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राजनीति में नहीं आना चाहते थे लालू, हींग वाले की दबंगई ने बना दिया नेता, पढ़ें लालू से जुड़े दिलचस्प किस्से…

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लखनऊ। लालू प्रसाद यादव…ये नाम जुबान पर आते ही एक ठेठ दिहाती अंदाज वाला गोल-मटोल चेहरा आंखों के सामने जीवंत हो जाता है। कभी बिहार की राजनीति के पर्याय रहे राष्टीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव आज राजनीतिक वनवास काट रहे हैं। भारतीय राजनीति में अपने चुटीले अंदाज के लिए जाने जाने वाले लालू यादव आज चारा घोटोले मामले में जेल की सलाखों के पीछे एकाकी जीवन काटने पर मजबूर हैं। लालू प्रसाद यादव का बिहार की राजनीति में कभी वही कद था जो उत्तर प्रदेश में उनके समकालीन सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का था।
लालू प्रसाद यादव दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। केन्द्रीय रेल मंत्री की भी जिम्मेदारी निभायी। राज्य सभा और लोकसभा सदस्य भी रहे।
भारतीय राजनीति में लालू प्रसाद यादव के जितने दिलचस्प किस्से हैं उतनी ही मजेदार उनकी इंटी की कहानी भी है। हाथ की सिली बनियान के सहारे बचपन गुजार देने वाले लालू यादव को भाषण देना और लोगों के बीच रहना बचपन से ही पसंद था लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि लालू कभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे। वह डाॅक्टर बनना चाहते थे। लेकिन जब राजनीति में आए तो चपरासी के आवास में रहकर राज्य सरकार चलाई और सालों तक बिहार की गद्दी पर राज किया।
आज 11 जून को लालू यादव का जन्मदिन है, इस मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण और दिलचस्प पहलुओं के बारे में-
आधी से ज्यादा उम्र तक हेलीकाप्टर में घूमने वाले लालू प्रसाद यादव की बचपन बेहद गरीबी में बीता। गरीबी इस कदर की थी कि उनके पास रोज पहनने के लिए कपड़े तक नहीं होते थे। सर्दियों में ठण्ड से बचने के लिए पुआल पर सोना पड.ता था और खाने के नाम पर बस दूध और मोटा अनाज। ऐसे तंग हालातों के बीच लालू प्रसाद यादव ने डाॅक्टर बनने का सपना देख रखा था।
अपनी आत्मकथा ‘गोपालगंज से रायसीना’ लालू यादव ने लिखा है कि स्कूल में दाखिले के बाद मैं डॉक्टर बनना चाहता था। लेकिन मेरे एक दोस्त ने बताया कि डॉक्टर बनने के लिए बायोलॉजी से पढ़ाई करनी होगी और मेंढकों की चीरफाड़ करनी पड़ेगी, जिससे मुझे नफरत थी। इसके बाद मैंने डॉक्टर बनने का इरादा छोड़ दिया।

इसी बीच एक घटना ने लालू प्रसाद यादव के जीवन में ऐतिहासिक बदलाव ला दिया। लालू के गांव में एक हींग बेचने वाला आया। जिसके झोले को लालू ने शरारतन कुएं में फेंक दिया। इसके बाद हींग बेचने वाले ने पूरा गांव अपने सिर पर उठा लिया। इस दौरान लालू की मां ने उनकी शरारतों से परेशान होकर उन्हें बड़े भाई मुकुंद के साथ पटना जाने को कहा।
मुकुंद उस समय पटना चपरासी आवास में रहा करते थे। बताया जाता है कि अगर हींग बेचने वाला नहीं आया होता तो शायद लालू उतनी जल्दी गांव से बाहर नहीं निकलते। हो सकता था कि बाद में निकलते ही नहीं और निकलते भी तो शायद वह न तो ’लालू प्रसाद यादव’ बन पाते और न तो डाॅक्टर बन पाते।

