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एटीएस कमांडो ने संदिग्ध परिस्थितियों में गोली मारकर किया सुसाइड

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लखनऊ। राजधानी में आए दिन पुलिसकर्मी आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन अभी तक पुलिसकर्मियों की संदिग्ध मौत पर आलाधिकारियों द्वारा आत्महत्या का जिक्र कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ऐसा ही एक ताजा मामला फिर सामने आया है जिसमें एटीएस मुख्यालय में तैनात कमांडो बृजेश ने मुख्यालय के सरकारी बैरिक में लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वहीं बताया जा रहा है कि मृतक कमांडो को आज सुबह अपने घर गोरखपुर के लिए भी निकलना था लेकिन उससे पहले ही उसने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा है कि मृतक की बीती रात उसकी पत्नी से फोन पर बातचीत हो रही थी और उसी बीच दोनों में काफी कहासुनी हुई थी। वहीं हर मामलों की तरह इस बार भी अधिकारियों का कहना है कि पारिवारिक कलह के चलते उसने सुसाइड किया है।

आपको बता दें कि 29 मई 2018 को भी उत्तर प्रदेश पुलिस के पीपीएस अधिकारी और उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपी एटीएस) में अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर तैनात खुशमिजाज राजेश साहनी ने अज्ञात कारणों से अपने कार्यालय में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। गोली चलने की आवाज सुनकर एटीएस कार्यालय में तैनात कर्मचारी कमरे की तरफ दौड़े तो लेकिन उनको किसी ने भी हॉस्पिटल नहीं पहुंचाया। वहीं अधिकारियों ने बताया है की उनको खून से लथपथ और तड़पते देख फौरन अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी मौत हो गई। फिलहाल राजेश साहनी के आत्महत्या करने के कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया है। जबकि पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सरकारी पिस्टल कब्जे में भी ले ली थी। जिसके बाद से ही मौत पर सवाल उठने लगे और इस मामले की जांच की मांग भी की गई थी। उसके बाद से इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

इस बार भी एक एटीएस कमांडो बृजेश की संदिग्ध परिस्थितियों में अपने बैरिक में सुसाइड करने का मामला सामने है। साथ ही हर बार की तरह इस बार भी पुलिस मामले की जांच कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का भी इंतिजार करने की बात कर रही है। लेकिन देखने वाली बात तो होती है ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी उसकी जांच नहीं होती केवल उस रिपोर्ट पर धूल जमती है। इससे जाहिर होता है कि कहीं न कहीं इन सभी आत्महत्याओं के पीछे अधिकारियों का प्रेशर तो नहीं है? जिसके कारण आए दिन कोई न कोई पुलिसकर्मी आत्महत्या कर रहा है। लेकिन अभी तक किसी भी पुलिसकर्मी के आत्महत्या करने का खुलासा नहीं हो पाया है।http://www.satyodaya.com

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Birthday Special: ये हैं बेगम अख्तर की टॉप-5 गजलें

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नई दिल्ली। गजल की मल्लिका कहें या महान गायिका… खलिश उर्दू का उच्चारण करने वाली बेगम अख्तर दादरा और ठुमरी की साम्राज्ञी थीं। आज उनकी जयंती है। उनके गीतों-गजलों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। लेकिन आज हम उनकी जिंदगी से जुड़े ऐसे रोचक पहलुओं के बारे में आपको बताएंगे जिनके बारे में पहले आपने नहीं सुना होगा ।

बेगम अख्तर का जन्म सात अक्टूबर 1914 उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ था। बेगम अख्तर के बचपन का नाम बिब्बी था। वो फैजाबाद के शादीशुदा वकील असगर हुसैन और उनकी दूसरी पत्नी मुश्तरीबाई की बेटी थीं।

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वह बचपन से ही गायिका बनना चाहती थीं लेकिन उनके परिवार वाले उनकी इस इच्छा के सख्त खिलाफ थे। हालांकि उनके चाचा ने उनके शौक को आगे बढ़ाया।

कुलीन परिवार से ताल्लुक रखने वाली अख्तरी बाई को संगीत से पहला प्यार सात साल की उम्र में थियेटर अभिनेत्री चंदा का गाना सुनकर हुआ। उस जमाने के विख्यात संगीत उस्ताद अता मुहम्मद खान, अब्दुल वाहिद खान और पटियाला घराने के उस्ताद झंडे खान से उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत की दीक्षा दिलाई गई।

