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प्रदूषण मुक्त दिल्ली के लिए एक बार फिर Odd-Even, नितिन गडकरी ने जताई असहमति

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नई दिल्ली। प्रदूषण से निपटने के लिए अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से दिल्ली में Odd-Even पॉलिसी लागू कर रहे हैं। इस बात की जानकारी उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर के दी है। केजरीवाल ने बताया कि 4 से 15 नवंबर तक Odd-Even पॉलिसी लागू रहेगी। इसी के साथ उन्होंने दिल्लीवासियों से पटाखा मुक्त दिवाली मनाने का अनुरोध भी किया है। इसके अलावा प्रदूषण से मुक्ति के लिए 7 सूत्रीय ऐक्शन प्लान का भी ऐलान किया है।

सीएम केजरीवाल ने ये भी कहा कि दिल्ली सरकार N-95 मास्क खरीदकर लोगों में बांटेगी, जिससे लोग प्रदूषण से बच सकें। अभी 50-60 लाख मास्क खरीदने की योजना है। सीएम केजरीवाल ने आगे बताया कि छोटी दीवाली के दिन लेजर शो कराएगी, जिसमें फ्री एंट्री होगी। दिल्ली सरकार प्रदूषण के रोकथाम के लिए अन्य साधन भी अपनाएगी।

कूड़ा जलाने से रोकने के लिए नियुक्त होंगे मार्शल

Arvind Kejriwal ने बताया कि दिल्ली में 12 ऐसे स्पॉट है जहां प्रदूषण ज्यादा है ऐसी जगहों के लिए अलग से प्लान बनाएंगे। उड़ती धूल से लोगों को निजात दिलाने के लिए जगह-जगह पानी का छिड़काव किया जाएगा। सड़कों पर मैकेनाइज्ड स्वीपिंग (मशीन से झाड़ू लगाना) का भी प्रयोग होगा। इसी के साथ लोग कूड़ा या पत्ती न जलाएं इसके लिए हर वार्ड में मार्शल नियुक्त करेंगे।

वॉर रूम निपटेंगे प्रदूषण की शिकायत से

उन्होंने बताया कि लोगों को पेड़ उनके घर पर सप्लाई किये जाएंगे और उन्हें पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। स्कूली बच्चों में पर्यावरण को लेकर जागरूकता फैलाई जाएगी। इतना ही नहीं प्रदूषण की शिकायतों से निपटने के लिए वॉर रूम भी बनाए जाएंगे। Odd-Even और दीवाली के अलावा बाकी सारे पॉइंट विंटर एक्शन प्लान की तरह होंगे। इतना ही नहीं उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि दिल्ली में 8-10 महीने में 4,000 बसें आ जाएंगी और बस एग्रीगेटर पॉलिसी भी जल्द ही लागू होगी।

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Odd-Even से नितिन गडकरी ने जताई असहमति

दिल्ली को प्रदूषण मुक्त रखने लिए जहां केजरीवाल ने तमाम उपायों का ऐलान किया है वहीं, केंद्रीय परिवहन मंत्री ने उनकी इस योजना से असहमति जताई है। उन्होंने Odd-Even पॉलिसी को लेकर कहा कि, ‘मैं नहीं मानता कि इसकी जरूरत थी। हमने जो रिंग रोड बनाया है, उससे शहर के प्रदूषण में बड़ी कमी आई है। अगले 2 सालों में हमारी स्कीमों से दिल्ली प्रदूषण से मुक्त हो जाएगी।’

इन तारीखों पर नंबर प्लेट चेक कर निकलें

Odd-Even लागू होने के बाद आप जब घर से निकले तो अपनी नंबर प्लेट चेक कर लें। क्योंकि इस योजना के तहत ईवन दिन ऐसे वाहन चलेंगे जिनकी नंबर प्लेट के नंबरों की आखिरी संख्या ईवन होगी। अगले दिन वह वाहन चलेंगे जिनकी नंबर प्लेट के नंबरों की आखिरी संख्या ऑड होगी। ऑड नंबर की गाड़ियां 5, 7, 11, 13, 15 तारीख को चलेंगी जबकि ईवन नंबर की गाड़ियां 4, 6, 8, 12, 14 तारीख को चलेंगी।http://www.satyodaya.com

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Birthday Special: ये हैं बेगम अख्तर की टॉप-5 गजलें

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नई दिल्ली। गजल की मल्लिका कहें या महान गायिका… खलिश उर्दू का उच्चारण करने वाली बेगम अख्तर दादरा और ठुमरी की साम्राज्ञी थीं। आज उनकी जयंती है। उनके गीतों-गजलों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। लेकिन आज हम उनकी जिंदगी से जुड़े ऐसे रोचक पहलुओं के बारे में आपको बताएंगे जिनके बारे में पहले आपने नहीं सुना होगा ।

