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#Ayodhya: लाॅकडाउन और कर्फ्यू के बीच ही क्यों होता है राम का हर काम!

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लखनऊ। वर्तमान में जो हालात हैं, उसको देखते हुए कोई भी भारतीय इन दिनों को याद नहीं रखना चाहेगा। लेकिन संकट और दहशत के इस बुरे दौर के बीच हिन्दु धर्म और राम में आस्था रखने वालों के लिए 25 मार्च 2020 का दिन हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा। करीब 500 वर्षों बाद मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने एक फिर अपने राजसी वैभव को प्राप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। पिछले 70 वर्षों से एक मामूली से टाट के नीचे विराजमान श्रीराम ने पहली बार इस चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन बुधवार को अपना स्थान बदला। ताकि उनके जन्म स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे विधि विधान के साथ श्रीराम की मूर्ति को गर्भगृह से उठाकर मानस भवन के पास बनाए गए अस्थाई ढांचे में चांदी के सिंहासन पर विराजित किया। अब मंदिर निर्माण होने तक अयोध्या के राजा यहीं पर अपने भक्तों को दर्शन देंगे।

राम का स्थान परिवर्तन और भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे देश में कोरोना के चलते सब कुछ ठप हो गया है। महामारी ने दुनिया भर में ऐसी दहशत पैदा कर दी है कि हर कोई अपने घरों में ठिठुक गया है। लेकिन अयोध्या के राजा श्रीराम कर हर काम लगभग ऐसे ही माहौल होता रहा है। यह एक रहस्य सा है कि पिछले करीब 100 वर्षों में श्रीराम से जुड़ा कोई काम शुरू हुआ या निर्णय हुआ तो देश में लाॅकडाउन और कफ्यू लगाना पड़ा।

पिछले 100 साल से ज्यादा समय में ऐसा रहा राम-काज का इतिहास

सन 1902 में दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के तत्कालीन महंत ने अयोध्या के सभी तीर्थ स्थलों को चिन्हित कराकर वहां शिलापट्ट लगवाया। महंत ने पहला शिलालेख रामजन्मभूमि पर लगवाया। लेकिन इसके बाद ही वहां सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया। जिसके बाद प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी।
1934 में भी कब्जे के विवाद में विवादित स्थल को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जिसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए लोगों से जुर्माना वसूल कर निर्माण कार्य कराया।
1949 में रामलला के प्राकट्य के समय भी भारी विवाद हुआ। जिसके बाद प्रशासन ने विवादित स्थल को कुर्क कर दिया।
1986 में राम जन्म भूमि का ताला खुलने के पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गयी। जिसके बाद देश भर में दंगे फैल गए और देश ने बेहद बुरा दौर देखा।

1989 में जब रामजन्मभूमि यज्ञ समिति ने 9 नवंबर को शिलान्यास का ऐलान किया तो इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी। जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गयी।
30 अक्टूबर 1990 में कारसेवा के दौरान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पूरे प्रदेश को लाॅकडाउन कर दिया। हालांकि फिर भी कारसेवा हुई और दर्जनों कारसेवकों की जान गई। सन 2002 में शिलादान को लेकर अयोध्या में कई महीने तक कफ्यू की स्थिति बनी रही।
इसके बाद 30 सितंबर 2010 में राम जन्मभूमि विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय के समय भी पूरा उत्तर प्रदेश अघोषित लाॅक डाउन हो गया। जिसका परिणाम रहा कि कोई भी अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
हाल ही में 9 नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के एतिहासिक निर्णय के समय भी पूरे प्रदेश में कफ्यू जैसे हालात रहे। हालांकि पूरे देश ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया।

