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#MenToo : अब पुरुष भी सुना पाएंगे यौन शोषण की कहानी

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लखनऊ। यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की आवाज बने #MeToo movement के बाद अब #MenToo campaign उत्पीडन के शिकार पुरुषों की कहानी बयां करने वाला है। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ हो रही है। हालांकि साल 2017 में अमेरिका में पुरुषों के लिए उसी तर्ज पर #HimToo campaign चलाया जा चुका है।

#MenToo campaign दरअसल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एनजीओ गाइड समाज कल्याण संसथान चलाती है। संस्था Center for Mens Right Protection कार्यक्रम के तहत पुरुषों के अधिकारों की लडाई लडती है। संस्था की Founder डॉ इंदु सुभाष एक महिला हैं, Womens Studies से Ph.D हैं, लेकिन लडाई पुरुषों के अधिकारों के लिए लडती हैं। उनका मानना है कि #MeeToo एक वायरस की तरह है। Cheif Justice of India पर लगे आरोप का हवाला देते हुए कहती हैं कि, आरोप लगने के बाद पुरुषों का मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है। आरोप अक्सर झूठे होते हैं, जो पुरुषों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालते है। यौन शोषण होने के 50 साल बाद घटना याद करने वाली महिलाओं की मंशा पर डॉ इंदु सुभाष सवाल भी उठाती हैं। उनका मानना है कि यौन शोषण जैसे मामलों में भी Gender Equality होनी चाहिए। पुरुषों पर आरोप लगते ही उन्हें दोषी मान लिया जाना, गलत है। मर्द को भी दर्द होता है इसलिए डॉ इंदु सुभाष पुरुषों के दर्द को आवाज दिए जाने की वकालत करती हैं।

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आपको बता दें कि साल 2006 में अमेरिका की सोशल ऐक्टिविस्ट और कम्युनिटी ऑर्गनाइज़र तराना बर्क ने सबसे पहले #MeToo का इस्तेमाल किया था। ‘माइस्पेस’ नाम के सोशल नेटवर्क पर उन्होंने रंगभेद की शिकार महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की कहानी बयां करते हुए लिखा था। बर्क के मुताबिक यह शब्द उनके दिमाग में तब आया था, जब एक 13 साल की बच्ची ने उन्हें खुद के साथ हुए यौन उत्पीड़न की कहानी बयां की लेकिन तब बर्क उस बच्ची को कोई जवाब नहीं दे पाईं थीं। जबकि तराना बर्क खुद एक सेक्शुअल असॉल्ट सर्वाइवर हैं। फिर क्या था, तराना के इन दो शब्दों ने एक आंदोलन का रूप ले लिया, जिसमें यौन शोषण पीड़ितों को यह अहसास दिलाने की कोशिश की गई कि अब वे अकेली नहीं हैं।

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अक्टूबर 2017 में जब अमेरिका में #MeToo आंदोलन चला, तो इसका कुछ असर भारत में भी देखने को मिला। कई महिलाओं ने वर्क प्लेस पर उनके यौन उत्पीड़न की बातें कहीं। लेकिन, भारत में सही मायनों में #MeToo आंदोलन की शुरुआत 25 सितंबर 2018 को हुई, जब बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने एक्टर नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। यही नहीं केंद्र की मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे एम जे अकबर पर भी पत्रकारिता जगत से जुडी कई महिलाओं ने इसी तरह का आरोप लगाया। बाद में उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

