Connect with us

Featured

विभूति खंड थाने के नवनिर्माण इमारत का डीजीपी ने किया उद्घाटन

Published

on

लखनऊ। #विभूतिखंड थाने के नवनिर्माण थाने का यूपी के डीजीपी ओपी सिंह के द्वारा उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर एसएसपी कलानिधि नैथानी समेत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। आपको बता दें की विभूतिखंड थाने की नई इमारत लगभग 4000 वर्ग फिट में बनाया गया है और ये उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे भव्य थाना है इसके निर्माण में लगभग 2 साल का समय भी लगा है।

#नव निर्माण थाने का उद्घाटन करने पहुंचे डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि वे शुक्रगुजार हैं कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार के सहयोग से विभूतिखंड थाने के भव्य इमारत का निर्माण संभव हुआ है। इस अवसर पर डीजीपी ने कहा कि इस खूबसूरत इमारत की तरह हम सभी पुलिस वालों को अपने आचरण को ही खूबसूरत और जनता के प्रति नरम बनाना होगा। डीजीपी ने हिदायत देते हुए कहा कि हमें अपने आचरण को बेहतर बनाने की और उसमें लगातार सुधार करने की आवश्यकता है जिससे कि हम आम जनता से ज्यादा से ज्यादा जुड़ सकें और उनका भरोसा हम पर बना रहे हैं। वहीं डीजीपी ओपी सिंह ने इस अवसर पर बताया कि इस वर्ष पुलिस का बजट 1800 करोड़ से बढ़कर 2400 करोड़ हो गया है। सरकार के द्वारा पुलिस विभाग के लिए यह कदम बहुत ही सराहनीय है।

यह भी पढ़ें :- प्रदर्शन के दौरान पुलिस अभ्यर्थियों ने खाया जहरीला पदार्थ…

आपको बता दें कि नवनिर्माण विभूतिखंड थाने में हेल्पडेस्क के साथ ही महिलाओं की सुनवाई के लिए अलग से कक्ष तथा इमारत के अंदर बहुत बड़े हाॅल और साथ ही मनोरंजन के लिए टेबल, टेनिस, शतरंज जिम, जैसी तमाम सुविधाएं भी दी गई हैं। इस थाने के अंदर वह सभी सुविधाएं हैं जिसकी एक पुलिसकर्मी अपेक्षा करता है और साथ ही साथ इन सुविधाओं का लाभ यहां आने वाली आम जनता को भी मिलेगा। वहीं इस अवसर पर एसएसपी कलानिधि नैथानी ने राजधानी के सभी पुलिस कर्मियों को अपना कर्तव्य संपूर्ण ईमानदारी से करने की और जनता के प्रति अच्छे आचरण पेश करने की हिदायत दिया और साथ ही उन्होंने डीजेपी ओपी सिंह समेत तमाम लोगों का धन्यवाद प्रकट किया है।http://www.satyodaya.com

Featured

उफ्फ…ये गरीब की बीवी भी न!!!

