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आज है वाई-फाई के जनक निकोला टेस्ला का जन्मदिन, पागल वैज्ञानिक के नाम से थे मशहूर

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वाई-फाई ने लोगों की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है। इसके जनक अमेरिकी-सर्बियाई आविष्‍कारक निकोला टेस्‍ला का जन्‍म साल 1856 में 10 जुलाई को हुआ था। वह पागल वैज्ञानिक के नाम से मशहूर थे। 7 जनवरी 1943 को निकोला टेस्ला की 86 साल की उम्र में न्यूयॉर्क में मौत हो गई थी।

वह अपने माता-पिता की पांच संतानों में चौथे नंबर की संतान थे। उन्होंने यूरोप में टेलिग्राफ ड्राफ्टर और इलेक्ट्रिशन के तौर पर काम किया। उसके बाद वह 1884 में संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए जहां थॉमस एडिसन के साथ काम किया। वह रात में केवल दो घंटे ही सोते थे। वह अक्सर न्यूयॉर्क के डेल्मोनिको और बाद में वाल्डोर्फ-एस्टोरिया होटल में एक ही टेबल पर अपना डिनर लेते थे। उन्हें कीटाणुओं से डर लगता था और 18 नैपकिन के का पैक अपने साथ रखते थे। तीन नंबर को लेकर वह ज्यादा ही दीवाने थे।

जानें उनके बारे में…

अपनी कल्‍पना से अविष्‍कार को बिना कागज पर उतारे उसे पूरा कर देते थे।

उन्‍हें तकरीबन 8 भाषाओं का ज्ञान था।

टेस्‍ला ने कभी शादी नहीं की, जिसकी वजह यह थी कि उनके काम में कोई खलल नहीं डाले।

DC जेनरेटर और मोटर सही करने के लिए थॉमस एडिसन ने टेस्‍ला को 50 हजार डॉलर का प्रस्‍ताव दिया था। टेस्‍ला ने ये कर दिखाया लेकिन फीस मिलने की बजाय फटकार मिली कि टेस्‍ला तुम अमेरिका का मजाक नहीं समझ सके।

उन्‍होंने वायरलैस कम्‍यूनिकेशन रिमोट कंट्रोल, निओन लाइट, एक्‍स रे रडार का आइडिया, एल्‍टरनेटिव करंट, नियाग्रा फॉल पर पहला हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्‍लांट बनाए।

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विश्व आदिवासी दिवस: जानिए देश के विभिन्न राज्यों में आदिवासियों की आबादी

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आदिवासी लोग कौन हैं? जिन्होंने अपने जीवन में विकास के बदले सिर्फ प्रकृति को चुना है वो हैं आदिवासी। जिन्होंने प्रकृति को बचाने का संकल्प लिया है वो हैं आदिवासी। जिनकी जीवनचर्या आज भी जल ,जंगल ,जमीन , जानवर पर आधारित है। आज विश्व आदिवासी दिवस है। इस मौके पर आपको बताते हैं कि कब और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत….

जानिए कब और कैसे हुई शुरुआत…
9 अगस्त 1982 को संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल पर मूलनिवासियों का पहला सम्मेलन हुआ था। इसकी स्मृति में विश्व आदिवासी दिवस “Tribal day” मनाने की शुरुआत 1994 में कि गई थी ।

देश के विभिन्न राज्यों में आदिवासियों की आबादी

झारखंड 26.2 %
पश्चिम बंगाल 5.49 %
बिहार 0.99 %
शिक्किम 33.08%
मेघालय 86.01%
त्रिपुरा 31.08 %
मिजोरम 94.04 %
मनीपुर 35.01 %
नगालैंड 86.05 %
असम 12.04 %
अरूणाचल 68.08 %
उत्तर प्रदेश 0.07 %
हरियाणा 0.00 %

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क्या आपको पता है सुषमा स्वराज के परिवार से जुड़ी ये बातें…

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सोशल मीडिया के जरिए के जरिए लोगों की मदद के लिए मशहूर पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन से पूरा देश शोक में डूब गया है। उन्होंने राजनीति में जिस तरह से सफलता के शिखर चूमें हैं वैसे बहुत कम लोग ही होते हैं। वह सबसे कम उम्र में मंत्री बनने के साथ ही दिल्ली की पहली मुख्यमंत्री भी दीं। आज हम आपको उनके परिवार से जुड़ी कुछ बातें बताने जा रहे हैं जिसे बहुत कम लोग जानते हैं…

