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Breaking News : मौसम के यू टर्न से बारिश ने बढ़ाई ठंड, ओले भी गिरे

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लखनऊ। प्रदेश में शुक्रवार को कई जगह मौसम ने करवट ली और आसमान में घने बादल छाये रहने की वजह से सुबह के समय शाम जैसा नजारा हो गया। राजधानी सहित कई शहरों में बारिश हुई, वहीं कई जगह ओले गिरे। मौसम विभाग ने इस माह के अन्त तक ऐसा ही मौसम रहने की सम्भावना जताई है। राजधानी लखनऊ में शुक्रवार सुबह मौसम का मिजाज बदला नजर आया। इसके बाद दोपहर होते-होते आसमान में बादल छाने लगे और फिर झमाझम बारिश होने लगी। कई जगह बारिश के साथ ओले भी गिरे हैं। वैसे लखनऊ के मौसम का मिजाज पिछले तीन दिन से बदला था। हवा के चलने के कारण ठण्ड में बढ़ोत्तरी पहले ही हो गयी थी। वहीं शुक्रवार को हुई बारिश के बाद ठण्ड में और इजाफा हो गया है। इसी तरह कानपुर, कानपुर देहात, हमीरपुर, फतेहपुर, औरैया, उन्नाव सहित कई अन्य जनपदों में भी बारिश हुई। बुन्देलखण्ड में बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई।

इससे किसान फसलों को काफी नुकसान पहुंचने की बात कह रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में भी इस आसमान में बादल छाए रहेंगे और बारिश की सम्भावना है। सर्द हवाओं की वजह से पारा गिर सकता है। पहाड़ी इलाकों में बने पश्चिमी विक्षोभ का असर मैदानी इलाकों में भी हो रहा है। वहीं कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरमेश सिंह ​चौहान ने बताया कि यह बारिश गेहूं के साथ—साथ विशेषकर अरहर,गन्ना, मटर, मसूर और सरसों की फसल के लिए बहुत ही फायदेमंद है। डॉ. चौहान ने कहा कि इस बार सर्दी भी कम पड़ी है। बारिश के बाद ठण्ड में भी इजाफा होगा जो गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद साबित होगा। वहीं चिकित्सकों के मुताबिक श्वास रोगियों के लिए यह मौसम घातक साबित हो सकता है। इसलिए श्वास रोगी इन दिनों खास एहतियात बरतें। लखनऊ नगर निगम ने अपने सभी रैन बसेरों में मजदूरों को ठण्ड से बचाव के लिए अलाव जलाने के लिए पहले से ही लकड़ी की व्यवस्था की है। वहीं शहर के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में पहले से ही रात में अलाव जलाने के लिए लकड़ी का इंतजाम किया गया है। 

वहीं लखनऊ में ओले गिरे हैं। ओले गिरने के कारण रबी के फसलों को थोड़ा बहुत नुकसान हो सकता है, पौधे टूट सकते हैं। हालांकि, ओला गिरने से किसानों को कितना नुकसान हुआ है इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आ पाई है। दिल्ली से सटे राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कई क्षेत्रों में भी बारिश हुई है। जबकि हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और खूबसूरत मनाली व डलहौजी में बर्फबारी का नजारा देखने को मिला। बर्फबारी के कारण पर्यटकों के बीच खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। बारिश के कारण फुटपाथों पर रह रहे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ठंड में बढ़ोतरी के कारण लोगों को आग का सहारा लेना पड़ रहा है। मौसम खराब होने के कारण कुछ ट्रेनें देरे से चल रही है।https://satyodaya.com

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मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड माहौल खराब करने का कर रहा कामः वसीम रिजवी

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राममंदिर

लखनऊ। अयोध्या फैसला आने के बाद से जहां आये दिन मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के सदस्य बैठक कर रहे हैं। साथ ही प्रेस काॅन्फ्रेंस कर रामजन्म भूमि पर रिव्यू पेटिशन डालने की बात कर रहे हैं। तो वहीं आज इस मामले पर वसीम रिजवी का बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड रामजन्म भूमि मामले पर दोबारा रिव्यू पेटिशन डालने की बात कह कर माहौल को खराब करने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा है देश में था अच्छा माहौल था जो खराब करने का काम किया जा रहा है। वसीम रिजवी ने हिंदुस्तान में आपसी भाईचारा और मिलजुल कर रहने की अपील की है।

