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गुजरात में 800 हिंदुओं और 35 मुसलमानों ने मांगी धर्म परिवर्तन की इजाजत

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गांधीनगर। गुजरात विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार से शुरू हो गया है। कांग्रेस विधायकों ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार से धर्म परिवर्तन के लिए आवेदन करने वालों की जानकारी मांगी थी। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने जो सूचना दी वो हैरान करने वाली है। सीएम ने बताया कि, पिछले दो सालों में 911 लोगों ने धर्मांतरण के लिए आवेदन किया है जिसमें सबसे ज्यादा संख्या हिंदुओं की है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि, पिछले दो सालों में (31 मई 2019 तक) 911 लोगों ने धर्म परिवर्तन के लिए सरकार से आवेदन किया है। जिसमें 863 हिंदू समेत, 35 मुसलमान, 11 इसाई , एक खोजा और एक बौद्ध है। सीएम ने बताया कि इनमें से अब तक 689 को धर्मांतरण की इजाजत दी गई है।

बता दें, सबसे ज्यादा हिंदुओं ने गुजरात के सूरत से धर्म परिवर्तन के लिये आवेदन किया है। यहां 474 हिंदुओं ने धर्मांतरण की अनुमति मांगी है। उसके बाद जूनागढ़ से 152 और आणंद 61 हिंदुओं ने आवेदन किया है।

दरअसल, गुजरात में 2008 में धार्मिक स्वतंत्रता कानून बनाया गया था। इसका उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन पर लगाम लगाना था। इस एक्ट के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति दूसरा धर्म अपनाना चाहता है तो उसे इसके लिए सरकारी प्राधिकारियों से अनुमति लेनी होगी।http://www.satyodaya.com

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मस्जिद के अंदर केरल के BJP सचिव पर हुआ हमला, भाजपा ने वाम संगठनों का बताया हाथ…

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भाजपा कार्यकर्ताओं

फाइल फोटो

कट्टाप्पना। केरल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले लगातार होते ही जा रहे हैं। ऐसे में इस बार भाजपा के राज्य सचिव एके नजीर की बेहरमी से पिटाई की खबर सामने आई है। नजीर पर आरोपियों ने तब हमला किया जब वह इडुक्की जिले के थूकुप्पलम क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे। हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए। जिसके बाद उन्हें पास के एक अस्पताल भर्ती कराया गया,  जहां उनका इलाज चल रहा है।

एके नजीर पर चरमपंथी इस्लामी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने हमला किया था। बताया जा रहा है कि नजीर को थुकुप्पलम की जुमा की नमाज पढ़ने मस्जिद के अंदर गए हुए एक मिनट भी नहीं हुआ था कि उनकी पिटाई शुरू कर दी गई। नजीर इससे पहले भारतीय जनता पार्टी की ‘जन जागृति’ रैली में शामिल हुए थे, जिसका मकसद लोगों को सीएए के बारे में जानकारी देना था और इसको लेकर देश भर के कई हिस्सों में इस तरह की रैली निकाली गई। रैली खत्म होने के बाद नजीर मस्जिद में आए थे।

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हमले के दौरान चरमपंथी संगठन के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी नेता नजीर को पीछे से लात मारी और फिर 15 मिनट तक उन पर फर्नीचर से हमला किया, जिसके बाद मस्जिद के इमाम ने हस्तक्षेप किया और उन्हें बचाया। एक पार्टी कार्यकर्ता ने दावा किया कि हमलावर एसडीपीआई कार्यकर्ताओं ने किया है जो लोग नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें जिंदा नहीं बख्शा जाएगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन फिलहाल हमलावरों की पहचान अभी नहीं हो सकी।

बता दें चरमपंथी इस्लामी राजनीतिक संगठन है, जो केरल और भारत के अन्य कई हिस्सों में कई सांप्रदायिक हमलें करता है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), जो कि SDPI का जन्मदाता है, वो देश के कई हिस्सों में हुए सीएए  विरोधी हिंसक प्रदर्शन के पीछे था।http://www.satyodaya.com

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कैम्पस में शांतिबहाली के लिए JNU प्रशासन ने शिक्षकों से मांगा सहयोग

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नई दिल्ली: जेएनयू में बीते कुछ दिनों पहले नकाबपोश लोगों के हमले के बाद स्थिति को और तनावपूर्ण होता देख प्रशासन ने शिक्षकों से परिसर में स्थिति सामान्य बनाने और अकादमिक गतिविधियों को शुरू करने की अपील की है। जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने सोमवार को कहा कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के 2 पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय में प्रशासन के साथ सहयोग नहीं करने का एलान किया है।

जेएनयूटीए ने अपनी आम सभा में एक प्रस्ताव पारित कर इसका समर्थन किया है। प्रशासन ने 10 जनवरी को दो सर्कुलर जारी किए थे, जिनमें शिक्षकों से छात्रों के पंजीकरण के समय कार्यालय में रहने व क्लास शुरू करने की अपील की गई थी। ताकि परिसर में माहौल सामान्य हो और अकादमिक गतिविधियां फिर से शुरू हो सके, लेकिन शिक्षक संघ ने अपनी आम सभा में असहयोग करने का एलान किया।

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प्रशासन ने कहा है कि हजारों की संख्या में छात्रों ने शीतकालीन सेमेस्टर के लिए पंजीकरण किया है। छात्रों का यह अधिकार है कि वे परिसर में पढ़ें, लेकिन शिक्षक उनके अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो उनकी सेवा शर्तों के खिलाफ है। जिसको देखते हुए प्रशासन ने शिक्षकों से अपील की है कि वे काम पर लौटे और स्थिति को सामान्य बनाने में अपना सहयोग दें। http://www.satyodaya.com


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निमोनिया से हर साल विश्वभर में 20 लाख से ज्यादा बच्चों की हो रही मौत…

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निमोनिया

फाइल फोटो

कोलकाता। इस कड़ाके की ठंड में निमोनिया से देशभर में सर्वाधिक बच्चों की मौत हो रही है। हर साल निमोनिया की चपेट में आने लगभग 20 लाख से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक विश्व भर में हर वर्ष करीब 20 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत निमोनिया के कारण होती है।

निमोनिया से मरने वाले हर पांच में से एक बच्चे की उम्र पांच साल से कम होती है। रिपोर्ट की माने तो लगभग 60 करोड़ डॉलर की लागत से निमोनिया से ग्रस्त बच्चों को सार्वभौमिक रूप से एंटीबायोटिक दवाएं दी जाएं तो हर साल करीब 6 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार इसके अलावा यदि वैश्विक स्तर पर निमोनिया की रोकथाम और इस बीमारी के उपचार की पहल की जाती है तो करीब 13 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

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निमोनिया एक इन्फ्लैमटोरी बीमारी है। इसके रोगाणु सबसे पहले फेफड़ों के वायु छिद्रों पर हमला करते हैं फिर जब इनकी संख्या बढ़ जाती है तो ये नाक और गले से गुजरने वाली हवा को प्रभावित करने लगते हैं। जिससे हमें सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। संक्रमण ज्यादा बढ़ जाने पर लगातार खांसी आने लगती है और ज्यादा खांसने के कारण सीने में दर्द होने लगता है। फिर सांस लेने में दिक्कत फिर खांसी, बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, भूख न लगना आदि इस बीमारी के लक्षण हैं।http://www.satyodaya.com

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January 13, 2020, 4:26 pm
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