Published

on

अनूप मणि त्रिपाठी

हे महा कट्टर प्रकृति प्रेमी ! आप खूब घूमें, लुत्फ उठाएं, पहाड़ों को रौंद कर समतल बनाएं, समुंदर को उलीचें और खाली करें, आसमान सर पर उठाएं या खोद दें, सुषमा के सौरभ बनें या भौरा बन भुनभुनाएं, दंतावलियों ओर-छोर तक फैलाते जाएं, हाथ लहरा शुतुरमुर्ग की तरह दौड़ लगाएं, भांति-भांति के स्वांग रचें या कुलांचे भरें और तो और यात्रा वृतांत के नाम पे अपनी हैसियत के कसीदे गढ़ें…सब…सब कुबूल है, पर आप से एक निवेदन है…करबद्ध निवेदन… आप ये फोटो पे फोटो, फोटो पे फोटो, फोटो पे फोटो न दिखाएं! आपने एक झटके में इतनी फोटोज दिखा दीं, इतनी तो मेरे शादी की एलबम में भी नहीं! फोटो दर फोटो तिस पर वीडियो का भी तांडव! दिखाएं मगर इतनी नहीं कि सांसें फूल जाएं और आंखें ही फूट जाएं! आप कह सकते हैं कि देखना हो देखो नहीं तो फूट लो! देखने को कौन कहता है! जी बिल्कुल सही! इसलिए तो मैं आपसे उलाहना की जगह अनुरोध कर रहा हूं! आप नहीं जानते, आपकी फोटोज की वजह से मेरे घर में कलह का माहौल है। आप उधर लहालोट हैं और इधर मैं घर में घरवाली से लोहा ले रहा हूं! आप दुनिया के कोने-कोने में घूम रहे और इधर मुझे छुपने के लिए कोई कोना नहीं मिल रहा! आप ठंडे में चैड़े से घूम रहे और हमारे घर का तापमान गरम से गरमतर होता जा रहा। अब मैं आप से क्या कहूं कि मेरे घर का तापमान ज्यादा है या बाहर का! मेरी घरवाली ‘वे’ की तर्ज पर ताने देती है कि सारी दुनिया घूम रही है, मगर एक तुम हो घर में हमें कैद किये हो! वो मुझे घरघुस्सू कह रही है। जब वो ताने नहीं दे रही होती, तब वो भृकुटि ताने रहती है। और मैं बेचारा किसी पर्यटक स्थल-सा सहमा-सहमा रहता हूं, जैसे सीजन आने पर वह सहमा रहता है! सही पूछो तो आपकी मस्ती की कीमत प्रकृति से ज्यादा मैं चुका रहा हूं! आप उधर घूम रहे हो, मासूम धरती घूम रही है, इसके आलवा अगर इन दिनों और कुछ घूम रहा है, वो है घरवाली के ताने खा-खा कर मेरा सर…

हे नवाचारी हाहाकारी ! मैं आप की मजबूरी समझता हूं। जंगल में मोर नाचा किसने देखा! वैसे भी ये दुनिया दिखावे पे ही मरती है। मोहल्ले वाले दुल्हन बाद में दहेज की कार पहले देखते हैं! आज ’स्किल’ नहीं ’स्किन’ देखा जाता है! रोड से ज्यादा रोड शो देखा जाता है! विचार से पहले स्टेट्स आता है! नैतिकता से पहले जीत आती है! ऐसे में, आप गलत नहीं हो! जिस प्रकार से मेरी घरवाली गलत नहीं है। न मैं आप को दोष देता हूं, न अपनी घरवाली को! पर मेरी हालत को भी तो समझिए! मेरे हाल को भी जानिए! घरवाली को शांत करने की तरह-तरह की तरकीबें भिड़ाता हूं! उसे बहुत मुश्किल से बहलाता हूं, घूमाने के नाम पे बाजार जा कर गोलगप्पे खिलाता हूं, कुछ दिन के भीतर हमारे यहां शांति का आगमन होता ही है कि कोई न कोई फिर अपनी ’गर्मियों की छुट्टी पर की गई मस्ती’ ’फिलिंग जॉयफुल’ कहकर फोटो की अनन्त श्रृंखला चेंप देता है और फिर देखते ही देखते मेरी शांति के दुर्ग में सेंध लग जाती है और मैं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित ठगा-सा रह जाता हूं! देखते ही देखते शादी के पहले की बात निकलती है और सात जन्म तक पहुंच जाती है! ’भाग्य फूटे’ से लेकर ’मैं जियूं या मरूं, तुम्हें क्या फर्क पड़ता है!’ उसकी मार की जद में मेरी मां और बाबूजी भी आ जाते हैं। यद्यापि मां पर विशेष फोकस रहता है! जैसे ही वो भाग्य फूटे पर आती है, मैं तुरन्त समझ जाता हूं कि मेरे फूटने का समय आ गया है! मगर उस वक्त भागना उसके कोप का और भाजन बनाता, लिहाजा ‘अरे बाबा’ तुम समझती नहीं हो’ जल्द ही कहीं चलेंगे’ जैसे सांत्वना वाले वाक्य मुझे भजना पड़ता है! वो मुझे किन-किन, कैसे-कैसे उपमाओं से सुशोभित करती है, ये मैं बता नहीं सकता! बस आप ये समझ लें कि कल तक गोलगप्पे खिलाने वाला ये पतिपरमेश्वर आज गोल-गोल बातें कर के गरल पिलाने वाला गप्पी है!