यह भी पढ़ें :- कांग्रेसी दिग्गजों ने कहा, हमारा निष्कासन असंवैधानिक, दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण

बता दें कि रामजन्म भूमि मामले में फैसला आने के बाद आज सोमवार को वसीम रिजवी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश का मौहाल खराब किया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद, रिव्यू पेटिशन की बात करके लाॅ बोर्ड माहौल को खराब करने का काम कर रहा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फैसले को मुस्लिमों के खिलाफ और रिव्यू पेटिशन में जाने की बात कही है। उन्होंने कहा दूसरे धार्मिक स्थलों के लिए जो आवाजे बन्द थीं, अब वो भी उठेंगी। भाजपा नेता विनय कटियार ने मथुरा और काशी की बात अब उठाई है। अब और लोग भी ऐसी बातें करते नजर आएंगे। उनका कहना है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रिव्यू पेटिशन में जाने से अब और धार्मिक स्थलों की बात उठेंगी और इन सबके लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जिम्मेदार है।http://www.satyodaya.com

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#MaharashtraCrisis : #SupremeCourt ने किया फैसला सुरक्षित, कल सुबह 10:30 बजे आ सकता है फैसला

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नयी दिल्ली। महाराष्ट्र में सरकार गठन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गया है। आपको बता दें कि कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी जल्द बहुमत परीक्षण की मांग किया। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एन वी रमन, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने किया। महाराष्ट्र की सियासत पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चली। महाराष्ट्र संकट पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब कल सुबह 10:30 बजे फैसला सुनाया जा सकता है।

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेने को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। अदालत में राज्यपाल का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अजित पवार का पूर्व एएसजी मनिंदर सिंह, देवेंद्र फडणवीस का मुकुल रोहतगी, कांग्रेस-एनसीपी का अभिषेक मनु सिंघवी और शिवसेना का कपिल सिब्बल पक्ष रख रहे हैं। राज्यपाल की तरफ से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को सरकार बनाने के लिए दी गई समर्थन वाली चिट्ठी को सौंपा। जिसके अनुसार नवनियुक्त सरकार को 170 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। पढ़िए कोर्ट में क्या-क्या हुआ…

ये भी पढ़े : पेट्रोल के दामों में फिर आई उछाल, जानिए आज की कीमत….

