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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी ने तीन पदों पर जमाया कब्जा

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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के छात्र संघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीन प्रमुख पदों पर कब्जा जमाया है जबकि नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) को केवल एक पद पर जीत नसीब हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव गुरुवार को हुआ था, जिसके बाद शुक्रवार को मतगणना हुई। जिसमें चारों प्रमुख पदों के नतीजे घोषित किए गए। एबीवीपी ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पदों पर जीत दर्ज की, वहीं एनएसयूआई ने सचिव का पद झटक लिया। आरएसएस से जुड़े संगठन एबीवीपी के अक्षित दहिया ने अध्यक्ष, प्रदीप तंवर ने उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर शिवांगी खरवाल ने कब्जा जमाया है। वहीं कांग्रेस से जुड़े संगठन एनएसयूआई के आशीष लांबा ने सेके्रटरी पद पर जीत दर्ज की है।

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इस बार के डीयू छात्रसंघ चुनाव में कुल 1.3 लाख छात्र-छात्राओं में से करीब 40 प्रतिशत स्टूडेंट ने हिस्सा लिया। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब 5 प्रतिशत मतदान कम हुआ। पिछले वर्ष भी एबीवीपी ने तीन सीटों पर जबकि एनएसयूआई ने एक पद पर जीत दर्ज की थी। मतदान के दौरान किसी तरह की बड़ी घटना या हंगामा नहीं हुआ।

हालांकि प्रचार के दौरान एनएसयूआई ने आरोप लगाया था कि उसके उम्मीदवार को दक्षिणी दिल्ली के दयाल सिंह काॅलेज में मतदान केन्द्र पर नहीं जाने दिया गया, उसके पुलिस ने हिरासत में रखा। पुलिस ने सफाई दी कि एनएसयूआई उम्मीदवार काॅलेज के बाहर प्रचार कर रहा था जिसकी इजाजत नहीं है, उसने पुलिस के साथ भी अभद्रता की इसलिए उसे कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया।http://www.satyodaya.com

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लेह में मोदी : भारत का मस्तक है लद्दाख, यह भूमि भारतीयों के मान-सम्मान की प्रतीक

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अचानक लेह पहुंचे पीएम मोदी ने देश को चौंकाया, जवानों में भरा जोश…

कहा, भारतीय सेना के जवानों की वीरता, बलिदान, पराक्रम और जीवटता दुनिया में किसी से कम नहीं

लखनऊ। चीन से तनाव के बीच रक्षामंत्री रामनाथ सिंह को शुक्रवार को लद्दाख पहुंचना था। लेकिन दौरे ठीक एक दिन पहले रक्षा मंत्री का दौरा टल गया। अगले दिन सुबह पता चला कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लेह पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री के इस अचानक दौरे से लेह-लद्दाख में तैनात भारतीय सेना के जवान भी चौक गए। लेह पहुंचकर प्रधानमंत्री ने जवानों के साथ बैठक उनका उत्साह बढ़ाया। प्रधानमंत्री लेह की बर्फ पर खड़े होकर न सिर्फ जवानों का हौसला बढ़ाया , बल्कि चीन को भी सख्त संदेश दिया है। पीएम मोदी के साथ सीडीएस बिपिन रावत भी थे।

प्राकृतिक चुनौतियों के बीच देश की रक्षा में तैनात जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, पूरा लद्दाख भारत का मस्तक है। 130 करोड़ भारतीयों के मान-सम्मान का प्रतीक है। यह भूमि भारत के लिए सर्वस्व त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले राष्ट्रभक्तों की धरती है। इस धरती ने देश को महान राष्ट्रभक्त दिए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, देश के वीर सपूतों ने गलवान घाटी में जो अदम्य साहस दिखाया, वो पराक्रम की पराकाष्ठा है। देश को आप पर गर्व है, आप पर नाज है। पीएम मोदी ने कहा, आप उसी धरती के वीर हैं, जिसने हजारों वर्षों से अनेकों आक्रांताओं के हमलों और अत्याचारों का मुंहतोड़ जवाब दिया है।

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जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, आज हर देशवासी का सिर अपने देश के वीर सैनिकों के सामने आदरपूर्वक नतमस्तक होकर नमन कर रहा है। हर भारतीय की छाती आपकी वीरता और पराक्रम से फूली हुई है।

हम बांसुरीधारी व सुदर्शन चक्रधारी कृष्ण को पूजते हैं

हम वो लोग हैं जो बांसुरीधारी कृष्ण की पूजा करते हैं, वहीं सुदर्शन चक्रधारी कृष्ण को भी अपना आदर्श मानते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, हमारी संस्कृति में कहा जाता है कि ’वीर भोग्य वसुंधरा’… यानी वीर अपने शस्त्र की ताकत से ही मातृभूमि की रक्षा करते हैं। ये धरती वीर भोग्या है। इसकी रक्षा-सुरक्षा को हमारा सामथ्र्य और संकल्प हिमालय जैसा ऊंचा है।

ये सामर्थ्य और संकल्प में आज आपकी आंखों पर, चेहरे पर देख सकता हूं। मोदी ने कहा, मैं गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों को आज पुनः श्रद्धांजलि देता हूं। उनके पराक्रम, उनके सिंहनाद से धरती अब भी, उनका जयकारा कर रही है।