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राम मंदिर का रास्ता साफ होने के बाद केन्द्र सरकार ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया है। जिसकी देख-रेख में भव्य रामंदिर निर्माण की दिशा में आज महत्वपूर्ण पहला कदम बढ़ा। इस बार कोई सांप्रदायिक या कानूनी पचड़ा नहीं फैला तो कोरोना ने रामालय के भूमि पूजन और ऐतिहासिक स्थान परिवर्तन को फीका कर दिया। यदि देश में यह महामारी न फैली होती तो शायद सूबे की योगी सरकार इस महत्वपूर्ण पल को यादगार बना देती!http://www.satyodaya.com

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लॉक डाउन का सड़कों पर दिखा असर, पूछताछ के बाद भी शहर के अन्दर नहीं पहुंचे लोग

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लखनऊ। कोरोना वायरस के बीच राजधानी में लॉक डाउन का खासा असर सड़कों पर दिखा है। हांलाकि शहर में पुलिस भी सतर्क रही है। सोमवार की सुबह से ही लखनऊ की सीमा को सील कर दिया गया था। आने जाने वाले लोगों से पूछताछ हुई। उन्हें शहर के भीतर प्रवेश करने नहीं दिया गया।

अयोध्या रोड पर पुलिस ने बेरिकेडिंग लगा रखी है। कानपुर रोड पर भी बंथरा में बेरिकेडिंग लगाकर लोगों को रोका गया। ट्रेन, बस व अन्य साधन बंद होने के कारण अधिकतर लोग किराए की गाड़ी से सड़क मार्ग के माध्यम से राजधानी पहुंचे। पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने पुलिस अफसरों को लॉक डाउन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने किसी भी दशा में बेवजह बाहर निकलने वाले लोगों को वापस घर भेजने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सलाह दी है।

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पुलिस आयुक्त के मुताबिक कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लोगों को घरो में ही रहना होगा। जरूरी काम पड़ने पर ही लोग बाहर निकलें। घर का सामान लेना हो तो परिवार का कोई एक सदस्य ही निकले। पुलिस की ओर से सोमवार सुबह 10 बजे तक कुछ राहत दी गई थी। इसके बाद लोगों का बाहर निकलना शुरू हो गया। लोग जरूरी काम का बहाना कर सड़कों पर टहलते दिखे। उच्चाधकारियों को जब इसकी जानकारी हुई तो मातहतों को सख्ती करने के निर्देश जारी हुए। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और लोगों को वापस घरों में भेजना शुरू किया। सबसे ज्यादा समस्या सरकारी कर्मचारियों को हुई। अधिकांश दफ्तर खुले होने के कारण वह कार्यालयों में देर से पहुंचे या फिर नहीं पहुंच सके।

अमीनाबाद में किराना की दुकान पर धक्का मुक्की, दुकान बंद, जरूरतमंद नहीं खरीद सके दवा और राशन

लॉकडाउन का असर दवा और राशन की खरीद करने वाले लोगों पर भी देखने को मिला है। पुलिस की सख्ती के चलते वह दुकानों तक नहीं पहुंच पाए। इस वजह से अमीनाबाद में किराना स्टोर पर लगी भीड़ के कारण लोगों में धक्का मुक्की होने लगी। इसकी वजह से पुलिस ने दुकान बंद करा दी। वहीं छोटे-मोटी दुकान चलाने वालों के यहां तक ट्राली से सामान भी नहीं पहुंचाया जा सका।

लॉकडाउन के बावजूद शहर में अफरा-तफरी का माहौल रहा। इससे जरुरतमंदों को भारी नुकसान हुआ। अमीनाबाद में राशन की दुकानों को प्रशासन की मंशानुरूप खोला गया था कि जरूरतमंद लोग अपनी आवश्यकतानुसार सामान खरीद सकें। लेकिन दुकान पर उमड़ी भीड़ के कारण पुलिस को नतीजतन दुकान बंद करानी पड़ी।

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अमीनाबाद के एक व्यापारी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान राशन और मेडिकल स्टोर को खोला गया था। लेकिन राशन की दुकान पर एकदम से भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद पुलिस ने कई दुकानों को बंद करा दिया। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस के साथ नोकझोंक भी की। उन्होंने बताया कि पुलिस की इस कार्रवाई से जरूरतमंद लोग भी खाली हाथ वापस लौट गए।

