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जन्मदिन विशेष: ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की मौत पर पाकिस्तान ने रखा था 50 हजार का इनाम

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15 जुलाई भारतीय इतिहास का वह दिन है, जब भारतीय सेना के महान अफसर मोहम्मद उस्मान का जन्म हुआ था। भारतीय सेना में एक ऐसा जांबाज अफसर भी था जिसने अपने शौर्य और पराक्रम के बल पर दुश्मन के दांत तो खट्टे किए ही इसके साथ-साथ देश की एकता और अखंडता की मिसाल भी दुनिया के सामने बखूबी पेश की। उसने बताया कि जब सवाल देश की सुरक्षा का हो तो उससे बड़ा धर्म कोई नहीं होता। जी हां, हम बात कर रहे हैं सन् 1947 में हुए भारत-पाक युद्ध में शहीद मोहम्मद उस्मान की।

ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का जन्म 15 जुलाई, 1912 में आजमगढ़ में हुआ था। उनके पिता मोहम्मद फारूक खुनाम्बिर पुलिस अफसर थे। उनकी मां का नाम जमीलन बीबी था। उनके पिता मोहम्मद फारुख चाहते थे कि बेटा सिविल सर्विस की पढ़ाई करे, लेकिन मोहम्मद उस्मान शुरू से ही सेना में जाने की ललक रखते थे। महज 20 साल की उम्र में ही उस्मान ने रॉयल मिलिट्री एकेडमी में दाखिला ले लिया था। मिलिट्री संस्थान द्वारा चुने गए 10 लड़कों में से उस्मान भी एक थे।

मिलिट्री संस्थान में चयनित होने के बाद वर्ष 1932 में देहरादून में इंडियन मिलिट्री एकेडमी की स्थापना हुई। उस्मान आर्मी अफसर बनने के लिए वहां रवाना हो गए और वहां 3 साल का कठिन प्रशिक्षण लिया।सन् 1945 में उस्मान बलूच रेजिमेंट में तैनात किए गए। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मोहम्मद उस्मान को अफगानिस्तान और बर्मा में तैनात मिली। सन् 1945 से 1946 तक उन्होंने 10वीं बलूच रेजिमेंट की 14वीं बटालियन संभाली थी।

सन् 1947 में भारत-पाक बटंवारे में सेना भी बंटी थी। बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा था लिहाजा बंटवारे में बलूच रेजिमेंट पाकिस्तानी खेमे का हिस्सा बनी और इस तरह मोहम्मद उस्मान को भी पाकिस्तान में जाना पड़ता लेकिन वह भारत में ही रहना चाहते थे। उस्मान एक काबिल अफसर थे जिस कारण पाकिस्तानी नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने उन्हें पाकिस्तान का चीफ आर्मी कमांडर बनाने तक का प्रलोभन दिया था, पर हिन्दुस्तान की धरती से प्यार करने वाले उस्मान नहीं माने। बाद में उस्मान को डोगरा रेजिमेंट में शिफ्ट कर दिया गया और वह भारत में ही रहे। भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने 25 दिसंबर,1947 तक झनगड़ नाम के इलाके पर अपना कब्जा जमा लिया था। लेकिन यह ब्रिगेडियर उस्मान की बहादुरी थी कि मार्च,1948 में नौशेरा और झनगड़ फिर भारत के कब्जे में आ गए। नौशेरा की भारत में वापसी और इस अभियान में उस्मान की अहम भूमिका के कारण उन्हें ‘नौशेरा का शेर’ के नाम से संबोधित किया जाने लगा।

ब्रिगेडियर उस्मान से डरे पाकिस्तान ने रखा था 50 हजार का इनाम
नौशेरा की घटना के बाद पाकिस्तानी सरकार ने ब्रिगेडियर उस्मान की मौत पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा था, जो कि उस समय के लिहाज से एक बहुत बड़ी रकम थी। ब्रिगेडियर उस्मान ने कसम खाई थी कि जब तक झनगड़ भारत के कब्जे में नहीं आएगा, तब तक वह जमीन पर चटाई बिछाकर ही सोएंगे। आखिरकार उस्मान ने झनगड़ पर भी कब्जा जमा लिया। लेकिन 3 जुलाई,1948 को झनगड़ में मोर्चे पर तैनाती के दौरान एक तोप के गोले की चपेट में आने से वह शहीद हो गए।शहीद मोहम्मद उस्मान को मरणोपरांत महावीर चक्र से नवाजा गया। साथ ही दो खिताब ‘हीरो ऑफ नौशेरा’ और ‘नौशेरा का रक्षक’ से भी सम्मानित किया गया। ब्रिगेडियर उस्मान को राजकीय सम्मान के साथ नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया कब्रग्राह में दफनाया गया।

