Connect with us

Featured

बीमारी से हुई मौतों पर सिद्धार्थ नाथ ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री से की बात

Published

on

सभी आवश्यक मदद देने की पेशकश, बलिया, देवरिया व कुशीनगर के डीएम व सीएमओ को भी निर्देश

लखनऊ। बिहार के मुजफ्फरपुर में दुर्भाग्यपूर्ण बीमारी से हुई मौतों के मद्देनजर, यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से दूरभाष पर बात की और यथासंभव सभी आवश्यक मदद की पेशकश की। अगले चरण में प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य बिहार को यूपी में अपने समकक्ष के साथ बात करनी है और आवश्यक मदद के लिए सूचित करना है। स्वास्थ्य मंत्री ने बलिया, देवरिया और कुशीनगर के जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ बात की तथा उन्हें निर्देशित किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी निवारक उपायों को कार्य योजना के अनुसार अमल में लाया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें यह भी निर्देशित किया कि तत्काल अंतर-विभागीय बैठकें आयोजित की जाएं, डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मचारी छुट्टी पर न भेजें जाएं, यह सुनिश्चित हो कि वेंटिलेटर उचित ऑक्सीजन की आपूर्ति के साथ काम करें तथा सभी सीएमओ अपने क्षेत्राधिकार के हर पीकू और मिनी पीकू का नियमित दौरा करें।

यह भी पढ़े :- पिकनिक स्पॉट पर नहाने गए युवक डूबने से हुई मौत

इसी के साथ सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है कि यदि कोई भी बच्चा बुखार से पीड़ित पाया जाता है, तो उसे तुरंत निदान और उपचार के लिए सरकारी अस्पताल में भेजा जाए। इसके अलावा, स्वास्थ्य मंत्री ने सचिव स्वास्थ्य को स्वयं तीनों जिलों की दैनिक आधार पर समुचित निगरानी करने के लिए कहा है तथा महानिदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य को देवरिया, बलिया एवं कुशीनगर के संयुक्त निदेशक, जो अपने जनपद के प्रभारी भी हैं, को यह निर्देशित करने के लिए कहा है कि वे अपने-अपने जनपदों के सभी पीकू एवं मिनी पीकू में जाकर वेंटिलेटर, आवश्यक उपकरण, ऑक्सीजन आपूर्ति, मानव संसाधन एवं औषधियों की समुचित उपलब्धता को सुनिश्चित करें।http://www.satyodaya.com

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Featured

डेंगू के बढ़ते मरीजों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने संभाली कमान, दिए निर्देश

Published

on

लखनऊ। एक बार फिर उत्तर प्रदेश डेंगू की चपेट में है। सरकारी आंकड़ों में इस वर्ष सात हजार से ज्यादा मरीज चिन्हित किये गए हैं, जबकि 10 लोगों की मौत हो चुकी है। करोड़ों के बजट से संचारी रोग अभियान चलाने के बाद भी 2019 के आंकड़े संतोषजनक नहीं हैं। इसी का नतीजा है कि मामले में मुख्यमंत्री ने खुद कमान संभाली है और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारीयों को निर्देश भी जारी किये हैं।

बता दें कि, डेंगू के मामले में यूपी की राजधानी लखनऊ नंबर वन पर है। यहां सरकारी आंकड़ों में 1452 मरीज चिन्हित किये गए हैं। वहीं चार की मौत भी हो चुकी है। दूसरे नंबर पर कानपूर और तीसरे नंबर पर प्रयागराज है। यूपी में अक्टूबर माह में चार हजार से ज्यादा मामले डेंगू के आ चुके हैं। वहीं पिछले साल इनकी संख्या दो हजार के करीब रही। स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में अलर्ट जारी किया है। डेंगू के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने का दावा किया है लेकिन नतीजा इसके उल्ट है।

यह भी पढ़ें :- कोर्ट परिसर में साले ने साथियों संग मिलकर जीजा को पीटा

अस्पतालों में वार्ड तो बना दिए गए हैं लेकिन वार्ड में बेड की अपेक्षा मरीजों की संख्या बहुत ज्याद है। स्वास्थ्य विभाग की संचारी रोग निदेशिक डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी बताती हैं कि डेंगू के वायरस का हर तीन साल में चक्र चलता है। जिससे मरीजों की संख्या बढ़ती है। इस वर्ष डेंगू के मामले बढे हैं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से सतर्कता बरती जा रही है।

