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इतिहास : आज ही के दिन मुंबई की लोकल ट्रेनों में फटे थे सात कुकर…

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11 जुलाई को आतंकवाद ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को एक ऐसा जख्म दिया, जिसकी टीस समय के साथ साथ बढ़ती चली गई। 11 जुलाई 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट की याद आते ही आज भी ट्रेन में कदम रखने से पहले दिलो-दिमाग में डर घर कर जाता है।

इन धमाकों में 188 लोगों की मौत हो गई थी और 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में 7 सीरियल बम धमाके हुए थे। यह 1993 के बाद मुंबई में हुआ बड़ा आतंकी हमला था। जांच के बाद पाया गया कि इस हमले में प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन का हाथ था। सारे ब्लास्ट लोकल ट्रेनों के फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट में हुए थे। इस धमाके में कुल 90 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

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आतंकियों ने प्रेशर कुकर में छिपाई थी मौत
मुंबई में 11 जुलाई 2006 को शाम 6 बजकर 24 मिनट से लेकर 6 बजकर 35 मिनट के बीच एक के बाद एक सात ब्लास्ट हुए थे। ये सभी ब्लास्ट मुंबई के पश्चिम रेलवे पर लोकल ट्रेनों के फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट में करवाए गए थे। खार, बांद्रा, जोगेश्वरी, माहिम, बोरीवली, माटुंगा और मीरा-भायंदर रेलवे स्टेशनों के पास ये ब्लास्ट हुए थे। ट्रेनों में लगाए गए बम आरडीएक्स, अमोनियम नाइट्रेट, फ्यूल ऑयल और कीलों से बनाए गए थे, जिसे सात प्रेशर कुकर में रखकर टाइमर के जरिए उड़ाया गया था।

नवंबर 2006 में आतंकवाद रोधी दस्ते ने आरोप पत्र दायर करके 30 आरोपियों को नामजद किया था जिसमें 17 भगोड़े भी शामिल थे। वहीं, एटीएस ने ब्लास्ट की जांच के बाद 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। जिसके बाद अदालत ने 5 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई और 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी थी। एक को रिहा कर दिया गया था।

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कर्नाटक सरकार पर बढ़ा संकट, सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों के पक्ष में सुनाया फैसला

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नई दिल्ली। कर्नाटक में एचडी कुमार स्वामी की सरकार का बच पाना अब लगभग नामुक्किन हो गया है। कई दिनों से चल रहे इस सियासी संकट का अंत सुप्रीम कोर्ट से हो गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के 10 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश विधानसभा अध्यक्ष को दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि विधायक आज शाम 6 बजे अपना इस्तीफा विधान सभा स्पीकर रमेश कुमार को सौंपें। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया जिसमें मांग की गई थी कि विधान सभा स्पीकर को उनके इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए। दरअसल इन विधायकों ने कई दिन पहले इस्तीफा दे दिया था, लेकिन स्पीकर इनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहे थे। उनका कहना था कि वो जल्दबाजी नहीं करेंगें और रूलबुक, संविधान और अपने विवेक के आधार पर फैसला लेंगे।#Karnataka ka natak

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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी होने के बाद वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पत्रकारों से कहा, इस्तीफा देने वाले इन 10 विधायकों ने पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। जैसे ही वो बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उतरेंगे वो उन्हें मिलेगी। क्योंकि हमने कोर्ट को बताया कि कल भी असेंबली में हंगामा हुआ और मुंबई के होटल के अंदर और बाहर भी हंगाम हुआ। कोर्ट ने फैसला दिया है। बाकी मुकदमा कल है। पत्रकारों के इस सवाल पर रोहतगी ने कहा कि अदालत का यह आदेश 10 विधायकों के लिए है, क्योंकि 10 विधायक कोर्ट में थे। बाकी 5 या 6 विधायक जो हैं, वो नई याचिका लगाएं।http://www.satyodaya.com

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क्यों मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस? ये जरूरी बातें जान लीजिए

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विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य जनसंख्या और उससे जुड़े मुद्दों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है।

कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत

1989 से विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत की गई। इस दिन की शुरुआत, संयुक्त राष्ट्र संघ के विकास कार्यक्रम के तहत हुई और इसके बाद सारे देशों में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाने लगा। इस दिन लोगों को बताया जाता है कि तेजी से जनसंख्या की वृद्धि कई वजहों से समाज और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बता दें कि गैरकानूनी होने के बाद भी कुछ पिछड़े इलाकों में आज भी बाल विवाह की परंपरा है। ऐसे में कम उम्र में ही महिलाएं मां बन जाती हैं। जो कि बच्चे और मां दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। रूढ़िवादी समाज में आज भी लड़के की चाह में पुरुष, परिवार नियोजन अपनाने को तैयार नहीं होते।

भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य

आबादी के लिहाज से यूपी सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य है। यहां देश के करीब 20 करोड़ लोग रहते हैं। सिक्किम सबसे छोटा राज्य है, जहां की आबादी 5 लाख के करीब है। यूपी के बाद देश के दो बड़े राज्य महाराष्ट्र और बिहार हैं। महाराष्ट्र की आबादी 11 करोड़ और बिहार की आबादी करीब 10 करोड़ है। एक आंकड़े के मुताबिक जनसंख्या के मामले में हम 2024 तक चीन को पछाड़ देंगे। तब हमारी आबादी 144 करोड़ के करीब होगी। 2029 तक हमारी जनसंख्या 150 करोड़ को पार कर जाएगी। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2061 के बाद भारत की आबादी घटनी शुरू होगी। यानी आबादी कम होने के लिए हमें अभी भी 42 साल का इंतजार करना होगा।

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अतिरिक्त बजट के बाद भी नहीं तैयार हुई आयुर्वेदिक कॉलेज की बिल्डिंग

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दो साल बाद भी नहीं तैयार हुई नई ओपीडी और इंडोर बिल्डिंग, देरी होने पर आठ करोड़ का आया अतिरिक्त भार

लखनऊ। जहां एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर अफसरों के तबादले कर रहे हैं। वहीं राजधानी लखनऊ में ही टूड़ियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में शिथिलता देखने को मिली है। यहां की नई ओपीडी और इंडोर बिल्डिंग दो साल बाद भी बनकर पूरी तरह से तैयार नहीं हो पायी है, जबकि ठेकेदार को इस ओपीडी बिल्डिंग को वर्ष 2017 में ही हैंडओवर करना था। वहीं इस देरी की वजह से पूरे प्रोजेक्ट पर आठ करोड़ रुपए अतिरिक्त बजट भी बढ़कर खर्च किया जा चुका है, लेकिन बारिश शुरू होने के बाद भी नई बिल्डिंग में मरीजों को इलाज नहीं मिलना शुरू हो सका है। पुराने जर्जर भवन में ही इलाज कराने को मरीज मजबूर हैं। इससे मरीजों के साथ इलाज करने वाले डॉक्टर भी परेशान हैं।

टूडियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में मरीजों का इलाज अभी तक अकेडमिक ब्लॉक में कई वर्षों से चल रहा है। यहां पर कॉलेज प्रशासन ने छोटे से चार-पांच केबिन बना रखे हैं, जिसमें डॉक्टर के सही से बैठने की जगह तक नहीं है। ऐसे में वरिष्ठ डॉक्टर ज्यादातर अपने कमरों में ही मरीजों का इलाज और जांच करते हैं। इन केबिनों का यह हाल है कि वहां पर एक या दो मरीज ही बमुश्किल खड़े हो पाते हैं। पुरानी बिल्डिंग हो जाने से बारिश में तो यहां खड़े होने में भी लोग डरते हैं। स्थिति यह होती है कि मरीज ब्लॉक में बने केबिन से लेकर पूरे परिसर में इधर-उधर खड़े रहते हैं। गंभीर मरीज तो फर्श पर ही बैठ जाते हैं।

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आयुर्वेदिक कॉलेज की नई ओपीडी बिल्डिंग वर्ष 2017 दिसंबर में बनकर तैयार हो जानी थी। डॉक्टरों और कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार की लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली से बिल्डिंग बनने में देरी हुई है। दो साल देरी से ओपीडी और इंडोर बिल्डिंग बनने का बजट 48 से 56 करोड़ रुपए तक खर्च कर दिया गया। देरी होने पर शासन पर आठ करोड़ रुपए अतिरिक्त भार भी आ गया। लेकिन अभी भी बिल्डिंग बनकर हैंडओवर नहीं की जा सकी है।

आयुर्वेदिक कॉलेज की पुरानी बिल्डिगें जर्जर हो चुकी हैं। यहां कार्यरत कर्मचारी भी डर-डर कर काम कर रहे हैं। इनका कहना है कि इस बरसात में बिल्डिगों के गिरने का डर है। नई बिल्डिंग बनाने में कोई तेज गति नहीं दिखाई दे रही है। डॉ. आयुर्वेदिक कॉलेज प्रधानाचार्य प्रकाश चंद्र सक्सेना निर्माण एजेंसी ने इस बिल्डिंग को सितंबर माह में हैंडओवर करने के लिए लिखकर दिया है। हैंडओवर मिलने पर नई ओपीडी में मरीजों का इलाज शुरू किया जाएगा। अभी पुरानी बिल्डिंग में ही इलाज किया जा रहा है। http://www.satyodaya.com

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July 11, 2019, 4:46 pm
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