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शी जिनपिंग 11 अक्टूबर को आएंगे भारत, दूसरे शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

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नई दिल्ली: पीएम नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 अक्टूबर को भारत के दो दिवसीय दौरे पर आएंगे। चीन के राष्ट्रपति और मोदी के बीच दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन 11-12 अक्टूबर को भारत के चेन्नई में होगा। बता दें कि इससे पहले शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री के बीच पहला अनौपचारिक शिखर सम्मेलन पिछले वर्ष 27-28 अप्रैल को चीन के वुहान में हुआ था।

इस शिखर सम्मेलन के दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संबंधी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही भारत-चीन क्लोजर डेवलपमेंट पार्टनरशिप को लेकर कई अहम समझौते हो सकते हैं। साथ ही, इस सम्मेलन से दोनों देशों को आपसी संबंधों को मजबूत करने का अच्छा अवसर मिलेगा।

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वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले चीन ने पाकिस्तान और भारत से कश्मीर मुद्दे को सुलझाने की बात कही है। दरअसल, पाक के पीएम इमरान खान चीन के अपने तीसरे आधिकारिक दौरे पर मंगलवार को बीजिंग पहुंचे। जहां चीन ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे को दोनों देशों के बीच हल किया जाना चाहिए।http://www.satyodaya.com

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आज ही के दिन हुआ था प्रसिद्ध सरोद वादक अमजद अली खां का जन्म, जानिए ये बातें

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नई दिल्ली। अपने सरोद के सुरों से दुनिया भर के श्रोताओं को झुमा देने वाले सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खां का आज जन्मदिन है। ग्वालियर में संगीत के ‘सेनिया बंगश’ घराने की छठी पीढ़ी में जन्म लेने वाले अमजद अली खां को संगीत विरासत में प्राप्त हुआ था। उनके पिता उस्ताद हाफिज अली खान ग्वालियर राज-दरबार में प्रतिष्ठित संगीतज्ञ थे।

उन्होंने महज 12 साल की उम्र में एकल सरोद-वादन का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया था। एक छोटे से बालक की सरोद पर अनूठी लयकारी और तंत्रकारी सुन कर दिग्गज संगीतज्ञ दंग रह गए। अमजद अपने पिता के ही शिष्य थे, जिन्होंने सेनिया घराना सरोद वादन में परंपरागत तरीके से तकनीकी दक्षता हासिल की।

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भारत और विदेश के इन व्यापक प्रदर्शनों को काफी न पाकर अमजद अली ने शास्त्रीय संगीत में अभिनव परिवर्तन के अलावा गायन एवं वाद्य संगीत की रचना की। ग्वालियर में जन्में अमजद अली खान ने भरतनाट्यम नृत्यांगना शुभालक्ष्मी के साथ शादी की। कहा जाता है कि एक बार नौकरी ना होने की वजह से उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा और इस दौरान उन्हें बेघर होना पड़ा।

उन्होंने 1963 में 18 वर्ष की उम्र में पहली अमेरिका यात्रा की थी। इस यात्रा में पंडित बिरजू महाराज के नृत्य-दल की प्रस्तुति के साथ अमजद अली खां का सरोद-वादन भी हुआ था।

हिंदू डांसर से की शादी

अमजद अली खान और उनकी पत्नी शुभालक्ष्मी की शादी काफी चर्चा में रही और उनकी यह कहानी काफी दिलचस्प रही है। बताया जाता है कि अमजद अली खान को पहली बार शुभालक्ष्मी ने कोलकाता में 1974 में कला संगम कार्यक्रम में स्टेज परफॉर्मेंस करते हुए देखा था। कार्यक्रम के बाद दोनों की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के घर हुई। उसके बाद उनकी बात आगे बढ़ी और शादी के लिए लंबे इंतजार के बाद साल 1976 में शादी की।

सम्मान और पुरस्कार
युवावस्था में ही उस्ताद अमजद अली खाँ ने सरोद-वादन में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर ली थी। 1971 में उन्होंने द्वितीय एशियाई अन्तर्राष्ट्रीय संगीत-सम्मेलन में भाग लेकर ‘रोस्टम पुरस्कार’ प्राप्त किया था। यह सम्मेलन यूनेस्को की ओर से पेरिस में आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने ‘आकाशवाणी’ के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। अमजद अली ने यह पुरस्कार मात्र 26 वर्ष की आयु में प्राप्त किया था। इसके अतिरिक्त उन्हें मिले पुरस्कार निम्नलिखित हैं-

यूनेस्को पुरस्कार

कला रत्न पुरस्कार

1975 में पद्मश्री

1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

1989 तानसेन सम्मान

1991 में पद्म भूषण

2001 में पद्म विभूषणhttp://www.satyodaya.com

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एटीएस कमांडो ने संदिग्ध परिस्थितियों में गोली मारकर किया सुसाइड

