगा।

लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्रा ने कहा कि यह बजट देश की इकोनॉमी को 5 ट्रिलियन पर पहुंचाने का रोडमैप है। कई प्रावधान देश की आर्थिक स्थिति में नई स्फूर्ति भरने वाले हैं। व्यापरियों का भी सरकार ने ख्याल रखा है। सरकार ने जो 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी का लक्ष्य रखा है उसे साकार करने में व्यापारी अहम भूमिका निभाएंगे।

भाजपा व्यापार कोष्ठ के अध्यक्ष अभिषेक खरे ने इस बजट को देश की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने वाला करार दिया है। उनका कहना है कि सरकार ने हर वर्ग का ख्याल रखा है। व्यापारियों, किसानों, गरीबों सभी को इस बजट से काफी सहूलियत मिली है।

उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामों पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों से अन्य चीजों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। वस्तुओं की लागत बढ़ने से महंगाई की मार आम आदमी पर पड़ेगी। इसलिये सरकार को चाहिए कि तुरंत इस फैसले को वापस ले।

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July 11, 2019, 6:30 pm
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