यूपी के क्या हैं सरकारी आंकड़े

यूपी में स्वाइन फ्लू के 7057 मरीज, 10 की मौत। लखनऊ में डेंगू के 1452 मामले, चार की मौत। कानपूर में डेंगू के 1386 मामले, एक की मौत। प्रयागराज में डेंगू के 326 मामले। 2016 में सबसे ज्यादा 15033 डेंगू के मरीज रहे हैं। 2016 में 42 लोगों की हुई थी मौत।

डेंगू के लक्षण

तेज सिर दर्द के साथ बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंख के पीछे दर्द। बुखार के साथ सिरदर्द, बदन दर्द, कमर दर्द और त्वचा पर चकत्ते आदि के लक्षण। गंभीर मामलों में नाक, मुंह और मसूढ़ों से खून भी आ सकता है।

बरतें सावधानियां

बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल का प्रयोग करें। डेंगू के इलाज के लिए कोई खास दवा नहीं होती है। किसी किस्म की दर्द निवारक दवा आदि का प्रयोग न करें। पपीते के पत्तों का रस निकाल कर मरीज को दिन में दो से तीन बार दें। घर और आस-पास पानी न जमा होने दें।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Featured

पत्नी ने पति को लीवर डोनेट कर बचाई जान, दोनों की हालत में काफी सुधार

Published

on

लिवर प्रत्यारोपण डोनर आईसीयू से बाहर वार्ड में शिफ्ट

लखनऊ। केजीएमयू में लिवर प्रत्यारोपण वाले मरीज के डोनर को आईसीयू से बाहर कर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि मरीज अभी आईसीयू में ही है। दोनों की हालत में पहले से काफी सुधार हुआ है। दोनों मरीज की अच्छी रिकवरी हो रही है।

यह भी पढ़ें :- छात्रा समेत दो की डेंगू से मौत, सीडीओ ने अफसरों को लगाई फटकार

अमेठी निवासी ज्ञानेंद्र सिंह का केजीएमयू में डॉक्टरों ने छह अक्तूबर को लिवर प्रत्यारोपण किया था। पत्नी वंदना ने उसे लिवर देकर जीवन दिया है। दोनों ही मरीज अब तक आईसीयू में थे। पांचवे दिन रविवार को डॉक्टरों ने दोनों की हालत में बेहतर सुधार होते देख डोनर वंदना को आईसीयू से बाहर कर वार्ड में भेज दिया है। जबकि अभी ज्ञानेंद्र को आईसीयू में ही रखकर इलाज दिया जा रहा है।

केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉक्टर सुधीर सिंह ने बताया कि, दोनों मरीज की हालत में पहले से बहुत सुधार है। एहतियात के तौर पर मरीज ज्ञानेंद्र को आईसीयू में रखा है। मरीज की संक्रमण संबंधी जांच रिपोर्ट सामान्य आई है। खाने के लिए दोनों को अभी तरल पदार्थ ही दिया जा रहा है।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Featured

आपात स्थिति से निपटने का एलर्ट राजधानी के संस्थानों व अस्पतालों पर बेअसर

Published

on

ऑक्सीजन के अभाव में घंटो तड़पती रही महिला मरीज

लखनऊ। आपात स्थिति से निपटने के लिए शासन का एलर्ट राजधानी के संस्थानों व अस्पतालों पर बेअसर रहा। एक महिला मरीज को मेडिसिन विभाग के चिकित्सक व कर्मचारी ऑक्सीजन उपलब्ध न होने की बात कहकर टरकाते रहे। कई घंटो तक आॅक्सीजन के अभाव में महिला मरीज तड़पती रही। परिजनों के शोर शराबा करने पर उसे आॅक्सीजन उपलब्ध कराया गया। मरीज के साथ आए परिजन महिला को भर्ती करने के लिए हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे। मरीज की हालत पहले से और खराब होने लगी। जिसके बाद ही आनन-फानन में परिजनों उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं जो शनिवार को पूरी तरह से भर गए थे। गंभीर मरीजों को बेड न खाली होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया। लखनऊ के अमौसी निवासी महिला मरीज उमा (26) को आॅक्सीजन स्पोर्ट की आवश्यकता बताकर उसे डॉक्टरों ने उसे मेडिसिन वार्ड भेज दिया। परिजन जब यहां आए तो उन्हें आॅक्सीजन न उपलब्ध होने की बात कहकर टरकाते रहे। कई घंटो तक वह आॅक्सीजन के अभाव में तड़पती रही। मरीज की हालत पहले से और खराब हो गई तो परिजनों ने शोर शराबा शुरू कर दिया। जिसके बाद आनन-फानन में उसे आॅक्सीजन उपलब्ध कराया गया।

