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राजधानी में स्वतंत्रता दिवस पर जगह-जगह हुआ ध्वजारोहण

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लखनऊ। 73 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूरे भारत में शान से तिरंगा लहराया गया। इस राष्ट्र पर्व के अवसर पर राजधानी लखनऊ में भी सरकारी, गैर सरकारी इमारतों, विद्यालयों, मदरसों राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों समेत अन्य स्थानों पर देश प्रेमियों के द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इस जश्न-ए-आजादी के अवसर पर देश की आजादी के लिए अपने प्राण निछावर कर भारत देश को आजादी दिलाने वाले वीर सपूतों और स्वतन्त्रता सैनानीयों को याद कर उन्हें श्रधांजलि दिया गया।

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जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के द्वारा जिला कार्यलय पर ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी समेत बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी समेत विभागों के प्रमुख मौजूद रहे। इस अवसर पर कौशल राज शर्मा ने कहा की आज हम वतन के लिए शहीद हुए वीरों को सच्चे मन से श्रधांजलि देते हैं और हमेशा संविधान के अनुसार जीवन गुजारने का संकल्प लेते हैं।

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कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के द्वारा कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया गया। इस मौके पर राज बब्बर ने कहा कि 15 अगस्त को हमारा देश आजाद हुआ। ये बहुत ही खुशी का पर्व है। आज हमने अपने साथियों के साथ ये पर्व मनाया और कामना करते हैं की यौमे आजादी के इस दिन सभी लोग खुशियां मनायेगे। देश बड़ी कुर्बानीयों के बाद आजाद हुआ है। हम उनको नमन करते हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया और आज हम खुली आजादी में सांस ले रहे हैं।

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जश्न-ए-आजादी के मौके पर इस्लामिक सेंटर आॅफ इंडिया ईदगाह में मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली के द्वारा झंडारोहण किया गया। इस मौके पर मौलाना ने कहा कि जब से देश आजाद हुआ है यहां पर झंडारोहण करके और राष्ट्रगान गाकर आजादी का जश्न मनाया गया। मौलाना ने कहा कि यह सिलसिला आज से नहीं बल्कि जब से मुल्क आजाद हुआ है तब से जारी है। उन्होंने बताया कि यहां बड़ी संख्या में उलमा हजरात ने आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। महात्मा गांधी खुद यहां आए और यहीं से हिंदू-मुस्लिम एकता का नारा भी दिया गया। मौलाना ने कहा कि आज इस बात की जरूरत है कि हिंदू-मुस्लिम एकता के माध्यम से मुल्क की हिफाजत की जाए। मौलाना ने कहा की इस अवसर पर दुआ किया की मुल्क में अमन व शांति कायम रहे और मुल्क के संविधान के हिसाब से हर किसी को उसका हक मिले और हमेशा हम कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आजादी का जश्न मनाते रहें।

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राष्ट्र पर्व के अवसर पर डीजीपी ओपी सिंह के द्वारा पुलिस मुख्यालय सिगनेचर बिल्डिंग में झंडारोहण किया गया और इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा की यूपी पुलिस के द्वारा भव्य कुंभ का सफल समापन कराया गया। साथ ही इन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर कहा कि वीमेन पावर लाइन ने महिलाओं को जोड़ने का काम किया है। महिलाओं को बेहतर सुरक्षा प्रदान किया जा रहा है। जिसके कारण अब वह बिना डर, भय के घर से निकल रही हैं। डीजीपी ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से यूपी पुलिस लोगों की सहायता कर रही है और पूरे विश्व में यूपी पुलिस के सेवा की सराहना भी हो रही है।

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स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि आज हम जो आजादी का जश्न मना रहे हैं। यह हमारे राष्ट्र के वीर सपूतों द्वारा अपने प्राणों को बलिदान दिए जाने का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज हम स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनकी शहादत को नमन करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश समेत केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा लगातार विकास के कार्य किये जा रहे हैं। आगे कहा कि भाजपा द्वारा हमेशा से ही शहीदों और सैनिकों को सम्मान दिया गया है।http://www.satyodaya.com

