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चाचा नेहरू की पुण्यतिथि पर जानें कुछ खास बातें, जो नहीं जानते होंगे आप

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फाइल फोटो

लखनऊ । पंडित जवाहरलाल नेहरू की आज पुण्यतिथि है । नेहरु का जन्म 14 नवंबर 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था । जवाहरलाल नेहरू की 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी । लेकिन आज भी नेहरू देश के लोगों के दिलों में जिंदा हैं । जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरु और मां स्वरूप रानी थी । वह देश के पहले और सर्वाधिक समय तक सेवाएं देने वाले प्रधानमंत्री हैं । वह 27 मई 1964 को निधन होने तक प्रधानमंत्री के रूप में सेवारत रहे ।

जवाहरलाल नेहरू कश्मीरी पंडित समुदाय से थे, इसलिए उन्हें पंडित नेहरू बुलाया जाता था । नेहरू बच्चों से बहुत प्यार प्यार करते थे । तभी बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कहकर बुलाते थे । जवाहरलाल नेहरू ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से लॉ किया था । जवाहरलाल नेहरू 1912 में भारत लौटे और वकालत शुरू की । 1919 में नेहरू महात्मा गांधी के संपर्क में आए नेहरू गांधी जी से प्रभावित हुए और उन्होंने गांधी के उपदेशों के अनुसार खुद को ढाल लिया । नेहरू गांधी की तरह ही कुर्ता और टोपी पहनने लगे थे । देश की आजादी में नेहरू का खास योगदान था ।1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नेहरूजी 9 अगस्त 1942 को बंबई में गिरफ्तार हुए और अहमदनगर जेल में रहे । जहां से उन्हें 15 जून 1945 को रिहा किया गया । पंडित नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है । उन्होंने ही पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया था । साल 1947 में देश की आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने । नेहरू 1947 से 27 मई 1964 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे ।

पंडित जवाहरलाल नेहरु कि कुछ खास बातें

जवाहर लाल नेहरू की शादी 1916 में कमला नेहरू से हुई । इसके एक साल बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम इंदिरा प्रियदर्शनी था ।

जवाहर लाल नेहरू को अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत का अच्छा ज्ञान था । नेहरू 1905 में पढ़ाई के लिए ब्रिटेन चले गए थे । जवाहरलाल नेहरू ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से लॉ किया था ।

जवाहरलाल नेहरू को सिगरेट पीने का बहुत शौक था । वो हर जगह सिगरेट पीते भी नजर आते थे। एक वक्त की बात है जब नेहरू जी भोपाल पहुंचे तो वहां उनकी 555 ब्रांड की सिगरेट खत्म हो गई। वहां कहीं भी उनकी सिगरेट नहीं मिली । जिसके बाद विशेष विमान में इंदौर से सिगरेट लाई गई।

पंडित जवाहर लाल नेहरू लाल किले पर तिरंगा लहराने वाले पहले शख्स थे ।

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नेहरु का मतलब

जवाहरलाल चिंति‍त थे कि भारतीय महि‍लाएं ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट्स पर बड़े पैमाने पर वि‍देशी मुद्रा खर्च कर रही हैं । जिसको देखते हुए नेहरू ने जेआरडी टाटा ने ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने का निवेदन किया । जिसके बाद लैक्मे मार्केट में आया ।

जवाहरलाल नेहरू एक बार लंदन जाने वाले थे । उनका नाई हमेशा लेट हो जाया करता था । नेहरूजी के पूछने पर नाई ने कहा- ‘मेरे पास घड़ी नहीं है, जिसके कारण मैं हमेशा लेट हो जाया करते हूं । जिसके बाद वो लंदन से नई घड़ी लाए थे ।

टिप्पणियां

जवाहरलाल नेहरू क्यों लगाते थे लाल गुलाब? Valentine Week में कांग्रेस ने किया खुलासा ।
नेहरू अपने जीवन में 9 बार जेल गए । चाचा नेहरू को 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था ।

जवाहर लाल नेहरू एक अच्छे लेखक भी थे । उनकी प्रमुख किताबें डिस्कवरी ऑफ इंडिया और ग्लिम्प्स ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री हैं ।

जवाहरलाल नेहरू की 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ा जिसमें उनकी मृत्यु हो गई । http://www.satyodaya.com

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जानिए क्या है पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, कैसे मजबूत होगी कानून व्यवस्था!

