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सातवें चरण का चुनाव होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी वेंकटेश्वर लू ने की प्रेस वाता

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लखनऊ। 2019 लोकसभा चुनाव के सातवें अंतिम चरण में कुल 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहे थे जिस पर मुक्ता प्रधानमंत्री की संसदीय क्षेत्र वाराणसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ कहे जाने वाले गोरखपुर जैसे क्षेत्रों पर जिन पर कुल 57 प्रतिशत मतदान हुआ है। जिसको लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी वेंकटेश्वर लू ने प्रेस वार्ता करके जानकारी दी और साथ में उत्तर प्रदेश के लॉ एंड ऑर्डर प्रवीण कुमार भी रहे। वहीं उन्होंने चुनाव आयोग की पूरी टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया और चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मीडिया को इस लोकसभा चुनाव का अभिन्न हिस्सा भी बताया।

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वहीं मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि सातवें और आखिरी चरण में प्रदेश के कई जगहों पर 2019 लोकसभा उनमें जो मतदान प्रतिशत रहा था उससे इस बार का प्रतिशत बढ़ कर के आया है जिसकी खुशी पूरे निर्वाचन आयोग में है। आगे उन्होंने चंदौली में चुनाव से पहले उंगली में स्याही लगाने के मामले पर बताया कि कुछ लोगों के खिलाफ मामले पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे विधिक कार्यवाही भी चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि चंदौली में विधायक का साधना सिंह का वायरल वीडियो होने के बाद 2 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है।

वहीं एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रवीण कुमार ने बताया कि प्रदेश में दिन पर अपराधिक गतिविधियां वह मुकदमा पहले से डरते थे उन पर पुलिस प्रशासन पैनी नजर रखे हुए था और उनको रेड कार्ड भी जारी किया गया था जिसके चलते प्रदेश में और बेहतर और शांतिपूर्ण ढंग से मतदान रहा। http://www.satyodaya.com

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एयरपोर्ट पर चेन्नई फ्लाइट में बम की सूचना से मचा हड़कम्प

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लखनऊ। राजधानी के सरोजनीनगर स्थित चौधरी चरण सिंह अमौसी एयरपोर्ट पर बम होने की सूचना से हड़कंप मच गया। पीयूष वर्मा नामक यात्री ने चेन्नई जा रही इंडिगो फ्लाइट में बम होने की सूचना दी। जिसके बाद मौके पर एयरपोर्ट अधिकारी और पुलिस पहुंच गई। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी किया साथ ही अधिकारी पीयूष से भी पूछताछ करने में जुटे रहे।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बताया कि पीयूष वर्मा नाम के पैसेंजर को 6E447 द्वारा दिल्ली की यात्रा करनी थी। फ्लाइट के उड़ान का समय रात के 10:40 का था। लेकिन गेट नं- 5 के पास ड्यूटी पर तैनात सीआईएसएफ की टीम को पीयूष वर्मा का व्यवहार कुछ आसामान्य लगा। पूछताछ के दौरान पीयूष ने बताया कि चेन्नई जा रही इंडिगो की फ्लाइट में बम है। जैसे ही ये सूचना मिली हड़कंप मच गया।

सीआईएसएफ की टीम ने तुरंत सभी संबंधित एजेंसियों को सतर्क कर दिया। एयरपोर्ट डायरेक्टर, सीनियर कमांडेंट, बॉम्ब डिटेक्शन एंड डिस्पोजल टीम (BDDS), सीआईएसएफ के डॉग स्कॉड और सीआईएसएफ की क्विक रिएक्शन टीम, सीओ कृष्णानगर, इंस्पेक्टर सरोजनीनगर एयरपोर्ट पहुंचे। चेन्नई जा रही फ्लाइट की उड़ान को रोक दिया गया और जांच की जाने लगी।

वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन करने के साथ ही काफी जांच करने के बाद एयरपोर्ट पर चेन्नई फ्लाइट में बम मिलने की सूचना फर्जी निकली। जिसके बाद से ही चेन्नई जाने वाले यात्री पीयूष वर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही सूचना देने वाले पीयूष वर्मा के खिलाफ तहरीर मिलने पर सरोजनीनगर पुलिस आगे की कार्रवाई भी करने में जुट गई है। वहीं पूरी जांच करने के बाद ही चेन्नई की फ्लाइट को उड़ान भरने की मंजूरी मिल गई और वह कुछ देर बाद ही उड़ान भर्ती बनी।http://www.satyodaya.com

