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मंत्री के आवभगत में लगे रहे डॉक्टर्स, दर्द से तड़पता रहा मरीज…

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लखनऊ। जब पूरा अस्पताल प्रशासन  डॉक्टर और कर्मचारी ही मरीजों को छोड़कर मंत्री जी के आवभगत में लग जायें, तो ऐसे हालात में गंभीर मरीज की क्या स्थिति होगी। ठीक ऐसा ही वाक्या बलरामपुर अस्पताल में गुरुवार को देखने को मिला है। जहां राज्यमंत्री स्वाति सिंह और लखनऊ महापौर की आवभगत में पूरा अस्पताल प्रशासन लगा रहा और न्यू बिल्डिंग के आर्थोपेडिक वार्ड में एक गम्भीर मरीज दर्द से चीखता रहा, हालांकि अस्पताल प्रसाशन ने हंगामा बढ़ता देख मरीज को किसी निजी अस्पताल में रेफर कर दिया।

कन्नौज निवासी शिवकरन (22) बुधवार को कन्टेनर से कहीं जा रहा था, तभी कानपुर के पास आगे से एक डीसीएम ने टक्कर मार दी। इस दौरान उसका बायां पैर बुरी तरह से प्रभावित हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे नजदीकी पीएचसी पहुंचाया, जहां उसे थोड़ा बहुत मलहम पट्टी करके केजीएमयू ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। ट्रामा में सुबह 7 बजे पहुंचने के बाद डॉक्टर्स ने बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। वहां मरीज की मां राजेश्वरी ने आरोप लगाया कि बलरामपुर में सुबह 9 बजे आ गए थे, लेकिन यहां कोई दवा नहीं दी गई और मरीज पूरा दिन दर्द से तड़पता रहा।

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बलरामपुर अस्पताल में दोपहर दो बजे राज्यमंत्री स्वाति सिंह और महापौर संयुक्ता भाटिया के कार्यक्रम को लेकर पूरे अस्पताल के डॉक्टर्स व कर्मचारी व्यवस्था ठीक करने में लगे रहे। शाम करीब 3 बजे अस्पताल के न्यू बिल्डिंग में हंगामा मचने लगा, जिससे अस्पताल प्रसाशन के होश उड़ गए। इधर मंत्री जी उधर मरीज, ऐसे में तत्काल पहुंचे कुछ डॉक्टर्स ने मरीज को समझा बुझाकर किसी निजी अस्पताल रेफर कर दिया। मरीज की मां राजेश्वरी का आरोप है कि हमें पहले कानपुर रेफर किया जा रहा था, लेकिन जब बेटे को असहनीय दर्द होने लगा तो उसे निजी अस्पताल भेजवा दिया गया। यहां तक कि एम्बुलेंस मांगने पर भी कहा गया कि अस्पताल में कोई एम्बुलेंस नहीं है बाहर से मंगा लो।

साथ ही मरीज शिवकरन के बहनोई राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि यहां वार्ड के कर्मचारियों ने हमसे 200 रुपये सुविधा शुल्क वसूल किए हैं। उसका कहना था कि मरीज सुबह से इलाज के अभाव में तड़पता रहा लेकिन उसे उस वक्त रेफर नहीं किया गया लेकिन अचानक इस तरह रेफर करके अस्पताल प्रशासन ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। राकेश ने कहा कि इन सबकी शिकायत मैं स्वास्थ्य मंत्री से करूंगा, क्योंकि अस्पताल प्रसाशन पर कोई भरोसा नहीं है। वहीं अस्पताल के किसी भी जिम्मेदार ने इस मामले में बात करनी नहीं चाही है। http://www.satyodaya.com

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जयंती : पढ़िए दुनिया में मशहूर उपन्यासकार आर के नारायण का जीवन परिचय

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नई दिल्ली। आरके नारायण, पढ़ने-लिखने और साहित्य से रूचि रखने वाले हर शख्स ने यह नाम जरूर सुना होगा। आज उनकी जयंती है। उनकी रचनाओं ने हिंदी भाषी लोगों को जितना प्रेरित किया है, उतना शायद ही किसी अंग्रेजी लेखक की रचनाओं ने किया होगा। आर के नारायण अंग्रेजी साहित्य के भारतीय लेखकों में 3 सबसे महान् उपन्यासकारों में गिने जाते थे।

