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येदियुरप्पा ने ‘हाथ तो आया मगर मुंह ना लगा’ वाली कहावत फिर से दोहराई, अपना ही रिकार्ड तोड़ दिया

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एक फिल्म आई थी नायक, फिल्म में नयी बात ये थी कि अनिल कपूर को एक दिन का मुख्यमंत्री दिखाया गया था। सबसे पहले आम लोगों के जहाँ में यही सवाल उठ रहा था कि क्या सच में कोई एक दिन का मुख्यमंत्री बन सकता है। खैर वो फिल्म की बात थी, और फिल में नायक का एक दिन के मुख्यमंत्री बनने के पीछे का मकसद भी नेक था। लेकिन यहाँ राजनीति है। एक बार जो कुर्सी से चिपका उसका फिर उठने का मन नहीं करता। ऐसे में अगर किसी को एक दिन के लिए ही ये कुर्सी नसीब हो तो कुर्सी छोड़ने में बहुत तकलीफ होती है। ऐसी ही तकलीफ झेली कर्नाटक के “पूर्व” मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने शनिवार 19 मई को कर्नाटक विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का अपना ही रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को 19 मई शाम चार बजे राज्य विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना था, लेकिन इसकी नौबत ही नहीं आई। अगर येदियुरप्पा सदन के पटल पर बहुमत साबित कर देते, तो वे अपना ही पुराना खराब रिकॉर्ड तोड़ने से बच जाते, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

इससे पहले 2004 के विधानसभा में भी जब बीजेपी कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, तब पार्टी सरकार नहीं बना पाई थी। बाद में 2007 में जोड़तोड़ कर बीजेपी का जेडीएस के साथ गठबंधन हो गया था। लेकिन येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के सात दिन के भीतर जेडीएस ने अपना समर्थन वापस ले लिया और येदियुरप्पा सरकार गिर गई। आज यानी शनिवार, 19 मई को येदियुरप्पा फ्लोर टेस्ट से पहले ही हारकर सात दिन के बजाय ढाई दिन के मुख्यमंत्री बनकर रह गए। इस तरह उन्होंने अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।

वैसे येदियुरप्पा ने भले ही अपना रिकार्ड तोडा हो किन्तु वो जगदंबिका पाल का रिकार्ड नहीं तोड़ पाए हैं। बीजेपी में सबसे कम दिनों तक मुख्यमंत्री रहने वाले जगदंबिका पाल भी मौजूद हैं। कभी कांग्रेस नेता रहे पाल इस समय डुमरियागंज से बीजेपी सांसद हैं। उत्तर प्रदेश में ऐसे ही सियासी उठापटक के बीच वे रातभर के लिए मुख्यमंत्री बन गए थे। दरअसल उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने 21 फरवरी 1998 को तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया था। उसके बाद पाल को मुख्यमंत्री बना दिया गया था। 23 फरवरी को हाइकोर्ट ने कल्याण सिंह सरकार बहाल कर दी। हालांकि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल को अदालत ने शून्य माना, इसलिए उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री नहीं माना जाता है।

इस बार 12 मई को हुए विधानसभा चुनाव में 104 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जबकि कांग्रेस के पास 78 और जनता दल (सेकुलर) ने 37 सीटें जीती हैं। इसके अलावा दो सीटें निर्दलीयों के पास और एक सीट बसपा के पास है। http://www.satyodaya.com

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बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है, सोशल मीडिया…

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लखनऊ। कोविड-19 महामारी ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। कोविड-19 महामारी  के दौरान हुए लॉकडाउन में बच्चों की पढ़ाई लिखाई खेलकूद सभी कुछ काफी हद तक प्रभावित हुआ है। बच्चों को जिन चीजों में रूचि थी। उनसे वह कोसों दूर नजर आए, इन्हीं चीजों को ध्यान में रखते हुए मैक्स डिजिटल अकैडमी ने कोविड-19 महामारी के दौरान बच्चों की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें भापते हुए एक सोशल मीडिया बूट कैंप शुरू किया है। 