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अलीगढ़: असलहों से लैस बदमाशों ने दिनदहाड़े ज्वैलरी शाॅप में घुसकर 40 लाख का सोना लूटा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लूट और हत्या के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे है। आए दिन कोई न कोई घटना घटती रहती है। अलीगढ़ में शुक्रवार को दिनदहाड़े तीन बाइक सवार बदमाशों ने फिल्मी स्टाइल में पिस्टल दिखाकर बन्नादेवी क्षेत्र के खैर रोड स्थित सुंदर ज्वेलर्स के यहां लूटपाट को अंजाम दिया। हाथों में तमंचे लहराते हुए फरार हो गए। बदमाशों ने करीब 35 लाख रुपए का सोना और 40 हजार रुपए की नगदी लूट ले गए। जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

दिनदहाड़े लूट की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे आईजी सहित पुलिस के आला अधिकारी जांच में जुटे हैं। एसपी सिटी और एसपी क्राइम के नेतृत्व में बदमाशों की धरपकड़ के लिए टीम का गठन किया जा चुका है। पुलिस सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर शीघ्र बदमाशों को तलाश कर घटना का खुलासा करने का दावा कर रही है।

एसएसपी मुनिराज ने कहा कि एसपी सिटी और एसपी अपराध के नेतृत्व में बदमाशों की तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर शीघ्र ही बदमाशों की तलाश कर घटना का खुलासा किया जाएगा।

पीड़ित ज्वेलर्स ने बताया कि दोपहर करीब तीन बजे के समय बाइक पर सवार होकर तीन बदमाश दुकान पर आए और तमंचे दिखाकर दुकान में रखे 35 लाख रुपये कीमत के 700 ग्राम सोने के आभूषण, 50 हजार की नगदी लूटकर फरार हो गए। साथ ही बताया कि 4 वर्ष पूर्व भी हमारे यहां डकैती पड़ चुकी है।

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पीड़ित ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में बदमाश साफ नजर आ रहे हैं और पुलिस प्रशासन ने भी मुझे सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहे बदमाशों को शीघ्र गिरफ्तार कर घटना का खुलासा करने का आश्वासन दिया है।http://www.satyodaya.com

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B’day Special: प्रेम और शांति की दूत थीं मदर टेरेसा, जाने, उनके जीवन से जुड़ी खास बातें

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Happy Birthday Mother Teresa: आज मदर टेरेसा का जन्मदिन है। इनका जन्म 26 अगस्त 1910 में हुआ था। इन्हें रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा कलकत्ता की संत टेरेसा के नाम से नवाजा गया था। इन्होंने सन् 1949 में अपनी इच्छा से भारतीय नागरिकता ले ली थी। इनकी वेशभूषा की बात करें तो ये नीले रंग के पाड़ की साड़ी पहनती थीं। इनके गले में हमेशा ही एक क्रॉस चिन्ह लटका रहता था। मदर टेरेसा असाधारण व्यक्तित्व की धनी थीं। इन्हें ममता और मानवता की मूर्ति भी कहा जाता है।

भारत में मदर टेरेसा
मदर टेरेसा 19 वर्ष की आयु में 1929 में भारत आईं और समाजसेवा की शुरुआत की। उन्हें भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों की नागरिकता मिली हुई थी। जिसमें ऑटोमन, सर्बिया, बुल्गेरिया और युगोस्लाविया शामिल हैं। मदर टेरेसा ने कहा था। कि एक बार वे दार्जलिंग की यात्रा पर जा रही थीं। तो उन्हें अंतरात्मा से आवाज़ आई। कि उन्हें सब कुछ छोड़ कर असहाय लोगों की सहायता के लिए लग जाना चहिए। वर्ष 1946 में उन्होंने गरीबों, असहायों की सेवा का संकल्प लिया था। निस्वार्थ सेवा के लिए मदर टेरेसा ने वर्ष 1950 में कोलकाता में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की थी। उनके द्वारा लिखित दस्तावेजों में वर्णित है।

