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मार्केट से कम रेट में आरबीआई से खरीदें सोना, जल्द जाएं बैंक जानें स्कीम…

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सोना

फाइल फोटो

नई दिल्ली। नई मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने 5 जुलाई को पहला बजट पेश किया था। इस बजट पेशी के दौरान सीतारमन ने सोने पर आयत शुल्क 10 प्रतिशत बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया। ऐसा करने के बाद सोने की कीमतों में इजाफा हुआ है। लेकिन इस बीच अब मोदी सरकार आपको सस्ता सोना खरीदने का मौका दे रही है।

बता दें  मोदी सरकार की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड  स्‍कीम के तहत आप सस्‍ता सोना खरीद सकते हैं। डिजिटल मोड की यह स्‍कीम साल 2015 में शुरू की गई थी। इस स्‍कीम के तहत समय-समय पर लोगों को सस्‍ता सोना खरीदने का मौका दिया जाता है। वहीं इस दौरान आरबीआई की तरफ से सोने की कीमत भी तय की जाती है।

8 जुलाई से शुरू हुई सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्‍कीम की नई सीरीज 12 जुलाई तक चलेगी। बता दें कि 10 जुलाई के हिसाब से सोना का बाजार कीमत 3,487 रुपये प्रति ग्राम है। वहीं स्‍कीम के तहत आप सोना 3,443 रुपये प्रति दस ग्राम खरीद सकते हैं।

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वहीं अगर ग्राहक डिजिटल मोड में पेमेंट करता है तो उसे 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट मिलेगी। इस तरह सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में ऑनलाइन निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए एक ग्राम सोने की कीमत 3,393 रुपये रह जाएगी। ऐसे में आप गोल्ड को मार्केट वैल्यू से 94 रुपये कम कीमत पर खरीद सकते हैं।

जानिए शर्तें:

हालांकि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्‍कीम के तहत ऑनलाइन सोना खरीदने की कुछ शर्तें भी हैं। पहली शर्त है कि कोई भी व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 500 ग्राम सोने का बॉन्ड खरीद सकता है। वहीं इस बॉन्ड में न्यूनतम निवेश एक ग्राम है।

वहीं अगर इस स्कीम की बात करें तो आप सोना खरीदकर टैक्‍स बचा सकते हैं। इसके अलावा स्‍कीम के जरिए बैंक से लोन भी लिया जा सकता है।

इस स्कीम का क्‍या है मकसद:

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्‍कीम का मकसद सोने की फिजिकल डिमांड को कम करना है। लेकिन आप स्कीम के तहत गोल्ड खरीदकर घर में नहीं रख सकते हैं। बल्कि बॉन्‍ड में निवेश के तौर पर इस्‍तेमाल करना होता है। http://www.satyodaya.com

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इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पास कराने के लिए अनुचित रास्ता अपनाने का आरोप

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संसद में पारित कराने से पहले इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 पर हो गहन चर्चा: शैलेन्द्र दुबे

लखनऊ। ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2020 को लेकर सरकार पर जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगाया है। इसके साथ फेडरेशन ने केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा 3 जुलाई को सभी राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ बुलाई गई वीडियो कान्फ्रेसिंग बैठक का भी विरोध किया है। शुक्रवार को केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री के साथ देश भर के ऊर्जा मंत्रियों की मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 प्रमुख मुद्दा होगा। इस वर्चुअल मीटिंग में वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और नई वितरण योजना पर भी निर्णय लिया जाएगा।

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ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा, बैठक के एजेंडा में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर विचार विमर्श के लिए मात्र 35 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। जिससे पता चलता है कि केन्द्र सरकार इस बिल पर राज्यों की राय लेने की महज औपचारिकता निभा रही है। सरकार इस बिल को जल्दबाजी में आगामी मानसून सत्र में पारित कराना चाहती है।

हर राज्य को अपना पक्ष रखने का मिले मौका

श्री दुबे ने कहा, देश के 11 राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय विद्युत मंत्री को पत्र भेजकर कड़ा ऐतराज जताया है। इसके बावजूद सरकार इस बिल पर गहन विचार-विमर्श से बच रही है। शुक्रवार को होने वाली मीटिंग में हर राज्य को अपना पक्ष रखने के लिए कम से कम 30 मिनट का समय मिलना चाहिए। लेकिन महज 35 मिनट में सभी 30 राज्यों की बात सुन ली जाएगी।