तनुश्री के बाद तो भारत की फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री की कई महिलाएं आगे आईं और उन्होंने एक से एक दिग्गज कलाकारों का नाम लेते हुए बताया कि काम देने के बहाने उनका यौन उत्पीड़न किया था। इस क्रम में एक्टर आलोक नाथ, पीयूष मिश्रा, रजत कपूर, रोहित रॉय, डायरेक्टर विकास बहल, सुभाष घई, साजिद खान, सुभाष कपूर, लव रंजन, विवेक अग्निहोत्री, प्रड्यूसर गौरांग दोषी, नाटककार किरण नागरकर, कमीडियन उत्सव चक्रवर्ती, गुरसिमरन खंबा, अदिति मित्तल, क्रिकेटर लसिथ मलिंगा, अर्जुन रणतुंगा, सिंगर कैलाश खेर, रघु दीक्षित, अभिजीत भट्टाचार्य, वैरामुत्तू रामासामी, राइटर वरुण ग्रोवर, चेतन भगत, मॉडल जुल्फी सईद, पत्रकार एमजे अकबर, विनोद दुआ, केआर श्रीनिवास, गौतम अधिकारी, मनोज रामचंद्रन, मयंक जैन, सिद्धार्थ भाटिया, मेघनाद बोस, उदय सिंह राणा, सिद्धांत मिश्रा और सताद्रु ओझा का नाम आया, जिनके खिलाफ महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।http://www.satyodaya.com

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इस जन्माष्टमी बाल-गोपाल को करना है खुश,तो पूजा में शामिल करें ये चीजें…

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जन्माष्टमी

फाइल फोटो

नई दिल्ली। हिन्दुओं के सभी महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जन्माष्टमी। इस दिन भगवान विष्णु ने 8वें अवतार का बाल-गोपाल के रूप में जन्म हुआ था। इस बार जन्माष्टमी 23 अगरस्त या 24 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन को सभी लोग बड़े धूमधाम के साथ मनाते हैं। इतना ही नहीं इस दिन मंदिरों को खूब सजाया जाता है। कहीं-कहीं भगवन कृष्ण के बाल रूप की झाकियां भी सजती हैं।  

बता दें इस अधर्म का नाश करने और मानवता के कल्याण के लिए भगवान विष्णुन ने कृष्ण के रूप में भाद्र मास के कृष्णम पक्ष की अष्टमी को देवकी की कोख से जन्म लिया था। यही वजह है इस भगवान् कृष्ण के भक्त उपवास रखकर और मंगल गीत गाकर भगवान कृष्ण का लड्डू गोपाल के रूप में जन्म करवाते हैं। ऐसे चलिए आज हम आपको बताते हैं भगवन के भक्त किस तरह करवाते हैं भगवन का जन्म और पूजा में किन समाग्रियों को शामिल करते हैं।

बाल गोपाल की पूजा सामग्री में एक खीरा, एक चौकी, पीला साफ कपड़ा, बाल कृष्ण की मूर्ति, एक सिंहासन, पंचामृत, गंगाजल, दही, शहद, दूध, दीपक, घी, बाती, धूपबत्ती, गोकुलाष्ट चंदन, अक्षत (साबुत चावल), तुलसी का पत्ता, माखन, मिश्री,शामिल किया जाता है।

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श्रृंगार सामग्री

जब भगवान कृष्ण का जन्म हो जाता है, उसके बाद उनके श्रृंगार के लिए इत्र, नए पीले वस्त्र, बांसुरी, मोरपंख, गले के लिए वैजयंती माता, सिर के लिए मुकुट, हाथों के लिए कंगन रखें जाते हैं।

जानिए कैसे मनाएं जन्म की खुशियां

जानकारी के मुताबिक इस बार भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में 23 अगस्त या 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। हमेशा बाल गोपाल का जन्म रात में 12 बजे के बाद होता है। ऐसे में जन्म के बाद सबसे पहले आप दूध से उसके बाद दही, फिर घी, फिर शहद से स्नान किया जाता है। उसके बाद गंगाजल से अभिषेक किया जाता है, ऐसा शास्त्रों में वर्णित है। स्नान कराने के बाद पूरे भक्ति भाव के साथ एक शिशु की तरह भगवान के लड्डूगोपाल स्वयरूव को लगोंटी अवश्यत पहनाएं। जिन चीजों से बाल गोपाल का स्नान हुआ है, उसे पंचामृत बोला जाता है। पंचामृत को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। फिर भगवान कृष्ण को नए वस्त्र पहनाने चाहिए।

