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JNU में हमला भाजपा की सोची समझी साजिश का हिस्सा: अखिलेश यादव

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लखनऊ: सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को प्रदेश मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने कहा कि जेएनयू में हुआ हमला एक सोची समझी साजिश थी, जिसे भाजपा ने करवाया था। साथ ही पुलिस बवाल और हिंसा करने वालों को शह दे रही थी। भाजपा ये नहीं चाहती है कि गरीब बच्चे जेएनयू पढ़े और पढ़ लिखकर कुछ बन सके। यूपी सरकार व प्रशासन पर कई सवाल उठ रहे हैं। किस तरह से मुंह छुपा कर कई लोग जेएनयू परिसर में घुसे और वहां तोड़फोड़ की।

वहीं जेएनयू में पुलिस इसलिए इंतज़ार कर रही थी, क्योंकि प्रशासन में बैठे लोग ये जानते थे कि नकाबपोश लोग कब निकलेंगे ? कुछ लोग पुलिस के साथ पुलिस बनकर आये थे। अखिलेश ने एक वीडियो भी दिखाया और कहा कि वाराणसी में समाजवादी छात्रसभा पर भी जेएनयू जैसे हमले हुए थे। सरकार व पुलिस को सब पता है कि जेएनयू में हुए हमलों के पीछे कौन थे? हमारी मांग है कि इसकी न्यायिक जांच हो कि आखिर यूनिवर्सिटी को बर्बाद करने के पीछे किसका हाथ है। जिसके बाद इन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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इसी कड़ी में सीएए के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हुए दंगों पर भाजपा पर निशाना साधते हुए अखिलेश ने कहा कि दंगो के लिए अगर कोई ज़िम्मेदार है तो वो खुद भाजपा है। भाजपा लोकतंत्र को बर्बाद कर देना चाहती है। शहर में हुए दंगे में जितने लोगों की जान गई है वह पुलिस की गोली से गई है। यूपी के सीएम की कुर्सी बचाने के लिए ये सब दंगे करवाए जा रहे हैं। भाजपा के फैसलों से नौजवानों का रोज़गार छीन गया है, जिससे कि वह बेरोजगार हो गयें हैं।

इसी क्रम में अखिलेश ने कहा कि गोरखपुर में अगस्त 2017 में 100 से अधिक बच्चों की मौत प्रशासन की लापरवाही की वजह से हुई थी। मैंने मांग की थी कि बच्चों के परिजनों की मदद की जाए, लेकिन सरकार ने उनकी मदद नहीं की बल्कि सपा के लोगों ने उनकी मदद की। सीएम ने मारे गए बच्चों के परिजनों को सांत्वना देने के बजाए उनपर कटाक्ष किया था।

वहीं जनवरी 2019 से अक्टूबर 2019 के आंकड़े बताते है कि दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या 1050 थी, लेकिन यूपी सरकार ने दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या 500 से कम बताई है। इसकी जांच एक सिटिंग जज की देख रेख में होनी चाहिए, जब जांच होगी तो सच्चाई खुद बखुद सबके सामने आ जाएगी। मुलायम सिंह सरकार ने मृतक बच्चों के परिजनों को 25 हजार व दिव्यांग बच्चों को 50 हज़ार देने की घोषणा की थी।

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साल 2012 में जब फिर हमारी सरकार आई तो, मृतक बच्चों के परिजनों को 50 हजार और दिव्यांग बच्चों को 1 लाख दिया जाता था। गोरखपुर मेडिकल में गलत दवाइया दी जा रही हैं। सीएम योगी गोरखपुर जाते हैं, क्यों जाते है, पता नहीं हैं। भाजपा के लोग ये समझते है कि धर्म से कैंसर का इलाज होगा, लेकिन धर्म से तो सर दर्द भी ठीक नहीं होगा। भाजपा के लोगों को अगर अपना नाम रखने की आदत है, तो खुद काम करवाइए और नाम गुनवाइए। http://www.satyodaya.com

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विवादित ढांचा विध्वंस मामले में CBI कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल

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लखनऊ। अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया है। कोर्ट के फैसले को एक पक्ष ने जहां ऐतिहासिक बताया है तो वहीं दूसरे पक्ष ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी, एआईएमआईएम के अध्यक्ष और सांसद असदउद्दीन ओवैसी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सीबीआई की विशेष कोर्ट के फैसले पर सख्त नाराजगी जाहिर की है।

फैसले के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा है कि कोर्ट ने साक्ष्यों को नजरअंदाज किया है। ढांचा ढहाए जाने के समय वहां पुलिस व प्रशासन के अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार भी मौजूद थे। उनकी गवाहियों का क्या हुआ? क्या वह लोग झूठ बोल रहे हैं? जिलानी ने कहा है कि वह अब इस मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।

न्याय के इतिहास का काला दिन: ओवैसी

एआईएमआईएम के अध्यक्ष और सांसद असदउद्दीन आवैसी ने कोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद पत्रकार वार्ता कर अपना विरोध दर्ज कराया। ओवैसी ने आज अपराधियों को क्लीनचिट दी जा रही है, यह न्याय के इतिहास का काला दिन है। ओवैसी ने कहा कि यह आखिरी फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आखिरी निर्णय होता है। कोर्ट के फैसले से असहमत होना, अवमानना नहीं होता।

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ओवैसी ने कहा कि सीबीआई को अपनी स्वतंत्रता बरकरार रखनी होगी तो वह अपील करेगी। यदि वह फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेगी तो हम हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से कहेंगे कि इसके खिलाफ अपील करे। एआईएमआईएम अध्यक्ष ने कहा कि उस दिन क्या कोई जाद हुआ था? किसने किया था मेरी मस्जिद को शहीद? ओवैसी ने कहा कि बाबरी मस्जिद को ढहाने वालों को दोषमुक्त कर संदेश दिया जा रहा है कि मथुरा और काशी में भी यही करो, रुल ऑफ लॉ की चिंता नहीं है, वे करते जाएँगे, क्लीन चिट मिलता जाएगा।

सीबीआई के विशेष जज का फैसला न्याय का मजाक बनाने जैसा

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सीबीआई के विशेष कोर्ट के निर्णय पर आश्चर्य जाहिर किया है। येचुरी ने फैसले का मजाक बताते हुए ट्वीट कर कहा, यह न्याय का मजाक बनाने जैसा है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के आरोपियों को बरी कर दिया गया है। एक मस्जिद खुद गिर गई? उस समय की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने इसे कानून का भयावह उल्लंघन बताया था। अब ये फैसला! शर्मनाक।

न्यायपालिका में न्याय नहीं होता: प्रशांत भूषण

वहीं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, इस निर्णय से यही साबित होगा कि न्यायपालिका में न्याय नहीं होता। बस एक भ्रम रहता है कि न्याय किया जाएगा। भूषण ने कहा, ऐसे ही निर्णय की संभावना थी। क्योंकि जमीन के मालिकाना हक पर फैसला पहले ही सुनाया जा चुका है। वो भी उस पक्ष के हक में, जो मस्जिद ढहाए जाने का आरोपी था। प्रशांत भूषण ने कहा कि इस फैसले से मुसलमान समुदाय में द्वेष बढ़ेगा क्योंकि कोई भी फैसला उन्हें अपने हक में नहीं लगेगा।http://www.satyodaya.com

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अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सभी आरोपी बरी

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लखनऊ। अयोध्या के बहुचर्चित विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है। स्पेशल सीबीआई कोर्ट के जज सुरेन्द्र कुमार यादव ने सभी लालकृष्ण आडवाणी, उमाभारती, मुरली मनोहर जोशी सभी 32 आरोपियों को बेगुनाह करार दिया है। 6 दिसंबर 1992 को हुए ढांचा विध्वंस मामले में करीब 28 साल बाद यह फैसला आया है। फैसला सुनाते हुए जज सुरेन्द्र कुमार यादव ने कहा, विवादित ढांचा विध्वंस कांड पूर्वनियोजित नहीं था।