एनसीसी ज्वाइन कर पहली बार पहना जूता

पटना पहुंचने के बाद उनका दाखिला शेखपुरा के उच्च प्राथमिक स्कूल में हुआ। स्कूल में उन्होंने एनसीसी जॉइन की और तब उन्हें पहली बार जूता पहनने को मिला। उन्होंने एनसीसी ही इसलिए जॉइन की थी कि उन्हें पूरे कपड़े मिल सकें। क्योंकि एनसीसी के बच्चों को शर्ट, पतलून और जूते मिलते थे। 10 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर लालू स्कूल पहुंचते थे। लालू यादव बचपन से ही लोगों की नकल करने में माहिर थे। जिसके चलते स्कूल और काॅलेज के बार राजनीति में भी वह काफी मशहूर हुए।

काॅलेज की लड़कियां कहती थीं महात्मा

कॉलेज में वो लड़कियों के बीच काफी मशहूर थे। वो उन्हें ’लालू महात्मा’ कहकर पुकारती थीं क्योंकि उनकी छवि भी कुछ ऐसी ही थी। वो छात्रों की खास तौर पर लड़कियों की खूब मदद करते थे।

छात्र राजनीति से शुरू किया सफर

प्रसाद ने 1970 में पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पुसू) के महासचिव के रूप में छात्र राजनीति में प्रवेश किया और 1973 में अपने अध्यक्ष बने। 1974 में उन्होंने बिहार आंदोलन, जयप्रकाश नारायण (जेपी) की अगुवाई वाली छात्र आंदोलन में बढ़ोतरी, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ शामिल हो गए। एक आंदोलन के दौरान लालू प्रसाद जनवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता के करीब आए और 1977 में लोकसभा चुनाव में छपरा से जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामित हुए। बिहार राज्य के तत्कालीन राष्ट्रपति जनता पार्टी और बिहार के नेता सत्येंद्र नारायण सिन्हा ने उनके लिए प्रचार किया। जनता पार्टी ने भारत गणराज्य के इतिहास में पहली गैर-कांग्रेस सरकार बनाई और 29 साल की उम्र में, वह उस समय भारतीय संसद के सबसे युवा सदस्यों में से एक बन गए। धीरे-धीरे राजनीतिक की सीढि.यां चढ.ते हुए लालू प्रसाद यादव एक समय बिहार राजनीति के पर्याय बन गए।

जब लालू की मौत की उड़ी अफवाह

आपातकाल के दौरान गिरफ्तार होकर जेल भी गए। संपूर्ण क्रांति के दौरान एक बार उनके मरने की अफवाह फैल गई थी। 18 मार्च 1974 को आंदोलन हिंसक हो गया था। छात्र सड़कों पर उतर आए थे। उनमें लालू भी शामिल थे। आंदोलन रोकने के लिए सेना के जवान सड़क पर उतर आए और लालू की पिटाई की। इसी दौरान अफवाह फैल गई कि सेना की गई पिटाई में लालू की मौत हो गई है।

लालू से शादी को तैयार नहीं थे राबड़ी के चाचा

जून 1973 में लालू यादव की शादी पड़ोस के गांव की लड़की राबड़ी देवी से हुई। उस समय राबड़ी देवी की उम्र 14 साल थी। इस शादी को लेकर राबड़ी देवी के चाचा तैयार नहीं थे। एक टीवी कार्यक्रम में लालू ने बताया था कि राबड़ी देवी के चाचा उनसे शादी लेकर गुस्सा थे। उन्होंने अपना भाई यानी राबड़ी के पिता से कहा कि हमारी लड़की पक्के मकान में रही है और लड़के का मिट्टी का घर है। ऐसे में लड़की कैसे वहां रहेगी। हालांकि, अंत में वो मान गए लालू की शादी राबड़ी देवी से हो गई।

