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बूँद बूँद को प्यासी धरती…

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लखनऊ।  गर्मी शुरू होते ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैले बुंदेलखंड पानी की कमी के चलते लोगों का बुरा हाल है। पिछले वर्ष महाराष्ट्र के लातूर की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। बुंदेलखंड में मध्यप्रदेश का टीकमगढ़ और उत्तर प्रदेश के 6 जिले शामिल है। यहाँ की महिलाएं पानी के लिए एक-एक किलीमीटर दूर जाकर घंटो संघर्ष करती है। इस क्षेत्र में पानी के लिए कई बार लोगों में आपसी संघर्ष की खबरें भी सामने आ चुकी है। पत्थरों और बीहड़ में बसे इस क्षेत्र में गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और भी ज्यादा विकराल रूप ले लेती है।

बबीना (झांसी) ऊंचाई पर स्थित है। यहां 150 फीट तक खोदने पर भी पानी नहीं मिल रहा है। यहां की जल समस्या के समाधान के लिए एक टैंक की योजना प्रस्तावित है, पर काम आगे नहीं बढ़ा है। बबीना सटे सिमरिया गांव में 400 परिवारों के लिए 25 हैंडपंप हैं, जिनमें से मात्र 6 चल रहे हैं। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ ज़िले के मस्तापुर गांव में 350 परिवार मात्र एक हैंडपंप से अपनी प्यास बुझा रहा है। यहां के गंभीर जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने 300 फीट तक खुदाई करवाई पर मगर पानी मिला न के बराबर मिला। इनकी समस्या के लिए सरकार बहुत महंगी और बड़ी परियोजनाओं पर संसाधन केंद्रित कर रही है जिनकी उपयोगिता पर कई सवाल उठ चुके हैं।

कई क्षेत्रों में लोग तालाबों और पोखरों का पानी पीने को विवश है जिसकी वहज से दूषित पानी का उपयोग भी करना पड़ता है जिससे कभी त्वचा रोग तो कभी उल्टी-दस्त की बीमारी होती है। पानी के लिए संघर्ष के लिए आधा दिन निकल जाता है तब कही जाकर पानी मिलता है। इसके बाद बचे आधे दिन में काम की तलाश जारी होती है। हालाँकि कई गैर सरकारी संस्थाए यहाँ काम कर रही है जो यहाँ के निवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करने की कोशिश में जुटी है। यहाँ के स्थानीय निवासियों ने भी समूह बनाये है जो समस्याओं को कम करने का प्रयास कर रहे है।http://www.satyodaya.com

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पीएम मोदी ने कहा, जम्मू कश्मीर के विकास की बाधा अब खत्म

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नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म करने के बाद गुरुवार रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित किया। पीएम मोदी ने अपने पूरे संबोधन में सिर्फ जम्मू कश्मीर पर बात की। इस दौरान उन्होंने राज्य के विशेष दर्जे को खत्म करने के निर्णय और इससे से होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से अपने विचार रखे। मोदी ने कहा कि अनुच्छेद-370 हटने के साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर, सरदार पटेल, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और करोड़ों देशभक्तों का सपना पूरा हो गया। अब पूरे देश में हर नागरिक के अधिकार और दायित्व समान हैं। पीएम मोदी ने सरकार ने नहीं बल्कि पूरे देश ने एक परिवार के तौर पर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। एक ऐसी व्यवस्था को हटाने का, जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहन अनेक अधिकारों से वंचित थे। उनके विकास में जो बाधा थी, वह हमारे प्रयासों से दूर हो गई है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में एक नए युग की शुरुआत हुई है। अब देश के नागरिकों के हक भी समान हैं और दायित्व भी समान हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि कभी-कभी समाज में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें बदल पाना असंभव लगता है। अनुच्छेद 370 के साथ भी ऐसा ही हुआ था। इसके कारण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहनों और हमारे बच्चों की जो हानि हो रही थी, उसकी चर्चा ही नहीं होती थी। पीएम मोदी ने कहा कि अनुच्छेद-370 के कारण 42000 लोगों की जान चली गई। इसी अनुच्छेद के कारण सूबे में परिवारवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। सत्ता यहां के कुछ परिवारों तक ही सिमट कर रह गयी थी। जो अपने निजी स्वार्थों के लिए यहां की भोली-भाली जनता का इस्तेमाल कर रहे थे।

