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गुर्जर आंदोलन चौथे दिन भी जारी, रेल और सड़क मार्ग किये जाम, कई ट्रेनें रद्द

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जयपुर । राजस्थान में गुर्जरों का आरक्षण के लिए आंदोलन सोमवार को चौथे दिन भी जारी है । गुर्जर नेता मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर पटरियों पर बैठे हैं जिसके चलते कई प्रमुख ट्रेन रद्द कर दी गयी हैं या उनके मार्ग में बदलाव किया गया है । राज्य में कई सड़क मार्ग भी बंद हैं ।

गुर्जर नेता विजय बैंसला ने सोमवार को एक बार फिर दोहराया कि सरकार को वार्ता के लिए मलारना डूंगर में रेल पटरी पर ही आना होगा और आंदोलनकारी वार्ता के लिए कहीं नहीं जाएंगे । कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला व पूरी टीम बैठकर फैसला करेंगे । उन्होंने कहा, ‘बातचीत क्या करनी है ? सरकार पांच प्रतिशत आरक्षण की हमारी मांग पूरी करे और हम घर चले जाएंगे ।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मांग नहीं माने जाने पर गुर्जर लंबे आंदोलन के लिए तैयार हैं । वहीं पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) एम एल लाठर ने बताया कि आंदोलन के दौरान कहीं से अप्रिय घटना का कोई समाचार नहीं है । रविवार को कुछ हुड़दंगियों ने धौलपुर में पुलिस के तीन वाहनों को आग के हवाले कर दिया था और हवा में गोलियां चलाईं थीं ।

लाठर ने बताया कि आंदोलनकारियों ने दौसा जिले में सिकंदरा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11 को अवरूद्ध कर दिया है । इसके साथ ही नैनवा (बूंदी), बुंडला (करौली) व मलारना में भी सड़क मार्ग अवरूद्ध है । उल्लेखनीय है कि गुर्जर नेता राज्य में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्‍थानों में प्रवेश के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार शाम को सवाईमाधोपुर के मलारना डूंगर में रेल पटरी पर बैठ गए ।

गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला व उनके समर्थक यहीं जमे हैं । आंदोलनकारियों और सरकारी प्रतिमंडल में शनिवार को हुई बातचीत बेनतीजा रही । इसके बाद रविवार को दोनों पक्षों में कोई बातचीत नहीं हुई । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि सरकार के स्तर पर वार्ता के द्वार खुले हैं और आंदोलनकारियों को बातचीत के लिए आगे आना चाहिए ।

गुर्जर समाज सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्‍थानों में प्रवेश के लिए गुर्जर, रायका रेबारी, गडिया, लुहार, बंजारा और गड़रिया समाज के लोगों को पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा है । वर्तमान में अन्‍य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के अतिरिक्‍त 50 प्रतिशत की कानूनी सीमा में गुर्जरों को अति पिछड़ा श्रेणी के तहत एक प्रतिशत आरक्षण अलग से मिल रहा है ।http://www.satyodaya.com

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आकाश विजयवर्गीय के बहाने मायावती ने ली चुटकी, ‘बेकार है पीएम मोदी की फटकार’

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय के बहाने भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया है। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी की टिप्पणी पर मायावती ने चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा नेतृत्व के यदाकदा फटकार से अबतक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है और न आगे इसकी कोई गारंटी है। 

मायावती ने ट्वीट के जरिए कहा कि, “देश भर में हर स्तर पर सत्ताधारी पार्टी के लोगों द्वारा जिस प्रकार से कानून को खुलेआम हाथ में लेकर हर प्रकार की अराजकता फैलाई जा रही है, वह लगातार गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। लेकिन भाजपा नेतृत्व के यदाकदा फटकार से अबतक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है और न आगे कोई गारंटी है।”

इसके आगे मायावती ने लिखा है कि लिखा कि, “भाजपा सरकार अपने राज्यों में लगातार ऐसे जातिवादी व धार्मिक उन्मादी जघन्य अपराध को क्यों होने देती हैं, जिससे कि पूरे राज्य समेत वहां की सरकार ही नहीं, बल्कि देश की भी बदनामी होती है और प्रधानमंत्री को भी शर्मिंदा होना पड़ता है। वहीं अब तो पुलिस व सरकारी कर्मचारी भी इस नई आफत के शिकार हैं।”

बता दें कि मंगलवार को पीएम मोदी ने भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय के मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि “किसी का भी बेटा हो, उसकी यह हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन लोगों ने स्वागत किया है, उन्हें भी पार्टी में रहने का हक नहीं है। सभी को पार्टी से निकाल देना चाहिए।”

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आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने इंदौर के गंजी कम्पाउंड क्षेत्र में एक जर्जर भवन ढहाने गए नगर निगम के एक अधिकारी को बैट से पीट दिया था। यही नहीं बाद में आकाश ने इसे सही ठहराते हुए कहा था कि “हमारा काम करने का तरीका है पहले आवेदन, फिर निवेदन और फिर दे दनादन। पूरी घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर भाजपा की किरकिरी हुई।”

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राहुल के ऐलान के बाद मोतीलाल वोहरा हो सकते हैं अंतरिम अध्यक्ष