आईटी चैराहा में दवा स्टोर के मालिक संजीव ने बताया कि पुलिस सख्ती के कारण वह मेडिसिन बाजार से दवाई नहीं ला पाए। क्योंकि पुलिस ने अलीगंज चैराहे से आगे नहीं बढ़ने दिया। उन्होंने बताया कि यही हाल उनके जानने वाले बीबीडी की तरफ से बाजार पहुंचने में असमर्थ रहे। मेडिसिन बाजार भी सुबह से 12 बजे तक ही खुली रही। जबकि सुबह से ही वह फोन पर फुटकर विक्रेताओं से बुकिंग ले रहे थे। इसके बाद उन्होंने उन लोगों को डिलीवरी देने के बाद दुकान बंद कर दी। उनका कहना है कि इसके बाद ग्राहक भी बाजार नहीं आया तो दुकान बंद करनी ही थी।http://www.satyodaya.com

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इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच अब 28 मार्च तक के लिए बंद

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इससे पूर्व 23 से 25 तक के अवकाश को 28 मार्च तक बढ़ाया

लखनऊ। कोरोना से मचे हड़कम्प के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसकी लखनऊ बेंच को अब 28 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। इस दौरान केवल अति आवश्यक मामलों की ही सुनवाई जाएगी। इसके लिए व्यवस्था कर दी गई है। कोरोना वायरस के खतरे से बचाव एवं राहत उपायों को देखते हुए हाईकोर्ट व लखनऊ खंडपीठ में इससे पहले 23 मार्च से 25 मार्च तक अवकाश घोषित किया था। अब उसे 28 मार्च तक बढ़ा दिया गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के निबंधक शिष्टाचार आशीष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार अति आवश्यक मामलों के लिए पूर्वाह्न 10 बजे से 11 बजे के बीच मुकदमा दाखिल कर सुनवाई के लिए अनुरोध करना होगा। इस दौरान नियमित रूप से मुकदमे दाखिल नहीं होंगे। कुछ अधिकारियों को नामित किया गया है जो अतिआवश्यक मुकदमों की सुनवाई के अनुरोध पर व्यवस्था करेंगे। उनके मोबाइल पर अनुरोध किया जा सकता है।

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सुनवाई का अनुरोध हाईकोर्ट के संयुक्त निबंधक (न्यायिक व लिस्टिंग) इलाहाबाद के मोबाइल नंबर 9532693559, संयुक्त निबंधक (न्यायिक व आपराधिक) इलाहाबाद के मोबाइल नंबर 9473838827, निबंधक (न्यायिक व लिस्टिंग) लखनऊ के मोबाइल नंबर 9415028118 या इनकी अनुपस्थिति में निबंधक न्यायिक स्टेशनरी के मोबाइल नंबर 9412711100 पर कॉल किया जा सकेगा।

ये अधिकारी संबंधित न्याय पीठ से अनुमति लेकर कॉल करने वाले को सूचित करेंगे। आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 26 एवं 27 मार्च को सुने जाने वाले मुकदमे अब 9 एवं 10 अप्रैल को सुने जाएंगे। साथ ही 26, 27 और 28 मार्च को अवकाश घोषित कर दिया गया है, इसलिए मुकदमों की काजलिस्ट एक अप्रैल 2020 को प्रकाशित होगी।http://www.satyodaya.com

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क्या होता है लॉकडाउन, आम आदमी क्या-क्या कर सकता है? जानिए

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लखनऊ। लॉकडाउन एक इमर्जेंसी व्यवस्था है। जिसके तहत निजी प्रतिष्ठानों, निजी कार्यालयों व सार्वजनिक परिवहन को पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाता है। यानी लोगों के पास अपने घरों से निकलने की कोई खास वजह होनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी बीते रविवार का बताया गया कि ‘लॉकडाउन से लोगों को थोड़ी असुविधा जरूर होगी। लेकिन इसके पीछे जो नीयत है, उसे समझने की जरूरत है। यह सब अस्थाई है और महामारी से बचने के लिए इस तरीके को पूरी दुनिया अपना रही है।