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बता दें उन्होंने 1981 में उन्होंने अपना नाम बदलकर टेरेसा रख लिया था। ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ में अति दरिद्र लोगों की सेवा की जाती थी। वर्ष 1952 में उन्होंने ‘निर्मल हृदय’ नाम से एक आश्रम की शुरुआत की यहां आने वाले लोगों को न केवल निःशुल्क मेडिकल सेवा दी जाती थी। बल्कि उन्हें मर्यादापूर्वक मृत्यु स्थान भी मिलता था। आगे चलकर उन्होंने कुष्ठ रोगियों के लिए ‘शांति नगर’ नाम से एक अस्पताल भी आरंभ किया इसके अतिरिक्त उन्होंने निर्मल शिशु भवन की शुरुआत की जहां बच्चों को स्वास्थ्य सुविधा दी जाती थी।

मदर टेरेसा के जीवन की 10 अनमोल वचन:
1. अपना प्रेम संदेश बार-बार सुना जाएं तो उसे बार-बार कहें। ठीक उसी तरह जिस तरह दिए को जलाए रखने के लिए बार-बार तेल डालना जरूर होता है।
2.हम यह काम करते हैं यह चमत्कार नहीं है बल्कि यह है कि हमें ऐसा करने में हमें खुशी मिलती है।
3. अगर आपमें सौ लोगों को खिलाने का सामर्थ्य नहीं है तो किसी एक को खिलाएं।
4. मुस्कुराहट से ही शांति की शुरुआत होती है।
5. आप जहां भी जाएं वहां प्यार फैलाएं। जो आपके पास आए वह खुश होकर ही लौटे।
6. अवांछित होना सबसे बड़ी बिमारी है, कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं।

7. रोगी की भूख को मिटाने से कहीं ज्यादा जरूरी प्यार की भूख को मिटाना है।
8. अगर हमारे मन में शांति नहीं है तो इसका मतलब यह है कि हम यह भूल चुके हैं कि हम सब एक-दूसरे के हैं।
9. सबसे भयानक गरीबी अकेलापन है।
10. अगर कोई व्यक्ति ऐसा है जिसका कोई ख्याल रखने वाला न हो या जिसे कोई चाहता न हो या जिसे हर कोई भूल चुका हो तो उसकी तुलना ऐसे व्यक्ति से की जा सकती है जिसके पास कुछ खाने को न हो या गरीबी से ग्रस्त हो।http://satyodaya.com

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निगोहां में तिहरे हत्याकांड की गुत्थी पुलिस के लिए चुनौती

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घटनास्थल के पास मिला मोबाइल और टार्च, निजी गार्ड राजस्व विभाग के दस्तावेज में पहले से मृत घोषित

लखनऊ। निगोहां में तिहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। पुलिस को छानबीन में शनिवार को घटनास्थल से थोड़ी दूर पर एक मोबाइल फोन और टार्च पड़ा मिला है। तीन दिन पूर्व यहां बुजुर्ग दंपति और निजी गार्ड की हत्या के मामले में अब पुलिस यह पता लगा रही है कि वह मोबाइल फोन किसका है। पुलिस तिहरे हत्याकांड में संपति विवाद की दिशा में पड़ताल कर रही है।

पड़ताल के दौरान पुलिस को एक चैकाने वाली बात पता चली है। जांच में सामने आया है कि निजी गार्ड सत्रोहन राजस्व विभाग के दस्तावेज में पहले से ही मृत घोषित है। इस तथ्य के उजागर होने के बाद गुत्थी और उलझ गई है। पुलिस राजस्व विभाग की टीम के साथ इसके बारे में जानकारी कर रही है। वारदात के राजफाश के लिए उन्नाव और रायबरेली की टीम को भी लगाया गया है। पुलिस ने हिरासत में लिए गए कुछ लोगों से कई बिंदुओं पर पूछताछ की है, लेकिन हत्या का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

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नगराम मोड़ पर हाईवे के किनारे मकान में बुजुर्ग दंपति रामसनेही और राम जानकी की हत्या कर दी गई थी। वहीं थोड़ी दूर निजी गार्ड सत्रोहन का भी शव झाडियों में मिला था। तीनों के सिर पर पत्थर से प्रहार कर हत्या की गई थी। पुलिस बुजुर्ग दंपति और निजी गार्ड की हत्या के बीच संबंध खंगाल रही है। हालांकि अभी तक वह हमलावरों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।http://www.satyodaya.com

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