इसी के चलते जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विकास उस गति से नहीं हो पाया जिसका वह हकदार था। लेकिन अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों का वर्तमान तो सुधरेगा ही, उनका भविष्य भी सुधरेगा। धारा 370 के चलते जम्मू कश्मीर का भारी नुकसान हो रहा था, देश के अन्य राज्यों में बच्चों को शिक्षा का अधिकार है लेकिन जम्मू कश्मीर के बच्चों को नहीं, देश के अन्य राज्यों में बेटियों को जो सारे हक मिलते हैं, वे हक जम्मू कश्मीर की बेटियों को नहीं मिलते थे। देश के अन्य राज्यों में सफाई कर्मचारियों के लिए सफाई कर्मचारी एक्ट लागू है मगर जम्मू-कश्मीर के सफाई कर्मचारी इससे वंचित थे। #ModiNationalAddress
देश के अन्य राज्यों में दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए सख्त कानून लागू है मगर जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं था। देश के अन्य राज्यों में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए मॉइनॉरिटी लॉ लागू है मगर जम्मू-कश्मीर में यह नहीं है। वहां न्यूनतम दिहाड़ी का कानून भी कागजों में ही लटका मिलता था। ऐसे ही तमाम अधिकारों और सुविधाओं से यहां के लोग वंचित थे।
अब नई व्यवस्था में केंद्र सरकार की प्राथमिकता रहेगी कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के कर्मचारियों को दूसरे केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों और वहां की पुलिस के बराबर सुविधाएं मिलें। अभी केंद्र शासित प्रदेशों में मिलने वाली तमाम वित्तीय सुविधाएं जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों और पुलिस परिवारों को नहीं मिलती थीं। लेकिन अब ऐसी सुविधाओं का तत्काल रिव्यू करवाकर जल्द ही मुहैवा करवाया जाएगा। #KashmirWithModi
पीएम मोदी ने कहा कि बहुत जल्द जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी केंद्रीय और राज्य के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे स्थानीय नौजवानों को रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलेंगे। साथ ही केंद्र सरकार की पब्लिक सेक्टर यूनिट और प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को भी रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में राजस्व घाटा भी बहुत ज्यादा है. केंद्र सरकार ये भी सुनिश्चित करेगी कि इसे दूर किया जाए।
पीएम मोदी ने कहा कि हमने जम्मू-कश्मीर प्रशासन में नई कार्यसंस्कृति और पारदर्शिता लाने का प्रयास किया है। इसी का नतीजा है कि आईआईटी, आईआईएम, एआईआईएमएस, इरिगेशन प्रोजेक्ट्स, पावर प्रोजेक्ट्स और एंटी करप्शन ब्यूरो के काम में तेजी आई है। सूबे में दशकों से हजारों की संख्या में ऐसे लोग रहते हैं, जिन्हें लोकसभा के चुनाव में तो वोट डालने का अधिकार था, लेकिन वो विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान नहीं कर सकते थे। ये लोग बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए थे। इनके बारे में भी विचार किया जाएगा।

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पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही कुछ कालखंड के लिए जम्मू-कश्मीर को सीधे केंद्र सरकार के शासन में रखने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है। इसकी वजह समझना महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अपने भाई-बहनों को एक और महत्वपूर्ण बात स्पष्ट करना चाहता हूं। आपका जनप्रतिनिधि आपके द्वारा आपके बीच से ही चुना जाएगा। जैसे पहले एमएएल थे, वैसे ही आगे होंगे, जैसे पहले कैबिनेट होती थी, वैसी ही आगे भी होगी। जैसे पहले आपके सीएम होते थे, आगे भी वैसे आपके मुख्यमंत्री होंगे।
कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि इस नई व्यवस्था के तहत हम सभी मिलकर आतंकवाद और अलगाववाद से जम्मू-कश्मीर को मुक्त करवाएंगे। जब धरती का स्वर्ग, हमारा जम्मू-कश्मीर फिर एक बार विकास की नई ऊंचाइयों को पार करेगा।http://www.satyodaya.com

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प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख व भूपेन हजारिका अब ‘भारत रत्न’

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नई दिल्ली। भारत सरकार ने गुरुवार को पूर्व राष्टपति प्रणब मुखर्जी, गायक भूपेन हजारिका और समाजसेवी नानाजी देशमुख को भारत रत्न से सम्मानित किया। भारत सरकार ने इस साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर तीनों हस्तियों को भारत रत्न देने का ऐलान किया था। राष्ट्रपति भवन में हुए सम्मान समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया। संगीतकार भूपेन हजारिका और समाजसेवी नानाजी देशमुख को मरणोपांत यह सम्मान दिया गया है। #BharatRatna
गौरतलब है कि भारत सरकार ने इस साल गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की पूर्व संध्या पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अलावा समाजसेवी नानाजी देशमुख और मशहूर संगीतकार और गायक भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का ऐलान किया था। चार साल बाद भारत रत्न दिया गया। इससे पहले 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और स्वतंत्रता सेनानी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को यह सम्मान दिया गया था। इससे पहले 45 हस्तियों को भारत रत्न सम्मान दिया जा चुका है। अब यह संख्या 48 हो गई है।

