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गर्भवती महिला से बदमाशों ने किया गैंगरेप, पीड़िता के प्रेमी ने लगा ली फांसी

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जयपुर। देश आजाद हो चुका लेकिन महिलाएं अब तक जंजीरों में हैं। उनको जकड़ रखा है इस समाज में घूम रहे वहशी भेड़ियों के डर ने। इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना बांसवाड़ा जिले से सामने आई है। यहां 5 दरिंदों ने एक गर्भवती दलित महिला का सामूहिक बलात्कार किया और फिर उसे सड़क किनारे फेंक कर चले गए। इस घटना ने पीड़ता का सबकुछ छीन लिया। उसके प्रेमी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली और जानकारी के अनुसार उसका गर्भ में पल रहा दो माह का बच्चा भी नहीं बच पाया है।

पुलिस के अनुसार यह घटना 13 जुलाई की रात की है। 19 साल की पीड़िता दो महीने से गर्भवती थी और वह अपने प्रेमी के साथ बांसवाड़ा से अपने गांव जा रही थी। वो गांव पहुंच पाते कि इससे पहले ही करीब 10 बजे सुनील, विकास और जितेंद्र ने उनकी बाइक रोक ली। बाइक रोकने के बाद तीनों बदमाशों ने पीड़िता के प्रेमी के ऊपर चाकू और लोहे के रॉड से हमला कर दिया। इसके बाद बदमाशों ने उसको (प्रेमी) को वहां से भगा दिया। गांव लौटकर पीड़िता के प्रेमी ने पेड़ से लटकर आत्महत्या कर ली। वहीं, नशे में धुत तीनों शराबियों ने सुनसान जगह पर ले जाकर महिला से रेप किया। उन भेड़ियों ने अब भी महिला को छोड़ा नहीं बल्कि वो उसे सुनील के गांव ले गए, जहां पर उन्होंने नरेश और विजय नाम के दो और दोस्तों को बुलाया। उन दोनों ने भी पीड़िता का बलात्कार किया। उसके बाद बदमाशों ने सुबह पीड़िता को रास्ते किनारे फेंक दिया।

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पुलिस ने बताया कि पीड़िता ने इस बारे में किसी को भी नहीं बताया। लेकिन एक मोबाइल फोन ने इस हैवानियत से पर्दा उठा दिया। दरअसल, पुलिस पीड़ता के प्रेमी की मौत की जांच कर रही थी। अपराधी जितेंद्र ने प्रेमी का फोन अपनी पत्नी को दे दिया था। जब उसने फोन खोला तब जितेंद्र की लोकेशन पता चल गई। उसे गिरफ्तार किया गया तब इस पूरे मामले के बारे में पता चला।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने अब तक सभी अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनमें चार को कोर्ट के सामने पेश भी किया जा चुका है। फिलहाल पीड़िता का इलाज चल रहा है।http://www.satyodaya.com

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मध्यप्रदेश: देवी प्रतिमा विसर्जन से लौट रहे टेम्पो की ट्रैक्टर से भिडंत, 3 की मौत, 6 घायल

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मध्यप्रदेश: अनूपपुर जिले में राजेन्द्रग्राम थाना क्षेत्र के बम्हरी गांव के समीप बुधवार को देवी प्रतिमा के विसर्जन से लौट रहे टेम्पो की ट्रैक्टर से भिड़ंत हो गई। इस भिड़ंत में एक मासूम सहित तीन लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन लोग घायल हो गए। घटना से इलाके में दहशत फैल गई। राहगीरों ने आनन-फानन में घायलों को राजेन्द्रग्राम अस्पताल में भर्ती करवाया। घटना की सूचना पुलिस को भी मौके पर पहुंचाई गई।  

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सूत्रों के मुताबिक टेम्पों सवार सभी लोग दुर्गा विसर्जन कर कल रात अपने-अपने घर वापस लौट रहे थे, तभी बम्हनी गांव के समीप एक ट्रैक्टर से टेम्पो की जोरदार भिड़ंत हो गई। बताया जा रहा है कि इस में दुर्घटना में ट्रैक्टर को कुछ ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन ऑटो सवार 4 वर्षीय एक बालक लवकेश की घटनास्थल पर मौत हो गई, जबकि दो महिलाओं लवकेश की मां श्यामकली और सेमली बसी सिंह ने अस्पताल में इलाज के दौरान दमतोड़ दिया। http://www.satyodaya.com

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त्यौहारी मौसम को असम को दहलाने की साजिश नाकाम, एक उग्रवादी गिरफ्तार

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नई दिल्ली। भारतीय सुरक्षा बलों ने असम में एक बड़े आतंकी हमले को नाकाम करते हुए एक उग्रवादी को गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षा बलों को यह कामयाबी विशेष अभियान के दौरान असम के तिनसुकिया में मिली। जहां प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा आई) के का सदस्य त्यौहारी मौसम में तबाही मचाने की साजिश रच रहा था। इसे सुरक्षा बलों के लिए बड़ी कामयाबी बताया जा रहा है। सुरक्षा बलों ने उग्रवादी के ठिकाने से भारी मात्रा में विस्फोटक, हथियार, डेटोनेटर और रिमोट कंट्रोल बरामद किए। विस्फोटक के बारे में बताया जा रहा है कि यह बेहद खतरनाक और जानलेवा केमिकल टीएटी है। हथियारों के साथ पकड़े गए उग्रवादी ने पूछताछ में चैंकाने वाले खुलासे किए हैं।

