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हाईकोर्ट ने कार्ति को दी राहत, 20 मार्च तक गिरफ्तारी पर लगी रोक

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नई दिल्ली । आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने पर अंतरिम रोक लगा दी है । कार्ति ने ईडी द्वारा कार्रवाई के खिलाफ राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी । हालांकि यह अंतरिम सुरक्षा 20 मार्च तक के लिए मिली है । अब ईडी 20 मार्च तक कार्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगी । यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की तरफ से याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने के एक दिन बाद आया है, जिसमें जांच एजेंसी की तरफ से जारी किए गए समन को खारिज करने की मांग की गई थी ।

रिमांड मामले में साढ़े चार बजे आएगा फैसला

कार्ति के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज हमारे दो मामले थे । एक ईडी से जुड़ा था । कोर्ट ने 20 मार्च तक सुरक्षा प्रदान की है । हमारी जमानत याचिका पर अब 15 मार्च को सुनवाई होगी । रिमांड से संबंधित मुख्‍य मामले में साढ़े चार बजे फैसला आएगा।

28 फरवरी से सीबीआई कस्टडी में हैं कार्ति

कार्ति 28 फरवरी से सीबीआई कस्टडी में हैं। इस केस की अलग से जांच कर रहे केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यह आरोप लगाया कि कार्ति को साल 2007 में 305 करोड़ रूपये के विदेश निवेश की मंजूरी के लिए पीटर मुखर्जी और इंद्राणी की स्वामित्व वाली कंपनी की तरफ से घूस दी गई थी। उस समय उनके पिता पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे। पीटर और इंद्राणी मुखर्जी इस वक्त हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं। सीबीआई ने कहा है कि उसने इंद्राणी का वह बयान रिकॉर्ड किया है जिसमें उसने बताया कि कार्ति ने एफआईपीबी से क्लियरेंस दिलाने के लिए घूस मांगी थी। http://www.satyodaya.com

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जम्मू-कश्मीर में नये राजनीतिक समीकरण बनाने में लगे अमित शाह

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नई दिल्ली। बीजेपी के चाणक्य अमित शाह गृह मंत्री बनते ही फॉम में आ गए हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि शाह जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग बनाने पर विचार कर रहे हैं। आखिरी बार यहां 1995 में परिसीमन किया गया था। जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान है जिसके अनुसार 10 साल के बाद चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन करना होता है। इस हिसाब से 2005 में परिसीमन होना चाहिए था लेकिन फारुक अब्दुल्ला सरकार ने 2002 में इस पर 2026 तक के लिए रोक लगा दी थी। इसके लिए जम्मू-कश्मीर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1957 और जम्मू-कश्मीर के संविधान में बदलाव किया गया था।

 बता दें, सूबे में विधानसभा की 111 सीटें हैं जिनमें 87 सीटों पर चुनाव होता है जबकि 24 सीटें को पाक अधिकृत कश्मीर के लिए खाली छोड़ा गया है। 87 विधानसभा सीटों में भी 37 सीटें जम्मू संभाग में, 47 सीटें कश्मीर संभाग में और 4 सीटें लद्दाख संभाग में हैं।

माना जा रहा है, कि नए सिरे से परिसीमन पर जोर देने के पीछे कारण एससी और एसटी समुदाय को आरक्षण देना है। कश्मीर में कोई भी सीट रिजर्व नहीं है,  जबकि यहां 11 फीसदी गुर्जर बकरवाल और गद्दी जनजाति के लोग हैं। हालांकि, जम्मू में जरूर 7 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं,  लेकिन उनका भी रोटेशन नहीं हुआ है। ऐसे में कहा जा रहा है कि नए सिरे से परिसीमन होने पर इसका प्रभाव वहां के सामाजिक समीकरणों पर पड़ना तय है।http://www.satyodaya.com

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आतंकवाद पर शाह का पहला प्रहार, तीन कश्मीरी अलगाववादी नेता गिरफ्तार

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अलगाववादी नेता

फाइल फोटो

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता मसर्रत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को आतंकवाद के टेरर फंडिग मामले में अरेस्ट कर लिया है। गिरफ्तार करने के बाद एनआईए ने इन्हें दिल्ली के स्पेशल कोर्ट में किया है। जहां कोर्ट ने आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले में अलगाववादी मसर्रत आलम, आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह को 10 दिन के लिए एनआईए की कस्टडी में भेजा है।

आपको बता दें लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद पीएम मोदी के साथ 58 मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की थी। ऐसे में अमित शाह के गृह मंत्री पद संभालने के बाद यह कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ यह पहली कार्रवाई है। ऐसा लगता है कि जल्द ही कश्मीर के हालत सुधरने वाले हैं। हाफिज सईद संलिप्त रहा है। यह मामला 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के सरगना और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद से जुड़ा हुआ है।

सुनवाई के दौरान तीनों को किया गया अरेस्ट

एक वकील ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने स्पेशल जज राकेश स्याल की अदालत में बंद कमरे में चल रही सुनवाई के दौरान तीनों लोगों को गिरफ्तार किया है और 15 दिनों तक उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की है।

आरोपियों के वकील एमएस खान ने पीटीआई को बताया कि आसिया और शाह अलग-अलग मामलों में पहले से ही हिरासत में हैं, जबकि आलम को ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू-कश्मीर से लाया गया था।

