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युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ‘कोल्हापुरी चप्पल’ का है क्रेज, जानिए क्या है इतिहास

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कोल्हापुर महाराष्ट्र का फेमस जगह है। कोल्हापुर अपने रंग-बिरंग परिधान, खाने-पीने और खूबसूरत चप्पलों के लिए पूरे देश में मशहूर है। कोल्हापुरी चप्पलों का महाराष्ट्र के कोल्हापुर से शुरू हुआ व्यवसाय आज विश्व भर में मशहूर है। कोल्हापुरी चप्पलें 12वीं सदी की शुरुआत से पहनी जा रही हैं। इस से पहले जिस गांव में ये चप्पलें बनती थीं उसी गांव के नाम पर उन का नाम रख दिया जाता था। चलिए आपको आज इसका इतिहास बताते हैं।

12वीं सदी में भी बनती थी कोल्हापुरी चप्पलें
भारत में कोल्हापुरी चप्पलें 12वीं सदी में भी बनती थी, लेकिन 20वीं सदी में कोल्हापुरी ब्रांड विकसित हुआ था। छत्रपति शाहू महाराज (1874-1922) ने कोल्हापुरी चप्पलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया था और अपने शासन में कोल्हापुर में 29 टैनिंग सेंटर खोले थे।

सौदागर परिवार ने दिलाई पहचान

सौदागर परिवार ने अपने नई डिजाइन वाले चप्पल को मुंबई के मशहूर जे जे एंड संस शूज नामक दुकान के मालिक को बेचा। इस रिटेलर की दुकान पर इसको बहुत अधिक पसंद किया गया। बढ़ती मांग को देखते हुए रिटेलर ने कई और जोड़ी चप्पलों की मांग कर डाली। एक समय ऐसा आया जब सौदागर परिवार अकेले मार्केट में इसकी डिमांड नहीं पूरी कर पा रहा था। तब वे दूसरे लोगों को भी अपनी इस हस्तकला का हुनर सिखाने लगे। इसको इतना पसंद किया गया कि, ये अपने निर्मित गांव के नाम पर ही कोल्हापुरी के नाम से ही मशहूर हो गई। आज भले ही अलग-अलग डिजाइनों की वजह से इसके कई नाम हों, मगर मार्केट में इसे कोल्हापुरी चप्पल के नाम से ही जाना जाता है। इसी के साथ ही मुंबई की वह शॉप भी आज अपनी शाख बनाये हुए है। रिपोर्टों की मानें तो इसको बनाने के लिए जो चमड़ा प्रयोग किया जाता है। वह अधिकतर कोलकाता और चेन्नई से आता है। आज जिला कोल्हापुर में कई ऐसे कुटुंब परिवार रहते है, जिनकी रोजी रोटी इसी चप्पल से चलती है।

कैसे तैयार होती है कोल्हापुरी चप्पल
अब ये चप्पलें समय की मांग के हिसाब से अलग-अलग पैटर्न में बनाई जाने लगी है। इसको बनाने के लिए बकरों, भैंस व बैलों के चमड़े का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले चमड़ों को कुछ देर पानी में छोड़ देते है, जिससे चमड़ा नरम हो जाता है। इससे चमड़े की बदबू भी लगभग समाप्त हो जाती है। इसके बाद फर्मे की साइज के हिसाब से चमड़े को काट लिया जाता है। वाटर प्रूफ चप्पल बनाने के लिए कटे हुए चमड़े को तेल में भिगो देते हैं। इससे चमड़े की झुर्री को भी ख़त्म करने में मदद मिलती है

फिर चप्पल की एड़ी को उसके हिसाब से बनाकर चमड़े को सोल से अच्छी तरह जोड़ देते हैं। आगे चप्पल की डिजाइन के हिसाब से इसे आकार दिया जाता है। जैसे दो पट्टे, अंगूठेदार, आदि पैटर्न की तरह इसे तैयार करते हैं। आज के समय में पहले की अपेक्षाकृत हल्के वजन में निर्मित किए जाते हैं। इसको पहले अधिकतर सफ़ेद ही धागे से सिला जाता था। वहीं इसका रंग भूरा या पीला ही होता था, मगर बढ़ते फैशन में कोल्हापुरी चप्पल को भी अलग-अलग रंगों में रंग दिया गया। आज मार्केट में कोल्हापुरी लाल, हरी, गुलाबी, काली व सुनहरे आदि जैसे कई रंग-बिरंगे कलरों में उपलब्ध हैं। पूरी तरह तैयार होने के बाद इस पर धागे की कढ़ाई, मोती व गोटे (लैस) आदि से सजाया भी जाता है। कोल्हापुरी चप्पलों के अलावा इसके जूते व जूतियां भी काफी पसंद की जाती हैं।

