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बलरामपुर अस्पताल में एसी, कूलर व पंखे बने शोपीस, मरीज ले रहे हत्थू पंखे का सहारा

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लखनऊ। भीषण और तपती गर्मी के बावजूद भी राजधानी के अस्पतालों में कहीं एसी खराब है तो कहीं है भी तो वह केवल शोपीस बना हुआ है। मरीजों को राहत देने के लिए पंखे व कूलर तो लगाए गए हैं लेकिन कहीं पखें ही नहीं चल रहे हैं और चल भी रहे हैं तो वह हवा भी देने में शून्य है। वार्डों में कूलर भी लगाए गए हैं लेकिन कई जगह बेकार पड़े हुए हैं जो चल भी रहे हैं तो उसमें नियमित पानी नहीं डाला जा रहा है। बलरामपुर अस्पताल में रविवार को कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिले। यहां के इमरजेंसी में कुछ एसी खराब पड़े हुए हैं।

एक या दो एसी चल भी रहें हैं तो उससे मरीजों को कोई राहत नहीं मिल रही। इमरजेंसी के ऊपर बने प्रथम तल के वार्डों में एसी और पंखे चलने के बाद भी मरीज हत्थू पंखे का सहारा ले रहे थे। जबकि एसी भी लगा हुआ था जो चल रहा था। कुछ मरीजों ने बताया कि यहां लगाए गए पंखे और एसी केवल दिखावटी हैं। इसके लिए कई बार यहां के कर्मचारियों से कहा गया लेकिन उन्होंने कहा कि इस बारे में आप अस्पताल प्रशासन से बात करें। हम लोग कई बार इसके लिए कह चुके हैं।

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वहीं न्यू वार्ड के द्वितीय तल पर बने इएनटी 32 महिला वार्ड में एक कूलर लगा था जो कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है। यहां भर्ती हैदरगंज लखनऊ की महिला मरीज रूही ने बताया कि हम करीब चार दिनों से यहां भर्ती हैं लेकिन तपती गर्मी में कूलर खराब है। पंखा चल भी रहा है तो उसकी हवा भी नहीं लग रही। रूही का पथरी का आपरेशन हुआ है। दूसरी तरफ यहां के नर्सिंग स्टेशन डयूटी रूम के ठीक सामने बने आर्थोपेडिक वार्ड 33 में भी एक पंखा खराब पड़ा हुआ है। यहां भर्ती मरीजों ने बताया कि इसके बारे में यहां के स्टाफ से कई बार कहा गया लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

वहीं जनरल सर्जरी वार्ड 31 में भी कुछ पंखे बंद पड़े हुए थे। मरीजों को राहत देने के लिए तीन कूलर भी लगाए गए हैं जो चल रहे थे लेकिन दो में पानी ही नहीं डाला गया था। जिसकी गर्म हवा से मरीज पसीनों से लतपथ थे। खास बात यह थी कि जनरल सर्जरी वार्ड में लगाए गए कूलर मरीजों की पहुंच से भी दूर हैं। जो पास के नहीं बल्कि उसके ठीक सामने दूर के मरीजों को हवा दे रहे हैं। इस बारे में अस्पताल प्रशासन बार-बार यही जवाब देता है कि खराब पड़े एसी, कूलर व पंखों की मरम्मत के लिए मैकेनिक से कहा गया है और वह जल्द से जल्द ठीक कर देगा। वहीं अस्पताल सूत्रों की मानें तो मैकेनिकों को इस तरह की कोई सूचना नहीं दी गई है।http://www.satyodaya.com

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विश्व पाइल्स दिवस पर केजीएमयू में किया गया जागरूकता कार्यक्रम

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लखनऊ। पाइल्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सर्जरी विभाग के द्वारा किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में आज अंतरराष्ट्रीय पाइल्स दिवस के अवसर पर जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए एसिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा कि इस मौके पर एक पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। उसके माध्यम से पाइल्स के प्रति जानकारी देने का प्रयास किया गया। जिसमें मेडिकल व पैरामेडिकल व नर्सिंग के छात्रों ने भाग लिया। पोस्टरों प्रतियोगिता में उत्तम पोस्टरों को पुरस्कृत भी किया गया।

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वहीं डाक्टर अरशद ने कहा कि पाइल्स एक साधारण रोग है। लगभग 50 प्रतिशत लोगों को जीवनकाल में इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना होती है। जिसे स्वस्थ्य जीवनशैली अपना कर कम किया जा सकता है। सही समय पर सटीक इलाज कराने से इसका निवारण संभव है। इस जागरूकता अभियान से लोगों को पाइल्स से बचने व स्वस्थ्य जीवनशैली के लिए प्रोत्साहित करना और भ्रामक जानकारी से दूर रहना है। पाइल्स शरीर का नार्मल अंग है। जो कॉटिनैंस की प्राकृतिक परिक्रिया में अपना योगदान देता है। यह गुदा जैसा वैस्कुलर कुशन के रूप में होता है। कभी-कभी इसमें खून का अधिक भराव या अपने स्थान से नीचे खिसकने के कारण मरीज में लक्षण आते हैं। पाइल्स के मुख्य लक्षण खून आना गुदा द्वारा सूजन होना दर्द होना है। आमतौर पर यह लक्षण स्वतः ही ठीक हो जाते हैं। या कभी-कभी इसके इलाज की जरूरत पड़ती है। 80 प्रतिशत तक मरीजों में बिना ऑपरेशन के सफल इलाज हो जाता है। डॉक्टर ने बताया कि आज पाईल्स दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक मेडिकल छात्र मरीजों के साथ-साथ आम जनता ने भी भाग लेकर इस बीमारी से कैसे बचाव किया जाए और बेहतर इलाज के बारे में जानकारी हासिल किया।http://www.satyodaya.com