इन लोगों पर 2018 में दायर हुई थी चार्जशीट

एनआईए ने 2018 में सईद, एक अन्य आतंकवादी सरगना सैयद सलाउद्दीन और 10 कश्मीरी अलगाववादियों के खिलाफ घाटी में आतंकवादी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर धन मुहैया कराने और अलगाववादी गतिविधियों के मामले में चार्जशीट दायर की थी।

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वहीं उन्होंने कहा आरोपियों के खिलाफ जिन अपराधों के तहत चार्जशीट दायर की गई है उनमें आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धाराएं शामिल हैं।

वहीं एनआईए के मुताबिक, यह मामला 30 मई 2017 को दर्ज हुआ था और पहली गिरफ्तारी पिछले साल 24 जुलाई को हुई थी। इन पर हिज्बुल मुदाहिदीन, दुख्तरन-ए-मिल्लत और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के साथ मिलकर आतंक के लिए फंडिंग करने का आरोप है। दुख्तरन-ए-मिल्लत पर गैरकानूनी गतिविधि (प्रतिबंध) ऐक्ट के तहत बैन लगा है। शब्बीर शाह सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत धड़े का सदस्य था। पुलवामा हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारूक और कुछ अन्य अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा भी हटा ली थी।

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आपको बता दें आसिया आंद्राबी पर घाटी में फेमस आतंकी हाफिज सईद के इशारे पर पत्थरबाजी करवाने का आरोप है। हालांकि एनआईए ने पिछले साल दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में आंद्राबी या गिलानी का नाम नहीं लिया था। जबकि जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद आंद्राबी को पिछले साल दिल्ली लाया गया था। वहीं शब्बीर शाह और आसिया आंद्राबी अभी तक तिहाड़ जेल में बंद थे।http://www.satyodaya.com

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तिहाड़ जेल में बरती जा रही गंभीर लापरवाही, कैदियों के किचन में रखा मिला मौत का सामान

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नई दिल्ली। भारत में जेलों की क्या हालत है, यह छिपी हुई बात नहीं है। मीडिया में जब-कब जेलों के भीतर की तस्वीरें और की व्यवस्था की खबरें आती रहती हैं। देश की अधिकांश जेलों की बैरकें इंसान तो क्या जानवरों के रहने के लिए भी मुफीद नहीं हैं। न पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था, न ही गर्मी में पंखे और न ही सर्दी के मौसम में ठण्ड से बचने के पर्याप्त संसाधन। इन सब के अलावा कैदियों को परोसा जाने वाला खाना भी दोयम दर्जे का। कहने को तो जेल मैनुअल में बड़े-बड़े दावे और वादे किए गए हैं लेकिन यह सब सुप्रीम कोर्ट को भ्रमित करने और मानवाधिकार संगठनों से बचने का जरिया भर है, बल्कि कागजों में जेल मैनुअल के नाम पर लंबी चौड़ी लिस्ट बनाकर सरकारी धन ऐंठा जाता है।
बीते सोमवार को एक दैनिक समाचार पत्र में ऐसी ही एक और खबर प्रकाशित हुई जिसने भारतीय जेलों के दावों की पोल खोलकर रख दी। इस खबर ने दिल्ली स्थित देश ही नहीं दक्षिण एशिया के सबसे बड़े कारावास तिहाड़ जेल की पोल खोलकर रख दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यहां कैदियों को दिया जाने वाला भोजन भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों पर खरा नहीं उतरा है। यहां भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाला अधिकतर सामान घटिया किस्म का है।

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इतना ही नहीं तिहाड़ के किचन में बनने वाले भोजन में इस्तेमाल होने वाले अधिकतर डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ एक्सपायरी डेट के करीब थे। किचन में सरसों का तेल व अन्य तरल खाद्य पदार्थों के साथ फिनाइल और पेस्टीसाइड की बोतलें रखी हुई थीं। अगर जरा सी भी चूक हो जाए तो सैकड़ों कैदियों की जान पर बन आए। जेल के भीतर बरती जा रहीं इन लापरवाहियों का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में एफएसएसएआई की एक टीम ने तिहाड़ जेल का निरीक्षण किया।
अपने दौरे के दौरान खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की टीम ने जेल लंगर खाने और भोजन सामग्री के भंडारण कक्ष का भी निरीक्षण किया। इन जगहों पर टीम को गंभीर अनियमितताएं देखने को मिलीं जिनमें तत्काल सुधार लाने का आदेश दिया गया। टीम ने सरसों के तेल और पेस्टीसाइड की बोतलों को एक साथ रखे जाने को गंभीर लापरवाही करार दिया। कैदियों के लिए बनाई गयी दाल, रोटी और सब्जी भी मानकों पर खरी नहीं उतरी, जिसमें सुधार लाने का निर्देश दिया।
बता दें कि यहां के कैदी कई बार खाने को लेकर कोर्ट से शिकायत कर चुके हैं। कैदियों का कहना है कि उन्हें परोसी जाने वाली दाल इतनी पतली होती है कि उसके साथ चावल और रोटी खाना मुश्किल होता है। इस बारे में जेल प्रशासन ने कहा है कि यह सही है कि कुछ चीजें एक्सपायरी डेट के करीब थीं लेकिन वह अभी एक्सपायर नहीं हुईं थीं। कैदियों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। जेल प्रशासन ने कहा कि अन्य जो भी अनियमितताएं मिली हैं उन्हें सुधारने की दिशा में कदम उठा लिए गए हैं। कैदियों को खाने-पीने के लिए बेहतर चीजें ही दी जा रही हैं। http://www.satyodaya.com

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June 5, 2019, 9:56 am
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