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मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की सेहत खराब होने से बीजेपी हुई निराश, वहीं कांग्रेस गोवा में सरकार बनाने का कर रही दावा  

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मनोहर पार्रिकर

फाइल फोटो

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव सिर पर है ऐसे में गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर सेहत खराब होने से बीजेपी काफी निराश नजर आ रही है। ऐसे में कांग्रेस ने शनिवार को राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मिलकर अपनी सरकार बनाने की बात कही है। इतना ही नहीं इसी दौरान कांग्रेस ने बीजेपी को हटाने की भी बात कही है।

गोवा बीजेपी विधायक व डिप्टी स्पीकर माइकल लोबो ने शनिवार को कहा कि वे मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के ठीक होने की प्रार्थना कर रहे हैं लेकिन उनके बचने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा, ‘गोवा में नेतृत्व नहीं बदलेगा. जब तक पर्रिकर हैं वही गोवा के मुख्यमंत्री रहेंगे।

कांग्रेस ने कहा मनोहर पार्रिकर की तबीयत खराब होने से बीजेपी की संख्या और भी घट सकती है। ऐसे में भाजपा विधायक फ्रांसिस डिसूजे के निधन के बाद से गोवा में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुईं हैं।  कांग्रेस ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है- बीजेपी विधायक के दुखद निधन के बाद पार्टी विनम्रतापूर्वक अनुरोध करती है कि मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली गोवा सरकार जनता के विश्वास को खो चुकी है। कांग्रेस ने कहा विधानसभा में संख्या बल भी खत्म हो चुका है। इसलिए इस बार विधान सभा चुनाव में गोवा से सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।  नेता प्रतिपक्ष चंद्रकांत केवलेकर की ओर से यह पत्र राज्यपाल को लिखा गया है।

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वहीं दूसरी तरफ  भाजपा की राज्य इकाई ने शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से मुलाकात के बाद उनके स्वास्थ्य पर चर्चा की और कहा मनोहर पर्रिकर इतना बीमार होने के बाद भी हमारे नेता बने रहेंगे। गोवा के ऊर्जा मंत्री निलेश कैबरल ने कहा कि मुख्यमंत्री ठीक हैं, इसलिए नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा करने का कोई कारण नहीं है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने शनिवार को मनोहर पर्रिकर से उनके घर पर मिलने के बाद कहा कि मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य खराब है, मगर स्थिर है।  हालांकि वह लाइफ सपोर्ट पर नहीं है। मुझे नहीं पता कि हम उनके लिए कौन से चिकित्सा शब्द का इस्तेमाल करें।

ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि उनकी हालत अब ठीक है। बता दें कि 40 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 14 विधायक हैं। बीजेपी के 13 विधायक हैं। यह गोवा फॉरवर्ड पार्टी के तीन विधायकों और एमजीपी, एक निर्दलीय तथा एनसीपी के एक विधायक से समर्थित बीजेपी की सरकार है।  जबकि विधानसभा में तीन सीटें खाली पड़ीं हैं।http://www.satyodaya.com

 

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इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पास कराने के लिए अनुचित रास्ता अपनाने का आरोप

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संसद में पारित कराने से पहले इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 पर हो गहन चर्चा: शैलेन्द्र दुबे

लखनऊ। ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 को लेकर सरकार पर जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगाया है। इसके साथ फेडरेशन ने केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा 3 जुलाई को सभी राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ बुलाई गई वीडियो कान्फ्रेसिंग बैठक का भी विरोध किया है। शुक्रवार को केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री के साथ देश भर के ऊर्जा मंत्रियों की मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 प्रमुख मुद्दा होगा। इस वर्चुअल मीटिंग में वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और नई वितरण योजना पर भी निर्णय लिया जाएगा।

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ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा, बैठक के एजेंडा में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर विचार विमर्श के लिए मात्र 35 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। जिससे पता चलता है कि केन्द्र सरकार इस बिल पर राज्यों की राय लेने की महज औपचारिकता निभा रही है। सरकार इस बिल को जल्दबाजी में आगामी मानसून सत्र में पारित कराना चाहती है।

