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ब्रिटेन के आर्कबिशप ने जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए मांगी माफी, बोले- शर्मिंदा हूं

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लखनऊ। जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन उसके जख्म हम भारतीयों के जहन में आज भी ताजा हैं। 13 अप्रैल 1919 को हजारों निर्दोष लोगों को गोलियों से भून दिया गया था। ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता का यह वो जघन्य कृत्य है जिसे वो चाह कर भी कभी भुला नहीं सकता। कुछ ऐसा ही एंग्लिकन चर्च के सबसे वरिष्ठ पादरी और केंटबरी के आर्चबिशप जस्टिन वेल्बी के साथ हुआ है। वह मंगलवार को जलियांवाला बाग स्मारक पहुंचे और दंडवत होकर 1919 के नरसंहार में मारे गए लोगों को नमन किया। उन्होंन कहा, ‘मैं यहां ब्रिटिश गोलियों का शिकरा हुए लोगों के सामने पश्चाताप करने आया हूं। यहां जो अपराध हुआ, उसके लिए मैं बेहद शर्मिंदा हूं और माफी मांगता हूं।

आर्कबिशप जस्टिन वेल्बी ने कहा, ‘आपको याद है कि उन्होंने क्या किया है और उनकी स्मृति जीवित रहेगी. मुझे शर्म आती है और यहां किए गए अपराध के लिए खेद है, एक धार्मिक नेता के रूप में मैं इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करता हूं।’

उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘मुझे आज अमृतसर में हुए भीषण जलियांवाला बाग नरसंहार के स्थल पर जाकर शोक, विनम्रता और गहरा शर्म का एहसास हुआ है. 1919 में यहां बड़ी संख्या में सिखों के साथ-साथ हिंदू, मुस्लिम और ईसाई भी मारे गए।’

1800 से अधिक लोग मारे गए थे

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में एक जनसभा रखी गई थी। डॉ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी तथा रोलट एक्ट के विरोध में लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए यहां जमा हुए थे, इसमें औरतें, मर्द, बच्चे सब थे। वहां एकत्रित लोग इस बात से अंजान थे कि पूरे पंजाब समेत अमृतसर में मार्शल लॉ लग चूका है। सब कुछ बड़े शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था। इसी समय जरनल डायर (रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर) ने अपने 90 सैनिकों के साथ जलियांवाला बाग की घेराबंदी कर दी और अपने सैनिकों को फायर करने का आदेश दे दिया। पूरे दस मिनट तक गोलियां चलती रहीं। लोगों ने जान बचा कर भागने की कोशिश की मगर दरवाजे बंद हो चुके थे, जो रास्ता खुला था वह इतना तंग था कि लोग भागने में नाकाम रहे और अंग्रेज सिपाहियों की गोलियों का शिकार हो गए। 1650 राउंड फायर होने के बाद सभी सिपाहियों की गोलियां खत्म हो गयीं।

हवा में धूल और खून के छींटे थे, हरी घास खून से लाल हो गई थी, पूरा जलियांवाला बाग मासूमों की चीखों से गूंज उठा था। हर तरफ लाशें ही लाशें दिख रही थीं। कुछ गोली से मारे गए कईयों ने कुएं में छलांग लगा दी। बाग में लगी पट्टिका पर लिखा है कि 120 शव तो सिर्फ कुएं से ही मिले। आधिकारिक रूप से मरने वालों की संख्या 379 बताई गई जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार कम से कम 1300 लोग मारे गए। स्वामी श्रद्धानंद के अनुसार मरने वालों की संख्या 1500 से अधिक थी जबकि अमृतसर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉक्टर स्मिथ के अनुसार मरने वालों की संख्या 1800 से अधिक थी। उस घटना को याद कर के आज भी हर भारतीय का खून खौल उठता है।

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JNU हिंसा को लेकर पुलिस को मिली 3 और शिकायतें…

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फाइल फोटो

दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में 5 जनवरी की रात हुई हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस को तीन और शिकायतें मिली हैं।  बता दें किइस मामले में दिल्ली पुलिस को पहले ही 11 शिकायतें मिल चुकी हैं।  यानी कि पुलिस को अब तक कुल 14 शिकायतें प्राप्त हुई है।  ये शिकायतें किस आधार पर की गईं हैं और किसने की है, फिलहाल इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