सुषमा का जन्म 14 फरवरी 1952 में अविभाजित पंजाब की अंबाला छावनी में हुआ था। उनका परिवार मूलरूप से पाकिस्तान के लाहौर का था, जो विभाजन के बाद अंबाला आ गया।सुषमा स्वराज के पिता का नाम हरदेव शर्मा और माता का नाम लक्ष्मी देवी था। पिता हरदेव शर्मा सनातनी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे। लिहाजा सुषमा के घर में राजनीतिक चर्चाएं होती थीं। वे मशहूर वैद्य भी थे। वे गंभीर बीमारियों का देसी दवाओं से उपचार करने में माहिर थे।सुषमा स्वराज के इकलौते भाई गुलशन शर्मा डॉक्टर हैं और अंबाला कैंट में बीसी बाजार में एक क्लीनिक चलाते हैं। बहन वंदना शर्मा कॉलेज में राजनीति विज्ञान विषय की प्रोफेसर हैं।

सुषमा के पति स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के वकील रहे हैं। उनके नाम सबसे कम उम्र के जनरल सॉलिसिटर होने का खिताब भी है।स्वराज कौशल मिजोरम के गवर्नर भी रह चुके हैं। स्वराज से सुषमा ने प्रेम विवाह किया था। सुषमा ने अंबाला के एसडी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद एसडी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की और सक्रिय राजनीति में आईं।

स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज हैं। बांसुरी ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक किया है और इनर टेम्पल से कानून में बैरिस्टर की डिग्री ली है। बांसुरी अपने पिता स्वराज कौशल की तरह ही आपराधिक मामलों की वकील हैं। बांसुरी दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं। बांसुरी का नाम उस समय लोगों के सामने आया जब वह अपने पिता स्वराज कौशल के साथ आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी का पासपोर्ट रद करने के मामले में उनकी जूनियर वकील बनीं।

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पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन, शोक की लहर

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लखनऊ। पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज का आज मंगलवार को 67 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में निधन हो गया। जिनको मंगलवार की रात 9:00 बजे उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद एम्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। एम्स हॉस्पिटल में भर्ती करते समय उनकी हालत बेहद गंभीर बताई गई थी।

बता दें कि सुषमा स्वराज ने इस बार चुनाव न लड़ने का एलान भी किया था। साथ ही बता दें कि सुषमा स्वराज की गिनती प्रखर नेताओं में होती है और उन्हें साल 2014 में भाजपा सरकार बनने के दौरान उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए विदेश मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी दी गई थी।

सुषमा स्वराज के निधन से कुछ घंटे पहले ही अनुच्छेद धारा 370 खत्म होने को लेकर केंद्र सरकार की तारीफ की थी। पीएम मोदी ने उनके निधन पर शोक जाहिर करते हुए कहा कि वो लोगों के लिए प्रेरणा थीं। उन्होंने अपना जीवन लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि भारतीय राजनीति में एक शानदार अध्याय समाप्त होता है और भारत एक उल्लेखनीय नेता के निधन पर शोक जाहिर करता है। आगे उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपना जीवन सार्वजनिक सेवा और गरीबों के लिए समर्पित किया और वो करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत थीं।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्वनी कुमार चौबे ने कहा मैं निशब्द हूं स्तब्ध हूं। विलक्षण प्रतिभा की धनी कुशल संगठन कर्ता, ओजस्वी वक्ता लोकप्रिय जन नायिका, भाजपा की वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के निधन से अत्यंत दुखी हूं।

संसदीय कार्य के बाद मंत्रालय पहुंचने के उपरांत आवश्यक कार्य निपटा कर घर पहुंचा ही था कि उन्हें एम्स में भर्ती होने की सूचना मिली। तत्क्षण में एम्स की ओर निकल पड़ा वहां यह दर्द विदारक समाचार सुनने को मिला। उनका हंसता मुस्कुराता चेहरा, चेहरे के सामने प्रतीत हो रहा है। मैं निशब्द हूं। उनका आशीर्वाद प्यार हमेशा मिलता रहा। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ पूरे देश की जनता खड़ी है और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

वहीं भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी से मिल रही जानकारी के मुताबिक, बुधवार 12:00 बजे उनके पार्थिव शरीर को भाजपा कार्यालय लाया जाएगा। जिसके बाद ही उनके पार्थिव शरीर का दोपहर 3:00 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा।http://www.satyodaya.com

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