आर के नारायण जीवन परिचय
10 अक्टूबर 1906 को चेन्नई में जन्में आर के नारायण का पूरा नाम राशीपुरम कृष्णास्वामी अय्यर नारायणस्वामी था। बचपन के दिनों में आर के नारायण के परिवार के लोग उन्हें प्यार से कुंजप्पा कहकर बुलाता थे। बचपन के दिनों में आर के नारायण ज्यादातर अपनी नानी के घर रहे। बचपन से ही आर के नारायण को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। वह किताबों को पढ़ने के साथ-साथ लिखते भी थे। आर के नारायण के पिता एक तमिल टीचर थे। आर के नारायण ने भी बहुत कम वक्त के लिए एक टीचर और पत्रकार के रूप में कार्य भी किया है, लेकिन उन्होंने इसके सिवा अपना सारा जीवन लेखन में ही लगाया। इसके लिए उन्होंने अपनी टीचर की नौकरी भी छोड़ दी थी। आर के नारायण की पहली उपन्यास लिखा था जिसका नाम ‘स्वामी एंड फ्रेंड्स’ था।

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आर के नारायण ने इस उपन्यास में एक प्रसिद्द जगह जिक्र किया था, जिसे उन्होंने मालगुडी नाम दिया था। जोकि आगे इसी मालगुडी के नाम पर हिंन्दी टीवी जगत का प्रसिद्ध नाटक मालगु़डी डेज बन गया था। वह दक्षिण भारत के एक काल्पनिक शहर मालगुडी को आधार बनाकर अधिकतर रचनाएं लिखा करते थे। दुनियाभर में प्रसिद्ध आर के नारायण का 13 मई 2001 को चेन्नई में उनका निधन हो गया था। लेकिन अपनी रचनाओं में वे आज भी जीवित हैं।

उपन्यासकार आर के नारायण को इन पुरस्कारों से नवाजा गया
दुनियाभर में मशहूर उपन्यासकार आर के नारायण को साहित्य एकेडमी अवार्ड, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और ए सी बेनसन मेडल समेत अनेक पुरस्कारों से नवाजा गया। आर के नारायण को वर्ष 1989 में राज्यसभा के लिए भी चयनित किये गए थे।

उनकी प्रसिद्ध कृतियों में द इंग्लिश टीचर, वेटिंग फ़ॉर द महात्मा, द गाइड, द मैन ईटर आफ़ मालगुडी, द वेंडर ऑफ़ स्वीट्स, अ टाइगर फ़ॉर मालगुडी शामिल है। उन्होंने लॉली रोड, अ हॉर्स एंड गोट्स एंड अदर स्टोरीज़, अंडर द बैनियन ट्री एंड अदर स्टोरीज़ शामिल हैं। आरके नारायण की लेखन यात्रा लघुकथाओं से शुरू हुई थी। जीवन के विभिन्न पड़ावों से गुजरती हुई यह यात्रा 94 वर्ष की आयु में 13 मई, 2001 को सदा के लिए थम गई।http://www.satyodaya.com

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पुण्यतिथि: जानिए गजल सम्राट जगजीत सिंह के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों के बारे में…

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नई दिल्ली। गजल सम्राट नाम से मशहूर जगजीत सिंह उर्फ जगजी​त दादा की मखमली आवाज का जादू आज भी लोगों पर चढ़ा हुआ है। जब भी गजलों का ​जिक्र होता है जगजीत सिंह का नाम सबसे पहले ​याद किया जाता है। आज उनकी पुण्यतिथि है। 10 अक्टबूर 2011 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में ब्रेन हैमरेज के कारण उनका निधन हो गया था।

जगजीत सिंह ने अपनी पढ़ाई जालंधर के डीएवी कॉलेज से की थी। वे वहां हॉस्टल में रहते थे, लेकिन उनके साथ कोई कमरे में रहना पसंद नहीं करता था। क्योंकि जगजीत सिंह सुबह पांच बजे उठ कर दो घंटे रियाज करते थे। वे न खुद सोते थे, न बगल में रहने वाले लड़कों को सोने देते थे।

