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बांग्लादेशी अभिनेता को तृणमूल कांग्रेस का चुनाव प्रचार करना पड़ा भारी, भारत छोड़ने का आदेश

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अभिनेता का वीजा रद्द

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करना बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस अहमद को भारी पड़ गया है। मामले का संज्ञान लेते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने बांग्लादेशी कलाकार का वीजा रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस भी जारी किया गया है। गृह मंत्रालय ने यह फैसला आव्रजन ब्यूरो से अभिनेता द्वारा वीजा उल्लंघन की रिपोर्ट मिलने के बाद लिया है। गृह मंत्रालय ने अहमद का व्यावसायिक वीजा रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अहमद को ब्लैक लिस्ट भी किया गया है।

यह भी पढ़ें-ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार में उतारे बांग्लादेशी कलाकार, गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

इससे पहले बंगाल के उत्तर दिनाजपुर में फिरदौस अहमद एक रथ पर सवार होकर तृणमूल का प्रचार करते दिखे थे। जिस पर भाजपा ने कड.ी आपत्ति जताई थी और चुनाव आयोग के साथ गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से शिकायत की थी। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जमकर खरी खोटी सुनाई थी। http://www.satyodaya.com

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#MenToo : अब पुरुष भी सुना पाएंगे यौन शोषण की कहानी

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लखनऊ। यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की आवाज बने #MeToo movement के बाद अब #MenToo campaign उत्पीडन के शिकार पुरुषों की कहानी बयां करने वाला है। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ हो रही है। हालांकि साल 2017 में अमेरिका में पुरुषों के लिए उसी तर्ज पर #HimToo campaign चलाया जा चुका है।

#MenToo campaign दरअसल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एनजीओ गाइड समाज कल्याण संसथान चलाती है। संस्था Center for Mens Right Protection कार्यक्रम के तहत पुरुषों के अधिकारों की लडाई लडती है। संस्था की Founder डॉ इंदु सुभाष एक महिला हैं, Womens Studies से Ph.D हैं, लेकिन लडाई पुरुषों के अधिकारों के लिए लडती हैं। उनका मानना है कि #MeeToo एक वायरस की तरह है। Cheif Justice of India पर लगे आरोप का हवाला देते हुए कहती हैं कि, आरोप लगने के बाद पुरुषों का मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है। आरोप अक्सर झूठे होते हैं, जो पुरुषों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालते है। यौन शोषण होने के 50 साल बाद घटना याद करने वाली महिलाओं की मंशा पर डॉ इंदु सुभाष सवाल भी उठाती हैं। उनका मानना है कि यौन शोषण जैसे मामलों में भी Gender Equality होनी चाहिए। पुरुषों पर आरोप लगते ही उन्हें दोषी मान लिया जाना, गलत है। मर्द को भी दर्द होता है इसलिए डॉ इंदु सुभाष पुरुषों के दर्द को आवाज दिए जाने की वकालत करती हैं।

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आपको बता दें कि साल 2006 में अमेरिका की सोशल ऐक्टिविस्ट और कम्युनिटी ऑर्गनाइज़र तराना बर्क ने सबसे पहले #MeToo का इस्तेमाल किया था। ‘माइस्पेस’ नाम के सोशल नेटवर्क पर उन्होंने रंगभेद की शिकार महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की कहानी बयां करते हुए लिखा था। बर्क के मुताबिक यह शब्द उनके दिमाग में तब आया था, जब एक 13 साल की बच्ची ने उन्हें खुद के साथ हुए यौन उत्पीड़न की कहानी बयां की लेकिन तब बर्क उस बच्ची को कोई जवाब नहीं दे पाईं थीं। जबकि तराना बर्क खुद एक सेक्शुअल असॉल्ट सर्वाइवर हैं। फिर क्या था, तराना के इन दो शब्दों ने एक आंदोलन का रूप ले लिया, जिसमें यौन शोषण पीड़ितों को यह अहसास दिलाने की कोशिश की गई कि अब वे अकेली नहीं हैं।

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अक्टूबर 2017 में जब अमेरिका में #MeToo आंदोलन चला, तो इसका कुछ असर भारत में भी देखने को मिला। कई महिलाओं ने वर्क प्लेस पर उनके यौन उत्पीड़न की बातें कहीं। लेकिन, भारत में सही मायनों में #MeToo आंदोलन की शुरुआत 25 सितंबर 2018 को हुई, जब बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने एक्टर नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। यही नहीं केंद्र की मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे एम जे अकबर पर भी पत्रकारिता जगत से जुडी कई महिलाओं ने इसी तरह का आरोप लगाया। बाद में उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

