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अयोध्या पर सुप्रीम फैसला: राम के काम आए ‘मोहम्मद’

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लखनऊ। बहुप्रतीक्षित अयोध्या मामले पर शनिवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से विवादित जमीन को हिंदुओं को देने का फैसला दिया है। वहीं, मुसलमानों को मस्जिद के लिए अयोध्या में ही उचित जगह पर वैकल्पिक जमीन देने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र या राज्य सरकार मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन दे। इस फैसले की सबसे प्रमुख बात ये रही है कि कोर्ट ने भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट का आधार बनाया है। एएसआई की रिपोर्ट को आधार मानते हुए यह भी कहा कि अयोध्या में मस्जिद किसी खाली स्थान पर नहीं बनाई गई थी। इस फैसले के एक बाद एक बार डॉ. केके मोहम्मद चर्चा में आ गए हैं।

मस्जिद एक मंदिर के मलबे पर खड़ी थी

दरअसल, एएसआई ने 1976-77 में अयोध्या में प्रोफेसर बीबी लाल के नेतृत्व में खुदाई की थी। इस टीम का हिस्सा डॉ. मोहम्मद भी थे। उन्होंने दावा किया था कि अयोध्या में खुदाई के दौरान मंदिर होने के अवशेष होने सबूत मिले थे। उन्होंने ये बात मलयालम में लिखी अपनी आत्मकथा ‘जानएन्ना भारतीयन’ (मैं भी एक भारतीय) में भी कही है। पुरातत्व वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद ने अपनी किताब में जिक्र किया था ‘जो कुछ मैंने जाना और कहा है, वो एक ऐतिहासिक सच्चाई है। हमें विवादित स्थल से 14 स्तंभ मिले थे। सभी स्तंभों में गुंबद खुदे हुए थे। ये 11वीं और 12वीं शताब्दी के मंदिरों में मिलने वाले गुंबद जैसे थे। गुंबद में ऐसे 9 प्रतीक मिले हैं, जो मंदिर में मिलते हैं। उन्होंने कहा था कि, खुदाई से साफ हो गया था मस्जिद एक मंदिर के मलबे पर खड़ी की गई थी।

एएसआई की रिपोर्ट की नहीं कर सकते अनदेखी: SC

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम एएसआई की खुदाई से निकले सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला पूरी पारदर्शिता से हुआ है। कोर्ट ने कहा कि मस्जिद के नीचे विशाल संरचना थी। एएसआई ने 12वीं सदी का मंदिर बताया था। कोर्ट ने कहा कि कलाकृतियां जो मिली थीं, वह इस्लामिक नहीं थीं। विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीजें इस्तेमाल की गईं। कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए कहा कि इस पर शक नहीं किया जा सकता। उसके निष्कर्षों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हालांकि, फैसले में कोर्ट ने ये भी कहा है कि एएसआई ये नहीं बता पाया कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनी थी। लेकिन कोर्ट ने माना कि अयोध्या में राम के जन्मस्थान के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया। विवादित जगह पर हिंदू पूजा करते रहे थे।

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वामपंथी चिंतको ने किया मुसलमानों को गुमराह

बता दें, डॉ. केके मोहम्मद न सिर्फ मस्जिद के नीचे मंदिर होने का जिक्र करते रहे हैं बल्कि वो वामपंथी चिंतको पर मुसलमानों को गुमराह करने का आरोप भी लगाते रहे हैं। उन्होंने कहा था, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के तत्कालीन सदस्य प्रोफेसर इरफान हबीब, रोमिला थापर, बिपिन चंद्रा, एस. गोपाल जैसे वामपंथी इतिहासकारों ने मुस्लिम बुद्धजीवियों का अगर ब्रेन-वाश नहीं किया होता तो ये मुद्दा बहुत पहले सुलझ चुका होता। http://www.satyodaya.com

क्राइम-कांड

6 साल की मासूम को जिंदा जलाया, फिर बोरी से ढक दी अधजली लाश, फैली सनसनी

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चंडीगढ़। पंजाब के होशियारपुर जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जिले के गांव टांडा के जलालपुर में देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई। जब एक 6 साल की मासूम बच्ची को जिंदा जला देने का मामला सामने आया। उसकी अधजली लाश को बोरी से ढक दिया गया। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही टांडा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्‍ची के शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस के मुताबिक, इसका पता लगाया जा रहा है। कि मासूम की हत्या से पहले उसके साथ रेप तो नहीं किया गया। फिलहाल बच्ची के अधजले शव को पोस्मार्टम के लिए अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया है। बता दें किं इस घटना के बारे में उस समय पता चला जब गांव जलालपुर में बड़ी संख्या में इकठ्ठे हुए लोगों ने टांडा पुलिस को घटना के बारे में सूचित किया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लड़की के बारे में छानबीन करनी शुरू की।