कहा, आपकी इच्छा शक्ति पर्वतों की तरह अटल

प्रधानमंत्री ने कहा, आपका साहस उस ऊंचाई से भी ऊंचा है, जहां, आप तैनात हैं। आपका निश्चय, उस घाटी से भी सख्त है, जिसको आप रोज अपने कदमों से नापते हैं। आपकी भुजाएं, उन चट्टानों जैसी मजबूत हैं, जो आपके इर्द-गिर्द हैं। आपकी इच्छा शक्ति आस पास के पर्वतों की तरह अटल हैं। गलवान में भारतीय सपूतों ने जो वीरता दिखाई है, उसने पूरी दुनिया में ये संदेश दिया है कि भारत की ताकत क्या है। जब देश की रक्षा आपके हाथों में है, आपके मजबूत इरादों में है, तो सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि पूरे देश को अटूट विश्वास है और देश निश्चिंत भी है।

कलम आज उनकी जय बोल…

सैनिकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता से दो लाइनें भी पढ़ी। पीएम मोदी ने कहा, दिनकर जी ने लिखा था, जिनके सिंहनाद से सहमी, धरती रही अभी तक डोल…कलम आज उनकी जय बोल…। पीएम मोदी ने कहा, आज मैं अपनी वाणी से आप सब की जय बोलता हूं।http://www.satyodaya.com

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PM मोदी CDS बिपिन रावत के साथ पहुंचे लेह, अधिकारियों से ली जानकारी

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नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह अचानक लेह पहुंचे गए है। जिससे हर कोई चौंक गया। पीएम मोदी के साथ इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत भी मौजूद रहे। क्योंकि शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख को जाना था। लेकिन उनका दौरा टल गया था। वहीं दौरा टलने का कारण भी नहीं बताया गया था। जहां प्रधानमंत्री को सेना, वायुसेना के अधिकारियों ने जमीनी हकीकत की जानकारी दी। मई महीने से ही चीन के साथ बॉर्डर पर तनाव की स्थिति बनी हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नीमू की फॉरवर्ड पोस्ट पर पहुंचे। यहां पर सीनियर अधिकारियों ने उन्हें मौके की जानकारी दी। पीएम ने इस दौरान सेना, वायुसेना के अफसरों से सीधे संवाद भी किया। पहले इस दौरे पर सिर्फ CDS बिपिन रावत को ही आना था। लेकिन पीएम मोदी ने खुद पहुंचकर सभी को चौंका दिया।

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आपको बता दें कि नीमू पोस्ट समुद्री तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद है। जिसे दुनिया की सबसे ऊंची और खतरनाक पोस्ट में से एक माना जाता है।जानकारी के मुताबिक अपने इस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 कॉर्प्स के अधिकारियों से बात की। इसके अलावा CDS बिपिन रावत के साथ मिलकर मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान नॉर्दन आर्मी कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी, लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह भी मौजूद रहे।http://www.satyodaya.com

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इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पास कराने के लिए अनुचित रास्ता अपनाने का आरोप

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संसद में पारित कराने से पहले इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 पर हो गहन चर्चा: शैलेन्द्र दुबे

लखनऊ। ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 को लेकर सरकार पर जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगाया है। इसके साथ फेडरेशन ने केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा 3 जुलाई को सभी राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ बुलाई गई वीडियो कान्फ्रेसिंग बैठक का भी विरोध किया है। शुक्रवार को केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री के साथ देश भर के ऊर्जा मंत्रियों की मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 प्रमुख मुद्दा होगा। इस वर्चुअल मीटिंग में वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और नई वितरण योजना पर भी निर्णय लिया जाएगा।

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ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा, बैठक के एजेंडा में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर विचार विमर्श के लिए मात्र 35 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। जिससे पता चलता है कि केन्द्र सरकार इस बिल पर राज्यों की राय लेने की महज औपचारिकता निभा रही है। सरकार इस बिल को जल्दबाजी में आगामी मानसून सत्र में पारित कराना चाहती है।

हर राज्य को अपना पक्ष रखने का मिले मौका

श्री दुबे ने कहा, देश के 11 राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय विद्युत मंत्री को पत्र भेजकर कड़ा ऐतराज जताया है। इसके बावजूद सरकार इस बिल पर गहन विचार-विमर्श से बच रही है। शुक्रवार को होने वाली मीटिंग में हर राज्य को अपना पक्ष रखने के लिए कम से कम 30 मिनट का समय मिलना चाहिए। लेकिन महज 35 मिनट में सभी 30 राज्यों की बात सुन ली जाएगी।

बिल का विरोध करने के लिए राज्यों को भेजा मेल पत्र

ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा, बहुमत होने के चलते सरकार यह बिल संसद में पारित कराने की तैयारी कर चुकी है। लेकिन यह अनुचित और अलोकतांत्रिक है। फेडरेशन ने देश के सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों और ऊर्जा मंत्रियों को पत्र मेल कर अपील की है कि 3 जुलाई को होने वाली मीटिंग में वह इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर जल्दबाजी में लिए गए निर्णय का विरोध करे। फेडरेशन ने राज्यों से अपील की है कि वह मांग करें कि इस बिल पर गहन चर्चा के लिए इसे संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। ताकि सभी स्टेकहोल्डरों खासकर किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले।

इन मुद्दों पर बिल का हो रहा विरोध

बता दें कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 में मुनाफे वाले क्षेत्र के विद्युत् वितरण को फ्रेंचाइजी को देने, किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को बिजली टैरिफ में मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने जैसे कई प्रमुख मुद्दे शामिल किए गए हैं। देश के 11 राज्यों के मुख्यमंत्री, हजारों बिजली कर्मचारी और करोड़ों उपभोक्ता इन्हीं मुद्दों का विरोध कर रहे हैं। ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों का पक्ष सुने बिना जल्दबाजी में बिल को लोकसभा में रखा गया तो देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसका राष्ट्रव्यापी विरोध करेंगे।http://www.satyodaya.com

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July 4, 2020, 7:55 am
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