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अयोध्या विवाद: 1528 ई. से ऐतिहासिक फैसले तक

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नई दिल्ली: अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद में उच्चतम न्यायालय का फैसला आ गया है। अयोध्या भूमि विवाद को लेकर पांच जजों की पीठ ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित ढांचे पर अपना एक्सक्लूसिव राइट साबित नहीं कर पाया। कोर्ट ने विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को देने का फैसला सुनाया, तो मुसलमानों को दूसरी जगह जमीन देने के लिए कहा है। सदियों पुराने इस विवाद के महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार हैं….

1528: ऐसा माना जाता है कि अयोध्या में मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट बाबर के गर्वनर मीर तकी ने करवाया था। इस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था।
1853: इस तारीख का जिक्र उच्चतम न्यायालय में बहस के दौरान किया गया था कि पहली बार इस विवादित स्थल को लेकर सांप्रदायिक दंगे हुए थे।
1859: ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी थी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिन्दुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।
1885: निर्मोही अखाड़े के महंत रघुबर दास ने राम चबूतरे पर मंदिर निर्माण की अनुमति के लिए मुक़दमा किया था और अदालत से मांग की थी कि चबूतरे पर मंदिर बनाने की इजाजत दी जाये। यह मांग खारिज हो गई थी।
1946: मस्जिद शियाओं की या सुन्नियों की, इसे लेकर विवाद उठा। बाद में यह फैसला हुआ कि बाबर सुन्नी था, इसलिए मस्जिद सुन्नियों की है।
1949: जुलाई में प्रदेश सरकार ने मस्जिद के बाहर राम चबूतरे पर राम मंदिर बनाने की कवायद शुरू की, लेकिन यह भी नाकाम रही। 22-23 दिसम्बर 1949 की मध्य रात्रि को मस्जिद में राम सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां रख दी गईं। उसके बाद 29 दिसंबर को यह विवादित संपत्ति कुर्क कर ली गयी और वहां रिसीवर बिठा दिया गया।
1950: गोपाल दास विशारत ने 16 जनवरी को अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनकी दलील थी कि मूर्तियां वहां से न हटें और पूजा बेरोकटोक हो। निचली अदालत ने कहा था कि मूर्तियां नहीं हटेंगी, लेकिन ताला बंद रहेगा और पूजा सिर्फ पुजारी करेगा। जनता बाहर से दर्शन करेगी।
1959: निर्मोही अखाड़ा अदालत पहुंचा और सेवादार के नाते विवादित जमीन पर अपना दावा पेश किया।
1961: सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अदालत में मस्जिद पर दावा पेश किया।
1986: एक फरवरी को फैजाबाद के जिला जज ने जन्मभूमि का ताला खुलवाकर पूजा की अनुमति दे दी।
1986: कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाने का फैसला हुआ।
1989: विश्व हिन्दू परिषद नेता देवकीनंदन अग्रवाल ने रामलला की तरफ से मंदिर के दावे का मुकदमा किया।
1989: नवंबर में मस्जिद से थोड़ी दूर पर राम मंदिर का शिलान्यास किया गया।
25 सितंबर 1990: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा शुरू की। इससे अयोध्या में राम मंदिर बनवाने को लेकर एक जुनून पैदा किया गया, जिसके परिणाम स्वरूप गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गये। कई इलाके कर्फ्यू की चपेट में आ गए, लेकिन श्री आडवाणी को 23 अक्टूबर को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने गिरफ्तार करवा दिया।

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30 अक्टूबर 1990:
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के लिए पहली कारसेवा हुई थी। कारसेवकों ने मस्जिद पर चढ़कर झंडा फहराया था, इसके बाद दंगे भड़क गये।
1991: जून में आम चुनाव हुए और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बन गयी।
1992: 30-31 अक्टूबर को धर्म संसद में कारसेवा की घोषणा हुई।
1992: नवंबर में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अदालत में मस्जिद की हिफाजत करने का हलफनामा दिया।
06 दिसंबर 1992: लाखों कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद ढहा दी। कारसेवक 11 बजकर 50 मिनट पर मस्जिद के गुम्बद पर चढ़े। करीब 4.30 बजे मस्जिद का तीसरा गुम्बद भी गिर गया जिसकी वजह से देश भर में हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे।
जनवरी 2002: अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अयोध्या समिति का गठन किया। वरिष्ठ अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को हिन्दू और मुसलमान नेताओं के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किया गया। विश्व हिन्दू परिषद ने 15 मार्च से राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा कर दी।
2003: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2003 में झगड़े वाली जगह पर खुदाई करवाई ताकि पता चल सके कि क्या वहां पर कोई राम मंदिर था। जून महीने तक खुदाई चलने के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि उसमें मंदिर से मिलते-जुलते अवशेष मिले हैं।
मई 2003: सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराये जाने के मामले में उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।
अप्रैल 2004: श्री आडवाणी ने अयोध्या में अस्थायी राममंदिर में पूजा की और कहा कि मंदिर का निर्माण जरूर किया जाएगा।
जनवरी 2005: लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया। इसी साल अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में आतंकी हमले हुए, जिसमें पांचों आतंकियों सहित छह लोग मारे गए।

