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सीओ कैसरबाग अमित कुमार के समर्थन में उतरा पीपीएस एसोसिएशन, निलंबन का करेंगे विरोध…

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लखनऊ। प्रमुख सचिव गृह ने सीओ कैसरबाग के खिलाफ निलंबन की कार्यवाई करने की बात कही है जिसमें उन्होंने सीओ अमित कुमार का निलंबन करने के मामले में बताया है कि सचिवालय संघ के कर्मचारी नेताओं से मिले थे जिन्होंने बताया था सचिवालय कर्मचारी संघ ने जब प्रदर्शन किया था उसी दौरान समीक्षा अधिकारी की पिटाई की गई थी और उसी मामले में कार्यवाही की गई है। बताते चलें कि जिस समय यूपी कैबनेट की मीटिंग चल रही थी उसी वक्त कैसरबाग थाने के डिप्टी एसपी अमित कुमार ने सचिवालय के कर्मचारी की पिटाई कर दी थी। यह मामला जैसे ही सचिवालय संघ के सामने आया तो सैकड़ों कर्मचारियों ने लोकभवन को घेर लिया और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध बढ़ता देख मुख्य सचिव के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री अवनीश अवस्थी ने आश्वासन दिया कि इस घटना के दोषी डिप्टी एसपी यानी कि सीओ कैसरबाग और पुलिस कर्मचारियों को निलम्बित करने के आदेश दे दिए गए हैं। इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों का प्रदर्शन खत्म हुआ था।

जानकारी के मुताबिक, सचिवालय कर्मचारी मनोज प्रजापति की गाड़ी में एक व्यक्ति की गाड़ी से टक्कर लग गई थी। टक्कर से गाड़ी में आई क्षतिपूर्ति के लिए दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया था और मामला वहां नहीं निपटा तो पुलिस दोनों को थाने ले गई। वहां पर सचिवालय कर्मचारी ने अपना परिचय समीक्षाधिकारी के रूप में दिया तो कथित तौर पर डिप्टी एसपी ने उसकी वहां पिटाई कर दी। इसी दौरान कर्मचारी के पिटने की सूचना सचिवालय संघ के यादुवेन्द्र मिश्रा को मिल गई। उन्होंने मौके पर संघ के अन्य पदाधिकारियों को भेजा, लेकिन पुलिस का रुख देखकर वे सभी वापस आ गए। उसके बाद ही कर्मचारियों ने लोकभवन को उस वक्त घेर लिया जब मुख्यमंत्री कैबिनेट की मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे थे। कर्मचारियों के विरोध की जानकारी जब सीएम को हुई तो उन्होंने मुख्य सचिव को दिशा निर्देश दिए। जिसके बाद कर्मचारियेंा से कहा गया कि वे घेराव बंद करें।

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कर्मचारीयों को सरकार ने अश्वासन दिया कि सीओ और सम्बन्धित कर्मचारियेां को निलम्बित कर दिया गया है। अगर उनकी मांग पूरी ना हो पाई तो घेराव कल भी किया जा सकता है। शासन की इस बात पर कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष यादुवेन्द्र मिश्रा ने बताया कि सचिवालय कर्मचारियों के खिलाफ हो रहे पुलिसिया उत्पीड़न के विरोध में सभी कर्मचारी एक जुट हो गए और जोरदार धरना प्रदर्शन किया गया। इसके बाद शासन के अधिकारियों ने आश्वासन दिया तब धरना प्रदर्शन समाप्त किया गया। दो दिन पहले लोकभवन में प्रवेश को लेकर भाजपा के एक विधायक से सचिवालय सुरक्षा कर्मचारियों के बीच जमकर कहासुनी हुई। विधायक के खिलाफ भी कर्मचारियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। नतीजा यह रहा कि कर्मचारियों ने उस दिन भी प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर विधायक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।

वहीं पीपीएस एसोसिएशन सीओ कैसरबाग के समर्थन में उतरी हुई है और सीओ कैसरबाग के खिलाफ हुई कार्यवाही का विरोध करने की बात कही है। वहीं पीपीएस एसोसिएशन के महासचिव राजेश सिंह ने कहा कि अगर सीओ का निलंबन होता है तो पीपीएस एसोसिएशन इसका विरोध करेगा और अलाधिकारियों से वार्ता भी करेगा। बता दें कि वीडियो में पुलिस से बदसलूकी करने वाले के बचाव में उतरे उच्चाधिकारी के खिलाफ पीपीएस एसोसिएशन ने मोर्चा खोलने की बात की है।http://www.satyodaya.com

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डेंगू के बढ़ते मरीजों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने संभाली कमान, दिए निर्देश