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लखनऊ। लंबी कवायद के बाद योगी सरकार ने आखिरकार 5 दशक पुरानी मांग को पूरी करते हुए यूपी में पहली बार पुलिस कमिश्नरी लागू कर दी है। आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में कानून व्यवस्था हमेशा एक चुनौती रही है। लंबे समय से यूपी में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की मांग चल रही थी, लेकिन नौकरशाही के विरोध के चलते यह मांग परवान न चढ़ सकी। माना जाता है कि पुलिस कमिश्नरी में कानून व्यवस्था मजबूत होती है। आईपीएस एसोसिएशन की मांग का समर्थन करते हुए पूर्व राज्यपाल राम नाईक भी यूपी में पुलिस कमिश्नरी लागू करने की वकालत कर चुके हैं। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भी लिखा था।

लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नरी तो लागू कर दी गयी है लेकिन आम लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। जैसे- पुलिस कमिश्नरी सिस्टम क्या है? यह कैसे काम करता है? और इससे कानून व्यवस्था कैसे मजबूत होती है? तो आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब-

दरअसल पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के तहत वह तमाम अधिकार जो जिलाधिकारी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के पास होते हैं, वह सब पुलिस कमिश्नर के पास चले जाते हैं। सामान्य पुलिसिंग व्यवस्था में जिलाधिकारी के पास पुलिस पर नियंत्रण रखने का अधिकार होता है। यहां तक कि किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी के तबादले के लिए उस जिले के एसएसपी या एसपी को डीएम की मंजूरी लेनी होती है। दरअसल दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) के अंतर्गत जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के पास कई शक्तियां होती हैं।

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जिलाधिकारी की ही अध्यक्षता में मासिक क्राइम बैठक होती है। पुलिस से जुड़े कोर्ट संबंधी मामलों में का प्रभारी भी जिलाधिकारी होता है। कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में धारा 144 या फिर कर्फ्यू लगाने से पहले पुलिस को प्रशासनिक अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ती है। दंगाइयों पर लाठी चार्ज या फाॅयरिंग के लिए पुलिस को पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होती है। शांति भंग के आरोपी को जेल भेजना है या जमानत देनी है, इसका भी फैसला प्रशासनिक अधिकारी करते हैं। शस्त्र लाइसेंस देने और कैंसिल करने का अधिकार भी डीएम के पास होता है।

ऐसे ही बहुत सारे निर्णय लेने के लिए पुलिस अधिकारी स्वतंत्र नहीं होते। जिसके चलते पुलिस कोई भी एक्शन तत्काल नहीं ले पाती। तालमेल के अभाव में फैसले लेने में काफी समय गुजर जाता है। लेकिन पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में यह सभी अधिकारी पुलिस कमिश्नर के पास चलते जाते हैं। गुंडों, बदमाशों, माफियाओं और सफेदपोशों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को मजिस्ट्रेटों की अनुमति मिलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुलिस त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम होती है, जिसके परिणाम स्वरूप कानून व्यवस्था मजबूत होती है।

कैसा होता संगठन ढांचा!

इसमें उपमहानिदेशक (एडीजी) रैंक के किसी पुलिस अधिकारी को पुलिस कमिश्नर (सीपी) बनाया जाता है। पुलिस कमिश्नर के नीचे ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (ज्वाइंट सीपी) होता है, जो आईजी रैंक का अधिकारी होता है। ज्वाइंट सीपी के नीचे पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) रैंक के अधिकारी को एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (एडिशनल सीपी) बनाया है। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी होते हैं, जिन्हें डिप्टी कमिश्नर आॅफ पुलिस (डीसीपी) कहा जाता है। डीसीपी के पास एक शहर या क्षेत्र की कमान होती है। डीसीपी के नीचे DSP/ASP होते हैं जिन्हें असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) कहा जाता है। पुलिस कमिश्नरी में सभी अधिकार पुलिस के पास होते हैं इसलिए उसकी जवाबदेही भी बढ़ जाती है।

प्रयोग सफल रहा तो….

वर्तमान समय में देश के 15 राज्यों के 71 शहरों में पुलिस कमिश्नरी लागू है। जिनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलुरू, अहमदाबाद, राजकोट, बड़ौदा, हैदराबाद, त्रिवेंद्रम आदि शामिल हैं। फिलहाल लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम एक प्रयोग के तौर लागू किया गया है। यदि यह सफल रहता है तो राज्य के अन्य बड़े शहरों में भी पुलिस कमिश्नरी को हरी झण्डी दिखाई जाएगी। सरकार के इस कदम से आईपीएस अफसरों में खुशी की लहर है। डीजीपी ओपी सिंह सहित सेवानिवृत्त अन्य पुलिस अधिकारियों ने भी इसका स्वागत किया है।http://www.satyodaya.com

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राजधानी लखनऊ शहर होगा मेट्रोपॉलिटियन, पुलिस आयुक्त संभालेंगे कमान

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कैबिनेट बैठक में आज मिल सकती है कमिश्नरी को मंजूरी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की अहम बैठक हो रही है। इसमें लखनऊ और गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू करने सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी जा सकती है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैबिनेट की बैठक के बाद गोरखपुर जाएंगे। इस बैठक में पुलिस आयुक्त प्रणाली, कृषक दुर्घटना कल्याण योजना सहित कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी जा सकती है। बैठक लोकभवन में सुबह साढ़े नौ बजे से शुरू हो चुकी है।

