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पीली साड़ी वाली पोलिंग ऑफीसर का धमाकेदार इंटरव्यू, पर्सनल से प्रोफेशनल लाइफ तक

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लखनऊ। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हुई। फोटो में महिला पोलिंग ऑफीसर हैं जिन्होंने पीली साड़ी पहन रखी है। तमाम तरह के मेसेजस के साथ वायरल हो रही फोटो ट्विटर जैसी सोशल साइट्स पर टॉप ट्रेंडिंग में है। बता दें, महिला पोलिंग ऑफीसर का नाम रीना द्ववेदी है और वो पीडब्लूडी में कार्यरत हैं।

सत्योदय से खास बातचीत में महिला पोलिंग ऑफीसर रीना द्ववेदी ने बताया कि कैसे तस्वीर के वायरल होने के बाद उनकी जिन्दगी में बदलाव आया है। लोग उनके साथ सेल्फी लेते हैं। उन्हें रास्ते में देख के पहचान लेते हैं। उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ से लेकर प्रोफेशनल लाइफ तक की बातें शेयर की। साथ ही फोटो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। http://www.satyodaya.com

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डीएम ने दिए निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश…

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नगर निगम की दर पर हो मृत्यु पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था, कांजीहाउस निर्माण के लिए जिला पंचायत को भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश

लखनऊ। लखनऊ जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा है कि निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए कोई वाहन की व्यवस्था है यदि नहीं है तो वाहन खरीदने के लिए विभिन्न संस्थाओं सामाजिक संस्थाओं से मिलकर स्वयं सहायता के रूप में धनराशि की व्यवस्था की जाये। जिलाधिकारी ने ये बातें गुरूवार को कलेक्ट्रेट स्थिति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में एसपीसीए की समीक्षा बैठक में कही। बैठक की अध्यक्षता के दौरान डीएम ने बताया कि निराश्रित बेसहारा सड़क व गलियों के कुत्तों को जो कि दुर्घटना में घायल हो जाते हैं तथा उन्हें किसी प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। उन्हें चिकित्सा उपलब्ध कराने एवं भरण पोषण के एसपीसीए आश्रम स्थल पर रखा जाता है।

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उन्होंने बताया कि उनकी अध्यक्षता में सोसाइटी का संचालन किया जाता है। उपरोक्त संस्था को किसी भी प्रकार की आर्थिक अनुदान राज्य सरकार, केन्द्र सरकार से नहीं मिलती। एसपीसीए सोसाइटी फार प्रिवेन्शन क्रूयल्टी टू ऐनीमल्स के पशु चिकित्सालय न्यू हैदराबाद लखनऊ पर बने चिकित्सालय पर चिकित्सा एवं देखभाल की जाती है। नगरीय क्षेत्र में कुत्तों में बधियाकरण के सम्बन्ध में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यदि उन्हे स्थान एवं सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाये तो डाॅक्टरों के रोस्टर के अनुसार एक दिन में 10 का बधिायाकरण किया जा सकता है। वहीं डीएम ने मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को निर्देश दिया कि नगर निगम की दर पर मृत्यु पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करें। कांजी हाउस की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत की भूमि जिला पंचायत को उपलब्धा करा दी जाये जहां पर कांजी हाउस का निर्माण कराया जा सके और निराश्रित पशुओं को रखा जाये।http://www.satyodaya.com

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राजधानी में लगातार बढ़ रही टीबी मरीजों की संख्या, सरोजनी नगर ब्लॉक में मिले सबसे ज्यादा 26 मरीज

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लखनऊ। राजधानी में टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 6 लाख 33 हजार 712 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 2006 व्यक्तियों में संदिग्ध टीबी रोग के लक्षण पाए गए। जांच कराए जाने के बाद 164 व्यक्तियों में इसकी पुष्टि की गई। जबकि सीएमओ ने 5 लाख 40 हजार व्यक्तियों को सक्रिय क्षयरोग खोज अभियान के लिए स्क्रीनिंग किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। सीएमओ कार्यालय में गुरूवार को जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि 10 से 22 जून तक चिन्हित क्षेत्रों में सक्रिय क्षयरोग खोज अभियान संचालित किया गया। इसके लिए 750 सदस्यों द्वारा 5 लाख 40 हजार व्यक्तियों को अभियान के लिए स्क्रीनिंग किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