कोल्हापुरी चप्पलों को मिला GI टैग
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की ओर से देश और दुनिया भर मे मशहूर कोल्हापुरी चप्पल को जीआई टैग दिया गया है। इस टैग की मांग पिछले कई वर्षों से लगातर की जा रही थी। इस टैग के मिलने के बाद ये चप्पल बस उन्हीं इलाको में बनाई जा सकेगी जिन इलाकों को इन्हें बनाने के लिए अधिकृत किया गया है। इस चप्पल को बनाने के लिए महाराष्ट्र के चार कोल्हापुर, शोलापुर, सांगली और सतारा के साथ ही कर्नाटक के चार जिलों को शामिल किया गया हैं। महाराष्ट्र का कोल्हापुर अपनी खास कोल्हापुरी चप्पलों की वजह से भी जाना जाता है। कोल्हापुरी चप्पल को एक नई पहचान तब मिली जब अस्सी के दशक में फिल्म सुहाग के एक दृश्य में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन एक गुंडे को कोल्हापुरी चप्पल से पीटते नजर आए थे। अब इन्हीं कोल्हापुरी चप्पलों को जीआई टैग दे दिया गया है।

क्रेज विदेशों में भी
कोल्हापुरी चप्पलों का के्रज भारत में नहीं विदेशों में भी है। वहां भी इन्हें पहना जाता है। यहां वैस्टर्न, इंडियन सभी तरह की पोशाकों के साथ ये खूब फबती हैं। इन्हें जरमनी, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, सिंगापुर आदि देशों में निर्यात किया जाता है। कोल्हापुरी काप्सी, महाराजा, बीसबंदी गांधी, कोल्हापुरी पोइंटेड, लेडीज और जैंट्स मोजरी आदि सभी इस के अलग-अलग पैटर्न हैं।

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लॉक डाउन में राजधानी वासियों में दिखी जागरूकता, बेवजह घूमने वाले हुए कम

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लॉक डाउन का फायदा जमकर उठा रहे कालाबाजारी

लखनऊ। लॉक डाउन के बाद से तीसरे दिन राजधानी में पुलिस की सख्ती के बावजूद लोग जागरूक दिखे। सड़कों पर बेवजह घूमने वालों की संख्या में कमी आयी है। लोग सुबह और दोपहर के समय घर के जरूरी सामान खरीदने निकले हैं। हांलाकि इस दौरान पुलिस ने भी लोगों के इस कदम के बाद जागरूक किया और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की अपील की।

आपको बता दें कि, कुछ स्थानों पर बेवजह टहलते मिले युवकों से पुलिस सख्ती से पेश आई और उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। शहर के कई हिस्सों में परचून की दुकान पर लग रही भीड़ को देखते हुए पुलिस ने दुकान के बाहर सोशल डिस्टेंस के लिए एक-एक मीटर की दूरी पर चाक से निशान बनवाये हैं। ताकि खरीदारी करने वालों के बीच दूरी बनी रहें। साथ ही दुकानदारों को भी हिदायत दी कि वह लोगों को उसी घेरे में खड़े होकर क्रम से आकर खरीदारी करें।

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वहीं लॉकडाउन का फायदा कालाबाजारी जमकर उठा रहे हैं। फुटकर सब्जियों की दुकानों पर परवल 120 रुपये, भिंडी 100 रुपये किलो तक बेची। वहीं आटा और दाल के दाम भी ग्राहकों से ज्यादा वसूले। आटा, दाल और तेल की कालाबाजारी और जमाखोरी बढ़ गई है। सुबह 112 पर एक बुजुर्ग ने फोन कर दवाई की आवश्यक्ता बताते हुए मदद की मांग की। इसके बाद हजरतगंज कोतवाली की पीआरवी 4540 ने नरही निवासी सुधीर खन्ना से संपर्क किया और उनकी दवा खरीदकर पहुंचाई। सुधीर खन्ना ने पुलिस के सहयोग की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।