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लखनऊ। राजधानी में आए दिन पुलिसकर्मी आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन अभी तक पुलिसकर्मियों की संदिग्ध मौत पर आलाधिकारियों द्वारा आत्महत्या का जिक्र कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ऐसा ही एक ताजा मामला फिर सामने आया है जिसमें एटीएस मुख्यालय में तैनात कमांडो बृजेश ने मुख्यालय के सरकारी बैरिक में लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वहीं बताया जा रहा है कि मृतक कमांडो को आज सुबह अपने घर गोरखपुर के लिए भी निकलना था लेकिन उससे पहले ही उसने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा है कि मृतक की बीती रात उसकी पत्नी से फोन पर बातचीत हो रही थी और उसी बीच दोनों में काफी कहासुनी हुई थी। वहीं हर मामलों की तरह इस बार भी अधिकारियों का कहना है कि पारिवारिक कलह के चलते उसने सुसाइड किया है।

आपको बता दें कि 29 मई 2018 को भी उत्तर प्रदेश पुलिस के पीपीएस अधिकारी और उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपी एटीएस) में अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर तैनात खुशमिजाज राजेश साहनी ने अज्ञात कारणों से अपने कार्यालय में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। गोली चलने की आवाज सुनकर एटीएस कार्यालय में तैनात कर्मचारी कमरे की तरफ दौड़े तो लेकिन उनको किसी ने भी हॉस्पिटल नहीं पहुंचाया। वहीं अधिकारियों ने बताया है की उनको खून से लथपथ और तड़पते देख फौरन अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी मौत हो गई। फिलहाल राजेश साहनी के आत्महत्या करने के कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया है। जबकि पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सरकारी पिस्टल कब्जे में भी ले ली थी। जिसके बाद से ही मौत पर सवाल उठने लगे और इस मामले की जांच की मांग भी की गई थी। उसके बाद से इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

इस बार भी एक एटीएस कमांडो बृजेश की संदिग्ध परिस्थितियों में अपने बैरिक में सुसाइड करने का मामला सामने है। साथ ही हर बार की तरह इस बार भी पुलिस मामले की जांच कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का भी इंतिजार करने की बात कर रही है। लेकिन देखने वाली बात तो होती है ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी उसकी जांच नहीं होती केवल उस रिपोर्ट पर धूल जमती है। इससे जाहिर होता है कि कहीं न कहीं इन सभी आत्महत्याओं के पीछे अधिकारियों का प्रेशर तो नहीं है? जिसके कारण आए दिन कोई न कोई पुलिसकर्मी आत्महत्या कर रहा है। लेकिन अभी तक किसी भी पुलिसकर्मी के आत्महत्या करने का खुलासा नहीं हो पाया है।http://www.satyodaya.com

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Birthday Special: ये हैं बेगम अख्तर की टॉप-5 गजलें

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नई दिल्ली। गजल की मल्लिका कहें या महान गायिका… खलिश उर्दू का उच्चारण करने वाली बेगम अख्तर दादरा और ठुमरी की साम्राज्ञी थीं। आज उनकी जयंती है। उनके गीतों-गजलों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। लेकिन आज हम उनकी जिंदगी से जुड़े ऐसे रोचक पहलुओं के बारे में आपको बताएंगे जिनके बारे में पहले आपने नहीं सुना होगा ।

बेगम अख्तर का जन्म सात अक्टूबर 1914 उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ था। बेगम अख्तर के बचपन का नाम बिब्बी था। वो फैजाबाद के शादीशुदा वकील असगर हुसैन और उनकी दूसरी पत्नी मुश्तरीबाई की बेटी थीं।

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वह बचपन से ही गायिका बनना चाहती थीं लेकिन उनके परिवार वाले उनकी इस इच्छा के सख्त खिलाफ थे। हालांकि उनके चाचा ने उनके शौक को आगे बढ़ाया।

कुलीन परिवार से ताल्लुक रखने वाली अख्तरी बाई को संगीत से पहला प्यार सात साल की उम्र में थियेटर अभिनेत्री चंदा का गाना सुनकर हुआ। उस जमाने के विख्यात संगीत उस्ताद अता मुहम्मद खान, अब्दुल वाहिद खान और पटियाला घराने के उस्ताद झंडे खान से उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत की दीक्षा दिलाई गई।

बेगम अख्तर, गालिब, फैज अहमद फैज, जिगर मुरादाबादी, शकील बदायुनी और कैफी आजमी की लेखनी से काफी प्रभावित थीं। वे अधिकतर समय तो अपने गाने खुद कंपोज करती थीं और क्लासिकल राग पर बनाती थीं। बेगम अख्तर को अपनी शादी के बाद कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा। उनके पति ने बेगम अख्तर के गाने पर रोक लगा दी, वे इस दौरान 5 सालों तक गाना नहीं गा पाईं। मगर संगीत से उनका रिश्ता हमेशा से बहुत गहरा था। अपने करियर के अंतिम दिनों में जब वे बीमार चल रही थीं तो डॉक्टर्स ने भी उन्हें गाने से मना कर दिया था। मगर इसके बाद भी उन्होंने परफॉर्मेंस दी थी।

30 अक्टूबर, 1974 को उनका निधन हो गया। उन्हें कई तरह के पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री और पद्मभूषण भी शामिल हैं।http://www.satyodaya.com

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October 9, 2019, 1:23 pm
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