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नई दिल्ली। राहुल गांधी ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान कर दिया। उनके घोषणा करने के बाद पार्टी वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है। हालांकि, मोतीलाल वोरा ने इस बात का खंडन किया है। उनका कहना है कि राहुल गांधी का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है और मैं अंतरिम अध्यक्ष नहीं हूं। लेकिन विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अगर राहुल का इस्तीफा स्वीकार हुआ तो अंतरिम अध्यक्ष वोरा ही होंगे।

बता दें, आम चुनाव में मिली हार के बाद ही राहुल ने अध्यक्ष पद छोड़ने का निर्णय ले लिया था। साथ ही उनका कहना था कि नया अध्यक्ष गांधी परिवार के बाहर से होगा। हालांकि, लगातार कांग्रेसी नेता उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन बुधवार को राहुल ने मीडिया से बातचीत में सारे कयासों पर ब्रेक लगा दिया। उन्होंने कहा कि, वह अब कांग्रेस अध्यक्ष नहीं है। नये अध्यक्ष का चुनाव कांग्रेस वर्किंग कमेटी करेगी। राहुल बोले, ‘पार्टी को बिना किसी देरी के जल्द ही नए अध्यक्ष का चुनाव करना चाहिए। मैं इस प्रक्रिया में कही नहीं हूं। मैं पहले ही अपना इस्तीफा दे चुका हूं और अब मैं पार्टी अध्यक्ष नहीं हूं। कांग्रेस वर्किंग कमिटी को जितना जल्दी हो सके बैठक बुलानी चाहिए और फैसला लेना चाहिए।’

ये भी पढ़ें: ड्राइवरलेस हुई कांग्रेस, राहुल बोले- ‘मैं अब अध्यक्ष नहीं

मध्य प्रदेश के सीएम और यूपी के गवर्नर रह चुके हैं वोरा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके मोती लाल वोरा 2014 से राज्यसभा के सदस्य हैं। 20 दिसंबर 1928 को राजस्थान के निंबी जोधा में जन्में वोरा पहली बार 1988 में राज्यसभा के सदस्य बने थे। इसके अलावा वह कुछ समय के लिए 1985,1988-1989 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

भारत सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर रह चुके वोरा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और सिविल एविएशेन मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके हैं। वोरा 16 मई1993 से लेकर 3 मई 1996 तक उत्तर प्रदेश के गवर्नर भी रहे हैं। इतना ही नहीं, वह 80 के दशक के मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष भी रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान के बेहद करीबी माने जाने वाले वोरा पार्टी के कोषाध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुके हैं।http://www.satyodaya.com

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ड्राइवरलेस हुई कांग्रेस, राहुल बोले- ‘मैं अब अध्यक्ष नहीं’

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद राहुल गांधी के अध्यक्ष पद पर सवाल उठने शुरू हो गये थे। राहुल के इस्तीफे की खबर भी मीडिया में आ गई थी। बावजूद इसके एक सस्पेंस बना हुआ था। लेकिन अब स्थित साफ हो गई है। राहुल गांधी ने पहले मीडिया और फिर ट्विटर के जरिये साफ-साफ शब्दों में अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है।

राहुल ने मीडिया से बातचीत में सारे कयासों पर ब्रेक लगा दिया। उन्होंने कहा कि, वह अब कांग्रेस अध्यक्ष नहीं है। नये अध्यक्ष का चुनाव कांग्रेस वर्किंग कमेटी करेगी। राहुल बोले, ‘पार्टी को बिना किसी देरी के जल्द ही नए अध्यक्ष का चुनाव करना चाहिए। मैं इस प्रक्रिया में कही नहीं हूं। मैं पहले ही अपना इस्तीफा दे चुका हूं और अब मैं पार्टी अध्यक्ष नहीं हूं। कांग्रेस वर्किंग कमिटी को जितना जल्दी हो सके बैठक बुलानी चाहिए और फैसला लेना चाहिए।’

मीडिया के अलावा उन्होंने ट्विटर पर भी अपने अध्यक्ष पद छोड़ने की जानकारी दी है। गौरतलब है कि, आम चुनाव में मिली हार के बाद ही राहुल ने अध्यक्ष पद छोड़ने का निर्णय ले लिया था। साथ ही उनका कहना था कि नया अध्यक्ष गांधी परिवार के बाहर से होगा। हालांकि, लगातार कांग्रेसी नेता उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे थे। इसलिये राजनीतिक गलियारों में राहुल के अध्यक्ष रहने या न रहने को लेकर काफी भ्रम बना हुआ था। मगर अब राहुल के ऐलान के बाद कांग्रेस पार्टी में बदलाव तय हो गया है।

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल ने तो इस्तीफा दे दिया है लेकिन नये अध्यक्ष का अब तक चुनाव नहीं हुआ है। यानि कि कांग्रेस का इस वक्त कोई अध्यक्ष नहीं है। ऐसे समय में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब कई महत्वपूर्ण राज्यों के चुनाव हों तब ड्राइवरलेस कांग्रेस को दिशा कौन दिखाएगा?http://www.satyodaya.com

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