बेगम अख्तर का जन्म सात अक्टूबर 1914 उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ था। बेगम अख्तर के बचपन का नाम बिब्बी था। वो फैजाबाद के शादीशुदा वकील असगर हुसैन और उनकी दूसरी पत्नी मुश्तरीबाई की बेटी थीं।

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वह बचपन से ही गायिका बनना चाहती थीं लेकिन उनके परिवार वाले उनकी इस इच्छा के सख्त खिलाफ थे। हालांकि उनके चाचा ने उनके शौक को आगे बढ़ाया।

कुलीन परिवार से ताल्लुक रखने वाली अख्तरी बाई को संगीत से पहला प्यार सात साल की उम्र में थियेटर अभिनेत्री चंदा का गाना सुनकर हुआ। उस जमाने के विख्यात संगीत उस्ताद अता मुहम्मद खान, अब्दुल वाहिद खान और पटियाला घराने के उस्ताद झंडे खान से उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत की दीक्षा दिलाई गई।

बेगम अख्तर, गालिब, फैज अहमद फैज, जिगर मुरादाबादी, शकील बदायुनी और कैफी आजमी की लेखनी से काफी प्रभावित थीं। वे अधिकतर समय तो अपने गाने खुद कंपोज करती थीं और क्लासिकल राग पर बनाती थीं। बेगम अख्तर को अपनी शादी के बाद कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा। उनके पति ने बेगम अख्तर के गाने पर रोक लगा दी, वे इस दौरान 5 सालों तक गाना नहीं गा पाईं। मगर संगीत से उनका रिश्ता हमेशा से बहुत गहरा था। अपने करियर के अंतिम दिनों में जब वे बीमार चल रही थीं तो डॉक्टर्स ने भी उन्हें गाने से मना कर दिया था। मगर इसके बाद भी उन्होंने परफॉर्मेंस दी थी।

30 अक्टूबर, 1974 को उनका निधन हो गया। उन्हें कई तरह के पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री और पद्मभूषण भी शामिल हैं।http://www.satyodaya.com

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केजीएमयू में चेक से नहीं होगा लेन देन, फर्जीवाड़े के बाद वित्त नियंत्रक ने लिया फैसला

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लखनऊ। केजीएमयू में अब कोई भी लेन देन चेक से नहीं किया जाएगा। इसके लिए आरटीजीएस या फिर नेफ्ट से लेन देन होगा। यह फैसला केजीएमयू के बैंक खाते से दो करोड़ 60 लाख रुपए निकालने की कोशिश के बाद वित्त नियंत्रक ने लिया है।

बता दें कि राजधानी में इन दिनों बड़े-बड़े संस्थानों से चेक का क्लोन बनाकर करोड़ों रूपए निकालने की घटनाएं तेज हो गई हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में एक करोड़ रुपए निकाल लिए गए। ठीक उसी तर्ज पर केजीएमयू के बैंक खाते से भी दो करोड़ 60 लाख रुपए निकालने की कोशिश हुई है। हालांकि बैंक की सूझबूझ से चेक किलयर नहीं हो पाया।

केजीएमयू में मिले क्लोन चेक में पूर्व के अफसरों के हस्ताक्षर थे। वहीं मामले का संज्ञान में आते ही केजीएमयू प्रशासन ने जांच शुरू कर दिया है। केजीएमयू परिसर में ही इलाहाबाद बैंक की शाखा में खाता है। इस बैंक के खाते में एक अक्टूबर को आईसीआईसीआई बैंक का एक चेक लगाया गया। इस चेक में दो करोड़ 60 लाख रुपए अंकित थे। इस चेक पर केजीएमयू के पूर्व के वित्त नियंत्रक मुकुल अग्रवाल और वरिष्ठ एकाउंटेंट आरपी व्यास का हस्ताक्षर था। बैंक के अफसरों को पता था कि दोनों अफसर अब नहीं हैं।

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तत्काल बैंक ने चेक रोककर मामले की पूरी जानकारी केजीएमयू प्रशासन को दी। साथ ही इलाहाबाद बैंक के शाखा प्रबंधक को भी जानकारी दी गई। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई कि जिस नंबर का चेक भुगतान के लिए लगाया गया है। चेक नंबर का अगस्त में ही भुगतान हो चुका था। वह अगस्त में जारी किया जा चुका था। मामला पकड़ में आते ही भुगतान रोक दिया गया। इस मामले में आईसीआईसीआई बैंक की ओर से कार्रवाई होनी है। अभी बैंक और केजीएमयू प्रशासन भी अपने स्तर से जांच कर रहा है।