पूड़ी-जलेबी के नाम पर आरएसएस के लोगों को बनाया बेवकूफ

कॉलेज के दिनों में लालू जय प्रकाश नारायण (जेपी) से इतने प्रभावित हुए कि छात्र राजनीति में कूद पड़े। इसके बाद वो जेपी के पीछे-पीछे साये की तरह रहे। लालू बताते हैं, ‘एक बार जेपी ने जेल भरो अभियान शुरू किया और मुझसे बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तारी के लिए तैयार करने का निर्देश दिया. उस समय लोग जेल के नाम से डरते थे. फिर भी मैंने 17 ऐसे लोगों को तैयार किया जिनमें ज्यादातर एबीवीपी-आरएसएस से जुड़े लोग थे, उन्हें यह कहकर पटना ले आया कि मेरे एक दोस्त के घर में पूड़ी-जलेबी का भोज है. मैंने उन्हें एक पुलिस बस में बैठा दिया जो उन्हें बक्सर जेल लेकर जाने लगी. लेकिन जैसे ही पुलिस की वह बस बक्सर जेल के पास पहुंची, सभी 17 कार्यकर्ता बस से उतरकर फरार हो गए।

मंत्री बनने के लिए पीएमओ के पास नीतीश के साथ घूमते थे लालू

1989 में बिहार के छपरा लोकसभा से लालू ने चुनाव जीता और बाढ़ लोकसभा से नीतीश ने चुनाव जीता। केन्द्र में वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने और देवीलाल उप प्रधानमंत्री थे। जीत के बाद दोनों सांसद (नीतीश और लालू) केंद्र में मंत्री बनने का सपना लेकर दिल्ली पहुंच गए। नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव मंत्री बनने के लिए दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास अपना सबसे अच्छा कुर्ता-पायजामा पहनकर घूमा करते थे।

रातों-रात पत्नी को बनाया मुख्यमंत्री

पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू 3 महीने चपरासी क्वार्टर में ही रहे जहां स्कूल के दिनों में रहा करते थे लेकिन अधिकारियों के बार बार समझाने के बाद उन्होंने अपना ठिकाना बदला और मुख्यमंत्री अवास में आ गए। 1990 से लेकर 1997 तक लालू दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 23 सितंबर 1990 को लालू प्रसाद ने राम रथ यात्रा के दौरान समस्तीपुर में लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया और खुद को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में प्रस्तुत किया।
1997 में जब उन्हें लगा कि वो चारा घोटाला मामले में जेल चले जाएंगे तो उन्होंने रातों-रात अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। इसके बाद राबड़ी देवी 2005 तक बिहार की तीन बार मुख्यमंत्री बनीं। लालू यादव वर्तमान में चारा घोटाले मामले में जेल में सजा काट रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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पत्रकार प्रशांत कनौजिया के गिरफ्तारी के मामले में कोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार, तुरंत रिहा करने का दिया आदेश…

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प्रशांत कनौजिया

फाइल फोटो

नई दिल्ली। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में जर्नलिस्ट प्रशांत कनौजिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन यह मामला इतना बढ़ गया कि यह कोर्ट तक पहुंच गया। हालांकि सीएम योगी पर आपत्तिजनक पोस्ट लिखने वाले प्रशांत के गिरफ्तारी के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिपण्णी की है। इतना ही नहीं अदालत ने प्रशांत कनौजिया के हिट में फैसला लेते हुए तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट हुई सुनवाई में अदालत ने कहा है कि एक नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है, उसे बचाए रखना बहुत जरूरी है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि आपत्तिजनक पोस्ट पर विचार अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन गिरफ्तारी क्यों ? वहीं सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत कनौजिया की पत्नी को इस मामले को हाईकोर्ट ले जाने को कहा है।

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आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान आईपीसी की धारा 505 के तहत इस मामले में एफआईआर दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए। अदालत ने यूपी सरकार से भी सवाल पूछे कि किन धाराओं के तहत ये गिरफ्तारी की गई है। ये तो हम भी जानते आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करना सही नहीं, लेकिन फिर भी गिरफ्तारी क्यों।

जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट प्रशांत कनौजिया को लगातार आपत्तिजनक ट्वीट और रीट्वीट करने के आरोप में शनिवार सुबह दिल्ली में उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंडावली स्थित उनके घर से हिरासत में लिया था। जिसके बाद प्रशांत की पत्नी जिगीषा ने सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉरपस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। वहीं याचिका में कहा गया है कि प्रशांत की गिरफ्तारी गैरकानूनी है। याचिका के मुताबिक यूपी पुलिस ने इस संबंध में ना तो किसी एफआईआर के बारे में जानकारी दी है ना ही गिरफ्तारी के लिए कोई गाइडलाइन का पालन किया गया है।