हे मस्ती में डूबे आकंठ प्राणी! आप खाए-पीए, अघाए लोग हैं, जबकि हम जैसे घबराए हुए लोग हैं। आप जब अपनी मौज-मस्ती में डूबी हुई फोटो अपलोड करते हैं न, तब मेरा दिल बैठने लगता है, क्योंकि वह भारी होने लगता है। यह आशंका लोड लेने लगती है कि कहीं आप के इस अतिउत्साही कृत्य से मेरी जेब न हल्की हो जाए! यधपि हम जैसे मध्यवर्गीय आदमी की जेब कब भारी होती है, यह सोचने का अलग विषय है! यहां सर से लेकर पांव भारी होता है, मगर जेब का भारी होना किसी विरल घटना से कम नहीं! अभी आपके इस नवीनतम कृत्य से मेरे घर में क्या हुआ! जानते हैं! जानना चाहेंगे! सुनिए इस सुदामा की कहानी…
अभी-अभी मेरी घर वाली ने आप की एक फोटो दिखाई है, जिसमें आप युगल जोड़ी किसी हसीं वादी में खोए हुए हैं। जब वह तस्वीर दिखा रही होती है, तो मैं उसे देखता हूं, वह दासी की तरह दीख रही होती है, जो एक बलात् उबासी-उदासी की वादी में सदा के लिए कैद है! मेरी घरवाली के लिए घूमना कोई स्टेटस सिंबल या फोटो वाला मामला नहीं है! यह तो थोड़ा-सा प्राणवायु भरने की कवायद है, ताकि वह पूरी मुस्तैदी से अपनी गृहस्थी की रखवाली कर सके! अब उसको यह कैसे समझाऊं की इनको साल में एक बार घूमने के लिए सरकार पैसे देती है! और तेरा पति एक अनिश्चित प्राइवेट नौकरी वाला बंदा है! वह तेरे लिए आसमान से चांद-तारे तोड़ कर लाने की हसरत रखता है, पर सामर्थ नहीं! तेरा यह अपराधी पति मेहनत तो बैलों की तरह करता है, पर बरकत नहीं होती! शायद वह मेरे चेहरे के भावों को पकड़ लेती है। मेरे दिल की बेबसी की धड़कनों को वो शायद सुन लेती है! क्या मैं आज ज्यादा टूटा हुआ हूं! क्या आज मुझमें उसे मनाने-समझाने की शक्ति भी चुक-सी गई है! वह शायद ताड़ गई है!!! सब जान गई है!!!!
अचानक वह कहती है, ’ऐ जी जितनी चादर हो उतना ही पैर फैलाना चाहिए!!!’ जब वह ऐसा कह रही होती है तो मुझे किसी चिड़िया के टूटे हुए पर हवा में तैरते हुए दीखते हैं! मैं उससे कहना चाहता हूं कि हमारी चादर दिनों-दिन छोटी क्यों होती जाती है और दिनों-दिन उन मस्तीखोर लोगों की टांगे लंबी क्यों होती जा रही…. इस बात की मैं किससे शिकायत करुं! भगवान से या सरकार से!!! या अपने प्रारब्ध से!!! मगर नहीं कह पाता हूं! कुछ देर अभी इसी उधेड़बुन में रहता हूं कि घरवाली बोलती है, ‘घूमने कब चलोगे!!!’
यह सुनकर मैं सहम जाता हूं। अगले पल वह आंखें बड़ी करके कहती है, ’अरे, गोलगप्पे खाने!!!’ यह कहकर वो हंस देती है और मैं मुस्कुरा कर रह जाता हूं…

Continue Reading

Featured

मां भारती का ऐसा आदिवासी बेटा जिसने अंग्रेजों की नाक में कर दिया था दम, आज पुण्यतिथि पर देश कर रहा नमन