वहीं हजरतगंज इलाके में सड़क किनारे बैठे भूखे लोगों को एडीसीपी मध्य चिरंजीव नाथ सिन्हा, एसीपी हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा, इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह और इंस्पेक्टर हुसैनगंज अंजनी कुमार पांडेय ने फल और पुड़ी सब्जी बांटे। भूखे लोगों को खाना खिलाने के साथ ही उन्हें साबून भी बांटे गए ताकि वह अपना हाथ धुलते रहें और कोरोना वायरस से खुद को बचा सकें।

मोहनलालगंज में एक-एक मीटर की दूरी पर चाक से निशान

मोहनलालगंज में कस्बा व आस-पास लगभग सन्नाटा पसरा रहा। जरुरत के सामान की खरीदारी करने के लिए ही लोग सड़कों पर निकले। परचून की दुकान पर लग रही भीड़ को देखते हुए पुलिस ने दुकान के बाहर सोशल डिस्टेंस के लिए एक-एक मीटर की दूरी पर चाक से निशान बनवाये। ताकि खरीदारी करने वालों के बीच दूरी बनी रहें। साथ ही दुकानदारों को भी हिदायत दी कि वह लोगों को उसी घेरे में खड़े होकर क्रम से आकर खरीदारी करें।

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इंस्पेक्टर जीडी शुक्ला ने कस्बे में परचून की दुकानों पर लग रही भीड़ को देखकर दुकानों के बाहर एक-एक मीटर की दूरी पर चाक से घेरे बनवाये। खरीदारी करने के लिए आने वाले लोगों को उसी घेरे में क्रम से खड़े होने के निर्देश दिए। ताकि लोग एक-दूसरे के सम्पर्क में आने से बचें रहें। साथ ही दुकानदारों को भी चेतवानी दी कि खरीदारी करने के लिए आने वाले लोगों को उसी घेरे में क्रम से आने के लिए बोले। ताकि एक जगह पर भीड़ न लगे।

पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने बताया कि देर रात में अमौसी एयरपोर्ट पर तकरीबन पांच सौ लोग बाहर से आकर फंस गए थे। इनमें किसी को राजधानी में ही अपने आवास पर जाना था तो कई गैर जिलों के थे। भीड़ बढ़ती देख लोगों के बीच दूरी बनाने में कठिनाई आने लगी। इसके बाद 25 पीआरवी वहां बुलाई गई और लोगों को उनके गंतव्य तक छोड़ा गया। यही नहीं उन्नाव, बहराइच और बरेली समेत आस-पास के जिलों में जाने वाले लोगों को भी पुलिस ने गाड़ी मुहैया कराकर छुड़वाया।

आपको बता दें कि, इनमें महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और युवा भी शामिल थे। पुलिस ने जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश से संपर्क कर परिवहन विभाग से बात की। इसके बाद बसें भी मंगवाई गई और लोगों को उनके गंतव्य तक छुड़वाया गया। पुलिस ने देर रात तक एयरपोर्ट प्रशासन के साथ मिलकर आपॅरेशन चलाया और वहां से लोगों की भीड़ खत्म कराई गई।

लॉकडाउन से कालाबाजारियों की चांदी कट रही है। फुटकर सब्जियों की दुकानों पर परवल 120 रुपये, भिंडी 100 रुपये किलो तक बेची। वहीं आटा और दाल के दाम भी ग्राहकों से ज्यादा वसूले। बाजार के कुछ व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि आटा, दाल और तेल की कालाबाजारी और जमाखोरी बढ़ गई है।

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जनता कफ्र्यू और फिर लॉकडाउन से उपजे संकट का जमाखोर आटा की कालाबाजारी पर उतर आए हैं। दो दिन पहले थोक बाजार में आटा की कीमत 2150 रुपये कुंतल थी। वह मंगलवार को अचानक बढ़कर 2400 रुपये तक पहुंच गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि थोक बाजार में आटा की कमी बताकर इसके दाम बढ़ाए जा रहे हैं। जबकि आटा इन कालाबाजारियों के गोदामों भरा पड़ा है।

चार दिन पहले 60 रुपये किलो बिकने वाला परवल अब 120 रुपये और भिंडी के दाम 30-35 रुपये से उछलकर 100 रुपये तक पहुंच गए। दिलचस्प बात यह है कि नरही बाजार के इर्द गिर्द अधिकारियों का रिहायशी इलाका है। लेकिन कालाबाजारियों के हौंसले इतने बुलंद हैं कि उनके बीच नरही बाजार में ही टमाटर 50-60 रुपये, परवल 120 रुपये और भिंडी 100 रुपये प्रतिकिलो के भाव में बेच रहे हैं। एचएएल सब्जी मंडी का भी हाल इससे कुछ अलग नहीं है।