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मैक्स डिजिटल अकैडमी के प्रबंधक श्री अनुराग रॉय  बताते हैं, कि हमने बच्चों की जरूरतों को और उनकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए एक सोशल मीडिया बूट कैंप स्टार्ट किया है। जिसमें हम बच्चों को लाइव इनट्रैक्टिव सेशन के द्वारा हर संभव मदद करने की कोशिश करते हैं। जूम पर रेगुलर क्लासेस बच्चों के मनोरंजन पढ़ाई से लेकर सभी चीजों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। किसी भी प्रकार की दिक्कत आने पर तुरंत एनीडेक्स पर ले जाकर उसे हम दूर कर रहे हैं। सभी बच्चों को जरूरत पड़ने पर हम क्लासेस भी प्रोवाइड कर रहे हैं। उन्होने यह भी बताया, कि हम मैक्स डिजिटल अकैडमी में कई प्रकार के सोशल मीडिया व डिजिटल मीडिया के कोर्स कराते हैं। जिनमें एडवांस डुअल सर्टिफिकेशन इन डिजिटल मार्केटिंग, सर्टिफिकेट इन सोशल मीडिया मार्केटिंग, सर्टिफिकेट इन वेब डिजाइनिंग एंड एसईओ जैसे कई और कोर्स कराते हैं। हम ज्यादा से ज्यादा बच्चों को डिजिटल माध्यम से जोड़कर यूपी गवर्नमेंट मोदी जी के डिजिटल अभियान में जोड़ना चाहते हैं। हम सभी जानते हैं, कि आज के दौर में सोशल मीडिया, डिजिटल माध्यम कितना ज्यादा जरूरी है। हम नहीं चाहते, कि भारत का कोई भी बच्चा डिजिटल व सोशल मीडिया से जरा सा भी दूर रहे हम आगे भी ऐसे ही कई प्रोग्राम बच्चों के लिए शुरू करते रहेंगे।http://satyodaya.com

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रिलायंस ने पेश की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप “जियोमीट”, जानिए जूम को कैसे देगी टक्कर

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40 मिनट से अधिक की बैठक के लिए मासिक शुल्क देना होगा 15 डॉलर

लखनऊ। अब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जूम को टक्कर देने की तैयारी कर ली है। फेसबुक और इन्टेल जैसी कंपनियों को अपने डिजिटल कारोबार में हिस्सेदारी बेचकर अरबों डॉलर जुटाने के बाद मुकेश अंबानी की कंपनी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग बाजार में रिलायंस जियो ने ‘जियोमीट’ के नाम से नया ऐप उतारा है । जिसमें मेजबान समेत 100 लोग एक साथ असीमित समय तक फ्री वीडियो कांफ्रेंसिंग कर सकेंगे।

रिलायंस के इस कदम को प्रतिद्वंद्वी जूम के साथ ‘कीमत युद्ध’ के रूप में देखा जा रहा है। बीटा परीक्षण के बाद जियोमीट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप एंड्रॉयड, आईओएस, विंडोज, मैकओएस और वेब पर बृहस्पतिवार शाम से उपलब्ध ’है। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार जियोमीट पर एचडी ऑडियो और वीडियो कॉल की गुणवत्ता मिलेगी। इसमें एक साथ 100 लोगों को जोड़ा जा सकता है। यहां तक की जियोमीट में वीडियो कांफ्रेंसिंग की कोई समय सीमा तय नही की गई है जबकि जूम ऐप पर फ्री वीडियो कॉलिंग के लिए मात्र 40 मिनट की अवधि होती है।

इसमें स्क्रीन साझा करने, पहले से बैठक का समय तय करने और अन्य फीचर्स है। खास बात यह है कि इसमें जूम की तरह 40 मिनट की समयसीमा नहीं है। कंपनी ने दावा किया कि इसमें कॉल्स 24 घंटे तक जारी रखी जा सकती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक ‘कूटलेखन’ और पासवर्ड से संरक्षित रहेगी।