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उत्तर प्रदेश के सात अस्पतालों पर करोड़ों जुर्माने की सिफारिश

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अनुश्रवण समिति ने एनजीटी को भेजी रिपोर्ट

लखनऊ। एनजीटी की अनुश्रवण समिति ने बायो मेडिकल वेस्ट के खुले में निस्तारण, अवैध निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के रूप में मिली कमियों पर आजमगढ़ के पांच और मऊ के दो अस्पतालों समेत आजमगढ़ विकास प्राधिकरण और नगरपालिका आजमगढ़ पर लगभग 25.79 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही समिति ने और जुर्माने को बढ़ाने की चेतावनी दी है।

एनजीटी द्वारा गठित पूर्वी यूपी की नदियों और जलाशयों की अनुश्रवण समिति में शामिल देवी प्रसाद सिंह पूर्व न्यायाधीश अध्यक्ष, राजेंद्र सिंह पूर्व न्यायाधीश सचिव, ने अन्य अधिकारियों के साथ 31 मई और एक जून 2019 को आजमगढ़ और मऊ का निरीक्षण किया था। समिति में शामिल सदस्य राजेश सिंह के मुताबिक इस दौरान मुख्य रूप से तमसा के किनारे हुए अवैध निर्माण, कूड़ा निस्तारण और बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को फोकस किया गया था। टीम ने प्राधिकरण को तीन माह के भीतर तमसा नदी के 75 मीटर के दायरे में हुए निर्माण के हटाने, पालिका को कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था करने, नालों को टैप करने तथा तमसा नदी के किनारे से कूड़े को हटाने के निर्देश दिए थे।

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स्वास्थ्य विभाग को भी चेतावनी दी गई थी और बलरामपुर स्थित ओशोधरा अस्पताल को सीज कर दिया गया था। निरीक्षण के दौरान मिली कमियों पर समिति ने अब आजमगढ़ के पांच और मऊ के दो अस्पतालों के साथ ही आजमगढ़ विकास प्राधिकरण और नगरपालिका पर जुर्माना लगाया है। आजमगढ़ के जिला महिला अस्पताल, मंडलीय पुरुष अस्पताल, रहमान अस्पताल, ओशोधरा अस्पताल, वेदांता हाॅस्पिटल, मऊ जनपद के जिला अस्पताल मऊ पर प्रति अस्पताल 3.46 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। मऊ के फातिमा अस्पताल पर 1.15 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है।

इस प्रकार कुल सात अस्पतालों पर 21.96 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। वहीं आजमगढ़ विकास प्राधिकरण पर 2.73 करोड़, नगर पालिका पर 1.09 करोड़ समेत कुल 25.79 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा आजमगढ़ विकास प्राधिकरण और नगरपालिका प्रशासन को तमसा नदी के 50 मीटर परिधि में हुए अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यह समय सीमा एक नवंबर से शुरू हो जाएगी। अगर निर्माण नहीं हटाया गया तो पांच लाख रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दोनों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही नगरपालिका को छह माह के भीतर तमसा नदी में गिरने वाले सीधे नालों के ट्रीटमेंट की व्यवस्था करनी होगी। समिति ने अपने आदेश में कहा है कि आगे भी समिति की ओर से जनपद का निरीक्षण किया जाएगा। यदि मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो आगे भी जुर्माना लगाया जाएगा।

महेसरा ताल और चिलुआताल के जमीन पर अवैध कब्जा

एनजीटी की अनुश्रवण समिति ने सतर्क करते हुए कहा है कि गोरखपुर के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित महेसरा ताल और चिलुआताल के जमीन पर कब्जा हो रहा है। उसका कहना है कि सबसे खराब स्थिति महेसरा ताल की है। यह ताल सूखता जा रहा है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) द्वारा गठित ईस्टन यूपी रीवर्स एंड वॉटर रिजर्वायर मानीटरिंग कमेटी के सचिव पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में जांच टीम ने एसटीपी, चिलुआताल, जटाशंकर पोखरा, सूरजकुंड, राप्ती नदी व सरैया डिस्टिलरी, सरदारनगर का इसी वर्ष अगस्त में निरीक्षण किया था। कमेटी ने एनजीटी को रिपोर्ट सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं।