  • महाराष्ट्र संकट पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब कल सुबह 10:30 बजे फैसला सुनाया जा सकता है।
  • सिंघवी ने कहा कि फौरन प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति हो। मेरे पास एनसीपी के 48 विधायकों का समर्थन है। सदन में जल्दी शक्ति परीक्षण होना चाहिए।
  • अदालत ने कहा कि अब बहुमत परीक्षण को लेकर बात हो।
  • एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से अदालत में पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि दोनों पक्ष बहुमत परीक्षण के लिए तैयार हैं।
  • सिब्बल ने कहा कि पूरी कार्रवाई शक के घेरे में है। उस आपातकाल का अदालत में खुलासा करें। पोटेम स्पीकर बनाकर तुरंत बहुमत परीक्षण हो।
  • सिब्बल ने कहा कि राज्यपाल ने किसके कहने पर राष्ट्रपति शासन हटाया? बहुमत परीक्षण से आपत्ति क्यों? कैबिनेट ने कब राष्ट्रपति शासन हटाने की मंजूरी दी? सदन में तुरंत बहुमत परीक्षण कराया जाना चाहिए।
  • शिवसेना की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पूछा कि ऐसा क्या राष्ट्रीय आपातकाल था कि राष्ट्रपति शासन को सुबह 5.17 पर निरस्त करके सुबह 8 बजे शपथ दिलाई गई? राष्ट्रपति शासन को सुबह 5.17 बजे हटाया गया जिसका मतलब है कि 5.17 से पहले सब कुछ हुआ।
  • मनिंदर सिंह ने कहा कि यदि बाद में कोई स्थिति बनी है तो इसे राज्यपाल देखेंगे। इसे उनके ऊपर छोड़ा जाए। अदालत इसमें दखल क्यों दे।
  • मनिंदर सिंहने कहा कि जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई है वो कानूनी तौर पर सही है। फिर विवाद क्यों?
  • अदालत में अजित पवार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि मैं ही एनसीपी हूं। जी हां, मैं ही एनसीपी हूं। (इस पर अदालत परिसर में हंसी गूंजी उठी) विधायक मेरे साथ हैं। जैसे भी हो इस मामले का हल निकले। विधायक करें या फिर अदालत तय करे।
  • तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि इन्हें चिंता है कि विधायक भाग जाएंगे। इन्होंने अभी किसी तरह उन्हें पकड़ा हुआ है। विधानसभा की कार्रवाई कैसे चलेगी? अदालत को इसमें हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।
  • राज्यपाल को बहुमत परीक्षण के लिए समयसीमा तय करने को नहीं कहा जा सकता। यह राज्यपाल का विवेकाधिकार है। उनके कदम को दुर्भावना से प्रेरित नहीं कहा जा सकता।
  • रोहतगी ने कहा कि विधानसभा में मत विभाजन होगा, लेकिन राज्यपाल पर आरोप क्यों? उन्होंने भी बहुमत परीक्षम के लिए कहा है। बहुमत परीक्षण कब होगा इसे तय करने का अधिकार राज्यपाल के पास है।
  • रोहतगी ने पूछा कि क्या अदालत विधानसभा के एजेंडे को तय कर सकता है?
  • अदालत ने कहा कि कई मामलों में 24 घंटों में मत विभाजन का आदेश दिया गया है।
  • रोहतगी ने कहा कि आज बहुमत परीक्षण नहीं होना चाहिए।
  • रोहतगी ने कहा कि बहुमत परीक्षण कराना स्पीकर का काम है। एक दिन हो या दस दिन बहुमत परीक्षण तो एक दिन होनी ही है।
  • रोहतगी ने कहा कि अजीत पवार ने चिट्ठी में कहा है कि हमारे पास 54 विधायक हैं और हम भाजपा को समर्थन दे रहे हैं। इसलिए हम चाहते है कि देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ के लिए बुलाया जाए।
  • रोहतगी ने बताया कि अजित पवार ने 53 विधायकों के समर्थन वाले पत्र दिखाए। उन्होंने कर्नाटक केस से इसकी तुलना किए जाने पर विरोध जताया। रोहतगी ने कहा कि यहां एनसीपी का एक पवार हमारे पास है तो दूसरा विरोध में है। जिनके पारिवारिक झगड़े से हमे कोई लेना देना नहीं है। यहां संवैधानिक पहलू भी शामिल हैं। हम पर खरीद फरोख्त के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। विपक्ष अब पक्के तौर पर विधायकों के दस्तखत को फर्जी कहेगा।
  • मुकुल रोहतगी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का पक्ष रखते हुए कहा कि जो हमारा दोस्त था वह दुश्मन बन गया। उन्होंने कहा कि जब अजित पवार ने फडणवीस से कहा कि मेरे पास 53 विधायकों का समर्थन है और मैं विधायक दल का नेता हूं तब उन्होंने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा किया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि वो चिठ्ठी कहां है जिसमें राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनने का न्योता दिया था।
  • राज्यपाल को सौंपी गई समर्थन की चिठ्ठियों को पढ़ते हुए तुषार मेहता ने कहा कि अलग-अलग चिठ्ठियों में भाजपा के 105 और एनसीपी के 54 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। इसके अलावा निर्दलीय विधायकों के समर्थन वाली भी एक चिठ्ठी है।
  • तुषार मेहता ने कहा कि सभी विधायकों के नाम लिस्ट में है। अजित पवार ने चिठ्ठी में लिखा है कि मैं ही विधानमंडल दल के नेता हूं।
  • तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल का काम समर्थन पत्र की जांच करना नहीं है, बल्कि उन्होंने उसी पर भाजपा और अजित पवार को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। इन चिठ्ठियों के मुताबिक फडणवीस को 170 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
  • तुषार मेहता ने राज्यपाल को मराठी में लिखी गई समर्थन वाली चिट्ठी को अदालत में पेश किया। जिसपर अदालत ने कहा कि इसका अंग्रेजी अनुवाद कहां है? इसके बाद तुषार मेहता ने अंग्रेजी वाली चिट्ठी अदालत को सौंपी।
  • तुषार मेहता ने विधायकों के समर्थन की चिट्ठी अदालत में पेश की। उन्होंने कहा कि इसी चिट्ठी के आधार पर राज्यपाल ने शपथ दिलाई।
  • सभी के मना करने के बाद राज्यपाल ने फैसला लिया। क्या अनुच्छेद 32 की याचिका में राज्यपाल के आदेश को इस तरह से चुनौती दी जा सकती है या नहीं? राज्यपाल को पता था कि चुनाव पूर्व का एक गठबंधन जीता है।
  • तुषार मेहता ने कहा कि विपक्ष ने आजतक सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है।
  • मेहता ने राज्यपाल के संवैधानिक शक्तियों का हवाला दिया। राज्यपाल ने कई दिनों तक इंतजार किया। उसके बाद उन्होंने भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। भाजपा के इनकार के बाद शिवसेना को सरकार बनाने के लिए बुलाया, लेकिन उसने भी इनकार करते हुए और समय मांगा। राज्यपाल ने तीसरी बड़ी पार्टी एनसीपी को सरकार बनाने को कहा, लेकिन उसने भी वही बात दोहराई। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
  • तुषार मेहता ने दलील पेश करते हुए कहा कि राज्यपाल को शिवसेना और भाजपा के चुनाव पूर्व गठबंधन की जानकारी थी।
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्यपाल को मिली समर्थन की सभी चिठ्ठियां अदालत को सौंप दी है।