बता दें कि, पुलिस आयुक्त प्रणाली का खाका तैयार हो चुका है जिसमें दो ज्वाइंट कमिश्नर की भी तैनाती होगी। अपराधों पर नियंत्रण व बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए प्रदेश के बड़े जिलों में पुलिस आयुक्त प्रणाली का पूरा खाका तैयार हो चुका है। बहुत जल्द इसे अमली जामा पहनाया जाएगा। डीजीपी ओम प्रकाश सिंह की ओर से शासन को जो प्रस्ताव सौंपा गया है, उसमें पुलिस कमिश्नर के नीचे दो ज्वाइंट कमिश्नर भी तैनात होंगे। इनमें से एक ज्वाइंट कमिश्नर पुलिस मुख्यालय का, जबकि दूसरा कानून-व्यवस्था का होगा। इन पदों पर आईजी और डीआईजी में से कोई भी तैनात हो सकता है। वहीं, कमिश्नर पुलिस के एडीजी स्तर का होगा।

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वहीं सूत्रों की मानें तो लखनऊ में कमिश्नर के अतिरिक्त ज्वाइंट कमिश्नर के रूप में दो आईजी स्तर के अफसरों की तैनाती की जा सकती है। वहीं, गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में ज्वाइंट कमिश्नर डीआईजी स्तर का होगा। सूत्रों का कहना है कि पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने के लिए जल्द ही प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा। इसके फौरन बाद अफसरों की तैनाती की जाएगी। वहीं सूत्रों का कहना है लखनऊ कमिश्नर एडीजी जोन एसएन साबत हो सकते हैं और नोएडा कमिश्नर एडीजी मेरठ आलोक कुमार/प्रशांत कुमार बनाये जा सकते हैं। फिलहाल इस बात की जानकारी बैठक के बाद ही थोड़ी देर में सीएम योगी आदित्यनाथ माडिया को प्रेसवार्ता कर देंगे।

वहीं सूत्रों के मुताबिक, राजधानी लखनऊ शहर में मेट्रोपॉलिटियन होगा जिसमें पुलिस आयुक्त इसकी कमान संभालेंगे। लखनऊ पुलिस को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। शहर के 40 थाने पुलिस कमिश्नरी में आएंगे, जबकि पांच ग्रामीण थानों में पुरानी व्यवस्था चालू रहेगी। बीकेटी, इटौंजा, मलिहाबाद, निगोंहा और माल थानों में पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। नई प्रणाली में 56 लोगों की नई टीम होगी। पुलिस आयुक्त पुलिस महानिरीक्षक या उच्च रैंक का इसमें अधिकारी होगा। दो संयुक्त पुलिस आयुक्त पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी होंगे। 10 पुलिस उपायुक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के होंगे। 13 अपर पुलिस आयुक्त अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के तैनात किए जाएंगे। 28 सहायक पुलिस आयुक्त यह सभी पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी होंगे।http://www.satyodaya.com

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राष्ट्रीय युवा महोत्सवः तस्वीरों में देखिए कैसा है लखनऊ में जुटा ‘लघु भारत’

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लखनऊ। भारत देश विविधताओं से भरा पड़ा है। विदेशी यहां आकर कहते हैं कि आखिर कैसे इतनी भिन्नताओं और असमानताओं के बावजूद करोड़ों लोग एक साथ रह लेते हैं! यहां की विविधता के बारे में एक कहावत भी काफी प्रचलित है-कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी-अर्थात यहां हर एक कोस (करीब 3 किमी.) पर पानी और 4 कोस पर वाणी बदल जाती है। भारत में हजारों बोलियां बोली जाती हैं, सैकड़ों भाषाएं हैं। यहां एक साथ न कितनी संस्कृतियां फल-फूल रही हैं। भौगोलिक विविधताओं के अतिरिक्त धर्म-जाति, खान-पान, रहन-सहन, बोली-भाषा, पहनावा आदि न जाने कितनी विभिन्नताएं हमारे देश में देखने को मिलती हैं। कभी-कभी इन विभिन्नताओं का आपस में टकराव भी होता है लेकिन जब हमारे देश की एकता, अखण्डता और सुरक्षा की बात आती है तो हम सभी एक हो जाते हैं। जब कोई उत्सव आता है तो हम सब केवल और केवल भारतीयता के रंग में रंग जाते हैं। यही हमारी और हमारे देश की विशेषता है।
ऐसे ही एक उत्सव का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को हुआ। 23वें राष्ट्रीय युवा उत्सव में भाग लेने के लिए देश के कोने से युवा लखनऊ पहुंचे हैं। सभी यहां अपने-अपने राज्य, संस्कृति और पहचान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लेकिन इन के बाद उनकी सबसे महत्वपूर्ण पहचान एक ही है, यह सभी ‘भारतीय युवा’ हैं।

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विभिन्न राज्यों से आए हुए यह युवा राजधानी में चलने वाले 5 दिवसीय राष्ट्रीय युवा महोत्सव में न केवल अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि यहां के लिए अपनी कुछ यादें दे कर जाएंगे और कुछ यादें लेकर जाएंगे। युवा महोत्सव का समापन 16 जनवरी को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल करेंगी।http://www.satyodaya.com

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