बेगम अख्तर, गालिब, फैज अहमद फैज, जिगर मुरादाबादी, शकील बदायुनी और कैफी आजमी की लेखनी से काफी प्रभावित थीं। वे अधिकतर समय तो अपने गाने खुद कंपोज करती थीं और क्लासिकल राग पर बनाती थीं। बेगम अख्तर को अपनी शादी के बाद कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा। उनके पति ने बेगम अख्तर के गाने पर रोक लगा दी, वे इस दौरान 5 सालों तक गाना नहीं गा पाईं। मगर संगीत से उनका रिश्ता हमेशा से बहुत गहरा था। अपने करियर के अंतिम दिनों में जब वे बीमार चल रही थीं तो डॉक्टर्स ने भी उन्हें गाने से मना कर दिया था। मगर इसके बाद भी उन्होंने परफॉर्मेंस दी थी।

30 अक्टूबर, 1974 को उनका निधन हो गया। उन्हें कई तरह के पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री और पद्मभूषण भी शामिल हैं।http://www.satyodaya.com

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केजीएमयू में चेक से नहीं होगा लेन देन, फर्जीवाड़े के बाद वित्त नियंत्रक ने लिया फैसला

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लखनऊ। केजीएमयू में अब कोई भी लेन देन चेक से नहीं किया जाएगा। इसके लिए आरटीजीएस या फिर नेफ्ट से लेन देन होगा। यह फैसला केजीएमयू के बैंक खाते से दो करोड़ 60 लाख रुपए निकालने की कोशिश के बाद वित्त नियंत्रक ने लिया है।

बता दें कि राजधानी में इन दिनों बड़े-बड़े संस्थानों से चेक का क्लोन बनाकर करोड़ों रूपए निकालने की घटनाएं तेज हो गई हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में एक करोड़ रुपए निकाल लिए गए। ठीक उसी तर्ज पर केजीएमयू के बैंक खाते से भी दो करोड़ 60 लाख रुपए निकालने की कोशिश हुई है। हालांकि बैंक की सूझबूझ से चेक किलयर नहीं हो पाया।

केजीएमयू में मिले क्लोन चेक में पूर्व के अफसरों के हस्ताक्षर थे। वहीं मामले का संज्ञान में आते ही केजीएमयू प्रशासन ने जांच शुरू कर दिया है। केजीएमयू परिसर में ही इलाहाबाद बैंक की शाखा में खाता है। इस बैंक के खाते में एक अक्टूबर को आईसीआईसीआई बैंक का एक चेक लगाया गया। इस चेक में दो करोड़ 60 लाख रुपए अंकित थे। इस चेक पर केजीएमयू के पूर्व के वित्त नियंत्रक मुकुल अग्रवाल और वरिष्ठ एकाउंटेंट आरपी व्यास का हस्ताक्षर था। बैंक के अफसरों को पता था कि दोनों अफसर अब नहीं हैं।

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तत्काल बैंक ने चेक रोककर मामले की पूरी जानकारी केजीएमयू प्रशासन को दी। साथ ही इलाहाबाद बैंक के शाखा प्रबंधक को भी जानकारी दी गई। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई कि जिस नंबर का चेक भुगतान के लिए लगाया गया है। चेक नंबर का अगस्त में ही भुगतान हो चुका था। वह अगस्त में जारी किया जा चुका था। मामला पकड़ में आते ही भुगतान रोक दिया गया। इस मामले में आईसीआईसीआई बैंक की ओर से कार्रवाई होनी है। अभी बैंक और केजीएमयू प्रशासन भी अपने स्तर से जांच कर रहा है।

इस बारे में केजीएमयू के वित्त नियंत्रक मो. जमा का कहना है कि अब कोई भी लेन देन चेक से नहीं किया जाएगा। लेन देन आरटीजीएस या फिर नेफ्ट से होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जो मामला प्रकाश में आया है उस मामले की जांच की जा रही है। http://www.satyodaya.com

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बुके नहीं ‘बुक’ से स्वागत करना श्रेष्ठ है, उपहार में लोगों को दें किताबें