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क्या है Chief of Defense staff और जानिए क्या होगी पाॅवर

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नई दिल्ली। देश में एक बार फिर से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की चर्चा जोर शोर से चल निकली है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस स्वतंत्रता दिवस समारोह के अपने भाषण में इस पद को सृजित करने का ऐलान किया है। भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाने की कवायद 20 साल पुरानी है। कुछ समस्याओं और सेन्य अफसरों के बीच मतभेदों के चलते आज तक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अमल में नहीं आ सका।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का मतलब है, एक ऐसा अधिकारी जो तीनों सेनाओं के मध्य तालमेल बिठा सके साथ ही सेनाओं और सरकार के बीच सेतु का काम करे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की जिम्मेदारी होगी कि वह तीनों सेना अध्यक्षों से बात करके प्रधानमंत्री को सलाह दे। सैन्य अभ्यास, रक्षा खरीद, बाहरी देशों के साथ रक्षा सहयोग समेत तमाम मामलों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नीति निर्णायक होगा। वह राष्टपति के नीचे रहकर सेन्य शक्ति का इस्तेमाल देश हित में करेगा।#Chiefofarmystaff
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की सबसे पहले मांग कारगिल युद्ध (1999) के दौरान उठी थी। कारगिल युद्ध में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान को धूल चटा दी। लेकिन 65 दिनों तक चले इस युद्ध में भारत को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा, सैकड़ों जवानों को जान की कुर्बानी देनी पड़ी। तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक समूह ने युद्ध की समीक्षा में पाया कि अगर तीनों सेनाओं बीच बेहतर तालमेल होता तो भारत की क्षति को कम किया जा सकता था। मंत्रियों के समूह ने सरकार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाने का सुझाव दिया। लेकिन तब वायु सेना ने इसका विरोध कियाए जिसके बाद वाजपेयी सरकार ने पिफलहाल इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
बाद में बीच का रास्ता निकालते हुए चीफ ऑफ स्टाॅफ कमेटी का गठन किया गया था। लेकिन इस कमेटी प्रमुख के पास ज्यादा शक्तियां नहीं हैं। चीफ ऑफ स्टाॅफ कमेटी केवल तीनों सेनाओं के बीच तालमेल का कार्य करता है। वर्तमान समय में वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ इस कमेटी के अध्यक्ष हैं।

इंदिरा गांधी सैम मानेकशां को बनाना चाहती थीं सीडीएस

युद्ध के समय भारतीय सेनाओं के बीच तालमेल की कमी 1999 के पहले के युद्धों में भी जाहिर हो चुकी थी। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय 1971 में भी थल सेना और वायु सेना के बीच समन्वय की कमी खली थी। खबरों के मुताबिक इस कमी को पूरा करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थल सेना अध्यक्ष सैम मानेकशाॅ को फील्ड मार्शल की रैंक देकर उन्हे सीडीएस बनाना चाहती थी लेकिन तब भी सैन्य प्रमुखों के बीच उभरे मतभेदों के चलते सीडीएस का पद अमल में नहीं आ सका था। बाद में इंदिरा गांधी ने असाधारण वीरता के लिए सैम मानेकशां को फील्ड मार्शल की उपाधि से विभूषित किया था। जनवरी 1973 में मानेकशाॅ को फील्ड मार्शल बनाया गया था। इसके लिए मानेकशां का कार्यकाल भी छह महीने के लिए बढ़ाया गया था।

कई देशों के पास है सीडीएस

सेनाओं के बीच तालमेल की महत्ता इसी से समझी जा सकती है कि अमेरिका, चीन, यूनाइटेड किंगडम, जापान जैसे दुनिया के ताकतवर देशों में चीफ ऑफ डिफेंस जैसी व्यवस्था है। नॉटो देशों की सेनाओं में ये पद हैं। बताया जा रहा है कि विस्तृत भूमिए लंबी सीमाओं, तटरेखाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों को सीमित संसाधनों से निपटने के लिए भारत के पास एकीकृत रक्षा प्रणाली के लिए चीफ ऑफ डिफेंस पद की बहुत जरूरत थी।http://www.satyodaya.com