हर राज्य को अपना पक्ष रखने का मिले मौका

श्री दुबे ने कहा, देश के 11 राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय विद्युत मंत्री को पत्र भेजकर कड़ा ऐतराज जताया है। इसके बावजूद सरकार इस बिल पर गहन विचार-विमर्श से बच रही है। शुक्रवार को होने वाली मीटिंग में हर राज्य को अपना पक्ष रखने के लिए कम से कम 30 मिनट का समय मिलना चाहिए। लेकिन महज 35 मिनट में सभी 30 राज्यों की बात सुन ली जाएगी।

बिल का विरोध करने के लिए राज्यों को भेजा मेल पत्र

ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा, बहुमत होने के चलते सरकार यह बिल संसद में पारित कराने की तैयारी कर चुकी है। लेकिन यह अनुचित और अलोकतांत्रिक है। फेडरेशन ने देश के सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों और ऊर्जा मंत्रियों को पत्र मेल कर अपील की है कि 3 जुलाई को होने वाली मीटिंग में वह इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर जल्दबाजी में लिए गए निर्णय का विरोध करे। फेडरेशन ने राज्यों से अपील की है कि वह मांग करें कि इस बिल पर गहन चर्चा के लिए इसे संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। ताकि सभी स्टेकहोल्डरों खासकर किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले।

इन मुद्दों पर बिल का हो रहा विरोध

बता दें कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 में मुनाफे वाले क्षेत्र के विद्युत् वितरण को फ्रेंचाइजी को देने, किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को बिजली टैरिफ में मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने जैसे कई प्रमुख मुद्दे शामिल किए गए हैं। देश के 11 राज्यों के मुख्यमंत्री, हजारों बिजली कर्मचारी और करोड़ों उपभोक्ता इन्हीं मुद्दों का विरोध कर रहे हैं। ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों का पक्ष सुने बिना जल्दबाजी में बिल को लोकसभा में रखा गया तो देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसका राष्ट्रव्यापी विरोध करेंगे।http://www.satyodaya.com

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का लद्दाख दौरा टला, सैन्य तैयारियों का लेने जाना था जायजा

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नई दिल्ली। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ का लद्दाख दौरा स्थगित हो गया है। वह शुक्रवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के साथ लद्दाख जाने वाले थे। रक्षा मंत्री को लद्दाख में चीनी सेना के साथ सीमा पर गतिरोध के मद्देनजर भारत की सैन्य तैयारियों का जायजा लेना था। लेकिन अब उनके कार्यक्रम को रीशेड्यूल किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे की नई तारीख का जल्द ऐलान किया जाएगा।

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जानकारी के मुताबिक चीन के खिलाफ सरहद पर मोर्चा मजबूत करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत-चीन तनाव के ग्राउंड जीरो तक जाने वाले थे। राजनाथ सिंह का कल लेह पहुंचने का कार्यक्रम था। वह पूर्वी लद्दाख में चीन से बने तनाव की स्थिति पर सुरक्षा हालातों की समीक्षा करते। सूत्रों के मुताबिक दोनों देश में सहमति बनी है कि 72 घंटों तक दोनों पक्ष एक दूसरे पर निगरानी रखेंगे कि जिन बातों पर एक राय बन गई। उसे जमीन पर उतारा जा रहा या नहीं। भारत और चीन एलओसी पर स्थिति को शांतिपूर्ण बनाने के लिए प्रभावी उपाय करेंगे।http://www.satyodaya.com

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बाबरी विध्वंस केस: उमा भारती ने सीबीआई की विशेष अदालत में दर्ज कराया बयान

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लखनऊ। अयोध्या की बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में आरोपी भाजपा की वरिष्ठ नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती गुरुवार को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश हुईं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने अदालत पहुंच कर अपना बयान दर्ज कराया। इस केस में उमा भारती का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में बयान दर्ज कराने वाली उमा भारती 19वीं अभियुक्त हैं। इस मामले में कुल 32 अभियुक्तों के बयान दर्ज होने हैं। इससे पहले 17 जून को भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने अपने बयान दर्ज कराए थे। उमा भारती के बाद पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के भी बयान दर्ज होने हैं।

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अयोध्या के चर्चित विवादित ढांचा विध्वंस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, साध्वी ऋतम्भरा, साक्षी महाराज, राम विलास वेदांती और बृज भूषण शरण सिंह समेत 32 लोगों के बयान दर्ज होने हैं। इस मामले में कुल 49 लोग आरोपी बनाए गए थे जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है।http://www.satyodaya.com

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