बिल का विरोध करने के लिए राज्यों को भेजा मेल पत्र

ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा, बहुमत होने के चलते सरकार यह बिल संसद में पारित कराने की तैयारी कर चुकी है। लेकिन यह अनुचित और अलोकतांत्रिक है। फेडरेशन ने देश के सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों और ऊर्जा मंत्रियों को पत्र मेल कर अपील की है कि 3 जुलाई को होने वाली मीटिंग में वह इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर जल्दबाजी में लिए गए निर्णय का विरोध करे। फेडरेशन ने राज्यों से अपील की है कि वह मांग करें कि इस बिल पर गहन चर्चा के लिए इसे संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। ताकि सभी स्टेकहोल्डरों खासकर किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले।

इन मुद्दों पर बिल का हो रहा विरोध

बता दें कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 में मुनाफे वाले क्षेत्र के विद्युत् वितरण को फ्रेंचाइजी को देने, किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को बिजली टैरिफ में मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने जैसे कई प्रमुख मुद्दे शामिल किए गए हैं। देश के 11 राज्यों के मुख्यमंत्री, हजारों बिजली कर्मचारी और करोड़ों उपभोक्ता इन्हीं मुद्दों का विरोध कर रहे हैं। ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों का पक्ष सुने बिना जल्दबाजी में बिल को लोकसभा में रखा गया तो देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसका राष्ट्रव्यापी विरोध करेंगे।http://www.satyodaya.com

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का लद्दाख दौरा टला, सैन्य तैयारियों का लेने जाना था जायजा

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नई दिल्ली। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ का लद्दाख दौरा स्थगित हो गया है। वह शुक्रवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के साथ लद्दाख जाने वाले थे। रक्षा मंत्री को लद्दाख में चीनी सेना के साथ सीमा पर गतिरोध के मद्देनजर भारत की सैन्य तैयारियों का जायजा लेना था। लेकिन अब उनके कार्यक्रम को रीशेड्यूल किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे की नई तारीख का जल्द ऐलान किया जाएगा।

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जानकारी के मुताबिक चीन के खिलाफ सरहद पर मोर्चा मजबूत करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत-चीन तनाव के ग्राउंड जीरो तक जाने वाले थे। राजनाथ सिंह का कल लेह पहुंचने का कार्यक्रम था। वह पूर्वी लद्दाख में चीन से बने तनाव की स्थिति पर सुरक्षा हालातों की समीक्षा करते। सूत्रों के मुताबिक दोनों देश में सहमति बनी है कि 72 घंटों तक दोनों पक्ष एक दूसरे पर निगरानी रखेंगे कि जिन बातों पर एक राय बन गई। उसे जमीन पर उतारा जा रहा या नहीं। भारत और चीन एलओसी पर स्थिति को शांतिपूर्ण बनाने के लिए प्रभावी उपाय करेंगे।http://www.satyodaya.com

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बाबरी विध्वंस केस: उमा भारती ने सीबीआई की विशेष अदालत में दर्ज कराया बयान

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लखनऊ। अयोध्या की बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में आरोपी भाजपा की वरिष्ठ नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती गुरुवार को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश हुईं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने अदालत पहुंच कर अपना बयान दर्ज कराया। इस केस में उमा भारती का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में बयान दर्ज कराने वाली उमा भारती 19वीं अभियुक्त हैं। इस मामले में कुल 32 अभियुक्तों के बयान दर्ज होने हैं। इससे पहले 17 जून को भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने अपने बयान दर्ज कराए थे। उमा भारती के बाद पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के भी बयान दर्ज होने हैं।

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अयोध्या के चर्चित विवादित ढांचा विध्वंस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, साध्वी ऋतम्भरा, साक्षी महाराज, राम विलास वेदांती और बृज भूषण शरण सिंह समेत 32 लोगों के बयान दर्ज होने हैं। इस मामले में कुल 49 लोग आरोपी बनाए गए थे जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है।http://www.satyodaya.com

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