पूछताछ के दौरान उग्रवादी ने माना कि फेस्टिवल सीजन के दौरान असम में बड़े आतंकी हमले की साजिश थी। इसमें सुरक्षा बलों और कुछ महत्वपूर्ण संस्थानों को निशाना बनाया जाना था। उसके कब्जे से 10 किलो विस्फोटक बरामद किया गया है। जानकारी के अनुसार आतंकी हमले की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सेना और तिनसुकिया पुलिस ने चिक्राजन में सघन चेकिंग अभियान शुरू किया। दौरान सैन्य बलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी और सेना और पुलिस की संयुक्त टीम ने स्वयंभू सार्जेंट सब्दो असोम उर्फ जोनकी बोरा को गिरफ्तार कर लिया।

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सेना के एक आला अधिकारी ने मीडिया को बताया कि उल्फा-आई की तरफ से प्रदेश में किसी बड़े हमले का इंटेलिजेंस इनपुट काफी दिनों से मिल रहा था। इनपुट में कहा गया था कि उल्फा आतंकी ऊपरी असम में सेना पर बड़ा हमला करने की फिराक में हैं ताकि फिर से वे अपना दबदबा जता सकें। हालांकि उल्फा उग्रवादी बोरा की गिरफ्तारी से आतंकियों के नापाक मंसूबे नाकाम हो गए और इसी के साथ सेना ने एक बड़े हमले को टाल दिया। उग्रवादी ने यह भी बताया कि हमले करने का काम उसे सौंपा गया था। बम ब्लास्ट के जरिए असम में जगह-जगह खून-खराबा करने की साजिश रची गई थी। सुरक्षाबल के जवानों ने उग्रवादी के पास से विस्फोटक डिवाइस और दूसरे मटीरियल जब्त किए गए हैं।http://www.satyodaya.com

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इतिहास : आज ही के दिन मलाला यूसुफजई को तालिबान ने मारी थी गोली

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नई दिल्ली। पाकिस्तान में कट्टरता किस तरह से हावी है उसका सबसे बड़ा गवाह है 9 अक्टूबर। यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा काला दिन है। पाकिस्तान में कट्टरपंथियों द्वारा महिलाओं, अल्पसंख्यकों और उनके हक के लिए लड़ने वालों की आवाज को दबाने के लिए आज का दिन यानी 9 अक्टूबर को याद किया जाता है। आज ही के दिन मलाला यूसुफजई को तालिबान ने गोली मारी थी।

कौन हैं मलाला यूसुफजई?
मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वाह प्रांत के स्वात जिले में हुआ। मलाला के पिता का नाम जियाउद्दीन यूसुफजई है। तालिबान ने 2007 से मई 2009 तक स्वात घाटी पर कब्जा कर रखा था। इसी बीच तालिबान के भय से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था। मलाल तब आठवीं की छात्रा थीं और उनका संघर्ष यहीं से शुरू होता है।

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2008 में तालिबान ने स्वात घाटी पर अपना नियंत्रण कर लिया। वहां उन्होंने डीवीडी, डांस और ब्यूटी पार्लर पर बैन लगा दिया। साल के अंत तक वहां करीब 400 स्कूल बंद हो गए। इसके बाद मलाल के पिता उसे पेशावर ले गए जहां उन्होंने नेशनल प्रेस के सामने वो मशहूर भाषण दिया जिसका शीर्षक था- हाउ डेयर द तालिबान टेक अवे माय बेसिक राइट टू एजुकेशन? तब वो केवल 11 साल की थीं।

साल 2009 में उसने अपने छद्म नाम ‘गुल मकई’ से बीबीसी के लिए एक डायरी लिखी। इसमें उसने स्वात में तालिबान के कुकृत्यों का वर्णन किया था। बीबीसी के लिए डायरी लिखते हुए मलाला पहली बार दुनिया की नजर में तब आईं जब दिसंबर 2009 में जियाउद्दीन ने अपनी बेटी की पहचान सार्वजनिक की।

मलाला पर तालिबानी हमला

2012 को तालिबानी आतंकी उस बस पर सवार हो गए, जिसमें मलाला अपने साथियों के साथ स्कूल जाती थीं। उनमें से एक ने बस में पूछा, ‘मलाला कौन है?’ सभी खामोश रहे लेकिन उनकी निगाह मलाला की ओर घूम गईं। इससे आतंकियों को पता चल गया कि मलाला कौन है। उन्होंने मलाला पर एक गोली चलाई जो उसके सिर में जा लगी।

मलाला पर यह हमला 9 अक्टूबर 2012 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात घाटी में किया था। गंभीर रूप से घायल मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया। यहां उन्हें क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया। देश-विदेश में मलाला के स्वस्थ होने की प्रार्थना की गई और आखिरकार मलाला वहां से स्वस्थ होकर लौटीं।

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