कुछ इस तरह करें श्रृंगार

बाल गोपाल के जन्म के बाद मंगल गीत भी गाए जाते हैं। कृष्णजी को आसन पर बैठाकर उनका श्रृंगार करना चाहिए। उनके हाथों में कंगन, गले में वैजयंती माला पहनाएं। फिर उनके सिर पर मोरपंख लगा हुआ मुकुट पहनाएं और उनकी प्यारी बांसुरी उनके पास रख दें। इतना सब करने के बाद उनको चंदन और अक्षत लगाएं और धूप-दीप से पूजा करें। फिर माखन मिश्री के साथ अन्य भोग की सामग्री अर्पण करें। कृष्ण भगवान की पूजा करते समय इस बाद का ध्यान रखें कि भोग में तुलसी का पत्ता जरूर रखें।  इसके बाद भगवान को झूले पर बिठाकर झुला झुलाएं और नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गीत गाएं। अगर आप इस विधि विधान से भगवान के बाल रूप की पूजा करते हैं तो बाल-गोपाल आपसे प्रसन्न हो जाएंगे। वहीं इस दौरान अगर आप भगवान से कुछ मांगते हैं, तो जरूर पूरा होगा।  http://www.satyodaya.com 

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#Chandrayaan2: ISRO की ‘दुल्हन’ चांद की सतह से महज चार कदम दूर…

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नई दिल्ली। 22 जुलाई 2019, यह वही तारीख है जब Chandrayaan2 मिशन को #GSLVMk-III राकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। #ISRO के इस मिशन ने 29 दिनों बाद चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है। मंगलवार को सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर वह चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर गया। यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि सबसे मुश्किल पड़ावों में से एक को पार करने में यह मिशन सफल रहा। Chandrayaan जब निकला था तो उसे 3 लाख 84 हजार किलोमीटर की दूरी तय करनी थी लेकिन अब महज 18 हजार किलोमीटर रह गए हैं या यूं कहें कि बस चार और कदम चलना बाकी है। मिशन ऐसे ही ठीक ढंग से चला तो 7 सितंबर 2019 को रात के ठीक 1 बजकर 55 मिनट पर भारतीय अंतिरक्ष इतिहास की सबसे बड़ी तारीख होगी। इस दिन Chandrayaan2 चांद पर होगा।

यह हैं वो चार पड़ाव?

जिन चार कदमों की बात हम कर रहे हैं वो दरअसल इसके पड़ाव हैं यानि कि चंद्रयान को अभी चार और कक्षाओं को पार करना होगा। 20 अगस्त से लेकर 1 सितंबर के बीच चंद्रयान अपने चार पड़ाव तय करेगा। इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया कि Chandrayaan2 बुधवार को चांद की चार कक्षाओं को पार करना शुरू करेगा। बुधवार दोपहर 1 बजे वह पहली कक्षा लांघेगा। इसके बाद 28 अगस्त, 30 अगस्त तथा फिर 1 सितंबर को चौथी कक्षा पार करेगा। तब चांद से उसकी दूरी 18 हजार किलोमीटर से घटकर बस 100 किलोमीटर रह जाएगी।

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2 सितंबर को होगी दुल्हन की विदाई

चंद्रयान मिशन को 2 सितंबर को एक और अहम पड़ाव पार करना है। दरअसल इस दिन विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। इसरो चीफ ने बताया कि इसके बाद सारा ध्यान लैंडर पर केंद्रित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल वैसा ही होगा जैसे कोई दुल्हन अपने माता-पिता के घर से विदा लेकर ससुराल के लिए निकल जाती है।

अब होगा सारा खेल

ऑर्बिटर से अलग होने के बाद विक्रम लैंडर सीधे चांद की सतह पर नहीं गिरेगा बल्कि लैंडिंग के लिए इंतजार करेगा। इसरो के चीफ के सिवन ने भी कहा है कि विक्रम की लैंडिंग से पहले के 15 मिनट सबसे तनावपूर्ण और चुनौतिपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि चंद्रमा की सतह से 30 किलोमीटर दूर Chandrayaan2 की लैंडिंग के लिए इसकी गति कम की जाएगी। विक्रम को चांद की सतह पर उतारने का काम काफी मुश्किल होगा। इसके पीछे कारण यह है कि भारत चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला है। इसरो अगर ऐसा करने में सफल रहा तो भारत चौथा देश बन जाएगा जिसके पास ये विशेषज्ञता हो, अभी तक अमेरिका, रूस और चीन ही ऐसा करने में कामयाब हो पाएं हैं। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात है कि भारत चांद के दक्षिण ध्रुव पर यह कारनामा करने जा रहा है। सफल होने पर भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा।

सॉफ्ट लैंडिग के बाद क्या?

