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DGP ओपी सिंह पहुंचे पुलिस लाइन, कहा- सेवानिवृत्ति पर सम्मान पाकर खुश हूं…

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लखनऊ: यूपी के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह शुक्रवार को रिटायर हो रहे हैं। रिटायरमेंट के दिन डीजीपी ओपी सिंह को शाही तरीके से पारंपरिक परेड के साथ विदाई देने की तैयारी है। ऐसे में DGP ओपी सिंह पुलिस लाइन पहुंचे और परेड का निरीक्षण शुरू किया। इस दौरान पुलिस लाइन में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर पीवी रामाशास्त्री समेत तमाम पुलिस के आलाधिकारी मौजूद हैं। डीजीपी ओपी सिंह को 64 साल पुरानी डॉज विंटेज कार में बिठाकर विदाई दी जाएगी।

अपने रिटायरमेंट पर डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि मेरी सेवानिवृत्ति के अवसर पर आज मैं सम्मान पाकर अभिभूत हूं। आज की परेड के लिए मैं अपर पुलिस महानिदेशक पीएसी और पुलिस आयुक्त लखनऊ समेत सभी पुलिसकर्मियों को बधाई देता हूं। सबसे बड़े पुलिसबल का मुझे जो नेतृत्व करने का अवसर मिला, मैं उसे बयां नहीं कर सकता। जो भी उपलब्धियां रहीं हैं, मेरे सेवाकाल में आपके सहयोग से ही सम्भव हुआ है। पुलिस की सेवा एक नौकरी नहीं पुण्य जनसेवा वरदान से कम नहीं है। इस विभाग से समाज की अपेक्षाएं प्रतिदिन बढ़ रहीं हैं।

यूपी पुलिस के लिए बीता वर्ष ऐतिहासिक उपब्धियों से भरा रहा है, लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में पुलिस आयुक्त प्रणाली उत्तर प्रदेश पुलिस की भविष्य में दशा और दिशा व्यक्त करेगी। मैं दोनों पुलिस कमिश्नरों को धन्यवाद देता हूं और आशा करता हूं कि वो हमारी कसौटियों पर खरे उतरेंगे। एकीकृत आपात सेवा 112 का शुभारंभ किया गया। अमेरिका जैसे विकसित देश को पछाड़ते हुए विश्व में इसे तीसरा स्थान मिला।

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इसी कड़ी में आगे कहा कि साइबर क्राइम अगेंस्ट वीमेन में बड़ा काम किया। ई-कोर्ट का शुभारंभ हुआ, twitter पर 7000 fir हुईं। 62वीं अखिल भारतीय पुलिस ड्यूटी मीट हुई। साइबर अपराध के लिए साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन के लिए वर्कशॉप हुई। कानून व्यवस्था के क्षेत्र में कुम्भ और अयोध्या प्रकरण के समय पुलिस की सराहना हुई। संगठित अपराध के मामले में कार्रवाई की। 5 पुलिस के जवान शहीद हुए। फर्रुखाबाद में 21 बच्चों को छुड़ाया गया, बंधक बनाने वाला व्यक्ति पुलिस इनकाउंटर में मारा गया। पास्को में ऐतिहासिक समय में अपराधियों को सजा दिलाई, दुष्कर्म में 28 प्रतिशत की कमी आई।

पदोन्नति और भर्ती में हमारा ध्यान रहा। कुल 121 आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति हुई, 46 हजार से ज्यादा पदोन्नतियां की गईं। आगे की कार्यवाही प्रचलित है। पांच हजार पुलिस अधिकारियों को सम्मान दिया गया। पुलिस परिवार के लिए अधिक से अधिक कार्य किया जा सके, इसके लिए आगे भी कार्यरत रहना है।

चुनौतियों पर आगे भी खरा उतरना है। आज 37 साल की सेवा के उपरांत अच्छा और बुरा दोनों लग रहा है। अच्छा इसलिए क्योंकि पिछले 2 साल तक कर्तव्यनिष्ठा के साथ काम किया, बुरा इसलिए क्योंकि आज विदा ले रहा हूं। जितने भी पुलिस कर्मचारी और अधिकारी हैं, मैं उन्हें अपने और परिवार की ओर से बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। http://www.satyodaya.com

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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का है समाजवादी पार्टी से कनेक्शन, पत्नी लड़ चुकी है चुनाव

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उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के बिठूर के विकरू गांव में हुई 8 पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या से दहशत फैली हुई है। अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है कहा जा रहा है कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की पत्नी का एक पोस्टर सामने आया, जिसमें उसका कनेक्शन समाजवादी पार्टी से सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है।

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यूपी पुलिस के 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करके फरार विकास दुबे को लेकर समाजवादी पार्टी इस वक्त सरकार को भले ही घेर रही है लेकिन विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे का एक पोस्टर अलग ही कहानी कह रहा है। ये पोस्टर उस वक्त का है, जब रिचा दुबे घिमऊ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रही थीं। 