अब तक 2089 एफआईआर, विभिन्न शहरों में 6044 बैरियर

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि पूरे प्रदेश में सख्ती के साथ लॉक डाउन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। पूरे प्रदेश में धारा 188 के उल्लंघन पर पुलिस ने अब तक 2089 एफआईआर दर्ज की है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील भी की कि अनावश्यक घरों से बाहर न निकलें। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में अब तक 6044 बैरियर लगाए गए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 2,00,150 वाहन चेक किए गए हैं, जिसमें से 49,074 वाहनों का चालान किया गया है। इसमें से 3,679 वाहनों को सीज किया गया और 1.01 करोड़ रुपये शमन शुल्क वसूल किया गया।http://www.satyodaya.com

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लॉकडाउन तक पान, तम्बाकू, गुटखे पर रहेगा प्रतिबन्ध

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कालाबाजारी, जमाखोरी करने वालों पर होगी कार्रवाई

लखनऊ। लॉक डाउन के दौरान पान, तम्बाकू, गुटखे पर प्रतिबन्ध रहेगा। क्योंकि इसके थूकने से कोरोना के संक्रमण की सम्भावना अधिक रहती है। राज्य सरकार ने कोरोना पर प्रभावी नियन्त्रण स्थापित करने के लिए कोरोना एक्शन प्लान तैयार किया है। इस एक्शन प्लान का सुपरविजन मुख्य सचिव करेंगें। सभी जनपदों में कण्ट्रोल रूम की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा मुनाफाखोरी करने वालों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दवा तथा खाद्यान्न आदि की दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का अनिवार्य रूप से पालन कराया जाए। यह सुनिश्चित करें कि दुकानों पर एक समय 2 से अधिक व्यक्ति न रहें।

श्री योगी ने अपने सरकारी आवास पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कोरोना के सम्बन्ध में समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना पर प्रभावी नियन्त्रण स्थापित करने के लिए कोरोना एक्शन प्लान तैयार किया है। इस एक्शन प्लान के तहत कृषि उत्पादन आयुक्त, औद्योगिक विकास आयुक्त, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास, अपर मुख्य सचिव गृह एवं सूचना, अपर मुख्य सचिव राजस्व, प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं प्रमुख सचिव परिवहन की अध्यक्षता में समितियां गठित की गयी हैं।

सीएम ने प्रदेश के 51 सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में 200 से 300 बेड के आइसोलेटेड वॉर्ड बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्याप्त मात्रा में मास्क, ग्लव्स व सैनेटाइजर आदि की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पिछले एक सप्ताह में प्रदेश में विभिन्न देशों से आये हुए लोगों को चिन्हित कर उनका उपचार किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने गन्तव्य तक पहुंचाने के लिए पीआरवी-112 का उपयोग करें तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी व्यक्ति सड़क पर न दिखे। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से ग्राम प्रधानों से संवाद स्थापित कर गांवों में कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक करें।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन तथा पुलिस के अधिकारियों को संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना से लोगों को जागरूक करने के लिए माइक पर एनाउन्समेण्ट भी किया जाए। रैन-बसेरों तथा धर्मशालाओं में रहने वाले लोगों के लिए कुक्ड फूड की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एमडीएम के किचन का उपयोग किया जाए।

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श्री योगी ने कहा कि मण्डी समितियां गेहूं, चावल, दाल, आलू तथा दूध आदि की उठान की व्यवस्था भी करें। ई-कॉमर्स कम्पनियां यथा बिग बाजार, मेगा मार्ट आदि के लोग होम डिलीवरी करें, जिससे लोगों को घर पर ही सुविधाएं मिल सकें। स्वास्थ्य विभाग दवा विक्रेताओं से समन्वयन कर जरूरतमन्दों को होम डिलीवरी के माध्यम से दवा उपलब्ध कराने का कार्य करें। उन्होने कहा कि निराश्रित गो-आश्रय स्थलों पर व मुर्गी, बतख तथा मछली आदि के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एसपीसीए की मदद से कुत्तों आदि को भोजन उपलब्ध कराया जाए।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आरके तिवारी, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक कुमार, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव कुमार मित्तल, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं गृह अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद, पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।http://www.satyodaya.com

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#Ayodhya: लाॅकडाउन और कर्फ्यू के बीच ही क्यों होता है राम का हर काम!