कंपनी के सूत्रों ने कहा कि जूम पर 40 मिनट से अधिक की बैठक के लिए मासिक शुल्क 15 डॉलर है। सालाना आधार पर यह 180 डॉलर बैठेगा। वहीं जियोमीट इससे अधिक सुविधा मुफ्त में उपलब्ध करा रही है। इससे जूम बैठक आयोजित करने वाले को जियोमीट का इस्तेमाल करने पर सालाना 13,500 रुपये की बचत होगी।

गूगल प्ले स्टोर पर इस ऐप के कई फीचर्स की जानकारी दी गई है। इसके अनुसार जियोमीट के लिए मोबाइल नंबर या ई-मेल आईडी के जरिये आसानी से ‘साइन अप’ किया जा सकता है। इसमें तुरंत बैठक आयोजित की जा सकती है। एचडी ऑडियो और वीडियों गुणवत्ता वाली बैठक का समय पहले से तय किया जा सकता और बैठक में भाग लेने वाले लोगों को इसकी जानकारी दी जा सकती है।

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जियोमीट के जरिये एक दिन में कितनी भी बैठकें आयोजित की जा सकती हैं और कोई भी बैठक बिना किसी बाधा के 24 घंटे चल सकती है। प्रत्येक बैठक पासवर्ड से संरक्षित है। बैठक आयोजित करने वाला व्यक्ति ‘वेटिंग रूम’ की सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है। इससे कोई भी भागीदार बैठक में बिना अनुमति शामिल नहीं हो सकता। इसमें ग्रुप बनाने की अनुमति है। सिर्फ एक क्लिक पर कॉलिंग या चैटिंग की जा सकती है। गूगल प्ले स्टोर और आईओएस पर इस ऐप के पांच लाख डाउनलोड पहले ही हो चुके हैं।

यह ऐप ऐसे समय पेश की गई है जबकि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता पर खतरे के मद्देनजर चीन से संबंधित 59 ऐप पर रोक लगाई है। इनमें टिकटॉक भी शामिल है। कंपनी सूत्रों ने कहा कि जियोमीट में समय की कोई सीमा नहीं होने की वजह से शिक्षकों को अपनी ऑनलाइन कक्षाओं को छोटा करने की जरूरत नहीं होगी। इस ऐप के जरिये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार तथा सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। http://www.satyodaya.com

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पड़ोसी को फंसाने के लिए उसकी दुकान में रखा था तमंचा व गांजा, चार युवक गिरफ्तार

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार स्थित पटेलपुरम इलाके में दुकानदार को असलहे और गांजे में फसाने वाले गैंग के लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक पकडे गए पुलिस के मुखबिर समेत 4 लोगों के पास से 3 तमंचे, 700 ग्राम गांजा भी बरामद हुआ है। गोमतीनगर विस्तार थाना क्षेत्र के पटेलपुरम स्थित लक्ष्मी मार्केट में षड्यंत्र में दुकानदार को फंसाने वाले 4 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

एडिशनल डीसीपी अमित कुमार के मुताबिक क्षेत्र में मिठाई की दुकान चलाने वाले रणजीत यादव ने पड़ोसी दुकानदार यासीन को फंसाने के लिए उसकी दुकान में तमंचे व गांजा से भरा बैग रख दिया और पुलिस को सूचना दे दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने यासीन समेत अन्य दुकानदार को हिरासत में लिया। लेकिन एक सीसीटीवी की फुटेज ने सारी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। सीसीटीवी देखने पर पता चला कि मामला यासीन को फंसाने का था। जिसके बाद गैंग का खुलासा हुआ।

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पुलिस ने इस मामले में मुखबिर रणजीत कश्यप समेत राजकुमार कश्यप, विवेक शुक्ला और अभिषेक मिश्रा को गिरफ्तार किया है। मामले में वांछित अभियुक्त दुकानदार रंजीत यादव और अशोक यादव अभी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। पुलिस ने इनके पास से 315 बोर के 2 तमंचे और 720 ग्राम गांजा भी बरामद किया है।http://www.satyodaya.com

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