Published

on

आदिवासी आज भी भगवान मानकर करते हैं पूजा

लखनऊ। देश के स्वाधीनता संग्राम में मां भारती के अनगिनत सपूतों ने बलिदान दिया है। उन्हीं में से एक थे बिरसा मुंडा। आज यानी 9 जून को उनकी पुण्यतिथि मनायी जा रही है। इस अवसर पर गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिरसा मुंडा को याद करते हुए उन्हें नमन किया है। वहीं झारखण्ड की राजधानी रांची में राज्यपाल द्रौपदी मूर्मू और मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। इससे पहले शहादत दिवस पर बिरसा मुंडा को याद करते हुए बड़ी संख्या में युवाओं ने रन फॉर बिरसा में भाग लिया। बिरसा चैक पर पाहनों ने शहादत दिवस पर भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा का विधि-विधान से पूजा कर उन्हें नमन किया।
अग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने वाले क्रांतिकारियों में बिरसा मुंडा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 में छोटा नागपुर में मुंडा परिवार में हुआ था। मुंडा एक जनजातीय समूह था जो छोटा नागपुर पठार में निवास कारते थे। उनकी माता का नाम सुगना और पिता का नाम करमी था। यह वह दौर था जब समूच भारत में ब्रिटिश हुकूत ने अपनी जड.ें जमा ली थी और अब भारत के जंगलों पर उनकी नजरें गड़ी हुईं थीं। बिरसा मुंडा ने प्रारंभिक शिक्षा तो जैसे-तैसे प्राप्त कर ली। लेकिन आगे की शिक्षा के लिए उन्हें जर्मन मिशनरी स्कूल में दाखिला लेना था जिसके लिए उन्हे ईसाई धर्म अपनाना पड़ा। बिरसा मुंडा बचपन से ही स्वाभिमानी और विद्रोही स्वभाव के थे। जर्मन मिशनरी स्कूल में बिरसा मुुडा की आदिवासी संस्कृति का मजाक बनाया जाता था। जो बिरसा मंुडा को नागवार गुजरी और उन्होंने जर्मन मिशनरी स्कूल छोड. दिया। अंग्रेजों की क्रूरता और आदिवासियों की दुर्दशा देखकर बिरसा मुंडा हर समय विचार किया करते थे।

स्कूल से निकलने के बाद बिरसा मुंडा के जीवन में उस वक्त बड़ा बदलाव आया जब स्वामी आनंद पांडे से उनकी मुलाकात हुई और उन्होंने बिरसा मुंडा को हिंदू धर्म से उनका परिचय कराया। इस बीच वह मंुडा युवाओं को एकत्र कर अंग्रेजों के खिलाफ संगठित करने लगे। 1894 में छोटानागपुर में भयानक महामारी फैली, बिरसा मुंडा ने अपने साथियों के साथ महामारी से पीडि.त लोगों की भरपूर सेवा की। जिससे वह आदिवासी लोगों के प्रिय बन गए।
1 अक्टूबर 1894 को नौजवान नेता के रूप में सभी मुंडाओं को एकत्र कर इन्होंने अंग्रेजों से लगान माफी के लिये बिगुल फूंक दिया। इस समय तक बिरसा मुंडा आदिवासियों के लिए महापुरुष हो चुके थे। 1895 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन्हें उस इलाके के लोग धरती बाबा के नाम से पुकारा और पूजा जाता था। उनके प्रभाव की वृद्धि के बाद पूरे इलाके के मुंडाओं में संगठित होने की चेतना जागी।
1897 से 1900 के बीच बिरसा मुंडा, उनके साथियों और अंग्रेजों के बीच कई युद्ध हुए। बिरसा मंुडा ने अपने साथियों के साथ मिलकर अंगे्रजों की नींद हराम कर दी। एक समय तो ऐसा था जब बिरसा मुंडा, अंग्रेजों के दुश्मन नंबर वन बन गए। लेकिन वहीं दूसरी तरफ आदिवासियों के लिए वह भगवान बन गए।
अगस्त 1897 में बिरसा और उसके चार सौ सिपाहियों ने तीर कमानों से लैस होकर खूँटी थाने पर धावा बोलकर आग के हवाले कर दिया। इसके बाद 1898 में तांगा नदी के किनारे मुंडाओं की भिड़ंत अंग्रेज सेनाओं से हुई जिसमें पहले तो अंग्रेजी सेना हार गयी लेकिन बाद में इसके बदले उस इलाके के बहुत से आदिवासी नेताओं की गिरफ्तारियां हुईं।


