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अभिषेक मनु सिंघवी का मोदी सरकार पर तंज, कहा- मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू

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लखनऊ। देश की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है। कई सेक्टर्स दबाव में हैं ऐसे में विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावार है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान पर निशाना साधा है जिसमें उन्होंने ऑटोमोबाइल जगत में आई मंदी का कारण नौजवानों का ओला-उबर और मेट्रों को प्राथमिकता देना बताया था। इसके साथ ही सिंघवी ने पीएम मोदी की देश को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर भी सवाल खड़े किए।

उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘जो कुछ भी अच्छा हुआ है, वह हमारे द्वारा किया गया है। जो कुछ भी बुरा हुआ है, वह दूसरों द्वारा किया गया है। फिर लोगों ने आपको क्यों चुना है?’

उन्होंने एक और ट्वीट किया कि, ‘मोदीजी के ट्विटर फॉलोअर्स 50 मिलियन को पार कर गए हैं। अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन (डॉलर) को पार कर जाएगी, लेकिन कैसे? युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है, क्या आप इसके लिए भी विपक्ष को जिम्मेदार ठहराएंगे। उबर, ओला ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है बंटाधार।’

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बता दें, वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा था कि ऑटो सेक्टर में आई मंदी का कारण युवाओं की सोच में बदलाव है। युवा अब खुद गाड़ियां ने खरीदकर ओला, उबर जैसे ऑनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। http://www.satyodaya.com

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ब्रिटेन के आर्कबिशप ने जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए मांगी माफी, बोले- शर्मिंदा हूं

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लखनऊ। जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन उसके जख्म हम भारतीयों के जहन में आज भी ताजा हैं। 13 अप्रैल 1919 को हजारों निर्दोष लोगों को गोलियों से भून दिया गया था। ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता का यह वो जघन्य कृत्य है जिसे वो चाह कर भी कभी भुला नहीं सकता। कुछ ऐसा ही एंग्लिकन चर्च के सबसे वरिष्ठ पादरी और केंटबरी के आर्चबिशप जस्टिन वेल्बी के साथ हुआ है। वह मंगलवार को जलियांवाला बाग स्मारक पहुंचे और दंडवत होकर 1919 के नरसंहार में मारे गए लोगों को नमन किया। उन्होंन कहा, ‘मैं यहां ब्रिटिश गोलियों का शिकरा हुए लोगों के सामने पश्चाताप करने आया हूं। यहां जो अपराध हुआ, उसके लिए मैं बेहद शर्मिंदा हूं और माफी मांगता हूं।

आर्कबिशप जस्टिन वेल्बी ने कहा, ‘आपको याद है कि उन्होंने क्या किया है और उनकी स्मृति जीवित रहेगी. मुझे शर्म आती है और यहां किए गए अपराध के लिए खेद है, एक धार्मिक नेता के रूप में मैं इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करता हूं।’

उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘मुझे आज अमृतसर में हुए भीषण जलियांवाला बाग नरसंहार के स्थल पर जाकर शोक, विनम्रता और गहरा शर्म का एहसास हुआ है. 1919 में यहां बड़ी संख्या में सिखों के साथ-साथ हिंदू, मुस्लिम और ईसाई भी मारे गए।’

1800 से अधिक लोग मारे गए थे

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में एक जनसभा रखी गई थी। डॉ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी तथा रोलट एक्ट के विरोध में लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए यहां जमा हुए थे, इसमें औरतें, मर्द, बच्चे सब थे। वहां एकत्रित लोग इस बात से अंजान थे कि पूरे पंजाब समेत अमृतसर में मार्शल लॉ लग चूका है। सब कुछ बड़े शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था। इसी समय जरनल डायर (रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर) ने अपने 90 सैनिकों के साथ जलियांवाला बाग की घेराबंदी कर दी और अपने सैनिकों को फायर करने का आदेश दे दिया। पूरे दस मिनट तक गोलियां चलती रहीं। लोगों ने जान बचा कर भागने की कोशिश की मगर दरवाजे बंद हो चुके थे, जो रास्ता खुला था वह इतना तंग था कि लोग भागने में नाकाम रहे और अंग्रेज सिपाहियों की गोलियों का शिकार हो गए। 1650 राउंड फायर होने के बाद सभी सिपाहियों की गोलियां खत्म हो गयीं।