प्रणब मुखर्जी जुलाई 2012 से जुलाई 2017 तक देश के राष्ट्रपति रहे। इसके पहले उन्होंने वित्त, रक्षा और विदेश जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली थी। सार्वजनिक जीवन में प्रणब मुखर्जी एक निर्विवाद नेता के रूप में देश की सेवा की। साल 2004 से 2012 तक केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार में उन्हें प्रमुख संकटमोचक माना जाता था।
मुखर्जी 1982 में 47 वर्ष की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के वित्त मंत्री बने थे। ‘प्रणब दा’ के नाम से मशहूर मुखर्जी को पिछले वर्ष नागपुर में आरएसएस के एक कार्यक्रम में शामिल होने पर कुछ लोगों से आलोचना का सामना करना पड़ा था।

नानाजी देशमुख

संघ से जुड़े नानाजी देशमुख पूर्व में भारतीय जनसंघ से जुड़े थे। 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्होंने मन्त्री पद स्वीकार नहीं किया और जीवन पर्यन्त दीनदयाल शोध संस्थान के अन्तर्गत चलने वाले विविध प्रकल्पों के विस्तार के लिए कार्य करते रहे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया था। वाजपेयी के कार्यकाल में ही भारत सरकार ने उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण स्वालम्बन के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिये पद्म विभूषण भी प्रदान किया।

भूपेन हजारिका

भूपेन हजारिका पूर्वोत्तर राज्य असम से ताल्लुक रखते थे। अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा भूपेन हजारिका हिंदी, बंगला समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में गाना गाते रहे थे। उन्होंने फिल्म ’गांधी टू हिटलर’ में महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन ’वैष्णव जन’ गाया था। उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। हजारिका ने 1936 में अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। 1939 में उन्होंने इंद्रमलाटी फिल्म के लिए दो गाने गाए। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला गाना अग्निजुगोर फिरिंगोति लिखा था। हिंदी फिल्म रुदाली और दमन के उनके गीत बेहद लोकप्रिय रहे। 1977 में उन्हें पद्मश्री, 2001 में पद्मभूषण, 2012 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।

यह भी जानें

मुखर्जी यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले पांचवें राष्ट्रपति हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस राधाकृष्णन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. जाकिर हुसैन और वीवी गिरि को मिल यह सम्मान मिल चुका है। 20 साल बाद दो से ज्यादा हस्तियों को यह भारत रत्न दिया जा गया। इससे पहले 1999 में समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण, सितारवादक पंडित रविशंकर, अर्थशास्त्री डॉ. अमर्त्य सेन और स्वतंत्रता सेनानी रहे गोपीनाथ बोरदोलोई को इस सम्मान के लिए चुना गया था।http://www.satyodaya.com

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धारा 370 हटने का असर: हवाई यात्रा के लिए चार घण्टे पहले पहुंचना होगा एयरपोर्ट

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नई दिल्ली। अगर आप हवाई जहाज से सफर करने जा रहा हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पाकिस्तानी पीएम इमरान खान बौखलाए हुए है। इसीलिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने आतंकी हमलों की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम और पुख्ता कर दिए है। देश के सभी हवाई अड्डों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) ने अपने बयान में कहा है कि सभी एयरलाइंस और हवाई अड्डों के प्रबंधन को अब घरेलू उड़ानों के लिए यात्रियों को 3 घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना होगा। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ान लेने वालों को अब 4 घंटे पहले हवाई अड्डे पर पहुंचना होगा। बता दें कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने हवाई अड्डों को यह भी निर्देश दिया है कि एयरपोर्ट पर ड्रोन, मॉडल और माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट पर निगरानी रखें। सभी एयरपोर्ट क्विक रिएक्शन टीम को तैनात रखें।

यह भी पढ़ें-धारा 370 से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा को लेकर ये कदम उठाया गया है। नया नियम 10 अगस्त से 30 अगस्त तक लागू रहेगा। बता दें कि अभी तक सामान्य तौर पर घरेलू उड़ानों के लिए 2 घंटे और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से 3 घंटे पहले एयरपोर्ट जाना होता है। सभी गाड़ियों की होगी जांच- आदेश में कहा गया है कि एयरपोर्ट में आने वाली सभी गाड़ियों की जांच होगी। अगर कोई गाड़ी पार्किंग में भी खड़ी होती है तो उसकी भी जांच होगी। एयरपोर्ट टर्मिनल के बाहर हों या पिक-ड्रॉप सर्विस में लगी हों। इसी तरह सभी यात्रियों की एयरपोर्ट में घुसने से लेकर विमान में चढ़ने तक बेहद गहन जांच होगी।http://www.satyodaya.com

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