इस यान में तीन खास उपकरण हैं। ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर। इन्हीं की मदद से चांद पर एकत्रित जानकारी धरती तक पहुंचेगी। लेकिन सवाल तो ये है कि कैसे? दरअसल, ऑर्बिटर चंद्रमा के ऑर्बिट में रहेगा और उसके चक्कर लगाएगा। ऑर्बिटर से अलग हुआ लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा और उसके अंदर से  रोवर ‘प्रज्ञान’ बाहर निकलेगा। इस प्रक्रिया में करीब 4 घंटे का समय लग जाएगा। प्रज्ञान रोवर एक छह पहियों वाली गाड़ी है। यह 1 ल्यूनर डे यानि कि पृथ्वी के 14 दिन के अपने जीवनकाल के दौरान चंद्रमा की सतह पर घूमेगा। यह 500 मीटर तक घूम सकता है और सौर ऊर्जा की मदद से काम करता है। रोबर चांद की सतह पर इधर-उधर घूमकर जो जानकारी एकत्रित करेगा वो लैंडर को ट्रांसफर करेगा और लैंडर उसी जानकारी को ऑर्बिटर को ट्रांसफर कर देगा। फिर ऑर्बिटर सारी जानकारी धरती पर भेजेगा। बता दें, ऑर्बिटर का वजन 2,379 किलोग्राम, विक्रम लैंडर का वजन 1,471 किलोग्राम और 6 पहिए वाले प्रज्ञान रोवर का वजन 27 किलोग्राम है।http://www.satyodaya.com

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… आखिर मेरा क्या कसूर था मेरी मां?

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लखनऊ। बच्ची के पैदा होते ही माता-पिता ने उसे झाड़ियो के बीच आवारा जानवरों के शिकार के लिये छोड़ दिया। सोचने वाली बात है कि उस समय उस मां का दिल भी नहीं पिघला। जिसको 9 माह अपनी कोख में रखा और पैदा होते ही छोड़ दिया। ये बच्ची भी कितनी बदनसीब है। सोच रही होगी कि उसको लड़की होने की सजा मिली है।

चाइल्डलाइन लखनऊ को आज सोमवार को थाना प्रभारी ठाकुरगंज द्वारा बाल कल्याण समिति सदस्य सुधा रानी को सूचना दी कि एक बालिका जो आज ही पैदा हुई है। जो जनसामान्य सम्भारी निवासी भगवंत नगर को बसंत विहार कालोनी की झाड़ियो में मिली। सम्भारी द्वारा बताया कि मैं नौकरी पर जा रहा था तभी बसंत विहार के झाड़ियो के बीच रोने की आवाज सुनकर पहुंचे जहां पर देखा कि निर्वस्त्र बच्ची जिसको चीटियां व चीटे नोंच रहे थे।

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चाइल्डलाइन टीम सदस्य कृष्ण प्रताप शर्मा, नेहा कश्यप व पुलिस डी.बी. सिंह के सहयोग से रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय में बच्ची को दिखाया गया। उन्होंने बच्ची को दो तीन दिन (एसएनसीयू) में भर्ती करने की सलाह दी। परन्तु वंहा पर (एसएनसीयू) की सुविधा न होने के कारण लोकबन्धु संयुक्त चिकित्सालय आशियाना के लिए रेफर किया। लोकबन्धु चिकित्सालय बाल लोक विशेषज्ञ डाॅक्टर पूर्णिमा को पूरी जानकारी दी गयी। डाॅक्टर पूर्णिमा द्वारा हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया गया। जिसके उपरांत बच्ची को हाॅस्पिटल में भर्ती कर लिया गया है। साथ ही उसकी जानकारी बाल न्यायालय (सीडब्लूसी) को दी गयी।http://www.satyodaya.com

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August 20, 2019, 8:55 pm
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