हवा में धूल और खून के छींटे थे, हरी घास खून से लाल हो गई थी, पूरा जलियांवाला बाग मासूमों की चीखों से गूंज उठा था। हर तरफ लाशें ही लाशें दिख रही थीं। कुछ गोली से मारे गए कईयों ने कुएं में छलांग लगा दी। बाग में लगी पट्टिका पर लिखा है कि 120 शव तो सिर्फ कुएं से ही मिले। आधिकारिक रूप से मरने वालों की संख्या 379 बताई गई जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार कम से कम 1300 लोग मारे गए। स्वामी श्रद्धानंद के अनुसार मरने वालों की संख्या 1500 से अधिक थी जबकि अमृतसर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉक्टर स्मिथ के अनुसार मरने वालों की संख्या 1800 से अधिक थी। उस घटना को याद कर के आज भी हर भारतीय का खून खौल उठता है।

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पीके सिन्हा पीएम मोदी के मुख्य सलाहाकार, पीके मिश्रा बने नए मुख्य सचिव

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फाइल फोटो

नई दिल्ली: नृपेंद्र मिश्रा के पद छोड़ने के बाद अब पीके मिश्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं पूर्व कैबिनेट सचिव पी के सिन्हा को प्रमुख सलाहकार बनाया गया है। सिन्हा ने अपना पदभार संभाल लिया है। मोदी सरकार में पीके मिश्रा को अतिरिक्त प्रमुख सचिव का पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जानकारी के अनुसार पीके मिश्रा पीएम मोदी के करीबी अधिकारियों में से एक हैं। दोनों को गुजरात से ही काम करने का अनुभव है। उस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। पीके मिश्रा के तय समय में काम को कुशलता से करने के लिए जाना जाता है।

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पीएम मोदी ने नृपेंद्र मिश्रा की विदाई के लिए एक औपचारिक कार्यक्रम का आयोजन किया था। जिसमें प्रधानमंत्री सहित कई दिग्गज नेता भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने नृपेंद्र मिश्रा की तारीफ करते हुए उन्हें कुशल प्रशासनिक अधिकारी बताया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि वह उनके साथ काम करने के दौरान बहुत सी चीजें सीखने को मिली हैं।

बता दें कि पीएम मोदी के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने पिछले हफ्ते अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। यूपी कैडर के 1967 बैच के आईएसएस नृपेंद्र मिश्रा 2006 से 2009 तक ट्राई के चेयरमैन भी रहे। इससे पहले वे टेलिकॉम सचिव और वित्त मंत्रालय में भी रहकर सेवा कर चुके हैं। http://www.satyodaya.com

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हरिद्वार: दहेज न मिलने से ससुराल पक्ष ने बहु को पीटा, मृत समझ जंगल में फेंका

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प्रतीकात्मक चित्र

हरिद्वार: दहेज में नकदी और जेवरात न मिलने से ससुराल पक्ष वालों ने विवाहिता को पीट-पीटकर अधमरा करने के बाद मृत समजकर जंगल में फेंक दिया। जिसके कई घंटों के बाद पीड़िता को होश आया और उसने जंगल से निकलकर किसी तरह अपनी जान बचाई।

वहीं पीड़िता ने अपने मायके वालों से संपर्क कर हरिद्वार थाने में पति, ननद और सास के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज करवाया। पीड़िता का आरोप है कि दहेज में जेवरात और नगदी न लाने पर पिछले साल भी ससुराल पक्ष ने उसकी बुरी तरह से पिटाई की थी। इस दौरान पीड़ित विवाहिता ने इसकी शिकायत हेल्प लाइन में की थी, जिसपर ससुराल पक्ष ने दोबारा ऐसा कुछ न करने की बात स्वीकार की थी।

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वहीं विवाहिता ने आरोप लगाते हुए कहा कि ससुराल पक्ष ने बीती 8 सितंबर को फिर से जेवरात और नगदी की मांग की, जिसको पूरा न करने पर उसको बुरी तरह से पीटा गया और मृत समझकर जंगल में फेंक दिया गया। पुलिस के मुताबिक मामले को दर्ज कर जांच-पड़ताल जारी कर दी गई है।  http://www.satyodaya.com

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September 11, 2019, 3:26 pm
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