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दोपहर से लापता थी बच्ची
जानकारी के मुताबिक 6 साल की बच्ची के पिता का नाम राहुल है जो सुजीत सिंह नाम के एक व्यक्ति का ड्राइवर है। बच्ची की मां के मुताबिक, उसकी लड़की दोपहर से ही गायब थी। लड़की की तलाश करने पर पता चला कि सुरजीत सिंह का बेटा उनकी बच्ची को अपने साथ ले गया है। इसके बाद जब सुरजीत सिंह की हवेली में जाकर देखा गया तो बोरी के साथ लड़की की अधजली लाश पड़ी हुई थी।
बता दें कि टांडा पुलिस ने बच्ची के शव को कब्जे मै ले लिया  है और पुलिस जांच में जुट गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच की बात कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। पुलिस की मानें तो जल्द ही आरोपी उनकी गिरफ्त में होगा।http://satyodaya.com

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राजस्थान: जयपुर में ऑटोमोबाइल कंपनी के गोदाम में लगी भीषण आग

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जयपुर। राजस्‍थान की राजधानी जयपुर के आमेर में कूकस स्थित एक ऑटोमोबाइल कंपनी के गोदाम में बुधवार को आग लग गई आग इतनी भीषण थी कि उस पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की करीब 20 गाड़ियां ने अपना पूरा दमखम लगा दिया लेकिन घटना के कई घंटे बाद भी आग को पूरी तरह से नहीं बुझाया जा सका है हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है और पुलिस ने आसपास के इलाकों को अलर्ट कर दिया है बता दें कि पहले इस फैक्ट्री में एस्सार कंपनी के ट्रैक्टर बना करते थेलेकिन अब इसमें रॉयल इन्फील्ड समेत कुछ कंपनियों के वेयरहाउस बने हुए हैं

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फायर अफसर घनश्याम के अनुसार, जयपुर-दिल्ली हाईवे पर कूकस इंडस्ट्रीयल एरिया में आयशर कंपनी का यार्ड (गोदाम) है जबकि यहां आयशर कंपनी के चारपहिया वाहनों के अलावा सैकड़ों की संख्या में रॉयल इन्फील्ड कंपनी की बाइक काफी बड़े हिस्से में खड़ी रहती हैं वहीं, एक बड़े परिसर में पेंट हाउस बना हुआ था जहां गाड़ियां तैयार की जाती हैं इसके अलावा गाड़ियों के पुर्जे भी बनाए जाते हैं इसके अलावा जब आग की सूचना पर मीडिया पहुंची तो उसे अंदर नहीं जाने दिया गया ऐसे में सवाल उठता है कि फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन आखिर क्या छुपाने की कोशिश कर रहा है

पेट्रोल पंप बचा
सूचना मिलने पर एडिशनल डीसीपी सुमित गुप्ता और आमेर के एसीपी सौरभ तिवाड़ी पुलिस दल के  मौके पर पहुंचे जबकि सहायक फायर अफसर देवेंद्र व फायर अफसर घनश्याम की अगुआई में करीब 20 से ज्यादा दमकलकर्मियों और सिविल डिफेंस की टीम ने आग पर काबू पाने के लिए बचाव कार्य शुरू किया जबकि आसपास के लोगों का कहना था कि इस गोदाम के समीप ही एक पेट्रोल पंप भी था गनीमत रही कि पेट्रोल पंप तक आग की लपटें नहीं पहुंची, वरना बड़ा हादसा हो सकता थाhttp://satyodaya.com

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उपचुनाव से ठीक पहले सिंधिया खेमे के दो मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, CM ने दी मंजूरी

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भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा की 28 सीटों के लिए उपचुनाव में मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ कई क्षेत्रीय दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।  ऐसे में यहां से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां बिना विधायक बने छह महीने होने पर मध्य प्रदेश के दो मंत्री तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने दोनों नेताओं के इस्तीफे स्वीकारते हुए राजभवन भेज दिए। बता दें कि दोनों ही नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुये थे। साथ ही इस बार के उपचुनाव भी लड़ रहे हैं।

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दरअसल, संवैधानिक प्रावधान है कि कोई भी मंत्री सदन का सदस्‍य बने बिना 6 महीने से ज्‍यादा समय तक मंत्रीपद पर बने नहीं रह सकता है। ऐसे में इसी प्रक्रिया के चलते दोनों नेताओं को इस्तीफ़ा देना पड़ा।

उपचुनाव की बात करें तो सांवेर विधानसभा उपचुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी के तुलसीराम सिलावट और कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्‌डू के बीच है। हाल ही में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने नामांकन भरा तो वहीं, अगले दिन गुरुवार को प्रेमचंद गुड्‌डू ने नामांकन दाखिल किया। दोनों ने ही नामांकन के साथ अपनी आय का शपथ पत्र भी दिया है। सांवेर से चार बार विधायक रहे मध्यप्रदेश सरकार के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने अबकी बार भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया।http://satyodaya.com

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