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लखनऊ। एक बार फिर उत्तर प्रदेश डेंगू की चपेट में है। सरकारी आंकड़ों में इस वर्ष सात हजार से ज्यादा मरीज चिन्हित किये गए हैं, जबकि 10 लोगों की मौत हो चुकी है। करोड़ों के बजट से संचारी रोग अभियान चलाने के बाद भी 2019 के आंकड़े संतोषजनक नहीं हैं। इसी का नतीजा है कि मामले में मुख्यमंत्री ने खुद कमान संभाली है और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारीयों को निर्देश भी जारी किये हैं।

बता दें कि, डेंगू के मामले में यूपी की राजधानी लखनऊ नंबर वन पर है। यहां सरकारी आंकड़ों में 1452 मरीज चिन्हित किये गए हैं। वहीं चार की मौत भी हो चुकी है। दूसरे नंबर पर कानपूर और तीसरे नंबर पर प्रयागराज है। यूपी में अक्टूबर माह में चार हजार से ज्यादा मामले डेंगू के आ चुके हैं। वहीं पिछले साल इनकी संख्या दो हजार के करीब रही। स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में अलर्ट जारी किया है। डेंगू के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने का दावा किया है लेकिन नतीजा इसके उल्ट है।

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अस्पतालों में वार्ड तो बना दिए गए हैं लेकिन वार्ड में बेड की अपेक्षा मरीजों की संख्या बहुत ज्याद है। स्वास्थ्य विभाग की संचारी रोग निदेशिक डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी बताती हैं कि डेंगू के वायरस का हर तीन साल में चक्र चलता है। जिससे मरीजों की संख्या बढ़ती है। इस वर्ष डेंगू के मामले बढे हैं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से सतर्कता बरती जा रही है।

यूपी के क्या हैं सरकारी आंकड़े

यूपी में स्वाइन फ्लू के 7057 मरीज, 10 की मौत। लखनऊ में डेंगू के 1452 मामले, चार की मौत। कानपूर में डेंगू के 1386 मामले, एक की मौत। प्रयागराज में डेंगू के 326 मामले। 2016 में सबसे ज्यादा 15033 डेंगू के मरीज रहे हैं। 2016 में 42 लोगों की हुई थी मौत।

डेंगू के लक्षण

तेज सिर दर्द के साथ बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंख के पीछे दर्द। बुखार के साथ सिरदर्द, बदन दर्द, कमर दर्द और त्वचा पर चकत्ते आदि के लक्षण। गंभीर मामलों में नाक, मुंह और मसूढ़ों से खून भी आ सकता है।

बरतें सावधानियां

बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल का प्रयोग करें। डेंगू के इलाज के लिए कोई खास दवा नहीं होती है। किसी किस्म की दर्द निवारक दवा आदि का प्रयोग न करें। पपीते के पत्तों का रस निकाल कर मरीज को दिन में दो से तीन बार दें। घर और आस-पास पानी न जमा होने दें।http://www.satyodaya.com

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पत्नी ने पति को लीवर डोनेट कर बचाई जान, दोनों की हालत में काफी सुधार

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लिवर प्रत्यारोपण डोनर आईसीयू से बाहर वार्ड में शिफ्ट

लखनऊ। केजीएमयू में लिवर प्रत्यारोपण वाले मरीज के डोनर को आईसीयू से बाहर कर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि मरीज अभी आईसीयू में ही है। दोनों की हालत में पहले से काफी सुधार हुआ है। दोनों मरीज की अच्छी रिकवरी हो रही है।

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अमेठी निवासी ज्ञानेंद्र सिंह का केजीएमयू में डॉक्टरों ने छह अक्तूबर को लिवर प्रत्यारोपण किया था। पत्नी वंदना ने उसे लिवर देकर जीवन दिया है। दोनों ही मरीज अब तक आईसीयू में थे। पांचवे दिन रविवार को डॉक्टरों ने दोनों की हालत में बेहतर सुधार होते देख डोनर वंदना को आईसीयू से बाहर कर वार्ड में भेज दिया है। जबकि अभी ज्ञानेंद्र को आईसीयू में ही रखकर इलाज दिया जा रहा है।

केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉक्टर सुधीर सिंह ने बताया कि, दोनों मरीज की हालत में पहले से बहुत सुधार है। एहतियात के तौर पर मरीज ज्ञानेंद्र को आईसीयू में रखा है। मरीज की संक्रमण संबंधी जांच रिपोर्ट सामान्य आई है। खाने के लिए दोनों को अभी तरल पदार्थ ही दिया जा रहा है।http://www.satyodaya.com

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आपात स्थिति से निपटने का एलर्ट राजधानी के संस्थानों व अस्पतालों पर बेअसर

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ऑक्सीजन के अभाव में घंटो तड़पती रही महिला मरीज