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वहीं इससे पहले कनौजिया को सोमवार को मायावती का भी साथ मिला। मायावती ने कहा कि एडीटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया इस मामले में सरकार की आलोचना कर रहा है, लेकिन इससे भाजपा सरकार पर जरा सा फर्क नहीं पड़ेगा।

मायावती ने सोमवार को ट्वीट किया, “यूपी सीएम के खिलाफ अवमानना के संबंध में लखनऊ पुलिस की ओर से खुद ही संज्ञान लेकर पत्रकार प्रशांत कनौजिया सहित तीन अन्य लोगों की दिल्ली में गिरफ्तारी पर एडीटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अन्य मीडिया ने काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है लेकिन क्या इससे भाजपा और उसकी सरकार पर कोई फर्क पड़ेगा।”

सोशल मीडिया पर सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर गिरफ्तारियों का दौर लगातार जारी है। हालांकि इसकी शुरुआत जर्नलिस्ट प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी से हुई। http://www.satyodaya.com

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भाजपा सरकार में उत्तर प्रदेश के नौजवानों का भविष्य खतरे में – अखिलेश यादव

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पुलिस में भर्ती की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज की निंदा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार की संवेदनहीनता के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश के नौजवानों का भविष्य खतरे में है। इसके कार्यकाल में नौकरियों में भर्ती बंद हो गई है। एक साजिश के तहत नौकरियों के विज्ञापन देकर पेपरलीक के बहाने परीक्षाएं रद्द कर दी जाती हैं। भाजपा शासन में हजारों नौजवान हताशा और कुंठा में अपनी जान गंवा चुके हैं। नौजवानों ने अगर कभी अपने हक की मांग की तो उनपर पुलिस की लाठियां पड़ने लगती हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा राज की पुलिस ने सोमवार को पुलिस में भर्ती की मांग कर रहे नौजवानों पर क्रूरता से लाठीचार्ज किया। जिसमें दर्जन भर से ज्यादा घायल हुए हैं। कई प्रदर्शनकारी बेहोश हो गए। सरकारी उत्पीड़न से परेशान 10 नौजवानों ने जहर खा लिया। हजारों की संख्या में पुलिस भर्ती अभ्यर्थी इस भीषण गर्मी में लू के थपेड़े खाते हुए इको गार्डेन में जमे हैं। इन नौजवानों का दोष यही है कि वे सन् 2013 की पुलिस भर्ती की परीक्षा और मेडिकल के बाद अपनी नियुक्तियां किए जाने की मांग कर रहे हैं। वे कई बार पहले भी राजधानी लखनऊ में आकर प्रदर्शन कर चुके हैं, किन्तु यह गूंगी-बहरी सरकार उनकी बात सुनने और उन्हें न्याय देने के लिए तैयार नहीं है।

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सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि समाजवादी सरकार में हजारों नौजवानों की भर्तियां हुई थी। लखनऊ में आईटी हब, एचसीएल, अमूल प्लांट आदि के माध्यम से बड़ी संख्या में नौकरियां देने के लिए कौशल प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की गई थी। भाजपा सरकार ने आते ही इन सब योजनाओं पर रोक लगा दी। पूर्व सीएम ने कहा कि समाजवादी सरकार में शिक्षामित्रों, उर्दू ओअल्लिमों, आशा बहुओं, रसोइयां आदि के अलावा आंगनबाड़ी, पुलिस-पीएसी में भारी संख्या में भर्तियां की गई थी। उ.प्र. लोकसेवा आयोग के माध्यम से भर्तियां शुरू की गई थी। सैकड़ों शिक्षामित्रों ने अपनी जान दे दी। वे अभी भी सड़कों पर आवाज उठा रहे हैं। जब कभी कोई अपनी न्यायोचित मांग लेकर राजधानी आया तो भाजपा सरकार द्वारा उन्हें लाठियों से पीटने के बाद कई फर्जी केसो में भी फंसाने का काम किया गया है। यह लोकतंत्र को आहत करने वाली कार्यवाही है। अखिलेश ने बताया कि भाजपा की अमानवीय नीतियों के चलते प्रदेश के नौजवानों को रोजगार तो मिलने से रहा उनके भविष्य को भी बिगाड़ने का काम चल रहा है। नौकरियों में आरक्षण की इसीलिए अनदेखी की जा रही है। भाजपा युवाशक्ति का वोटबैंक की तरह इस्तेमाल तो करती है, उसे उसके हक और सम्मान देना नहीं चाहती है। भाजपा सरकारें देश के भविष्य को अंधकारमय बनाने का जो पाप कर रही है, जनता के प्रतिकार का भाजपा को परिणाम भुगतना पड़ेगा।http://www.satyodaya.com