जांच टीम में सीपीसीबी (सेंट्रल पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड) व यूपीपीसीबी (उत्तर प्रदेश पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड) के प्रतिनिधि भी शामिल थे। हाईपावर कमेटी का मानना है कि महेसरा ताल को पूरी तरह से घरों से निकल रहे कचरे (म्यूनिसिपल सालिड वेस्ट) का डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। इस ताल में हजारों टन कचरा फेंका गया है। इस कचरें के कारण ताल का एक हिस्सा सूख रहा है। ताल के दूसरे तरफ तेजी से अवैध भवनों का निर्माण हो रहा है। चिलुआताल के वेट लैंड पर भी बड़े भवनों का निर्माण हो रहा है। इन भवनों के निर्माण के लिए किसी विभाग ने एनओसी तक नहीं जारी की है।

एनजीटी की हाई पावर कमेटी का भी जिला प्रशासन के अधिकारियों पर जोर नहीं चला है। कमेटी ने चिलुआताल और महेसरा ताल को लेकर जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी और यह आज तक नहीं मिली। इसका उल्लेख कमेटी ने एनजीटी को भेजी गई सिफारिशों में किया है। कमेटी ने सूबे के रिमोट सेंसिंग अप्लीकेशन सेंटर से ताल का सेटेलाइट मैप बनाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही कमेटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन से दोनों तालों का राजस्व क्षेत्र निर्धारण कर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।http://www.satyodaya.com

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मुख्तार अंसारी के बेटे पर दर्ज हुआ एक ही लाइसेंस पर कई असलहे खरीदने का मुकदमा

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लखनऊ। राजधानी के महानगर थाना में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी पर धोखाधड़ी और आर्म्स ऐक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ है। जिसमें बताया गया है कि उसके द्वारा एक ही लाइसेंस पर कई असलहे खरीदने का मामला सामने आया है। बता दें कि कुछ दिनों से लखनऊ पुलिस इस मामले में हीलाहवाली कर रही थी जिसके बाद ही आखिरकार पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

महानगर पुलिस द्वारा बताया गया कि शस्त्र एवं कारतूस के सत्यापन को लेकर दारोगा इमरान खाँ द्वारा एक बीट सूचना थाना महानगर पर दर्ज करायी गयी है। जिसके आधार पर जांच की गयी तो पाया गया कि शस्त्र धारक अब्बास अन्सारी पुत्र मुख्तार अंसारी मैट्रो सिटी पेपर मिल कम्पाउण्ड निशातगंज थाना महानगर लखनऊ निवासी जो मूलरूप से यूसुफपुर दर्जी टोला थाना मोहम्मदाबाद जनपद गाजीपुर के निवासी हैं। जिन्होंने एक ही नाम से डीबीबीएल लाइसेंस वर्ष-2002 जिलाधिकारी लखनऊ द्वारा स्वीकृत किया गया था। उक्त लाइसेंस को शस्त्र धारक अब्बास अंसारी द्वार अपने दिल्ली के पते पर स्थानान्तरित कराया गया। जिसका लाइसेंस तथा यूआईडी नम्बर तथा दिल्ली के शस्त लाइसेंस नम्बर पर शस्त्र धारक द्वारा विख्यात निशानेबाज होने के आधार पर अनेक शस्त्र खरीदना दर्शाया गया है।

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वहीं पुलिस ने आगे बताया है शस्त्र धारक द्वारा लाइसेंस नई दिल्ली स्थान्तरित करा लिया गया है। परन्तु लखनऊ पुलिस या महानगर थाने पर कोई सूचना पूर्व में प्राप्त नहीं करायी गयी। जिसके कारण एक ही शस्त्र दो प्रदेशों में पंजीकृत कर अलग-अलग शस्त्र लाइसेंस व अलग-अलग अंकित होना प्रतीत होता है। जिसको देखते हुए शस्त्र धारक द्वारा धोखाधड़ी कर आवश्यक तथ्य छुपाये जाने व शस्त्र का अवैधनिक प्रयोग करने की मंशा को प्रदर्शित करता है। जिसके आधार पर थाना महानगर पर धारा 420 में मुकदमा दर्ज किया गया है और आगे की वैद्यानिक कार्रवाई की जा रही है।http://www.satyodaya.com

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October 13, 2019, 3:21 am
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