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JNU छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरे BBAU के छात्र,कुलपति का पुतला फूंका

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्ववविद्यालय के छात्रों ने देर रात बीबीएयू कैंपस में जेएनयू छात्र संगठन के समर्थन में न केवल सड़क पर उतरे। साथ ही छात्रों ने जेएनयू कुलपति का पुतला दहन कर विरोध दर्ज किया। वहीं प्रदर्शन के जरिये छात्रों ने जेएनयू छात्रों पर हुए लाठी चार्ज का भी जमकर विरोध किया।

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बीबीएयू के छात्र आलोक कुमार सिंह ने बताया कि आज हम सभी जेएनयू कुलपति का पुतला दहन किए है और छात्रों पर हुए लाठी चार्ज का विरोध किया है। वहीं आलोक ने बताया कि एमएचआरडी और जेएनयू प्रशासन मनमानी तरीके से फीस वृध्दि की है और इसके विरोध में वहां के छात्र अपनी मांग उठा रहे थे। लेकिन केंद्र सरकार और जेएनयू प्रशासन ने बेरहमी से छात्रों पर लाठी बरसाई। जिसका हम सभी छात्र कड़ी निंदा करते है और इसका जमकर विरोध करते है। हम छात्रों की मांग है कि जेएनयू प्रशासन बड़ी हुई फीस वृध्दि वापस ले।http://www.satyodaya.com

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डेंगू के बढ़ते मरीजों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने संभाली कमान, दिए निर्देश

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लखनऊ। एक बार फिर उत्तर प्रदेश डेंगू की चपेट में है। सरकारी आंकड़ों में इस वर्ष सात हजार से ज्यादा मरीज चिन्हित किये गए हैं, जबकि 10 लोगों की मौत हो चुकी है। करोड़ों के बजट से संचारी रोग अभियान चलाने के बाद भी 2019 के आंकड़े संतोषजनक नहीं हैं। इसी का नतीजा है कि मामले में मुख्यमंत्री ने खुद कमान संभाली है और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारीयों को निर्देश भी जारी किये हैं।

बता दें कि, डेंगू के मामले में यूपी की राजधानी लखनऊ नंबर वन पर है। यहां सरकारी आंकड़ों में 1452 मरीज चिन्हित किये गए हैं। वहीं चार की मौत भी हो चुकी है। दूसरे नंबर पर कानपूर और तीसरे नंबर पर प्रयागराज है। यूपी में अक्टूबर माह में चार हजार से ज्यादा मामले डेंगू के आ चुके हैं। वहीं पिछले साल इनकी संख्या दो हजार के करीब रही। स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में अलर्ट जारी किया है। डेंगू के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने का दावा किया है लेकिन नतीजा इसके उल्ट है।

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अस्पतालों में वार्ड तो बना दिए गए हैं लेकिन वार्ड में बेड की अपेक्षा मरीजों की संख्या बहुत ज्याद है। स्वास्थ्य विभाग की संचारी रोग निदेशिक डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी बताती हैं कि डेंगू के वायरस का हर तीन साल में चक्र चलता है। जिससे मरीजों की संख्या बढ़ती है। इस वर्ष डेंगू के मामले बढे हैं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से सतर्कता बरती जा रही है।

यूपी के क्या हैं सरकारी आंकड़े

यूपी में स्वाइन फ्लू के 7057 मरीज, 10 की मौत। लखनऊ में डेंगू के 1452 मामले, चार की मौत। कानपूर में डेंगू के 1386 मामले, एक की मौत। प्रयागराज में डेंगू के 326 मामले। 2016 में सबसे ज्यादा 15033 डेंगू के मरीज रहे हैं। 2016 में 42 लोगों की हुई थी मौत।

डेंगू के लक्षण

तेज सिर दर्द के साथ बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंख के पीछे दर्द। बुखार के साथ सिरदर्द, बदन दर्द, कमर दर्द और त्वचा पर चकत्ते आदि के लक्षण। गंभीर मामलों में नाक, मुंह और मसूढ़ों से खून भी आ सकता है।

बरतें सावधानियां

बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल का प्रयोग करें। डेंगू के इलाज के लिए कोई खास दवा नहीं होती है। किसी किस्म की दर्द निवारक दवा आदि का प्रयोग न करें। पपीते के पत्तों का रस निकाल कर मरीज को दिन में दो से तीन बार दें। घर और आस-पास पानी न जमा होने दें।http://www.satyodaya.com

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November 20, 2019, 6:31 pm
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