इस बारे में केजीएमयू के वित्त नियंत्रक मो. जमा का कहना है कि अब कोई भी लेन देन चेक से नहीं किया जाएगा। लेन देन आरटीजीएस या फिर नेफ्ट से होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जो मामला प्रकाश में आया है उस मामले की जांच की जा रही है। http://www.satyodaya.com

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बुके नहीं ‘बुक’ से स्वागत करना श्रेष्ठ है, उपहार में लोगों को दें किताबें

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लखनऊ। राणा प्रताप मार्ग मोतीमहल वाटिका लाॅन में 20 सितम्बर से जारी हुआ राष्ट्रीय पुस्तक मेला तीन दिन आगे बढ़ गया है। औपचारिक समापन समारोह में गांधी जयंती तक मेला बढ़ाये जाने की घोषणा होते ही पुस्तक प्रेमियों के चेहरे खिल उठे हैं। उमड़ते-घुमड़ते मेघों के बीच मेले में आज बराबर कार्यक्रम चले और इस लुत्फ भरे मौसम में पुस्तक प्रेमियों ने अपनी पसंदीदा पुस्तक को भी खरीदा। रायबरेली से आये पुस्तक प्रेमी राजेश विक्रम ने बताया कि वर्षा के बावजूद वे मेले में तीन बार आए और करीब 38 सौ की किताबें खरीदीं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज चुनिंदा प्रकाशकों, प्रमुख सहयोगियों को यहां आयोजन समिति की ओर से सम्मानित किया गया।

इससे पहले उपाध्याय गुप्ति सागर मुनि की दो पुस्तकों ‘365 अच्छे काम’ व ‘सफलता के दस कदम’ का लोकार्पण हुआ। संयोजन मनोज सिंह चंदेल ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि जिला प्रशासन की अनुमति और मेले में आए प्रकाशकों के सहयोग के बाद पुस्तक मेला आगे बढ़ा है और अब यह मेला दो अक्टूबर तक यहां जारी रहेगा। मेले के दसवें दिन आज छ्ट्टी होने के नाते बहुत अधिक भीड़ रही। नेत्र परीक्षण शिविर में भी बड़ी तादाद में आगंतुकों ने आंखे टेस्ट कराईं।

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बिन्दु जैन के संचालन में चले समारोह में मण्डलायुक्त मुकेश कुमार मेश्राम ने किताबों का महत्व बताने के साथ आयोजन को सराहते हुए कहा कि अब बुके नहीं ‘बुक’ से ही स्वागत करना श्रेष्ठ है। साथ ही कहा उपहार में भी लोगों को किताबें दें। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. भट्ट ने कहा कि हर पुस्तक हमें कुछ न कुछ प्रेरणा देती है। संरक्षक मुरलीधर आहूजा ने कहा कि किताबें हमें कठिन समय में राह सुझाती है। प्रमुख सहयोगियों में किरन फाउण्डेशन के विशाल श्रीवास्तव, ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन के राजवीर रतन, रचनाकार डाॅ.अमिता दुबे, लोक नृत्यांगना ज्योति किरन रतन इत्यादि को सम्मानित किया गया।

मुख्य साहित्यिक मंच पर स्नेह वेलफेयर फाउण्डेशन की ओर से वरिष्ठ साहित्यकारों इतिहासविद् योगेश प्रवीन, रत्ना बापुली रत्ना, डाॅ. अमिता आदि कई रचनाकारों को स्मृतिचिह्न व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में स्नेहलता की पुस्तक कस्तूरबा गांधी का विमोचन हुआ। बच्चों की गीत-संगीत व नृत्य प्रस्तुतियांे से गुलजार रहा। संयोजक ज्योति किरन रतन के संयोजन में हुई प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण किया गया तो ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन व लोक आंगन के सौजन्य से हुई लोकनृत्य कार्यशाला के प्रशिक्षकों लक्ष्मी जोशी, सुबोध पाण्डेय, रेखा सिंह व लोक संस्कृति शोध संस्थान के प्रतिनिधियों को कला वसुधा पत्रिका, कुछ पुस्तकें व पौधे प्रदान किये गये।

वहीं आज की शाम कथक के नाम भी रही। गुरु अर्जुन मिश्र, अनुज मिश्र व सुरभि सिंह की शिष्याओं ईशा रतन-मीशा रतन ने ताण्डव से सजी शिव स्तुति और तराने पर दर्शनीय कथक युगल रूप में प्रस्तुत किया। यहां मंच विजेता बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। इसके साथ ही अनेक बच्चों ने यहां गीत, संगीत व नृत्य की मोहक प्रस्तुतियां दीं। मेले के निदेशन आकर्ष चंदेल ने बताया कि अगले तीन दिनों में स्थगित हुए कार्यक्रमों को आयोजित करने के प्रयत्न के साथ अन्य कार्यक्रमों को भी आयोजित किया जायेगा।http://www.satyodaya.com

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