आरोपी बनाए गए लोगों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत भी नहीं हैं।सुनवाई के समय साक्षी महाराज, साध्वी ऋतंभरा, विनय कटियार, चंपत राय, वेदांती, पवन पांडेय, आचार्य धर्मेन्द्र देव सहित 26 आरोपी आज अदालत में उपस्थित थे।#BabriMasjid#BabriDemolitionCase

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बता दें कि सीबीआई ने कुल 49 लोगों को आरोपी बनाया था। जिनमें से 17 अभियुक्तों का निधन हो चुका है। वर्तमान समय में केवल 32 आरोपी ही जिंदा हैं, जो अब जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुके हैं।

6 आरोपी अदालत में नहीं आए

कोर्ट ने सुनवाई के समय सभी 32 आरोपियों को मौजूद रहने का आदेश दिया था। पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, महंत नृत्य गोपाल दास, सतीश प्रधान एवं पूर्व मुख्यमंत्री/राज्यपाल कल्याण सिंह सहित 6 आरोपी अदालत में मौजूद नहीं थे। इन लोगों को बीमारी वह कोरोना के चलते अदालत में मौजूद होने की छूट दी गई थी, इन लोगों ने घर से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत का फैसला सुना।#BabriDemolitionCase

कुल 49 अभियुक्तों में से 17 की हो चुकी है मौत

बता दें कि सीबीआई ने विवादित ढांचा विध्वंस मामले में कुल 49 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें ज्यादातर लोग भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे। कोर्ट के फैसले से लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़, धर्मेंद्र सिंह गुर्जर को बड़ी राहत मिली है।

17 अभियुक्तों की मौत

28 वर्षों से चली आ रही इस कार्यवाही के दौरान अब तक 17 अभियुक्तों की मौत हो चुकी है।अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, मोरेश्वर सावें, महंत अवैद्यनाथ, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि महाराज, बैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, डॉ. सतीश नागर, बालासाहेब ठाकरे, तत्कालीन एसएसपी डीबी राय, रमेश प्रताप सिंह, महात्यागी हरगोविंद सिंह, लक्ष्मी नारायण दास, राम नारायण दास और विनोद कुमार बंसल। http://www.satyodaya.com

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महिलाओं के खिलाफ अपराध में 7% का इजाफा, हर दिन दर्ज हो रहे 87 रेप केस- NCRB

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लखनऊ। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में दुनियाभर में लगे लॉकडाउन के बीच एक नई चुनौती सामने आ गई है। आज दुनियाभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भारी बढ़ोतरी आई है। भारत में 2019 में प्रतिदिन बलात्कार के औसतन 87 मामले दर्ज हुए और साल भर के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,05,861 मामले दर्ज हुए जो 2018 की तुलना में सात प्रतिशत अधिक हैं।सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, देश में 2018 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,78,236 मामले दर्ज हुए। आंकड़ों के अनुसार 2019 में बलात्कार के कुल 32,033 मामले दर्ज हुए जो साल भर के दौरान महिलाओं के विरुद्ध अपराध के कुल मामलों का 7.3 प्रतिशत था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला NCRB देश भर के क्राइम डेटा को इकट्ठा कर उसका एनलासिस करती है।

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एजेंसी ने 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों और 53 महानगरों के आंकड़ों को समेटने के बाद तीन हिस्सों में रिपोर्ट तैयार की है। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019 में भारत में प्रतिदिन हत्या के औसतन 79 मामले दर्ज किए गए। 2019 में हत्या के कुल 28,918 मामले दर्ज किए गए। जो 2018 (29,017 मामलों) की अपेक्षा 0.3 प्रतिशत कम है।

गृह मंत्रालय ने बताया कहा कि नवीनतम डेटा में पश्चिम बंगाल द्वारा आंकड़े साझा नहीं किए गए जिसकी वजह सेराष्ट्रीय और शहर-वार आंकड़ों के लिए 2018 के डेटा का उपयोग किया गया है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का धन्यवाद किया जिन्होंने कोरोनोवायरस प्रकोप के दौरान डेटा इकट्ठा करने का काम किया। http://www.satyodaya.com

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