यूं तो राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक में शनिवार को ही प्रदेश के अधिकांश क्षेत्र में नियमित लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई थी। लेकिन रविवार शाम 22 राज्यों में आंशिक लॉकडाउन के आदेश आए। इसके तहत दिल्ली, केरल और बिहार सोमवार सुबह 6 बजे से पूरी तरह बंद किए जा रहे हैं।

लॉकडाउन के दौरान क्या-क्या बंद रहेगा

सार्वजनिक परिवहन बंद है। पर कुछ राज्यों ने कहा है कि 25% सरकारी बसें चलेंगी। सभी दुकानें, बड़े स्टोर, फैक्ट्रियाँ, वर्कशॉप, दफ्तर, गोदाम, साप्ताहिक बाजार बंद रहेंगे। अगर किसी जिले की सीमा दूसरे राज्य से मिलती है, तो उसे सील किया जाएगा। यानी बॉर्डर सील होंगे। एक राज्य से दूसरे राज्य को जोड़ने वाली बस और रेल सेवाएं रद्द कर दी जाएंगी। कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया जाएगा। सभी धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम रद्द कर दिए जाएंगे। लोगों से अपील होगी कि वे घरों में ही रहें। ये सारी कवायद लोगों को एक-दूसरे के संपर्क में आने से रोकने के लिए ही की जा रही है।

लॉकडाउन में खुला क्या-क्या रहेगा

भारत सरकार के अनुसार लॉकडाउन के दौरान पुलिस थाने, अस्पताल, अग्नि शमन विभाग, जेल, महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर, खाद्यान व किराने की दुकानें खुली रहेंगी। लॉकडाउन के दौरान जीवन के लिए आवश्यक चीजें लेने की अनुमति होती है। इसलिए कुछ सुविधाओं को इसकी परिधि से बाहर रखा जाता है।

जैसे, बिजली, पानी, इंटरनेट, बैंकिंग व एटीएम की सुविधा जारी रहेगी। पोस्ट ऑफिस खुले रहेंगे। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को काम करने दिया जाएगा। पेट्रोल पंप और सीएनजी या एलपीजी पंप खुले रहेंगे। दवाओं की दुकानें खुली रहेंगी। डेयरी व डेयरी से संबंधित प्रतिष्ठान खुले रहेंगे। अधिकांश राज्य की सरकारों ने आदेश दिया है कि जीवन के लिए जरूरी सामानों को अपने निकटतम स्थानों से खरीदें। साथ ही यह भी कहा गया है कि इन आदेशों की अवमानना करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। अगर बहुत जरूरी हो तो लॉकडाउन में निजी वाहन का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि बिना वजह बाहर घूमने पर सरकार कार्रवाई कर सकती है। आपात स्थिति में एंबुलेंस को भी बुला सकते हैं।

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किन देशों में है लॉकडाउन

चीन, डेनमार्क, अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, आयरलैंड, इटली, न्यूजीलैंड, पोलैंड और स्पेन में लॉकडाउन जैसी स्थिति है। चूंकि चीन में ही सबसे पहले कोरोना वायरस के संक्रमण का मामला सामने आया था। इसलिए सबसे पहले वहां लॉकडाउन किया गया। इटली में मामला गंभीर होने के बाद वहां के प्रधानमंत्री ने पूरे देश में आंशिक लॉकडाउन किया। लेकिन लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिसके बाद शनिवार को संक्रमण से प्रभावित कुछ इलाकों में फौज को उतारना पड़ा। उसके बाद स्पेन और फ्रांस ने भी कोरोना संक्रमण रोकने के लिए यही कदम उठाया है। http://www.satyodaya.com

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March 25, 2020, 5:08 pm
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