तनुश्री के बाद तो भारत की फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री की कई महिलाएं आगे आईं और उन्होंने एक से एक दिग्गज कलाकारों का नाम लेते हुए बताया कि काम देने के बहाने उनका यौन उत्पीड़न किया था। इस क्रम में एक्टर आलोक नाथ, पीयूष मिश्रा, रजत कपूर, रोहित रॉय, डायरेक्टर विकास बहल, सुभाष घई, साजिद खान, सुभाष कपूर, लव रंजन, विवेक अग्निहोत्री, प्रड्यूसर गौरांग दोषी, नाटककार किरण नागरकर, कमीडियन उत्सव चक्रवर्ती, गुरसिमरन खंबा, अदिति मित्तल, क्रिकेटर लसिथ मलिंगा, अर्जुन रणतुंगा, सिंगर कैलाश खेर, रघु दीक्षित, अभिजीत भट्टाचार्य, वैरामुत्तू रामासामी, राइटर वरुण ग्रोवर, चेतन भगत, मॉडल जुल्फी सईद, पत्रकार एमजे अकबर, विनोद दुआ, केआर श्रीनिवास, गौतम अधिकारी, मनोज रामचंद्रन, मयंक जैन, सिद्धार्थ भाटिया, मेघनाद बोस, उदय सिंह राणा, सिद्धांत मिश्रा और सताद्रु ओझा का नाम आया, जिनके खिलाफ महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।http://www.satyodaya.com

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लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण से पहले ओडिशा में माओवादियों ने किया पंचायत भवन पर बम धमाका

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ओडिशा। लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान से पहले ओडिशा राज्य के मल्कानगिरी इलाके में माओवादियों ने एक बड़े धमाके को अंजाम दिया है। जानकारी के मुताबिक उपद्रवियों ने तेमुरपल्ली स्थित पंचायत कार्यलय को अपना निशाना बनाकर वहां बम धमाका किया है ।

मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीती रात माओवादियों ने पंचायत भवन पर बम धमाका किया था, जिसमें पूरी इमारत ध्वस्त हो गई है । वहीं इस बम धमाके में किसी भी तरह की जान-माल की कोई हानि नहीं हुई है । इसके साथ ही घटनास्थल से एक माओवादी का पोस्टर भी बरामद हुआ है, जिससे इस बात का पता चलता है कि इस घटना को  पुलिस के एंटी-ट्राइबल गतिविधियों जैसे-फेक एनकाउंटर और झूठी गिरफ्तारी के विरोध में अंजाम दिया गया है।

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वहीं बम धमाका होने के बाद घटनास्थल की जो तस्वीरें सामने आ रही है, उससे यह साफ़ तौर पर पता चल रहा है कि धमाके के बाद पंचायत भवन की इमारत पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नक्सलियों ने पंचायत भवन पर कई बम फेंके और इसके साथ ही  इमारत के अंदर तोड़फोड़ करते हुए जरूरी दस्तावेजों में भी आग लगा दी। इतना ही नहीं बल्कि सुरक्षाबलों को खबर लगने से पहले ही माओवादी मौके से भाग भी निकलें । जानकारी के अनुसार इस बम धमाके को लगभग 30 से ज्यादा नक्सलियों ने अंजाम दिया है । बता दें कि नक्सली इस जिले में पहले चरण से ही मतदान को प्रभावित करते नजर आ रहे हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने इस बार में जानकारी देते हुए बताया था कि ‘नक्सली हमले की संभावना को देखते हुए चित्रकोंडा के 6 बूथों पर वोटिंग प्रक्रिया नहीं हुई थी।

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राबड़ी देवी की सुरक्षा में तैनात जवान ने खुद को मारी गोली

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फाइल फोटो

लखनऊ । बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी के सुरक्षा में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान गिरिअप्पा नामक जवान ने खुद को गोली मारी गिरिअप्पा ने अपने ही हथियार से ही पटना स्थित राबड़ी देवी के आवास पर खुद को गोली मार ली । घटना शुक्रवार रात दस बजे की है । आत्महत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है । शुरुआती जांच में पुलिस मान रही है कि पारिवारिक विवाद में जवान ने खुदकुशी की है । सचिवालय डीएसपी ने घटना की पुष्टि की है ।


मिली जानकारी के मुताबिक घटना गुरुवार देर रात 2 बजे की है । गिरियप्पा कर्नाटक के बेलगाव का रहने वाला था । पिछले 9 महीने से गिरियप्पा पटना स्थित राबड़ी आवास पर तैनात था । राबड़ी देवी आवास पर कुल 11 सीआरपीएफ तैनात थे । जिसमें 8 कांस्टेबल 2 हवलदार 1 टीम लीडर शामिल है । इनमें गिरियप्पा भी शामिल था ।

यह भी पढ़ें : मायावती पर आठवले का पलटवार-कहा, पीएम मोदी की पत्नी की चिंता छोड. पहले खुद कर लें शादी


बताया जा रहा है कि गिरियप्पा ने अपने X95 हथियार से ही गोली मारकर आत्महत्या कर ली । घटना के बाद सुरक्षाकर्मीयों ने घटना को दिन भर छिपाकर रखा । वहीं पटना पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया परिवारिक विवाद का मामला लग रहा है । बताया जा रहा है कि गिरियप्पा का फोन पर अपनी पत्नी से बहस हुआ था । पटना पुलिस के मुताबिक घटना शुक्रवार की है । मृतक जवान के शव को कर्नाटक भेज दिया गया है ।http://www.satyodaya.com

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May 18, 2019, 11:26 pm
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