आपको बता दें कि जेएनयू में 5 जनवरी की रात कुछ नकाबपोश लोगों ने घुसकर जमकर हिंसा की थी। पुलिस के मुताबिक इस हमले में 34 लोग घायल हुए थे. इनमें से चार लोगों को सिर में चोट लगी थी। इन घायलों का इलाज दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर में कराया गया था। वहीं हमलावरों ने जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष और विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सुत्रित्रा सेन का सिर मार कर फोड़ दिया था।

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दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। जेएनयू हिंसा में दिल्ली पुलिस ने 4 एफआईआर दर्ज की है, लेकिन अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस का दावा है कि कैंपस के अंदर नकाब पहनकर हिंसा को अंजाम देने वालों को पुलिस लगातार तलाश कर रही है। http://www.satyodaya.com   

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इस बार इतने घंटे तक रहेगा चंद्रग्रहण, जानिए किन राशियों पर क्या होगा असर

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चंद्रग्रहण

फाइल फोटो

लखनऊ। सूर्यग्रहण के बाद अब साल का पहला चंद्रग्रहण भी 10 जनवरी को लगने जा रहा हैं। इस चंद्रग्रहण की सबसे खास बात यह है कि यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण 10 जनवरी रात 10:37 से शुरू होकर 11 जनवरी की सुबह 2:45 तक रहेगा। चंद्र ग्रहण का हमारे मन और मस्तिष्क पर काफी प्रभाव पड़ता है।

जानकारी के मुताबिक ग्रहण का प्रभाव एक पक्ष तक यानी 15 दिनों तक व्यक्ति के ऊपर रहता है। चंद्रमा जल का कारक होने से इस दौरान पृथ्वी पर जलीय आपदा या भूकंप भी आने की सम्भावना है। ऐसे में अगर हम राशियों की बात करें तो सभी राशियों पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव या दुष्प्रभाव अवश्य पड़ेगा।

मेष

इस राशि के तृतीय भाव में चंद्र ग्रहण मित्रों और छोटे भाई बहनों से सम्बन्ध खराब करा सकता है इसीलिए गायत्री मंत्र का 108 बार जपें तथा भगवान शिव के नमः शिवाय मंत्र का 3 माला जाप करें।

वृषभ

वृषभ राशि से दूसरे भाव में चंद्र ग्रहण धन कुटुंब सम्बंधित वाद विवाद करवा सकता है। इसलिए सफेद चीजों का दान करें जैसे सफेद कपड़ा चावल आदि।

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मिथुन

बता दें इस बार चंद्र ग्रहण मिथुन राशि पर भी लग रहा है। यह चंद्र ग्रहण स्वास्थ्य को लेकर आपको परेशान कर सकता है, इसलिए कच्चे दूध से रुद्राभिषेक अवश्य करवाएं।

कर्क

कर्क राशि से 12वें घर मे चंद्र ग्रहण होने से स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। मन अशांत रहेगा। इस दौरान चंद्रमा के मंत्र का जाप करें। ये मंत्र है ‘ॐ सोम सोमाय नमः’।

सिंह

सिंह राशि के 11वें घर में चंद्र ग्रहण होने से इन राशि के लोगों को धन लाभ ज्यादा हो सकता है। खर्चों को रोकने के लिए दवा का दान करने के साथ-साथ ‘ऊं नमः शिवाय मंत्र’ का जाप करें।

 कन्या

इस राशि में 10वें घर में चंद्र ग्रहण होने से कार्यों में देरी हो सकती है। इसके अलावा नौकरी में बदलाव भी हो सकता है। आपको इस दिन शिवलिंग का कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए।

तुला

तुला राशि से नवम भाव में यह चंद्रग्रहण आपके करियर में बदलाव ला सकता है। सफेद चीजों के दान के साथ चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें और अपनी माता को कोई सफेद चीज गिफ्ट करें।

वृश्चिक

राशि से अष्टम भाव में चंद्र ग्रहण हर कार्य मे गड़बड़ी कराएगा। इसकी वजह से आंखों की समस्या हो सकती है और भाग्य में रुकावट आ सकता है। चावल की खीर बनाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।

धनु

धनु राशि से सप्तम भाव में यह चंद्रग्रहण दाम्पत्य जीवन मे खराबी करेगा। यह चंद्र ग्रहण व्यापार में नुकसान कराएगा। अचानक कोई दुर्घटना घट सकती है। पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का 11 माला जाप जरुर करें।