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20 अप्रैल 2006: कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने लिब्रहान आयोग के समक्ष लिखित बयान में आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद को ढहाया जाना सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था और इसमें भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल और शिवसेना की मिलीभगत थी। तत्कालीन सरकार ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बने अस्थायी राम मंदिर की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाए जाने का प्रस्ताव किया। इस प्रस्ताव का मुस्लिम समुदाय ने यह कहते हुए विरोध किया कि ऐसा करना अदालत के उस आदेश के खिलाफ है जिसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिये गये थे।
30 जून 2009: बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी।
24 नवम्बर, 2009: लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश। आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मीडिया को दोषी ठहराया तथा पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव को क्लीन चिट दी।
26 जुलाई, 2010: रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी हुई।
30 सितंबर 2010: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अयोध्या में विवादित जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बांटने का फैसला किया, जिसके खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 विशेष अनुमति याचिकाएं दायर की गयीं।
09 मई 2011: उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के फैसले पर रोक लगाई।
21 मार्च 2017 : राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता की पेशकश की । तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा था कि अगर दोनों पक्ष राजी हो तो वह कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं।
11 अगस्त 2017: उच्चतम न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू।
8 फरवरी 2018 : मुख्य पक्षकारों को पहले सुने जाने का फैसला।
27 सितंबर, 2018: तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से 1994 के एक फैसले में की गयी टिप्पणी पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास नये सिरे से विचार के लिए भेजने से इन्कार कर दिया था। इस मामले में विचार का मुद्दा था कि ‘नमाज के लिए मस्जिद अनिवार्य या नहीं’ इसे संविधान पीठ के पास भेजा जाये या नहीं।
26 फरवरी 2019: उच्चतम न्यायालय ने मामले में मध्यस्थता के जरिये विवाद सुलझाने की सलाह दी और कहा कि अगर आपसी सुलह की एक फीसदी भी संभावना है तो मध्यस्थता होनी चाहिए।
06 मार्च 2019: मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए तैयार हुआ। हिंदू महासभा और रामलला पक्ष ने आपत्ति दर्ज करवाई।
08 मार्च 2019: उच्चतम न्यायालय ने अपने सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफएम आई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में मध्यस्थता समिति गठित की, जिसमें आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और मध्यस्थता मामलों के जाने माने वकील श्रीराम पंचू भी सदस्य थे।
02 अगस्त 2019: मध्यस्थता समिति ने रिपोर्ट सौंपी और कहा कि मध्यस्थता बेनतीजा रही है। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने छह अगस्त से रोजमर्रा के आधार पर मामले की सुनवाई का निर्णय लिया।
06 अगस्त 2019: उच्चतम न्यायालय में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई।
16 अक्टूबर 2019: चालीस दिनों तक चली सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
09 नवम्बर 2019: उच्चतम न्यायालय का फैसला- विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को, तो मुसलमानों को मिलेगी दूसरी जमीन। http://www.satyodaya.com

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भारतीय सेना में पहली महिला न्यायाधीश बनीं ज्योति शर्मा

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नई दिल्ली। भारतीय सेना में पहली महिला न्यायाधीश ज्योति शर्मा की नियुक्ति की गई है। ज्योति शर्मा लेफ्टिनेंट कर्नल महिला जज एडवोकेट जनरल अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में कार्य करेंगी। वह सैन्य कानूनी विशेषज्ञ के रूप में पूर्वी अफ्रीकी देश सेशेल्स की सरकार को अपनी सेवाएं देंगी।

भारतीय सेना में यह पहला मौका है। जब किसी महिला न्यायाधीश की नियुक्ति की गयी है। यह एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि इससे पहले किसी भी महिला को न्यायाधीश के तौर पर भारतीय सेना में नियुक्त नहीं किया गया है। ज्योति शर्मा विदेश से जुड़े मामले देखेंगी।

बता दें कि भारत में न्यायाधीश एडवोकेट जनरल अधिकारी का पद सेना के लेफ्टिनेंट को दिया जाता है। यह सेना का न्यायिक प्रमुख होता हैं। भारतीय सेना की न्यायाधीश एडवोकेट जनरल एक अलग विभाग है। इसमें कानूनी रूप से योग्य सेना के अधिकारी शामिल होते है। गौरतलब है कि एडवोकेट जनरल अधिकारी सभी तरह से सेना को कानूनी मदद देते हैं।