जिला पंचायत सदस्य पद की दावेदार रिचा दुबे को उस वक्त समाजवादी पार्टी का समर्थन प्राप्त था। उसके पोस्टर में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की तस्वीरें भी साफ दिखाई दे रही हैं। मामले पर राजनीतिक बयान देने को लेकर कानून मंत्री बृजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी को जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि जो लोग इस मामले के BJP से अपराधियों की गठजोड़ की बात कह रहे है, कनेक्शन उन्हीं का निकलेगा। उन्होंने कहा कि एसपी के DNA में ही अपराध है. इस बार अपराधी का कोई भी कनेक्शन क्यों न हो, वो बच नहीं पाएगा। कानून मंत्री ने ये भी कहा कि पूरे मामले की जांच होगी। रेड में गए पुलिस वालों की कम संख्या पर भी, और अगर इसमें किसी स्तर पर कोई कमी हुई है, तो उस पर भी जांच की जाएगी।http://www.satyodaya.com

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शिक्षक भर्ती घोटाले में अयोध्या विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पर केस दर्ज

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कुलपति ने अपने कार्यकाल में किये कई फर्जी नियुक्तियां

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के बाद अब विश्वविद्यालय में भी फर्जीवाड़ा का मामला उजागर होने लगा है। अयोध्या में आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति बीबी सिंह के खिलाफ शिक्षक भर्ती घोटाले में केस दर्ज किया गया है। विजिलेंस के इंस्पेक्टर विजय कुमार यादव ने थाना कुमारगंज में यह केस दर्ज कराया है। इस प्रकरण में पूर्व कुलपति बीबी सिंह के साथ चार अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

इन सभी लोगों के खिलाफ अभिलेखों में कूट रचित करने का मुकदमा दर्ज हुआ है। इस केस में तत्कालीन कुलपति बीबी सिंह, वरिष्ठ लिपिक ओम प्रकाश गौड़, विषय वस्तु विशेषज्ञ फसल सुरक्षा डॉ. प्रमोद कुमार तथा वस्तु विशेषज्ञ सुरक्षा विनोद कुमार सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। तत्कालीन कुलपति बीबी सिंह ने अपने कार्यकाल 2001-03 के बीच में कई फर्जी नियुक्ति की थी।

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बताया गया है कि बिना अर्हता वाले तीन लोगों को भर्ती किया गया था। एक अभ्यर्थी के अभिलेख में सफेदा लगाकर डॉ प्रमोद कुमार सिंह को नौकरी दी गई थी। इनको प्लांट प्रोटक्शन में तैनाती दी गई थी। अभी डॉ प्रमोद कुमार सिंह कृषि विज्ञान केंद्र बसूली महाराजगंज में पोस्टेड हैं।http://www.satyodaya.com

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लोकबंधु अस्पताल ने कोरोना की बनाई आयुर्वेदिक दवा

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कोविड-19 के मरीजों पर रिसर्च में मिली कामयाबी, मानक स्वीकृति के लिए आइसीएमआर को भेजी जाएगी शोध रिपोर्ट

लखनऊ। कोरोना से मचे दहशत के बीच राजधानी के लोकबंधु अस्पताल प्रशासन ने आयुर्वेदिक काढ़ा बनाकर इसका सफल इलाज करने का दावा किया है। कोविड-19 के मरीजों पर शुरू हुई रिसर्च में अब पूरी तरह कामयाबी मिल गई है। अब अभी इस पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की स्वीकृति नहीं मिली है। इसके लिए शोध रिपोर्ट उसे भेजी जाएगी।

लोकबंधु अस्पताल के शोध में बताया गया है कि आयुर्वेदिक काढ़े का इस्तेमाल तीन ग्रुप में मरीजों पर किया गया था जो पूरी तरह कामयाब रहा। अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कुछ मरीजों पर आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग किया गया था। आयुर्वेदिक दवाओं के जरिए मरीजों के ठीक होने के बाद किया गया शोध कार्य पूरा हो चुका है। अब इसका प्रयोग अन्य कोरोना संक्रमित मरीजों पर भी किया जाएगा ताकि मरीज जल्द से जल्द ठीक हो सकें।

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अस्पताल के निदेशक डॉ. डीएस नेगी का कहना है कि आयुर्वेदिक चिकित्सीय परीक्षण के तहत 90 रोगियों पर इसका प्रयोग किया गया था। 30-30 रोगियों के तीन समूहों में रोगियों को बांटा गया। दो समूहों के रोगियों को आयुर्वेदिक दवाएं दी गईं थीं जबकि तीसरे समूह को कोई आयुर्वेदिक दवा न देकर सामान्य इलाज किया गया। आयुर्वेदिक दवा खाने वाले दोनों समूह के रोगी पांच-छह दिन में ठीक हो गए।

उन्होंने बताया कि इस शोध के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उप्र की ओर से फंड भी दिया गया था। शोध के लिए सीटीआरआई से स्वीकृति ली गई थी। प्रयोग का रजिस्ट्रेशन नंबर सीटीआरआई/2020/06/025800 है। सीसीआरएएस द्वारा दिशा-निर्देश के अनुसार ही मरीजों के लक्षणों का आंकलन दवा के प्रयोग से पहले और बाद में किया गया।http://www.satyodaya.com

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July 5, 2020, 10:29 am
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