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प्रदेश सरकार महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध- योगी आदित्यनाथ

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एण्टी रोमियो स्क्वाॅड को पूरे जून माह में चलाने के निर्देश

लखनऊ। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं और बालिकाओं के उत्पीडन से जुड़ी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं। अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी अभियोजन को आवश्यक बताते हुए उन्होंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिये कि प्रत्येक रेंज से नाबालिग बालिकाओं के साथ हुए जघन्य अपराधों के 10-10 मामले चिन्हित कर, फास्ट ट्रैक अदालतों में मुकदमा चलाकर अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलायी जाए। प्रत्येक थाना क्षेत्र में पूर्व में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों में संलिप्त रहे व्यक्तियों को चिन्हित कर उन्हें पाबन्द किया जाए।

मुख्यमंत्री सोमवार को लोकभवन में महिला सुरक्षा के सम्बन्ध में आहूत एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं एवं बालिकाओं की गरिमा बनाए रखने तथा उन्हें हर प्रकार की सुरक्षा प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है। पुलिसिंग, डायल-100 तथा एण्टी रोमियो स्क्वाॅड को और अधिक सक्रिय किये जाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं से छेडखानी करने तथा उन्हें परेशान करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। एण्टी रोमियो स्क्वाॅड की कार्रवाइयों को पूरे जून माह अभियान के रूप में चलाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि भीड़-भाड़ वाले तथा संवेदनशील स्थानों पर एण्टी रोमियो स्क्वाॅड को निरन्तर सक्रिय रहना चाहिए।

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योगी ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी मात्र अपराधों को नियंत्रित करने में सहायक होती है। पेट्रोलिंग व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस द्वारा निरन्तर फुट पेट्रोलिंग की जानी चाहिए। डायल-100 की पेट्रोलिंग को और प्रभावी बनाने के निर्देश उन्होंने कहा कि डायल-100 के वाहनों को व्यापारिक क्षेत्रों तथा लूटपाट की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर खड़ा होना चाहिए। सीएम ने कहा कि अपराधों पर नियंत्रण के लिए वाहनों की रैण्डम चेकिंग आवश्यक है। इसके लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि रैण्डम चेकिंग की कार्रवाई निरन्तर चलनी चाहिए। प्रभावी पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा क्षेत्र भ्रमण को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि एडीजी, आईजी एवं डीआईजी जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी फील्ड में भ्रमण करें। पुलिस कप्तान प्रतिदिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों का भ्रमण करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी जुलाई माह में सभी स्कूलों में महिला कल्याण विभाग और पुलिस विभाग द्वारा मिलकर महिला सुरक्षा सम्बन्धी प्राविधानों के सम्बन्ध में जागरूकता अभियान संचालित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को इसके लिए अभी से कैलेण्डर तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि महिला सम्बन्धी अपराधों में घरेलू हिंसा की भी भूमिका है। इसके दृष्टिगत, ‘181्य महिला हेल्पलाइन को सुदृढ़ किया जाए और इस हेल्पलाइन के सम्बन्ध में जागरूकता के लिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इस अवसर पर मुख्य सचिव डाॅ. अनूप चन्द्र पाण्डेय, पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह, प्रमुख सचिव गृह अरविन्द कुमार, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, प्रमुख सचिव महिला कल्याण मोनिका गर्ग उपस्थित थी।http://www.satyodaya.com

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