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श्रमिक हितकारी है उत्तर प्रदेश भवन एवं निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड, जानिए क्यों हुआ इसका गठन

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लखनऊ। देश की श्रम शक्ति का बहुत बड़ा भाग असंगठित व अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों में भवन निर्माण कार्यों में लगे हुए श्रमिकों की संख्या काफी अधिक है। निर्माण श्रमिकों के कार्य की प्रवृत्ति ऐसी होती है कि उन्हें कठिन स्थितियों में कार्य करना पड़ता है। जिसमें धूल व प्रदूषण, जोखिम पूर्ण कार्य अनिश्चित व अस्थाई रोजगार, कार्य के घण्टों का अनिश्चित होना, कल्याणकारी उपायों का अभाव आदि शामिल हैं, जो निर्माण श्रमिकों की कार्य दशाओं को और कठिन बनाते है।
श्रमिकों की इन्ही समस्याओं को देखते हुए निर्माण श्रमिकों के नियोजन व सेवा शर्तों का विनियमन करने तथा उनकी सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य व कल्याण के उपाय करने के उद्देश्य से भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक अधिनियम 1996 बनाया गया था। जिसके अन्तर्गत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन करते हुये प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के कल्याण एवं उनके जीवन में गुणात्मक सुधार करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की हैं।
कोई भी प्रतिष्ठान जो सरकार के स्वामित्व या उसके नियन्त्रण के अधीन हो, कोई निकाय, कम्पनी फर्म कोई संघ या व्यक्तियों के कोई संगठन जो भवन व अन्य सन्निर्माण कार्य में श्रमिकों को नियोजित करते हैं, ठेकेदार से सम्बन्धित प्रतिष्ठान, जो श्रमिक से कार्य कराते हैं इस अधिनियम के अन्तर्गत आते हैं। इसी प्रकार निर्माण स्थलों जहां वर्ष मेे किसी भी दिन 10 या इससे अधिक निर्माण श्रमिक नियोजित हैं का पंजीयन भी अधिनियम के अन्तर्गत अनिवार्य है, रिहायशी भवनों की स्थिति में 10 लाख रूपये से अधिक लागत के भवनों पर ही अधिनियम के प्राविधान लागू हैं। प्रदेश में माह जून 2019 तक कुल 210841 निर्माण स्थलों का पंजीयन किया जा चुका है।

उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम 1996 की धारा-3 द्वारा अधिनियम से आवर्त सभी भवनों एवं अन्य सन्निर्माणों के लागत का 01 प्रतिशत धनराशि उपकर लिये जाने का प्राविधान है। जून 2019 तक कुल 4786.30 करोड़ रूपये की धनराशि उपकर के रूप में बोर्ड को प्राप्त हो चुकी है। उपकर के रूप में प्राप्त धनराशि का उपयोग पंजीकृत निर्माण श्रमिकों हेतु संचालित कल्याणकारी योजनाओं पर व्यय किया जाता है। इस अधिनियम के अन्तर्गत 18 से 60 वर्ष की आयु वर्ग के निर्माण श्रमिक जो निर्माण प्रक्रिया में एक वर्ष में 90 दिन से अधिक कार्य किये हो, पंजीयन के लिए पात्र है।
भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक वे हैं जो किसी भवन या अन्य निर्माण (कन्सट्रक्शन) कार्य में अकुशल, अर्द्ध कुशल श्रमिक के रूप में शारीरिक, तकनीकी, सुपरवाइजरी, लिपिकीय कार्य वेतन या पारिश्रमिक पाने के लिए करते हैै। इसके अन्तर्गत 40 प्रक्रियाओं के निर्माण कार्यों में लगे प्रदेश में माह जून 2019 तक 4941825 श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है।