मकर

मकर राशि से छठे भाव में यह चंद्र ग्रहण मन मे निराशा और जीवनसाथी से वाद विवाद को बढ़ा सकता है। जीवनसाथी के साथ शिवलिंग की पूजा करें और शिवाष्टक का पाठ भी करें।

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 कुंभ

कुंभ राशि से पंचम भाव में यह चंद्रग्रहण पेट के रोग और प्रेम के मामलों में गड़बड़ी करेगा। शिवलिंग पर दाएं हाथ से दूध चढ़ाएं और ॐ नमः शिवाय या नमः शिवाय का जाप करें तथा अपनी माता के पैर छुएं।

मीन

मीन राशि से चौथे भाव में चंद्रग्रहण आपकी माता की सेहत खराब करेगा। इससे आपके मन में निराशा के भाव उत्पन्न हो सकते हैं। भगवान शिव शंकर की पूजा करें और अपने घर की उत्तर पूरब दिशा को हमेशा साफ रखें।http://www.satyodaya.com

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लोकपाल सदस्य जस्टिस डीबी भोसले ने दिया इस्तीफा, जानिए वजह…

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दिलीप बाबसाहेब भोसले

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नई दिल्ली। लोकपाल के वरिष्ठतम सदस्य दिलीप बाबसाहेब भोसले ने आज अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। डीबी भोसले ने इस्तीफे की वजह का खुलासा ना करते हुए, इसे निजी बताया है। जस्टिस डीबी भोसले इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं। न्यायमूर्ति भोसले को 27 मार्च, 2019 को लोकपाल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष ने पद की शपथ दिलाई थी।

वहीं वह मार्च 2019 में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष ने भारत के पहले लोकपाल और भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी दल के रूप में शपथ ली थी। हालांकि, लोकपाल जांच कैसे करे जब शिकायत का प्रारूप ही अभी तय नहीं हो पाया है।

ऐसे में भ्रष्टाचार से लड़ाई के लिए जो सर्वोच्च संस्था लोकपाल बनाई गई है वह अभी तक भ्रष्टाचार की शिकायतों की विधिवत जांच शुरू नहीं कर पाई है, क्योंकि अभी तक लोकपाल में शिकायत देने का प्रारूप ही तय नहीं है।

जानकारी के मुताबिक लोकपाल को पद ग्रहण करने का 9 महीने का समय बीत चुका है लेकिन लोकपाल के समक्ष शिकायत करने का प्रारूप अधिसूचित नहीं किया है। जिसके तहत लोकपाल भ्रष्टाचार के किसी मामले का संज्ञान लेकर विधिवत जांच शुरू कर पाए।

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प्रारूप तय न होने के कारण लोकपाल आजतक भ्रष्टाचार के किसी मामले की जांच शुरू नहीं कर पाया है। हालांकि सरकार और लोकपाल दोनों ही तरफ से जल्दी ही प्रारूप अधिसूचित होने का विश्वास जताया जा रहा है।

भ्रष्टाचार से लड़ाई की सर्वोच्च संस्था लोकपाल स्थापित करने का कानून 2013 में पास हुआ था। कानून पास होने के पांच साल बाद 2018 में लोकपाल की नियुक्ति हुई। 23 मार्च 2019 को लोकपाल जस्टिस पीसी घोष ने पद की शपथ ली और 27 मार्च को लोकपाल के अन्य सदस्यों ने शपथ ग्रहण कर अपना पद धारण किया।

लोकपाल और सदस्यों को शपथ लेकर पद ग्रहण किये नौ महीने का समय बीत चुका है। इस बीच लोकपाल ने उसके पास आई लगभग 1200 शिकायतें निपटाई हैं लेकिन इन शिकायतों में ज्यादातर सर्विस मैटर, जमीन विवाद या पुलिस अत्याचार आदि के जुड़े मामले थे, जिनमें जांच करने का लोकपाल को क्षेत्राधिकार ही नहीं है। ख़बरों की माने तो कुछ शिकायतें भ्रष्टाचार से संबंधित भी आयी थीं लेकिन उस पर भी न विचार और न ही जांच की जा सकी. ऐसा इसलिए  क्योंकि अभी तक शिकायत दाखिल करने का प्रारूप तय नहीं किया गया है।http://www.satyodaya.com

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January 10, 2020, 12:21 pm
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