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लखनऊ। राणा प्रताप मार्ग मोतीमहल वाटिका लाॅन में 20 सितम्बर से जारी हुआ राष्ट्रीय पुस्तक मेला तीन दिन आगे बढ़ गया है। औपचारिक समापन समारोह में गांधी जयंती तक मेला बढ़ाये जाने की घोषणा होते ही पुस्तक प्रेमियों के चेहरे खिल उठे हैं। उमड़ते-घुमड़ते मेघों के बीच मेले में आज बराबर कार्यक्रम चले और इस लुत्फ भरे मौसम में पुस्तक प्रेमियों ने अपनी पसंदीदा पुस्तक को भी खरीदा। रायबरेली से आये पुस्तक प्रेमी राजेश विक्रम ने बताया कि वर्षा के बावजूद वे मेले में तीन बार आए और करीब 38 सौ की किताबें खरीदीं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज चुनिंदा प्रकाशकों, प्रमुख सहयोगियों को यहां आयोजन समिति की ओर से सम्मानित किया गया।

इससे पहले उपाध्याय गुप्ति सागर मुनि की दो पुस्तकों ‘365 अच्छे काम’ व ‘सफलता के दस कदम’ का लोकार्पण हुआ। संयोजन मनोज सिंह चंदेल ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि जिला प्रशासन की अनुमति और मेले में आए प्रकाशकों के सहयोग के बाद पुस्तक मेला आगे बढ़ा है और अब यह मेला दो अक्टूबर तक यहां जारी रहेगा। मेले के दसवें दिन आज छ्ट्टी होने के नाते बहुत अधिक भीड़ रही। नेत्र परीक्षण शिविर में भी बड़ी तादाद में आगंतुकों ने आंखे टेस्ट कराईं।

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बिन्दु जैन के संचालन में चले समारोह में मण्डलायुक्त मुकेश कुमार मेश्राम ने किताबों का महत्व बताने के साथ आयोजन को सराहते हुए कहा कि अब बुके नहीं ‘बुक’ से ही स्वागत करना श्रेष्ठ है। साथ ही कहा उपहार में भी लोगों को किताबें दें। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. भट्ट ने कहा कि हर पुस्तक हमें कुछ न कुछ प्रेरणा देती है। संरक्षक मुरलीधर आहूजा ने कहा कि किताबें हमें कठिन समय में राह सुझाती है। प्रमुख सहयोगियों में किरन फाउण्डेशन के विशाल श्रीवास्तव, ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन के राजवीर रतन, रचनाकार डाॅ.अमिता दुबे, लोक नृत्यांगना ज्योति किरन रतन इत्यादि को सम्मानित किया गया।

मुख्य साहित्यिक मंच पर स्नेह वेलफेयर फाउण्डेशन की ओर से वरिष्ठ साहित्यकारों इतिहासविद् योगेश प्रवीन, रत्ना बापुली रत्ना, डाॅ. अमिता आदि कई रचनाकारों को स्मृतिचिह्न व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में स्नेहलता की पुस्तक कस्तूरबा गांधी का विमोचन हुआ। बच्चों की गीत-संगीत व नृत्य प्रस्तुतियांे से गुलजार रहा। संयोजक ज्योति किरन रतन के संयोजन में हुई प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण किया गया तो ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन व लोक आंगन के सौजन्य से हुई लोकनृत्य कार्यशाला के प्रशिक्षकों लक्ष्मी जोशी, सुबोध पाण्डेय, रेखा सिंह व लोक संस्कृति शोध संस्थान के प्रतिनिधियों को कला वसुधा पत्रिका, कुछ पुस्तकें व पौधे प्रदान किये गये।

वहीं आज की शाम कथक के नाम भी रही। गुरु अर्जुन मिश्र, अनुज मिश्र व सुरभि सिंह की शिष्याओं ईशा रतन-मीशा रतन ने ताण्डव से सजी शिव स्तुति और तराने पर दर्शनीय कथक युगल रूप में प्रस्तुत किया। यहां मंच विजेता बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। इसके साथ ही अनेक बच्चों ने यहां गीत, संगीत व नृत्य की मोहक प्रस्तुतियां दीं। मेले के निदेशन आकर्ष चंदेल ने बताया कि अगले तीन दिनों में स्थगित हुए कार्यक्रमों को आयोजित करने के प्रयत्न के साथ अन्य कार्यक्रमों को भी आयोजित किया जायेगा।http://www.satyodaya.com

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