मरीज के साथ आयी उसकी बह प्राची ने बताया कि, मरीज की हालत बहुत खराब है। भर्ती के लिए हम लोगों ने यहां के पीआरओ से भी संपर्क किया लेकिन उन्होंने यहां बेड खाली न होने की बात कहकर दरकिनार कर दिया। परिजनों के मुताबिक उन्होंने चिकित्सक, कर्मचारी से लेकर पीआरओ तक के सामने हाथ जोड़ा लेकिन उसका कोई असर नहीं रहा। थक हारकर वह गंभीर मरीज को लेकर निजी अस्पताल पहुंच गए।

यह भी पढ़ें :- दर्ज मुकदमे में फरार चल रहा शातिर जालसाज गिरफ्तार

दर्द से कराहता रहा मरीज

मेडिसिन वार्ड के बाहर ही महाराजगंज निवासी मरीज पंकज (15) दर्द से कराहता रहा। उसके पिता देवेन्द्र ने बताया कि यहां के डॉक्टर केवल एक वार्ड से दूसरे वार्ड में टहला रहे हैं। डॉक्टरों ने मेडिसिन वार्ड में भेजा है। बेड के लिए सुबह से यहां खड़े हैं लेकिन अभी तक नहीं मिला। बेटे की हालत पहले से और खराब होती जा रही है। ऐसे में हम इसे कहां लेकर जाएं। खबर लिखे जाने तक भी उसे बेड नहीं मिला था।

सिटी स्कैन के लिए नहीं आया नंबर

ट्रॉमा में कई गंभीर मरीजों को सुबह से शाम तक लंबी लाइन के बावजूद उनका नंबर नहीं आया। सीतापुर से आए संजीव ने बताया कि मां का सिटी स्कैन कराने के लिए सुबह से लाइन में लगे हैं लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया। वहीं फैजाबाद के वैभव का अपनी बहन प्रिया और अनीस को अपने पिता अकरम के सिटी स्कैन के लिए शाम तक नंबर नहीं आया।

ट्रॉमा पीआरओ का कहना था कि यहां के ऑर्थोपेडिक, मेडिसिन, न्यूरोसर्जरी समेत कई विभागों के बेड फुल हो गए हैं। मरीज उमा के बारे में उनका कहना था कि उसे आॅक्सीजन स्पोर्ट की जरूरत है जो बेड मिलने पर ही उपलब्ध हो सकता है। ऐसे में अंदेशा यही लगाया गया कि आपात स्थिति में भी निपटने के लिए यहां पहले से कोई तैयारी नहीं की गई है।

लोहिया संस्थान में भी नहीं दिखी तैयारी

लोहिया संस्थान में भी आपात स्थिति से निपटने की कोई तैयारी नहीं दिखी। सुल्तानपुर से आए मरीज शमीम व हरदोई के चन्दन इमरजेंसी के बाहर सुबह से इलाज के अभाव में तड़पते रहे। उनका प्राथमिक उपचार तो किया गया लेकिन उन्हें बेड फुल होने की बात कहकर बाहर कर दिया गया।

सरकारी अस्पताल भी रहे बेखबर

वहीं राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों बलरामपुर, सिविल, रानी लक्ष्मीबाई, लोकबंधु अस्पताल में भी कोई खास तैयारी नहीं दिखी। सीएमओ के कड़े आदेश के बावजूद अस्पतालों की व्यवस्थाओं को दुरुरस्त नहीं किया गया। यहां किसी मरीज को दवा नहीं मिली तो कोई भर्ती न होने की वजह से इमरजेंसी के सामने चक्कर काटता रहा। बलरामपुर अस्पताल प्रवक्ता एसएम त्रिपाठी ने बताया कि ऐसा कोई मामला आएगा तो उससे निपटा जाएगा। इमरजेंसी के डॉक्टरों को एलर्ट किया गया है। http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Category

Weather Forecast

November 16, 2019, 11:24 am
Partly sunny
Partly sunny
23°C
real feel: 27°C
current pressure: 1010 mb
humidity: 70%
wind speed: 0 m/s WNW
wind gusts: 1 m/s
UV-Index: 4
sunrise: 5:56 am
sunset: 4:46 pm
 

Recent Posts

Top Posts & Pages

Subscribe to Blog via Email

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.

Join 10 other subscribers

Trending