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लखनऊ। वर्तमान में जो हालात हैं, उसको देखते हुए कोई भी भारतीय इन दिनों को याद नहीं रखना चाहेगा। लेकिन संकट और दहशत के इस बुरे दौर के बीच हिन्दु धर्म और राम में आस्था रखने वालों के लिए 25 मार्च 2020 का दिन हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा। करीब 500 वर्षों बाद मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने एक फिर अपने राजसी वैभव को प्राप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। पिछले 70 वर्षों से एक मामूली से टाट के नीचे विराजमान श्रीराम ने पहली बार इस चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन बुधवार को अपना स्थान बदला। ताकि उनके जन्म स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे विधि विधान के साथ श्रीराम की मूर्ति को गर्भगृह से उठाकर मानस भवन के पास बनाए गए अस्थाई ढांचे में चांदी के सिंहासन पर विराजित किया। अब मंदिर निर्माण होने तक अयोध्या के राजा यहीं पर अपने भक्तों को दर्शन देंगे।

राम का स्थान परिवर्तन और भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे देश में कोरोना के चलते सब कुछ ठप हो गया है। महामारी ने दुनिया भर में ऐसी दहशत पैदा कर दी है कि हर कोई अपने घरों में ठिठुक गया है। लेकिन अयोध्या के राजा श्रीराम कर हर काम लगभग ऐसे ही माहौल होता रहा है। यह एक रहस्य सा है कि पिछले करीब 100 वर्षों में श्रीराम से जुड़ा कोई काम शुरू हुआ या निर्णय हुआ तो देश में लाॅकडाउन और कफ्यू लगाना पड़ा।

पिछले 100 साल से ज्यादा समय में ऐसा रहा राम-काज का इतिहास

सन 1902 में दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के तत्कालीन महंत ने अयोध्या के सभी तीर्थ स्थलों को चिन्हित कराकर वहां शिलापट्ट लगवाया। महंत ने पहला शिलालेख रामजन्मभूमि पर लगवाया। लेकिन इसके बाद ही वहां सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया। जिसके बाद प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी।
1934 में भी कब्जे के विवाद में विवादित स्थल को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जिसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए लोगों से जुर्माना वसूल कर निर्माण कार्य कराया।
1949 में रामलला के प्राकट्य के समय भी भारी विवाद हुआ। जिसके बाद प्रशासन ने विवादित स्थल को कुर्क कर दिया।
1986 में राम जन्म भूमि का ताला खुलने के पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गयी। जिसके बाद देश भर में दंगे फैल गए और देश ने बेहद बुरा दौर देखा।

1989 में जब रामजन्मभूमि यज्ञ समिति ने 9 नवंबर को शिलान्यास का ऐलान किया तो इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी। जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गयी।
30 अक्टूबर 1990 में कारसेवा के दौरान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पूरे प्रदेश को लाॅकडाउन कर दिया। हालांकि फिर भी कारसेवा हुई और दर्जनों कारसेवकों की जान गई। सन 2002 में शिलादान को लेकर अयोध्या में कई महीने तक कफ्यू की स्थिति बनी रही।
इसके बाद 30 सितंबर 2010 में राम जन्मभूमि विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय के समय भी पूरा उत्तर प्रदेश अघोषित लाॅक डाउन हो गया। जिसका परिणाम रहा कि कोई भी अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
हाल ही में 9 नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के एतिहासिक निर्णय के समय भी पूरे प्रदेश में कफ्यू जैसे हालात रहे। हालांकि पूरे देश ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया।

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राम मंदिर का रास्ता साफ होने के बाद केन्द्र सरकार ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया है। जिसकी देख-रेख में भव्य रामंदिर निर्माण की दिशा में आज महत्वपूर्ण पहला कदम बढ़ा। इस बार कोई सांप्रदायिक या कानूनी पचड़ा नहीं फैला तो कोरोना ने रामालय के भूमि पूजन और ऐतिहासिक स्थान परिवर्तन को फीका कर दिया। यदि देश में यह महामारी न फैली होती तो शायद सूबे की योगी सरकार इस महत्वपूर्ण पल को यादगार बना देती!http://www.satyodaya.com

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