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इतिहास : आज ही के दिन मलाला यूसुफजई को तालिबान ने मारी थी गोली

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नई दिल्ली। पाकिस्तान में कट्टरता किस तरह से हावी है उसका सबसे बड़ा गवाह है 9 अक्टूबर। यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा काला दिन है। पाकिस्तान में कट्टरपंथियों द्वारा महिलाओं, अल्पसंख्यकों और उनके हक के लिए लड़ने वालों की आवाज को दबाने के लिए आज का दिन यानी 9 अक्टूबर को याद किया जाता है। आज ही के दिन मलाला यूसुफजई को तालिबान ने गोली मारी थी।

कौन हैं मलाला यूसुफजई?
मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वाह प्रांत के स्वात जिले में हुआ। मलाला के पिता का नाम जियाउद्दीन यूसुफजई है। तालिबान ने 2007 से मई 2009 तक स्वात घाटी पर कब्जा कर रखा था। इसी बीच तालिबान के भय से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था। मलाल तब आठवीं की छात्रा थीं और उनका संघर्ष यहीं से शुरू होता है।

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2008 में तालिबान ने स्वात घाटी पर अपना नियंत्रण कर लिया। वहां उन्होंने डीवीडी, डांस और ब्यूटी पार्लर पर बैन लगा दिया। साल के अंत तक वहां करीब 400 स्कूल बंद हो गए। इसके बाद मलाल के पिता उसे पेशावर ले गए जहां उन्होंने नेशनल प्रेस के सामने वो मशहूर भाषण दिया जिसका शीर्षक था- हाउ डेयर द तालिबान टेक अवे माय बेसिक राइट टू एजुकेशन? तब वो केवल 11 साल की थीं।

साल 2009 में उसने अपने छद्म नाम ‘गुल मकई’ से बीबीसी के लिए एक डायरी लिखी। इसमें उसने स्वात में तालिबान के कुकृत्यों का वर्णन किया था। बीबीसी के लिए डायरी लिखते हुए मलाला पहली बार दुनिया की नजर में तब आईं जब दिसंबर 2009 में जियाउद्दीन ने अपनी बेटी की पहचान सार्वजनिक की।

मलाला पर तालिबानी हमला

2012 को तालिबानी आतंकी उस बस पर सवार हो गए, जिसमें मलाला अपने साथियों के साथ स्कूल जाती थीं। उनमें से एक ने बस में पूछा, ‘मलाला कौन है?’ सभी खामोश रहे लेकिन उनकी निगाह मलाला की ओर घूम गईं। इससे आतंकियों को पता चल गया कि मलाला कौन है। उन्होंने मलाला पर एक गोली चलाई जो उसके सिर में जा लगी।

मलाला पर यह हमला 9 अक्टूबर 2012 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात घाटी में किया था। गंभीर रूप से घायल मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया। यहां उन्हें क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया। देश-विदेश में मलाला के स्वस्थ होने की प्रार्थना की गई और आखिरकार मलाला वहां से स्वस्थ होकर लौटीं।

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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने देश भर के व्यापारियों को किया संबोधित

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कहा, देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें व्यापारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने रविवार को वेबिनार के माध्यम से ऑनलाइन बैठक कर देश भर के व्यापारियों को संबोधित किया। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतीया व राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने राज्यपाल को संगठन के कार्यों की जानकारी दी। वेबिनार में कनफेडरेशन ऑफ ऑल ऑल इंडिया ट्रेडर्स उत्तर प्रदेश के चेयरमैन एवं आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता व मध्य प्रदेश के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन भी शामिल रहे। इस ऑनलाइन बैठक में राज्यपाल ने लाॅकडाउन के बीच आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यापारियों की सराहना की।

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वेबिनार का आयोजन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स नेे किया। जिसमें राज्यपाल आनंदी बेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। राज्यपाल ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापारियों को स्वदेशी आंदोलन छेड़ने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल ने व्यापारियों से भारत को आत्मनिर्भर बनाने की अपील की। वीडियो कांफ्रेंस में राज्यपाल ने गुजरात में महिला उद्यमियों एवं महिला व्यापारियों के लिए सखी मंडलों की रचना की भी जानकारी दी। उत्तर प्रदेश के व्यापारियों की तरफ से कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के उत्तर प्रदेश के चेयरमैन एवं उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने राज्यपाल का स्वागत वक्तव्य पढ़ा।http://www.satyodaya.com

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कल देश भर में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल का सांकेतिक विरोध करेंगे बिजली कर्मचारी