लखनऊ। आपात स्थिति से निपटने के लिए शासन का एलर्ट राजधानी के संस्थानों व अस्पतालों पर बेअसर रहा। एक महिला मरीज को मेडिसिन विभाग के चिकित्सक व कर्मचारी ऑक्सीजन उपलब्ध न होने की बात कहकर टरकाते रहे। कई घंटो तक आॅक्सीजन के अभाव में महिला मरीज तड़पती रही। परिजनों के शोर शराबा करने पर उसे आॅक्सीजन उपलब्ध कराया गया। मरीज के साथ आए परिजन महिला को भर्ती करने के लिए हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे। मरीज की हालत पहले से और खराब होने लगी। जिसके बाद ही आनन-फानन में परिजनों उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं जो शनिवार को पूरी तरह से भर गए थे। गंभीर मरीजों को बेड न खाली होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया। लखनऊ के अमौसी निवासी महिला मरीज उमा (26) को आॅक्सीजन स्पोर्ट की आवश्यकता बताकर उसे डॉक्टरों ने उसे मेडिसिन वार्ड भेज दिया। परिजन जब यहां आए तो उन्हें आॅक्सीजन न उपलब्ध होने की बात कहकर टरकाते रहे। कई घंटो तक वह आॅक्सीजन के अभाव में तड़पती रही। मरीज की हालत पहले से और खराब हो गई तो परिजनों ने शोर शराबा शुरू कर दिया। जिसके बाद आनन-फानन में उसे आॅक्सीजन उपलब्ध कराया गया।

मरीज के साथ आयी उसकी बह प्राची ने बताया कि, मरीज की हालत बहुत खराब है। भर्ती के लिए हम लोगों ने यहां के पीआरओ से भी संपर्क किया लेकिन उन्होंने यहां बेड खाली न होने की बात कहकर दरकिनार कर दिया। परिजनों के मुताबिक उन्होंने चिकित्सक, कर्मचारी से लेकर पीआरओ तक के सामने हाथ जोड़ा लेकिन उसका कोई असर नहीं रहा। थक हारकर वह गंभीर मरीज को लेकर निजी अस्पताल पहुंच गए।

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दर्द से कराहता रहा मरीज

मेडिसिन वार्ड के बाहर ही महाराजगंज निवासी मरीज पंकज (15) दर्द से कराहता रहा। उसके पिता देवेन्द्र ने बताया कि यहां के डॉक्टर केवल एक वार्ड से दूसरे वार्ड में टहला रहे हैं। डॉक्टरों ने मेडिसिन वार्ड में भेजा है। बेड के लिए सुबह से यहां खड़े हैं लेकिन अभी तक नहीं मिला। बेटे की हालत पहले से और खराब होती जा रही है। ऐसे में हम इसे कहां लेकर जाएं। खबर लिखे जाने तक भी उसे बेड नहीं मिला था।

सिटी स्कैन के लिए नहीं आया नंबर

ट्रॉमा में कई गंभीर मरीजों को सुबह से शाम तक लंबी लाइन के बावजूद उनका नंबर नहीं आया। सीतापुर से आए संजीव ने बताया कि मां का सिटी स्कैन कराने के लिए सुबह से लाइन में लगे हैं लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया। वहीं फैजाबाद के वैभव का अपनी बहन प्रिया और अनीस को अपने पिता अकरम के सिटी स्कैन के लिए शाम तक नंबर नहीं आया।

ट्रॉमा पीआरओ का कहना था कि यहां के ऑर्थोपेडिक, मेडिसिन, न्यूरोसर्जरी समेत कई विभागों के बेड फुल हो गए हैं। मरीज उमा के बारे में उनका कहना था कि उसे आॅक्सीजन स्पोर्ट की जरूरत है जो बेड मिलने पर ही उपलब्ध हो सकता है। ऐसे में अंदेशा यही लगाया गया कि आपात स्थिति में भी निपटने के लिए यहां पहले से कोई तैयारी नहीं की गई है।

लोहिया संस्थान में भी नहीं दिखी तैयारी

लोहिया संस्थान में भी आपात स्थिति से निपटने की कोई तैयारी नहीं दिखी। सुल्तानपुर से आए मरीज शमीम व हरदोई के चन्दन इमरजेंसी के बाहर सुबह से इलाज के अभाव में तड़पते रहे। उनका प्राथमिक उपचार तो किया गया लेकिन उन्हें बेड फुल होने की बात कहकर बाहर कर दिया गया।

सरकारी अस्पताल भी रहे बेखबर

वहीं राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों बलरामपुर, सिविल, रानी लक्ष्मीबाई, लोकबंधु अस्पताल में भी कोई खास तैयारी नहीं दिखी। सीएमओ के कड़े आदेश के बावजूद अस्पतालों की व्यवस्थाओं को दुरुरस्त नहीं किया गया। यहां किसी मरीज को दवा नहीं मिली तो कोई भर्ती न होने की वजह से इमरजेंसी के सामने चक्कर काटता रहा। बलरामपुर अस्पताल प्रवक्ता एसएम त्रिपाठी ने बताया कि ऐसा कोई मामला आएगा तो उससे निपटा जाएगा। इमरजेंसी के डॉक्टरों को एलर्ट किया गया है। http://www.satyodaya.com

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