जगजीत के पिता चाहते थे कि वो पढ़-लिखकर आईएएस बने लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उन्होंने एमए तक पढ़ाई की, लेकिन उनकी दिलचस्पी सिंगिंग में थी इसलिए अपना करियर बनाने मुंबई पहुंच गए।

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बहुत कम लोग ही इस बात को जानते होंगे कि ऑल इंडिया रेडियो के जालंधर स्टेशन ने उन्हें उपशास्त्रीय गायन की शैली में फेल कर दिया था। उनके गीतों और गजलों ने सबके दिलों पर ऐसा जादू बिखेरा की उन्हें गजल सम्राट कहा जाने लगा।

जगजीत सिंह तो अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनकी आवाज आज भी सुनने वालों को बेहद सुकून देती है। उनकी पत्नी चित्रा सिंह का भी काफी नाम हैं। वह भी अपनी गजलों के लिए काफी जानी जाती हैं। लोग आज भी दगजीत की मधुर आवाज सुनने के लिए तरसते हैं। लोग जब उकी आवाज सुनते हैं तो बेहद खुश हो जाते हैं।

जगजीत का पहला एलबम ‘द अनफॉरगेटेबल्स (1976)’ हिट रहा। जगजीत ने गजलों को जब फिल्मी गानों की तरह गाना शुरू किया तो आम आदमी ने गजल में दिलचस्पी दिखानी शुरू की। जगजीत जी ने क्लासिक शायरी के अलावा साधारण शब्दों में ढली आम-आदमी की जिंदगी को भी सुर दिए। जगजीत सिंह ने 150 से ज्यादा एलबम बनाईं। गजल को लेकर जगजीत सिंह सबसे अधिक लोकप्रिय हैं।

जगजीत ने अपनी मखमली आवाज के जरिए गजलों को नया जीवन दिया। ‘तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है’, ‘झुकी झुकी सी नजर बेकरार है कि नहीं’,’तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो’, ‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया’,’प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है’, ‘होश वालों को खबर क्या’, ‘कोई फरियाद’,’होठों से छू लो तुम’, ‘ये दौलत भी ले लो’, ‘चिठ्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश’ जैसी फिल्मी गजलें पेश कीं। वहीं गैरफिल्मी फेहरिस्त में ‘कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा’, ‘सरकती जाए है रुख से नकाब आहिस्ता-आहिस्ता’, ‘वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी’ जैसी मशहूर गजलें शुमार हैं।

जगजीत सिंह को 2011 में यूके में गुलाम अली के साथ परफॉर्म करना था, लेकिन इससे पहले सेरिब्रल हैमरेज के चलते उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत बिगड़ती चली गई और वो कोमा में चले गए। 10 अक्टूबर 2011 को जगजीत सिंह को अंतिम सांसे ली।http://www.satyodaya.com

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शी जिनपिंग 11 अक्टूबर को आएंगे भारत, दूसरे शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

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नई दिल्ली: पीएम नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 अक्टूबर को भारत के दो दिवसीय दौरे पर आएंगे। चीन के राष्ट्रपति और मोदी के बीच दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन 11-12 अक्टूबर को भारत के चेन्नई में होगा। बता दें कि इससे पहले शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री के बीच पहला अनौपचारिक शिखर सम्मेलन पिछले वर्ष 27-28 अप्रैल को चीन के वुहान में हुआ था।

इस शिखर सम्मेलन के दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संबंधी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही भारत-चीन क्लोजर डेवलपमेंट पार्टनरशिप को लेकर कई अहम समझौते हो सकते हैं। साथ ही, इस सम्मेलन से दोनों देशों को आपसी संबंधों को मजबूत करने का अच्छा अवसर मिलेगा।

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वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले चीन ने पाकिस्तान और भारत से कश्मीर मुद्दे को सुलझाने की बात कही है। दरअसल, पाक के पीएम इमरान खान चीन के अपने तीसरे आधिकारिक दौरे पर मंगलवार को बीजिंग पहुंचे। जहां चीन ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे को दोनों देशों के बीच हल किया जाना चाहिए।http://www.satyodaya.com

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