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लखनऊ। केन्द्र सरकार के इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 व निजीकरण के विरोध में 1 जून को देश भर के लाखों बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर व अभियंता काली पट्टी बांधकर विरोध दिवस मनाएंगे। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेंद्र दुबे, प्रभात सिंह, जीवी पटेल, जयप्रकाश, गिरीश पांडे, सदरुद्दीन राना, सुहेल आबिद, विनय शुकला, राजेन्द्र घिल्डियाल, डीके मिश्र, महेन्द्र राय, शशिकांत श्रीवास्तव, परशुराम, प्रेम नाथ राय, एके श्रीवास्तव, सुनील प्रकाश पाल, भगवान मिश्र, पूसे लाल, वीके सिंह कलहंस, पीएस बाजपेयी ने रविवार को एक बयान जारी कर बिजली कर्मचारियों के शांतिपूर्ण विरोध दिवस का दमन करने का आरोप लगाते हुए सरकार की निंदा की। पदाधिकारियों ने कहा, कोरोना संकट के बीच बिजली कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।

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1 जून को भी सांकेतिक विरोध दिवस पर बिजली व्यवस्था में कोई व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा। सभी कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। लेकिन पाॅवर कारपोरेशन की कोई भी दमनकारी नीति से बात बिगड़ सकती है। पदाधिकारियों ने कहा कि उप्र के कर्मचारी पूरे देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों के साथ बिजली के निजीकरण के लिए लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 का शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करेंगे।http://www.satyodaya.com

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अंतरराष्ट्रीय

नेपाल ने संसद में पेश किया देश का नया नक्शा, भारतीय सीमा पर तैनात करेगा सेना

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नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा विवाद का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद शुरू हो गया है। नेपाल संसद में नए नक्शे के लिए बिल पेश हो गया है। जिसमें भारत के हिस्से में रहे कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपना बताते हुए उस हिस्से को समेट कर नया नक्शा जारी किया है। वहीं नेपाल सरकार ने देश में प्रवेश करने के लिए खुली सीमाओं को बंद करने और सरकार द्वारा निर्धारित सीमा क्षेत्र से ही एंट्री देने का फैसला किया है। भारत के साथ तनाव को देखते हुए नेपाल ने अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की तैनाती को भी मंजूरी दी है। जो यह पहली बार होने जा रहा है।

बता दें कि नेपाल-भारत के बीच करीब 1700 किलोमीटर की खुली सीमाएं हैं। अभी तक नेपाल आने वाले भारतीय नागरिकों को बिना रोक-टोक आने जाने की अनुमति थी। जिस दिन नेपाल सरकार ने भारतीय क्षेत्रों को मिलाकर अपना नया नक्शा जारी किया था। यह निर्णय उसी समय ले लिया गया था। लेकिन सरकार ने एक हफ्ते तक इस निर्णय को छिपा कर रखा। राजपत्र में प्रकाशित करने के बाद इसे सार्वजनिक किया गया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की कैबिनेट ने सीमा विवाद को लेकर भारत से टकराव के मूड में सीमा व्यवस्थापन और सुरक्षा के नाम पर सख्ती दिखाते हुए भारत से लगी 20 सीमाओं को छोड़कर बाकी सभी को बन्द करने का निर्णय किया है। वहीं भारत के तरफ सीमा की निगरानी एसएसबी करती थी जब कि नेपाल की तरफ से सशस्त्र प्रहरी बल (एपीएफ) के हवाले सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। नेपाल के हर सीमावर्ती जिलों में सैन्य बैरक होने के बावजूद सीमा की निगरानी या सुरक्षा के नाम पर सेना को बॉर्डर पर कभी नहीं भेजा गया था।

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प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव नारायण बिडारी ने कहा कि कैबिनेट ने यह फैसला लिया है कि भारत से आने वाले लोगों को अब सिर्फ 20 सीमा गेट से ही आने की इजाजत मिलेगी। नेपाल के 22 जिलों की सीमा भारत से जुड़ी है। सरकार ने सिर्फ 20 जिलों के लिए एक-एक एंट्री प्वाइंट तय किए हैं। वहीं नेपाल सरकार के निर्णय से सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जो व्यापार और रोजगार के लिए लाखों की संख्या में हर रोज सीमा आर-पार करते हैं। अब नेपाल में वैध आईडी कार्ड के साथ ही एंट्री मिलेगी।http://www.satyodaya.com

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June 1, 2020, 12:49 am
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