जनवरी 1900 डोमबाड़ी पहाड़ी पर एक और संघर्ष हुआ था जिसमें बहुत सी आदिवासी औरतें और बच्चे मारे गये थे। यह संघर्ष तब हुआ जब वहां बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। अन्त में स्वयं बिरसा भी 3 मार्च 1900 को चक्रधरपुर में गिरफ्तार कर लिये गये। अंग्रेजों ने एक बार फिर उन्हें कारावास में डाल दिया।
बिरसा ने अपनी अन्तिम सांसें 9 जून 1900 को रांची कारागार में लीं। आज भी बिहार, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में बिरसा मुण्डा को भगवान की तरह पूजा जाता है। बिरसा मुण्डा की समाधि रांची में कोकर के निकट डिस्टिलरी पुल के पास स्थित है। वहीं उनका स्टेच्यू भी लगा है। उनकी स्मृति में रांची में बिरसा मुण्डा केन्द्रीय कारागार तथा बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र भी है।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Featured

सोनम कपूर को पति आनंद आहूजा ने कुछ इस अंदाज में विश किया बर्थडे, देखें तस्वीरें….

Published

on

सोनम कपूर

फाइल फोटो

मुंबई। बॉलीवुड की हॉट एक्ट्रेस सोनम कपूर आहूजा आज अपना 34वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। सोनम कपूर का जन्म 9 जून 1985 को मुंबई में हुआ था। सोनम फिल्म इंडस्ट्री के फेमस एक्टर अनिल कपूर की बेटी हैं। बता दें सोनम कपूर अक्सर अपने हॉट अंदाज और फैशन सेंस की वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं। सभी लोग सोनम के ड्रेसिंग और स्टाइल के दीवाने हैं।

सोनम कपूर के बर्थडे के मौके पर उनके पति आनंद अहूजा ने अपनी शादी की तस्वीर शेयर उन्हें बर्थडे की बधाई दी है। वहीं उन्होंने फोटो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है गर्लफ्रेंड फॉरएवर, एवरीडे पेरानॉर्मल, हैप्पी बर्थडे माइ वर्ल्ड। आनंद आहूजा के विश करने के बाद से ही उनकी इस फोटो ढेर सारे लाइक्स और फैंस के बर्थडे विशेज आने लगे।  

आपको बता दें अपने बर्थडे के मौके पर सोनम कपूर ने भी सोशल मीडिया पर फोट शेयर की है जिसमें उन्होंने कैप्शन में लिखा है हॉलिडे मोड ऑन। उनकी इस पिक से अंदाजा लगाया जा सकता है वह अपना बर्थडे काफी एन्जॉय कर रही हैं। सोनम का यह स्टाइलिश लुक उनके फैंस को काफी पसंद आ रहा है।

ये भी पढ़े:Birthday Special: फिटनेस और खूबसूरती से सबको मात देने वाली शिल्पा कभी खुद को मानती थी बदसूरत…

वहीं अगर हम सोनम कपूर के करयर की बात करें तो उन्हें 2007 में फिल्म सांवरिया से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इस फिल्म में उनके अपोजिट रणबीर कपूर नजर आए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। लेकिन इसके बाद सोनम कपूर ने दिल्ली 6, आयशा, आई हेट लव स्टोरी, मौसम, रांझना, प्रेम रतन धन पायो, नीरजा और पैडमैन जैसे कई हिट फिल्मों में काम किया। 

ऐसे में अगर सोनम के पर्सनल लाइफ की बात करें तो 8 मई 2018 को बिजनेसमैन आनंद आहूजा से शादी कर ली। वहीं इसी साल वह फिल्म वीरे दी वेडिंग में भी नजर आईं थी। इस फिल्म में उनके अलावा करीना कपूर और स्वरा भास्कर भी नजर आईं।

इसके बाद सोनम कपूर को आखिरी बार उनके पिता के साथ 2019 में रिलीज हुई फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ में देखा गया था। इस फिल्म में सोनम कपूर और अनिल कपूर के अलावा जूही चावला और राजकुमार राव मुख्य भूमिका में नजर आए थे।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Category

Weather Forecast

June 10, 2019, 7:34 pm
Mostly clear
Mostly clear
39°C
real feel: 40°C
current pressure: 99 mb
humidity: 32%
wind speed: 0 m/s N
wind gusts: 0 m/s
UV-Index: 0
sunrise: 4:42 am
sunset: 6:30 pm
 

Recent Posts

Top Posts & Pages

Subscribe to Blog via Email

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.

Join 9 other subscribers

Trending