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उन्होंने बताया कि उक्त दिवस के दौरान पर्यवेक्षकों व टीम सदस्यों द्वारा 6 लाख 33 हजार 712 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 2006 व्यक्तियों में संदिग्ध क्षय रोग के लक्षण पाए गए। जांच कराए जाने के उपरांत 164 व्यक्तियों में क्षय रोग की पुष्टि संबंधित क्षेत्र के चिकित्सकों द्वारा किया गया जिनको कार्यक्रम अंतर्गत निकटतम केंद्र पर उपचार की व्यवस्था प्रारंभ करा दी गई है। डीटीओ लखनऊ डॉक्टर बी.के. सिंह ने अवगत कराया कि 10 दिवसीय अभियान के दौरान सरोजनी नगर ब्लॉक में सबसे ज्यादा 26 रोगी चिन्हित किए गए। सभी 16403 चयनित रोगियों को डीबीटी के माध्यम से निक्षय पोषण योजना का लाभ सीधे उनके खाते में स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। 500 प्रति माह की दर से मरीजों के खाते में उपचार अवधि तक निरंतर स्थानांतरित की जाती रहेगी।

सीएमओ ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से अब तक लखनऊ में 2 करोड़ 38 लाख 42 हजार का भुगतान मरीजों के खाते में किया जा चुका है। सक्रिय रोगी खोज अभियान में जनपद लखनऊ निरंतर उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रथम चरण में फरवरी 2018 में 38 क्षयरोगी। द्वितीय चरण जून में 72 क्षयरोगी, तृतीय चरण सितंबर में 96 क्षयरोगी, चतुर्थ चरण जनवरी 2019 में 119 क्षयरोगी तथा जून के चरण में कुल 164 क्षय रोगी की खोजे गए हैं।http://www.satyodaya.com

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सैम मानेकशां : एक ऐसा भारतीय योद्धा जिसने पाकिस्तान को चीर डाला, इंदिरा भी मानती थीं बहादुरी का लोहा

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लखनऊ। पाकिस्तान को चीर कर उसे दो भागों में बांटने वाले भारतीय सेना के जांबाज हीरो पफील्ड मार्शल सैम मानेकशां की आज (गुरुवार) को पुण्यतिथि है। 27 जून 2008 का ही वो दिन था जब सैम मानेकशॉ ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। मानेकशां बहादुरी और सैन्य कारनामों के साथ अपने स्टाइल, हाजिर जवाबी के लिए भी जाने जाते थे। उन्हीं के नेतृत्व में भारत ने साल 1971 की जंग में पाकिस्तान को घुटनों पर छुका दिया था। जिसके बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ था। सैम मानेकशॉ का पूरा नाम होरमुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ था। उनका जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में हुआ था। बचपन से ही निडर और बहादुरी की वजह से उनके चाहने वाले इन्हें सैम बहादुर कहते थे। सैम भारतीय सेना के पहले ऐसे जनरल बने जिन्हें उनकी बहादुरी के लिए प्रमोट कर फील्ड मार्शल की रैंक दे दी गई थी। पिता के विरोध के बावजूद वह सेना में आए। इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा दी। वह 1932 में पहले 40 कैडेट्स वाले बैच में शामिल हुए।#SamManekshaw