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सेना में शादीशुदा महिलाओं का प्रतिबंध

गौरतलब है कि भारतीय सेना ने अपनी कानूनी शाखा न्यायाधीश एडवोकेट जनरल में आवेदन करने के लिए विवाहित महिलाओं पर प्रतिबंध लगाया हैं। इसे लेकर अदालत में याचिका भी दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेना को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि सेना चाहती है कि महिलाएं कठिन ट्रेनिंग को बिना किसी छुट्टी के पूरा करे।http://www.satyodaya.com

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भारत के इस गांव में लड़के और लड़कियां एक-दूसरे को पान खिलाकर करते हैं पसंद

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शादी

फाइल फोटो

नई दिल्ली। देश-दुनिया के हर कोने में अलग-अलग रस्में और परम्पराएं हैं। इसी तरह हर raj राज्य में शादी को लेकर भी कई सारी परम्पराएं हैं। ऐसे में चलिए आज हम भारत के मध्यप्रदेश के हरदा की एक ऐसी परम्परा के बारे में बताएंगे जिसके बारे में सुनकर आप हैरान हो जाएंगे।

मध्यप्रदेश के हरदा जिले में स्थित आदिवासी अंचल में विवाह का जो तीरका आज चलन है।उसके बारे में शायद ही किसी को पता हो। हरदा के आदिवासी अंचल में रहने वाले युवक- युवती अनोखे तरीके से अपनी शादी की रस्में निभाते है। जिला मुख्यालय से तकरीबन 70 किलोमीटर दूर आदिवासी अंचल में स्थित ‘मोरगढ़ी’ गांव में हर साल दिवाली के एक सप्ताह बाद एक अनोखा मेला लगता है।इस मेले में बड़ी संख्या में आदिवासी युवक-युवतियां शामिल होते हैं।

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ठिठिया बाजार नामक इस मेले में युवक और युवती अपने जीवनसाथी का चुनाव करते हैं। इसके लिए युवक और युवती एक-दूसरे को पान खिलाते है। जी हां, यहां पर परंपरा है जिसके तहत लोग अपनी पसंद का साथी चुनने के बाद पान खिलाते है। मोरगढ़ी गांव में कई सालों से यह परम्परा चली आ रही हैं।

सारा दिन मेला घूमने के बाद युवक और युवतियां एक दूसरे को पान खिला कर अपने जीवनसाथी के रूप स्वीकार कर लेती हैं। जिसके बाद उनकी शादी का भी ऐलान हो जाता है।इसके बाद दोनों अपने घर के लिए चले जाते है और शादी की जानकारी लड़की के घरवालों को पहुंचा दी जाती हैं ताकि परिवार वाले लड़की के लिए लड़के की खोजबीन बंद कर दें। और युवक और युवती ने जिसको पसंद किया है घरवाले उसी से उसकी शादी करा दें। http://www.satyodaya.com

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एक बार फिर बढ़ी पेट्रोल की कीमत, जानिए अब क्या है रेट…..

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पेट्रोल की कीमत

फाइल फोटो

नई दिल्ली। पेट्रोल की कीमत में एक बार फिर गुरुवार को 15 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। जबकि डीजल के रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। आज दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में पेट्रोल 15 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है तो वहीं चेन्नई में पेट्रोल 16 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी देखी गई है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल क्रमश: 73.45 रुपये, 79.12 रुपये, 76.15 रुपये और 76.34 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। वहीं इन चारों महानगरों में डीजल क्रमश: 65.79 रुपये, 69.01 रुपये, 68.20 रुपये और 69.54 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।

हमेश सुबह 6 बजे बदलती हैं कीमतें

बता दें पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना घटते बढ़ते रहते हैं। पेट्रोल-डीजल का नया दाम सुबह 6 बजे से लागू हो जाता है। इनकी कीमत में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन सब कुछ जोड़ने के बाद इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो जाती है।

जानिए घर बैठे कैसे जानें पेट्रोल-डीज़ल के दाम

अगर आप भी चाहते हैं कि घर बैठे पेट्रोल-डीजल के दाम पता चल जाएं तो SMS के जरिए जान लें। अगर आप सुबह 6 बजे के बाद पेट्रोल-डीज़ल का रेट चेक करना चाहते हैं तो 92249 92249 नंबर पर एसएमएस भेजकर भी पेट्रोल-डीजल के भाव के बारे में पता कर सकते हैं। इसके लिए आपको RSP<स्पेस> पेट्रोल पंप डीलर का कोड लिखकर 92249 92249 पर भेजना पड़ेगा। मतलब साफ है कि आप अगर दिल्ली में हैं और मैसेज के जरिए पेट्रोल-डीजल का भाव जानना चाहते हैं तो आपको RSP 102072 लिखकर 92249 92249 पर भेजना होगा।http://www.satyodaya.com

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November 14, 2019, 9:11 pm
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