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इन श्रमिको में बांध, पुल, सड़क या भवन निर्माण के अधीन कोई संक्रिया, ईट-भट्टों पर ईंट निर्माण, मिट्टी का कार्य, राजमिस्त्री, सीमेंट कंक्रीट, ईंट आदि ढोने का कार्य, इलेक्ट्रानिक, सड़क निर्माण, पुताई, बढ़ई, मिट्टी, बालू, मोंरम के खनन, लिपिकीयध्लेखा कार्य, प्लम्बरिंग, वेल्डिंग, सभी प्रकार के पत्थर काटने, तोड़ने व पीसने वाले श्रमिक, चौकीदारी, लोहार, मकानोंध्भवनों की आन्तरिक सज्जा का कार्य, टाइल्स लगाने, मार्बल एवं स्टोन वर्क, कुआं खोदना, छप्पर डालने का कार्य, चट्टान तोड़ने, खनिकर्म, हथोड़ा चलाने, चूना बनाना, मिक्सर चलाना, रोलर चलाना, बड़े यान्त्रिक कार्य, जैसे-मशीनरी, पुल निर्माण कार्य, खिड़की, ग्रिल, दरवाजे आदि की गढ़ाई एवं स्थापना का कार्य, रसोई में उपयोग हेतु माडूलर इकाईयों की स्थापना का कार्य, मोजैक पालिश, लिफ्ट एवं स्वचालित सीढ़ी की स्थापना, सुरक्षा द्वार एवं अन्य उपकरणों की स्थापना का कार्य, सामुदायिक पार्क या फुटपाथ का निर्माण, स्प्रे वर्क या मिक्सिंग वर्क, सुरंग निर्माण, स्विमिंग पूल, गोल्फ कोर्स आदिध्सहित अन्य मनोरंजन सुविधाओं का निर्माण कार्य, अग्निशमन प्रणाली की स्थापना एवं मरम्मत कार्य, कुएं से गाद (तलछट) हटाने का कार्यध्डिविंग तथा ठण्डे एवं गर्म मशीनरी की स्थापना और मरम्मत का कार्य करने वाल श्रमिक सम्मिलित किये गये हैं। जिन्हें उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत पंजीकृत करते हुये प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही 18 प्रकार की श्रमिक हितकारी एवं कल्याणकारी योजनाओें से लाभान्वित किया जा रहा है।http://www.satyodaya.com

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राजस्थान सबआर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड में धांधली करने वाले गिरोह का एसटीएफ ने किया भांडाफोड़

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लखनऊ। एसटीएफ उत्तर प्रदेश को राजस्थान सबार्डीनेट एण्ड मिनिस्टीरियल सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड व विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की भर्ती में धांधली कराने वाले गिरोह के 5 सदस्यों को जनपद लखनऊ में गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से 61 लाख 50 हजार रूपये व भारी संख्या में परीक्षाओं से सम्बन्धित अभिलेख बरामद करने में सफलता हासिल हुई है। जिसमें पकड़े गए आरोपियों की पहचान विनोद कुमार, शादान खान, पंकज कुमार, कमल किशोर यादव और अजीत कुमार के रूप में हुई है।

एसटीएफ उत्तर प्रदेश को विगत दिनों से काफी विभिन्न स्रोतों से सूचना प्राप्त हो रही थी कि शातिर अपराधियों द्वारा विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से भर्ती हेतु धन लेकर धांधली की जा रही है। जिसमें प्रयागराज फील्ड इकाई उन सूचनाओं को देखते हुए लखनऊ में मौजूद थे कि मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की भर्ती में धांधली करने वाले गिरोह के लोग भारी मात्रा में रूपये व अभिलेख लेकर जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नं0 2 के पास खड़े हैं। मुखबिर द्वारा प्राप्त सूचना पर उक्त टीम द्वारा तत्काल जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नं0 02 के पास पहुॅच कर देखा गया तो पीपल के पेड़ के नीचे पांच संदिग्ध व्यक्ति आपस में बातचीत करते हुए हाथ में लिये हुए बैगों का आदान-प्रदान कर रहे थे। तभी पुलिस बल द्वारा एक बारगी दबिश देकर उपरोक्त पांचों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