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मानेकशां जब सेन्य अधिकारी बने तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने सख्त मिजाज के लिए जानी थीं। अधिकारी और नेता उनसे डरते थे। लेकिन फील्ड मार्शल मानेकशां अपने मिजाज के अनुरूप ही इंदिरा के साथ भी पेश आते थे। जिसका एक किस्सा काफी मशहूर है। भारत-पाकिस्तान के बीच जब 1971 की लड़ाई शुरू होने वाली थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम मानेकशॉ से पूछा था, क्या लड़ाई की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं? इस पर मानेकशॉ ने तपाक से कहा- ‘I Am Always Ready Sweety’ । माना जाता है कि वह पारसी कनेक्शन होने की वजह से भी ऐसे बोलते थे, क्योंकि इंदिरा के पति फिरोज गांधी पारसी थे। मेजर जनरल वीके सिंह कहते हैं, एक बार इंदिरा गांधी जब विदेश यात्रा से लौटीं तो मानेकशॉ उन्हें रिसीव करने पालम हवाई अड्डे गए। इंदिरा गांधी को देखते ही उन्होंने कहा कि आपका हेयर स्टाइल जबरदस्त लग रहा है। इस पर इंदिरा गांधी मुस्कराईं और बोलीं, और किसी ने तो इसे नोटिस ही नहीं किया।

सैम को सबसे पहले शोहरत मिली साल 1942 में। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बर्मा के मोर्चे पर एक जापानी सैनिक ने अपनी मशीनगन की सात गोलियां उनकी आंतों, जिगर और गुर्दों में उतार दीं। उनका बचना लगभग नामुमकिन हो गया था। उन्हें गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया। इस दौरान एक सर्जन ने उनका ऑपरेशन करने से पहले उनसे पूछा- आपके साथ क्या हुआ था? तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, मुझे एक खच्चर ने लात मार दी है।
ऐसा ही एक और दिलचस्प किस्सा है। 1962 में जब मिजोरम की एक बटालियन ने भारत-चीन युद्ध से दूरी बनाने की कोशिश की तो मानेकशॉ ने उस बटालियन को पार्सल में चूड़ी के डिब्बे के साथ एक नोट भेजा। जिस पर लिखा था कि अगर लड़ाई से पीछे हट रहे हो तो अपने आदमियों को ये पहनने को बोल दो। फिर उस बटालियन ने लड़ाई में हिस्सा लिया और भरपूर वीरता दिखाई।
अपनी शरारतों और मजाक के लिए प्रसिद्ध सैम अनुशासन या सैनिक नेतृत्व और नौकरशाही के बीच संबंधों के मामले में कोई समझौता नहीं करते थे।

उनके मिलिट्री असिस्टेंट रहे लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंदर सिंह ने बताया था कि एक बार सेना मुख्यालय में एक बैठक हो रही थी। रक्षा सचिव हरीश सरीन भी वहां मौजूद थे। उन्होंने वहां बैठे एक कर्नल से कहा, यू देयर, ओपन द विंडो। वह कर्नल उठने लगा। तभी सैम ने कमरे में प्रवेश किया। रक्षा सचिव की तरफ मुड़े और बोले, सचिव महोदय, आइंदा से आप मेरे किसी अफसर से इस टोन में बात नहीं करेंगे। यह अफसर कर्नल है, यू देयर नहीं। उस जमाने के बहुत शक्तिशाली आईसीएस अफसर हरीश सरीन को उनसे माफी मांगनी पड़ी।
सैम की बेटी माया दारूवाला कहती हैं कि सैम अक्सर कहा करते थे कि लोग सोचते हैं कि जब हम देश को जिताते हैं तो यह बहुत गर्व की बात है लेकिन इसमें कहीं न कहीं उदासी का पुट भी छिपा रहता है क्योंकि लोगों की मौतें भी हुई होती हैं।
उनकी बेटी माया दारूवाला ने एक मीडिया हाउस को बताया था कि लोग सोचते हैं कि सैम बहुत बड़े जनरल हैं, उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ी हैं, उनकी बड़ी-बड़ी मूंछें हैं तो घर में भी उतना ही रौब जमाते होंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था। वह बहुत खिलंदड़ थे, बच्चे की तरह। हमारे साथ शरारत करते थे। हमें बहुत परेशान करते थे। कई बार तो हमें कहना पड़ता था कि डैड स्टॉप इट। जब वो कमरे में घुसते थे तो हमें यह सोचना पड़ता था कि अब यह क्या करने जा रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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June 30, 2019, 10:46 am
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