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प्रदेश के सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क भी हैः अखिलेश यादव

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सपा कार्यकाल की सड़कों को भाजपा ने बर्बाद किया

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह कहना मुश्किल है कि प्रदेश में सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क भी है। उन्होंने कहा कि सड़कों की दुर्दशा के कारण रोजाना राजधानी सहित तमाम जनपदों में हजारों मौत होती रहती है। रोज तमाम लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल होते हैं। समाजवादी सरकार ने गुणवत्ता के साथ सड़कें बनवाई थी और उनको गड्ढा मुक्त कराया था, इस सबको भाजपा के सत्ता काल में बर्बाद कर दिया गया है।

अखिलेश ने कहा कि कैसी विडम्बना है कि भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री और लोकनिर्माण मंत्री के सुर अलग-अलग निकलते हैं। लोक निर्माण मंत्री सड़कों को गड्ढा मुक्त कर देने के दावेदार हैं। लेकिन मुख्यमंत्री को लगातार बार-बार गड्ढों से सड़कों को मुक्त करने का आदेश देना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं पिछले दिनों अपनी सड़क यात्रा में सड़कों की दुर्दशा के स्वयं भुक्त भोगी रह चुके हैं। अब उन्होंने 30 नवम्बर 2019 तक सड़कों में सुधार का आदेश दिया है।

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पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा सरकार का आधे से ज्यादा समय बीत चुका है, अब उसको दो वर्ष से कम समय सत्ता में रहने के लिए मिलेगा। एक लम्बे कार्यावधि में भाजपा का प्रदर्शन निहायत घटिया और स्तरहीन रहा है। ऐसा लगता है कि लोकनिर्माण विभाग में मंत्री का आदेश नहीं चलता है या फिर मंत्री को लगातार गलत सूचनाएं देकर भ्रमित किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री का तो पता नहीं पर मुख्यमंत्री को सड़क पर चलने का जो अवसर मिला उसमें लगे हिचकोलों से उन्हें जरूर अंदाज हो गया कि हकीकत क्या है और फसाना क्या है?

उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसी शानदार सड़क बनी जिस पर वायुसेना का युद्धक और मालवाहक जहाज भी उतर चुका है। गाजियाबाद में एलीवेटेड सड़क बनाने का काम भी समाजवादी सरकार में हुआ है। राज्य भर में चारलेन सड़कों का जाल बिछाया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास गिनाने को कुछ भी नहीं है। वे बस समाजवादी सरकार के कामों को ही अपना बताने का झूठ बोलते चले जाएंगे।http://www.satyodaya.com

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November 26, 2019, 10:53 am
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