जिसमें बताया गया कि आरोपी विनोद कुमार गौड़ ने बताया कि वह साल 2014 से राभव लिमिटेड, विपुलखण्ड गोमती नगर लखनऊ में कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग का कार्य कर रहा है़। उसी के साथ शादान खान भी राभव लिमिटेड में डाटा इन्ट्री आपरेटर के पद पर काम करता है। राभव लिमिटेड को विभिन्न प्रदेशों की प्रतियोगी परीक्षाओं की डाटा इन्ट्री व रिजल्ट आदि बनाने का टेण्डर समय≤ पर मिलता रहता है। साल 2014 से 2016 तक यूपी एसएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं की डाटा इन्ट्री व रिजल्ट बनाने का काम राभव लिमिटेड को मिला था। लगभग 6 माह पहले राजस्थान सबार्डीनेट एण्ड मिनिस्टीरियल सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (आरएसएमएसएसबी) द्वारा महिला सुपर वाइजर, कृषि पर्यवेक्षक व प्रयोगशाला सहायक की भर्ती परीक्षाओं की ओएमआर स्कैनिंग कर परिणाम बनाने का टेण्डर राभव लिमिटेड को मिला था। विनोद और शादान ने मिलकर अपने मित्र पंकज गुप्ता उपरोक्त को ऐसे परीक्षार्थियों का जुगाड़ करने की बात की जो परीक्षा रिजल्ट में धांधली करवाकर भर्ती होने के एवज में अच्छी रकम दे सके।

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आगे बताया कि कुछ दिन बाद पंकज गुप्ता ने उपरोक्त तीनों भर्ती परीक्षाओं के 18 अभ्यर्थियों की सूची व अनुक्रमांक विनोद व शादान को देते हुए कहा कि यदि उक्त अभ्यर्थियों की भर्ती करवाने में विनोद व शादान सफल रहते हैं तो प्रति अभ्यर्थी के हिसाब से 5 लाख रूपये उन लोगों को मिल जाएंगे। इस सूचना पर विनोद व शादान ने पंकज के माध्यम से उक्त सभी 18 अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट खाली छोड़ देने की सूचना कराई। उक्त अभ्यर्थियों द्वारा ऐसा ही किया गया। परीक्षोपरान्त जब सभी अभ्यर्थियों की ओएमआर सीट राभव लिमिटेड के प्रतिनिधि के रूप में विनोद व शादान द्वारा स्कैन की जा रही थी, तब उनके द्वारा पंकज गुप्ता को उपलब्ध कराई गयी। उपरोक्त 18 अभ्यर्थियों की अनुक्रमांक सूची से मिलान कर सूची के अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट अलग कर अधिकृत आन्सर-की से मिलाकर ओएमआर शीट में सही उत्तरों के गोलों को भर दिया गया। रिजल्ट में उक्त सभी 18 अभ्यर्थी सफल रहे। इन्ही सफल अभ्यर्थियों से पैसा एकत्र कर पंकज गुप्ता व उसके सहयोगी कमल किशोर व अजीत कुमार, विनोद व शादान को देने के लिए आये थे।

आरोपी पंकज गुप्ता ने बताया कि विनोद व शादान द्वारा अभ्यर्थियों का जुगाड़ करने व उनसे पैसा लेने की बात उसने अपने मित्र अजीत कुमार तथा अजीत कुमार ने अपने मित्र कमल किशोर से बताई थी। पंकज, अजीत व कमल किशोर अपने-अपने परिचयों/सम्पर्कों के माध्यम से ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करने लगे, जो उन्हें भर्ती होने के एवज में 8 लाख रूपये दे सकें। इसी दौरान कमल किशोर का सम्पर्क राजस्थान के दो व्यक्ति रमेश मीणा व धर्मेश मीणा से हो गया। रमेश व धर्मेश उपरोक्त अपने स्थानीय सम्पर्को के कारण 18 ऐसे अभ्यर्थियों की व्यवस्था करने में सफल रहे, जो भर्ती होने के एवज में 9 लाख रूपये देने को तैयार हो गये। पंकज गुप्ता की बात का समर्थन अजीत व कमल किशोर द्वारा भी किया गया। सभी पांच आरोपियों से की गयी पू्छताछ से प्राप्त तथ्यों की पुष्टि तकनीकी एवं भौतिक दोनों रूपों से प्राप्त सूचनाओं से भी हुई है।http://www.satyodaya.com

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